राजस्थान-बिहार और झारखंड के गिरिडीह में भारत बंद का असर

नई दिल्ली :  आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में आज भारत बंद के पक्ष में प्रदर्शन किया।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखती हैं, “ बीएसपी का भारत बंद को समर्थन, क्योंकि भाजपा व कांग्रेस आदि पार्टियों के आरक्षण विरोधी षडयंत्र एवं इसे निष्प्रभावी बनाकर अन्ततः खत्म करने की मिलीभगत के कारण 1 अगस्त 2024 को SC/ST के उपवर्गीकरण व इनमें क्रीमीलेयर सम्बंधी मा. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध इनमें रोष व आक्रोश।”

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारत बंद का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखते हैं, “आरक्षण की रक्षा के लिए जन-आंदोलन एक सकारात्मक प्रयास है। ये शोषित-वंचित के बीच चेतना का नया संचार करेगा और आरक्षण से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के ख़िलाफ़ जन शक्ति का एक कवच साबित होगा। शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार होता है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने पहले ही आगाह किया था कि संविधान तभी कारगर साबित होगा जब उसको लागू करनेवालों की मंशा सही होगी। सत्तासीन सरकारें ही जब धोखाधड़ी, घपलों-घोटालों से संविधान और संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों के साथ खिलवाड़ करेंगी तो जनता को सड़कों पर उतरना ही होगा. जन-आंदोलन बेलगाम सरकार पर लगाम लगाते हैं।”

दिल्ली में भारत बंद का कोई खास असर नहीं दिखेगा। दिल्ली के व्यापारियों और फैक्ट्री मालिकों के प्रमुख संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार, राजधानी के सभी 700 बाजार खुले रहेंगे। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल और अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने बताया कि कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, खारी बावली, नया बाजार, चावड़ी बाजार, सदर बाजार, करोल बाग, कमला नगर, कनॉट प्लेस, लाजपत नगर, सरोजिनी नगर समेत 100 से अधिक बाजारों के एसोसिएशनों से बातचीत की गई है। सभी ने स्पष्ट किया कि 21 अगस्त को होने वाले भारत बंद के संबंध में किसी भी व्यापारी संगठन से संपर्क नहीं किया गया है और न ही समर्थन मांगा गया है। इसलिए दिल्ली के सभी बाजार पूरी तरह खुले रहेंगे। साथ ही, सभी 56 औद्योगिक क्षेत्र भी सामान्य रूप से कार्य करेंगे।

भारत बंद का असर रामगढ़ में व्यापक रूप से देखा जा रहा है। नेशनल हाईवे 33 रांची-पटना मुख्य मार्ग जाम कर दिया है। भारत बंद के समर्थक सड़क पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित और बहुजन संगठनों द्वारा आज भारत बंद का आह्वान किया गया है। भारत बंद का असर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में ज्यादा दिख सकता है। भारत बंद का सबसे ज्यादा असर राजस्थान में दिखाई देने की उम्मीद की जा रही है।

भारत बंद के दौरान देश में क्या-क्या बंद रहेगा और क्या-क्या खुला रहेगा। इसे लेकर किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई है। लेकिन भारत बंद के दौरान कई जगहों पर सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रभावित हो सकती है। हालांकि एंबुलेंस, हॉस्पिटल सहित इमरजेंसी सेवाएं खुली रहेंगी। इसके साथ ही सरकारी कार्यालय, बैंक, पेट्रोल पंप, स्कूल और कॉलेज में सामान्य रूप से काम-काज होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत बंद के आह्वान के बावजूद सार्वजनिक परिवहन के साथ ही रेल सेवाएं चालू रहेंगी।

BSP, RJD ने आरक्षण के मुद्दे पर भारत बंद का समर्थन किया है। इसके साथ ही चिराग पासवान की पार्टी ने भी भारत बंद को समर्थन दिया है। भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी इंस बंद का सपोर्ट किया है।भारत बंद के ऐलान को देखते हुए आज राजस्थान में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) आरक्षण में क्रीमीलेयर पर दिए गए फैसले के विरोध में आज कई सामाजिक संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) और आरजेडी जैसी राजनीतिक दलों ने भी भारत बंद का समर्थन किया है।

#BharatBandah: ত্রিপুরায় বনধে সফল মানিক, বাংলায় বিফল সূর্য-সেলিম

Bharat-Bandh tripura

নিউজ ডেস্ক: সরকারে নেই দু রাজ্যেই। তবে সরকার হারানোর বামেদের পর তেজ কিন্তু ত্রিপুরাতেই। আগামী বিধানসভা ভোটের আগে ফের সাংগঠনিক শক্তির দেখনাদারিতে সফল হলেন মানিক সরকার। ত্রিপুরায় বনধের বিরাট প্রভাব। এমনকি বিজেপির দখল করা বিধানসভাগুলিতেও জনজীবন স্তব্ধ হয়ে গেছে।

দেশজোড়া বনধের জেরে উত্তর পশ্চিম ভারতের সঙ্গে রাজধানী নয়াদিল্লির সড়ক ও রেল যোগাযোগ বিচ্ছিন্ন করে দিয়েছে কৃষক সংগঠনগুলি। বিভিন্ন রাজ্যে বনধের প্রভাব পড়লেও পশ্চিমবঙ্গে বনধ পালনে ফের ব্যর্থ বামেরা। বিক্ষিপ্ত কিছু ট্রেন রোকো ও বাজার বন্ধ করাতে পারলেও মোটের উপর রাজ্যে বনধ ব্যর্থ করে দিয়েছেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। তবে তিনি বনধের সবকটি ইস্যুকে সমর্থন করছেন বলে জানান।

বনধ যে বাংলায় তেমন হবে না তা বুঝেই গিয়েছিল সিপিআইএম সহ বাম দলগুলি। কিন্তু বঙ্গ বামেদের লজ্জায় ফেলে দিয়ে ফের শক্তি পরীক্ষায় পাশ মার্ক পেল ত্রিপুরা সিপিআইএম। এ রাজ্যে বিরোধী দলের ডাকা যতগুলি বনধ হয়েছে সবকটিকেই ছাপিয়ে গেছে সোমবারের ভারত বনধের ছবি।

কেন্দ্রের বিজেপি সরকারের কৃষি আইনের বিরোধিতায় সর্বভারতীয় কৃষক সংগঠনগুলির ডাকা ভারত বনধের সমর্থনে মানিক সরকার আগেই জানিয়েছিলেন, ত্রিপুরা স্তব্ধ করে দেওয়া হবে। খোদ বিজেপি শাসিত রাজ্য সকাল থেকেই স্তব্ধ।

রাজধানী আগরতলা শুনশান। কৈলাসহর, ধর্মনগর, সাব্রুম, পানিসাগর, গোমতী, বিশালগড়, উদয়পুর সহ রাজ্যের সর্বত্র বনধে বিরাট প্রভাব লক্ষ্য করা যাচ্ছে। একেবারে শুনশান চারিদিক। আগরতলায় বনধের প্রভাব সবথেকে বেশি বলেই মনে করা হচ্ছে। বনধে বিক্ষিপ্ত অশান্তি রুখতে রাজ্য পুলিশ মোতায়েন করা হয়।

সবথেকে উল্লেখযোগ্য, যে পার্বত্য উপজাতি অঞ্চলে সিপিআইএম এবারের বোর্ড হারিয়ে শূন্য হয়েছে এডিসি নির্বাচনে সেখানেও বনধের বড় প্রভাব পড়েছে।

গত নির্বাচনে টানা ২৫ বছরের বাম সরকারের পতন হয় ত্রিপুরায়। বিরোধী দল সিপিআইএমের দখলে থাকা বিধানসভাগুলির পাশাপাশি সরকারপক্ষ বিজেপি ও আইপিএফটি জোটের দখলে যাওয়া বিধানসভাতেও বনধের ‘সর্বাত্মক প্রভাব’ পড়েছে।

হেরেও ‘সুশান্ত এফেক্ট’ পশ্চিম মেদিনীপুরে, বনধের রোষ বাম কর্মীদের

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নিউজ ডেস্ক: বিধানসভা ভোটের আগে প্রবল সাড়া ফেলে নিজ এলাকা পশ্চিম মেদিনীপুরে ফিরে ক্রমাগত তৃণমূল কংগ্রেস ও বিজেপির বিরুদ্ধে রোষ দেখিয়েছিলেন দাপুটে সিপিআইএম নেতা সুশান্ত ঘোষ। তবে ভোটে শালবনী কেন্দ্রে তিনি পরাজিত হন। প্রাক্তন মন্ত্রী ও বিধায়ক তথা বেনাচাপড়া কঙ্কাল কান্ডে জেল খেটে আসা সুশান্তবাবুর দাপট ফের দেখা গেল ভারত বনধে।

পশ্চিম মেদিনীপুর ও ঝাড়গ্রামের বিস্তির্ণ গ্রামাঞ্চলে প্রায় খড়কুটোর মতো উড়ে যাওয়া সিপিআইএম সমর্থকরা তীব্র রোষ নিয়ে বনধে সামিল। চন্দ্রকোনা, মেদিনীপুর, শালবনি, গড়বেতায় বনধের প্রভাব পড়েছে। ঝাড়গ্রামের জঙ্গলমহল এলাকাতেও একই ছবি। সুশান্তবাবুর খাস এলাকা লাগোয়া বাঁকুড়ার বিভিন্ন গ্রামে বনধের প্রভাবে রাজ্য ও জাতীয় সড়ক অবরুদ্ধ।

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তবে আশ্চর্যজনকভাবে সুশান্ত ঘোষ অদৃশ্য। সূত্রের খবর, তিনি দলীয় কর্মী সমর্থকদের কড়া নির্দেশ দিয়েছেন। সেই নির্দেশ মেনে সকাল থেকেই বনধ পালনে নেমেছে বাম সমর্থকরা।

সুশান্ত ঘোষ টানা ৩৪ বছরের বাম জমানার ৩২ বছরের বিধায়ক ছিলেন। বামফ্রন্ট জমানার শেষ দশবছরে ততকালীন মুখ্যমন্ত্রী বুদ্ধদেব ভট্টাচার্যের সঙ্গে বিরোধিতা ছিল চরমে। সেই সব কথা বইতে লিখে দল থেকে সাময়িক সাসপেন্ড হন। পরে বিধানসভা ভোটের আগে তাঁকে ফেরায় সিপিআইএম।

সুশান্ত ঘোষের বিরুদ্ধে একাধিক হামলার অভিযোগ রয়েছে। তবে বাম নেতা আইনি প্রক্রিয়ায় জামিন নিয়েছেন। তাঁর মন্ত্রীত্বের সময়ে নেতাই গণহত্যা ঘটে। প্রবল বিতর্কিত সেই সময়। পরে নির্বাচনে বাম জমানা শেষ হয়। কিন্তু ২০১১ সালের ভোটেও জিতেছিলেন সুশান্ত ঘোষ।

#BharatBandh: কৃষক আন্দোলনের ধাক্কা, উত্তর ভারতের গ্রামাঞ্চলে ব্যাপক প্রভাব, বাংলায় নেই

all india strike hits north and weststern states

নিউজ ডেস্ক: কেন্দ্র সরকারের কৃষি আইনের বিরোধিতা সহ রাষ্ট্রায়ত্ব সংস্থাগুলির বিক্রি করার প্রতিবাদে একাধিক বিজেপি ও অবিজেপি শাসিত রাজ্যে বনধের প্রভাব পড়লেও পশ্চিমবঙ্গে তেমন ছবি নেই।

পূর্ব ঘোষিত কর্মসূচি অনুসারে মধ্যরাত থেকে কৃষক সংগঠনগুলির যৌথ মঞ্চ সারা ভারত কৃষক সংঘর্ষ সমন্বয় সমিতি (AIKSCC) বনধ পালন করছে।

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সংযুক্ত কিষাণ মোর্চার ডাকা ভারত বনধে পশ্চিম ও উত্তর ভারতে বিক্ষিপ্ত প্রভাব শুরু৷ মহারাষ্ট্রের বড় প্রভাব। পাঞ্জাব, হরিয়ানা অবরোধ। বড় প্রভাব তামিলনাড়ুতেও। সকালেই ত্রিপুরা স্তব্ধ হয়ে যায়। বাম শাসিত রাজ্য কেরল স্তব্ধ। বিহার, ওডিশায় প্রভাব পড়েছে।

এদিকে বনধের ইস্যু সমর্থন করেছে পশ্চিমবঙ্গের শাসক দল তৃণমূল কংগ্রেস। কিন্তু বনধ পালনের বিরোধিতা করবে তৃণমূল কংগ্রেস, সেটি আগেই জানানো হয়। সরকারি কর্মীদের হাজিরায় কড়াকড়ি করা হয়েছে।পশ্চিমবঙ্গে বনধ সফল হবে না। তৃণমূলের দাবি। তবে রাস্তায় বিরোধী বামেরা। বনধে সমর্থন করছে কংগ্রেস ও ইন্ডিয়ান সেকুলার ফ্রন্ট।

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বনধের বড় প্রভাব পড়েছে ব্যাংকে। ব্যাংক কর্মীদের বিভিন্ন সংগঠন সরাসরি বনধে অংশ নিয়েছে। বিমা, রেল, খনিতে কর্মরত শ্রমিকদের বড় অংশ বনধ করছেন। সংঘ পরিবার ও তৃণমূূল কংগ্রেসের শ্রমিক সংগঠন বনধ পালন করছে না। দেশের কেন্দ্রীয় শ্রমিক সংগঠনগুলি সরাসরি বনধে সামিল।

সরকারি কর্মীদের বাম সংগঠন পশ্চিমবঙ্গের রাজ্য কোঅর্ডিনেশন কমিটি বনধকে সমর্থন করার কথা জানিয়েছে। কংগ্রেসও বনধকে সমর্থন করবে।

উত্তর প্রদেশ, পাঞ্জাব, হরিয়ানার, হিমচল প্রদেশে বনধের বিরাট প্রভাব পড়েছে গ্রামাঞ্চলে। তামিলনাড়ুতে বনধ সফল, কারণ এই ডিএমকে কংগ্রেস ও বাম জোটের রাজ্য সরকার সরাসরি বনধ সমর্থন করেছে।