बजट में सस्ता हुआ सोना और चांदी

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बजट में सोने-चांदी पर आम लोगों को खुशखबरी दी। वित्त मंत्री ने सोने और चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया, जो कि पहले 15 प्रतिशत थी।

सीतारमण ने संसद में अपने बजट भाषण में कहा कि सोने और कीमती धातु के आभूषणों में घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ाने के लिए, मैं सोने और चांदी के सीमा शुल्क को घटाकर 6 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।

सरकार की इस घोषणा के साथ एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने के 5 अगस्त, 2024 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 5.33 प्रतिशत गिरकर 68,840 रुपये हो गया। वहीं, चांदी के 5 सितंबर, 2024 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 4.62 प्रतिशत गिरकर 85,079 रुपये प्रति किलो हो गया।

वहीं, दूसरी तरफ ज्वेलरी शेयरों में तेजी देखी गई। दोपहर 2:30 बजे तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर टाइटन का शेयर 6.65 प्रतिशत, सेंको गोल्ड का शेयर 5.53 प्रतिशत, टीबीजेड का शेयर 11.71 प्रतिशत, पीसी ज्वेलर्स 5 प्रतिशत और राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 6.79 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार कर रहा था।

बजट में टैक्स के मोर्चे पर भी आम आदमी को राहत दी गई है। नई टैक्स रिजीम में 3 से 7 लाख तक की आय पर 5 प्रतिशत टैक्स कर दिया गया है। वहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है।

जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेंगी निर्मला सीतारमण, उद्योग जगत से मांगीं राय

नई दिल्ली :  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जुलाई 2024 में पूर्ण बजट पेश कर सकती हैं। इसके लिए उन्होंने उद्योग जगत से राय मांगी है। हाल ही में संपन्न लोकसभा के लिए चुनाव के बाद मोदी 3.0 सरकार का पहला पूर्ण बजट होगा। वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के पूर्ण बजट के लिए व्यापार एवं उद्योग संघों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों और उनका अनुपालन बोझ कम करने के लिए कानूनों में बदलाव के संबंध में सुझाव आमंत्रित किए हैं। व्यापार एवं उद्योग संघों को अपने सुझाव 17 जून तक मंत्रालय को भेजने हैं।

वित्त वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट जुलाई के अंत में संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। इस साल चुनावी साल होने से फरवरी में अंतरिम बजट ही पेश किया गया था। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इन सुझावों में शुल्क संरचना, कर दरों में परिवर्तन और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों पर कर आधार को व्यापक बनाने के विचार शामिल हो सकते हैं, ताकि इसके लिए आर्थिक औचित्य दिया जा सके। सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क में परिवर्तन के लिए व्यापार और उद्योग जगत को उत्पादन, कीमतों और सुझाए गए बदलावों के राजस्व निहितार्थ के बारे में प्रासंगिक सांख्यिकीय जानकारी के साथ अपनी मांगों को उचित ठहराना होगा।

इसके साथ ही, उलटे शुल्क ढांचे में सुधार के अनुरोध को उत्पाद के विनिर्माण के प्रत्येक चरण में मूल्य संवर्धन से समर्थित करना होगा। उलटे शुल्क ढांचे में तैयार वस्तु पर लगने वाले शुल्क से अधिक शुल्क कच्चे माल पर लगता है। प्रत्यक्ष करों के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि सुझाव अनुपालन कम करने, कर निश्चितता प्रदान करने और मुकदमेबाजी कम करने पर भी हो सकते हैं। इसमें कहा गया कि मध्यम अवधि में सरकार की नीति कर प्रोत्साहन, कटौतियों तथा छूटों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने तथा साथ ही कर दरों को युक्तिसंगत बनाने की है।