CBI गिरफ्तारी के बाद अरविंद केजरीवाल की शुगर लेवल डाउन, कोर्ट रुम में हुए अस्वस्थ 

नई दिल्ली : दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज हाेने के बाद अब उन्‍हें राउज एवेन्‍यू कोर्ट में पेश किया गया था, यहां से सीबीआई ने उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्‍हें आज राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। इस दौरान कोर्ट में ही केजरीवाल की तबीयत बिगड़ गई। बताया गया कि कोर्ट रूम में ही उन्‍हें घबराहट होने लगी और शुगर लेवल डाउन हो गया। इसके बाद केजरीवाल को पास के अन्‍य रूम में लाया गया।

गौरतलब है कि मंगलवार को सीबीआई ने तिहाड़ जेल में केजरीवाल से शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ की थी। बताया जाता है कि सीबीआई उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं है।

अरविंद केजरीवाल की जमानत से जुड़ी याचिका पर भी आज सुनवाई होना है। दरअसल, राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत दे दी थी, लेकिन ईडी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गई। यहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक लगा दी।

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सर्वोच्‍च न्‍यायालय में 24 को मामला लिस्ट हुआ था, लेकिन अदालत ने हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी न मिलने का हवाला देकर 26 जून के लिए सुनवाई टाल दी थी।

 

दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को HC से नहीं मिली बेल, रहेंगे जेल

नई दिल्ली : शराब घोटाले मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देने का निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है। जस्टिस सुधीर कुमार जैन की पीठ ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले पर रोक बरकरार रखी है।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू करते हुए कहा कि निचली अदालत की अवकाशकालीन पीठ ने केजरीवाल को जमानत देते समय अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा हमने दोनों पक्षों को सुना। लेकिन निचली अदालत ने ईडी के दस्तावेजों पर गौर नहीं किया। निचली अदालत ने पीएमएलए की धारा 45 की दोहरी शर्तों पर गौर नहीं किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजू ने मुद्दा उठाया कि निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था की इतने दस्तावेज पढ़ना संभव नहीं था। इस तरह की टिप्पणी पूरी तरह से अनुचित थी और ये दर्शाती है कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर अपना ध्यान नहीं दिया।