क्रेडिट कार्ड से जुड़ी पांच गलतफहमियों के जाने

नई दिल्ली : भारत में पिछले कुछ वर्षों में क्रेडिट कार्ड का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है. अब लोगों के पास डेबिट कार्ड के साथ क्रेडिट कार्ड होना बहुत आम सी बात हो गई है। भारत में करीब 97.9 मिलियन लोग क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन लोगों ने क्रेडिट कार्ड से जुड़ी बहुत सी गलतफहमियां पाल रखी है। 

भारत में अधिकतर लोग यह मानते हैं कि अगर उनका क्रेडिट स्‍कोर अच्छा नहीं है तो उन्‍हें बैंक द्वारा लोन नहीं मिलेगा। लेकिन ये लोगों की गलतफहमी हैं। लेकिन लोन देते समय बैंक केवल आपका सिबिल स्कोर ही नहीं बल्कि साथ ही साथ आपकी इनकम जैसी अन्य बातों को भी देखती हैं।

यदि आपका क्रेडिट स्कोर कम है तो और फिर भी आप लोन लेना चाहते है तो आप कुछ कागज़ात दिखा कर लोन प्राप्त कर सकते हैं।आप अपने वेतन, सालाना बोनस या अन्य अतिरिक्त इनकम स्रोतों में बढ़ोतरी के प्रमाण के साथ बैंक स्टेटमेंट दे सकते हैं और ये साबित कर सकते हैं कि आप लोन चुकाने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं।

अगर आपके पास ऐसा कुछ नहीं है तो भी कई बैंक और अन्य संस्‍थाएं हैं जो कम सिबील स्कोर के साथ भी लोन मुहाया कराती हैं। लेकिन ऐसे में लोगों को ज्यादा ब्‍याज दरे भरने पड़ती हैं। कई बार क्रेडिट स्‍कोर कम होने से आपकी क्रेडिबिलिटी पर असर जरूर पड़ता है।

दूसरी सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि अगर आप अपना क्रेडिट स्कोर चैक करते है तो उससे आपका नुकसान होता हैं। यह गलतफहमी लोगों में ‘हार्ड इंक्वायरी’ और ‘सॉफ्ट इंक्वायरी’ के बीच अंतर नहीं समझ पाने से होती है। अपने क्रेडिट स्कोर की समीक्षा करना एक सॉफ्ट इंक्वायरी है जिसका आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

इसके विपरीत, जब लेनदार ऋण या क्रेडिट कार्ड एप्रूवल के लिए आपकी क्रेडिट रिपोर्ट का मूल्यांकन करते हैं तो वह कड़ी पूछताछ होती है जो आपके स्कोर को कुछ हद तक प्रभावित करती है. इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वह समय समय पर अपने क्रेडिट स्कोर की सटीकता को सत्यापित करते रहे। जिससे किसी भी संभावित समस्या की पहचान तुरंत ही जाए।

क्रेडिट कार्ड उपयोग करने वालों में से बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि जो क्रेडिट कार्ड उपयोग में नहीं है उसे बंद कर देने से क्रेडिट स्कोर में बढ़ोतरी होती है। वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता बल्कि इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है। आपका क्रेडिट उपयोग अनुपात जो आपके लिए उपलब्ध क्रेडिट की तुलना में आपके द्वारा उपयोग किया जा रहे क्रेडिट की मात्रा है वह आपका क्रेडिट स्कोर निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाता है, और क्रेडिट कार्ड बंद करने से क्रेडिट उपयोग अनुपात बढ़ जाता है जिससे संभावित रूप से आपका क्रेडिट स्कोर कम हो जाता है। इसलिए लोगों के लिए यह बेहतर होता है कि वह अपना क्रेडिट कार्ड चालू रखें, खासकर उस स्थिति में अगर आपका क्रेडिट हिस्ट्री बहुत लंबा है और आपको कोई वार्षिक शुल्क नहीं लगता है।

कुछ लोगों का ऐसा मानना होता है कि डेबिट कार्ड के उपयोग से आपका क्रेडिट स्कोर बढ़ता है। परंतु क्रेडिट कार्ड स्कोर डेबिट कार्ड के उपयोग पर जरा सा भी प्रभाव नहीं डालता। क्योंकि आपके डेबिट कार्ड स्कोर की लेनदेन की कोई भी रिपोर्ट क्रेडिट कार्ड ब्यूरो को नहीं दी जाती है। क्रेडिट कार्ड स्कोर आपके क्रेडिट कार्ड के उपयोग लोन आदि पर निर्भर करता है। एक अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाने के लिए अपना क्रेडिट कार्ड जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।

एक अच्छा क्रेडिट स्कोर मेंटेन करने के लिए समय पर कर चुकाना जरूरी है लेकिन यह आपके कर्ज लेने की हिस्ट्री को नहीं मिटा देती। अक्सर लोग ऐसा सोचते हैं कि अगर वह समय से अपना ऋण चुका देते हैं तो उनकी लोन हिस्ट्री हटा दी जाती है। आपकी लोन लेने और उसे चुकाने की पूरी जानकारी क्रेडिट रिपोर्ट में कुछ सालों तक बनी रहती है। जैसे सेटल अकाउंट में करीब 7 सालों तक आपकी हिस्ट्री दाखिल रहती है। यह लोन प्रोवाइडर को आपकी साक आकलन करने में मदद करता है।

ATM: বছরের শুরুতেই পকেটে হামলা, টাকা তুলুন সাবধানে

News Desk: নতুন বছরের প্রথম দিন থেকে কার্যকর হল রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অব ইন্ডিয়ার নির্দেশিকা। এটিএম থেকে বাড়তি লেনদেনের জন্য গ্রাহকদের এবার গুনতে হবে অতিরিক্ত অর্থ। আগে বিনামূল্য সীমা অতিক্রম করার পর আর্থিক লেনদেনের জন্য দিতে হতো ২০ টাকা। নয়া নির্দেশিকার পর বৃদ্ধি পেয়েছে এটিএম-এর এই চার্জটি।

এটিএম-এর চার্জ বৃদ্ধির বিষয়টি গত বছরেই চূড়ান্ত হয়েছিল। জুনের ২১ তারিখে আরবিআই-এর পক্ষ থেকে দেওয়া হয়েছিল অনুমতি- অটোমেটেড টেলর মেশিন থেকে অতিরিক্ত লেনদেন করলে ২০২২ সালের ১ জানুয়ারি থেকে দিতে হবে ২১ টাকা। সঙ্গে যোগ হতে পারে অতিরিক্ত শুল্ক। আগে যা ছিল ২০ টাকা। শেষবার এই চার্জ বেড়েছিল ৭ বছর আগে, ২০১৪ সালে।

এক নির্দেশিকায় আরবিআই জানিয়েছে, শেষবার ২০১২ সালে অগস্টে এটিএম লেনদেনের ফি বা চার্জের কাঠামোয় সংশোধন করা হয়েছিল। এরপর ২০১৪ সালে বদল আনা হয়েছিল গ্রাহকদের পরিষেবা মূল্যে। চার্জ বৃদ্ধির বিষয়ে সিদ্ধান্ত গ্রহণের আগে ২০১৯ সালে একটি কমিটি গঠন করেছিল কেন্দ্র। সেই কমিটির পরামর্শ মতো সিদ্ধান্ত গ্রহণ করেছে রিজার্ভ ব্যাঙ্ক।

কেন নেওয়া হল ফি বৃদ্ধির সিদ্ধান্ত? বিগত সাত বছরে বদলেছে দেশের আর্থিক খতিয়ান। যে সংস্থাগুলি গ্রাহক পরিষেবায় নিযুক্ত, এই ক’বছরে খরচ বেড়েছে তাদেরও। ফলত সুষ্ঠু পরিষেবা বহাল রাখার স্বার্থে এক টাকা করে বাড়ানো হয়েছে অতিরিক্ত লেনদেনের চার্জ। কমিটির পরামর্শ মোতাবেক গত বছর ১ অগস্টে বাড়ানো হয়েছিল সংস্থাগুলির থেকে নেওয়া পরিষেবা মূল্যও। অর্থনৈতিক লেনদেনের জন্য আগে যা ছিল ১৫ টাকা, পরে তা বেড়ে হয়েছে ১৭ টাকা। অর্থনৈতিক লেনদেন ব্যতীত লেনদেনের ক্ষেত্রে ৫ টাকা থেকে চার্জ বেড়ে হয়েছিল ৬ টাকা৷

বর্তমানে গ্রাহকরা তাঁদের নিজস্ব ব্যাঙ্কের এটিএম থেকে বিনামূল্যে টাকা লেনদেন করতে পারেন পাঁচবার। অন্য ব্যাঙ্কের এটিএম ব্যবহার করলে রয়েছে অন্য নিয়ম। মেট্রোপলিটন শহরে তিনবার কোনও চার্জ ছাড়া টাকা তোলা যায় অন্য ব্যাঙ্কের এটিএম থেকে। মেট্রোপলিটন ব্যতিরেকে অন্য কোনও জায়গা থেকে এই সুবিধাই পাওয়া যায় পাঁচবার।

গ্রাহকদের সুরক্ষা বাড়াতে বদলাচ্ছে Debit-credit card ব্যবহারের নিয়ম

Debit-credit card

নিউজ ডেস্ক, মুম্বই: বর্তমানে বহু মানুষই অনলাইনে কার্ডের মাধ্যমে কেনাকাটায় অভ্যস্ত হয়ে উঠেছেন। আগামী বছরের শুরু থেকেই ডেবিট ও ক্রেডিট কার্ড (Debit-credit card) ব্যবহারের নিয়ম বেশকিছু রদবদল আসছে।

বর্তমানে যে সমস্ত গ্রাহক নিয়মিত কোনও সংস্থা থেকে কার্ডের মাধ্যমে কেনাকাটা করেন তাঁদের কার্ড সংক্রান্ত তথ্য ওই সংস্থার কাছে মজুত থাকে। অত্যন্ত গোপনীয়তা ও সুরক্ষার সঙ্গেই কার্ডের বিস্তারিত তথ্য মজুত রাখা হয়। কিন্তু ২০২২ সালের জানুয়ারি (January) থেকে কোনও সংস্থাই আর গ্রাহকের কার্ডের বিবরণ নিজেদের কাছে সংরক্ষণ করতে পারবে না।

নতুন পদ্ধতি চালু হলে গ্রাহককেও ডেবিট বা ক্রেডিট কার্ডের ১৬ অঙ্কের সংখ্যা মনে রাখতে হবে না। কেনাকাটার সময় কার্ডের নম্বর থেকে সিভিভি (cvd card) কার্ডের তথ্য দিতে হবে না। তার বদলে একটি টোকেন নম্বর (token number ) দিতে হবে। ওই টোকেন নম্বর দিয়েই মেটানো যাবে টাকা। নতুন ব্যবস্থা চালু হলে কোনও গ্রাহকের ব্যক্তিগত তথ্য চুরির ভয়ও একেবারেই থাকবে না।

২০২২- এর ১ জানুয়ারি থেকে এই নিয়ম চালু হয়ে গেলে কোন সংস্থা আর গ্রাহকদের কার্ডের নম্বর বা কোনও ব্যক্তিগত বিবরণ নিজেদের কাছে সংরক্ষিত রাখতে পারবে না। সাধারণত কেনাকাটা আরও সহজ ও দ্রুত করতে বিভিন্ন সংস্থা গ্রাহকদের কার্ডের বিস্তারিত বিবরণ নিজেদের কাছে সংরক্ষিত রাখে। এর ফলে সহজেই এবং দ্রুত গ্রাহকরা কেনাকাটার পর জিনিসের দাম মেটাতে পারেন। যদিও এর ফলে তথ্য চুরির একটা সম্ভাবনা থাকে। কিন্তু রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়ার নতুন নির্দেশে আর কোনও সংস্থাই গ্রাহকদের কার্ডের বিবরণ সংরক্ষিত রাখতে পারবে না। পরিবর্তে চালু হচ্ছে টোকেন ব্যবস্থা।

আরবিআই জানিয়েছে, কেনাকাটার সময় গ্রাহক তাঁর ডেবিট বা ক্রেডিট কার্ডের বিস্তারিত তথ্য দেওয়ার পরিবর্তে একটি বিকল্প টোকেন নম্বর দেবেন। সংশ্লিষ্ট ব্যাংকের পক্ষ থেকে গ্রাহকদের সেই টোকেন নম্বর দেওয়া হবে। প্রতিটি কার্ডের বিকল্প হিসেবে দেওয়া হবে আলাদা আলাদা টোকেন। যা দিয়ে আগের থেকেও সহজেই কেনাকাটা করতে পারবেন যে কোনও ব্যক্তি। কিন্তু কোনও সংস্থাই আর গ্রাহকের টোকেন নম্বরটি সংরক্ষণ করতে পারবেন না। আরবিআই জানিয়েছে, আগামী বছরের ১ জানুয়ারি থেকে কার্ড প্রদানকারী এবং কার্ড ব্যবহারকারী ছাড়া লেনদেনের সঙ্গে যুক্ত তৃতীয় কোনও সংস্থাই কার্ডের তথ্য আর নিজেদের কাছে সংরক্ষণ করতে পারবে না। যে সব সংস্থার কাছে আগে থেকে তথ্য সংরক্ষিত আছে তাদের যাবতীয় তথ্য জানুয়ারির আগেই মুছে ফেলতে হবে।

গ্রাহকরা কিভাবে এই টোকেন পাবেন সেটা সকলেই জানতে চান। এক্ষেত্রে রিজার্ভ ব্যাংক যে নির্দেশ দিয়েছে তাতে বলা হয়েছে, গ্রাহকরা কার্ড প্রদানকারী সংস্থা বা ব্যাংকের কাছে টোকেনের জন্য অনলাইনে অনুরোধ পাঠাতে পারবেন। টোকেনের মাধ্যমে কেনাকাটার বাকি নিয়ম অবশ্য আগের মতই থাকবে।