तृणमूल कांग्रेस के सांसद हरियाणा में आंदोलनकारी किसानों से मिलेंगे

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को हरियाणा का दौरा करेगा और किसानों से मुलाकात करेगा। ये किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी शामिल है।

पार्टी ने सोमवार को एक बयान में कहा, “दीदी (टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी) का संदेश उन्हें देंगे कि हम आपके साथ हैं और केंद्र में मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए।”

टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन, मोहम्मद नदीमुल हक, डोला सेन, सागरिका घोष और साकेत गोखले की पांच सदस्यीय टीम हरियाणा और पंजाब की सीमा पर खनौरी के पास आंदोलनकारी किसानों से मिलने की संभावना है।
सुरक्षा बलों ने 13 फरवरी को खनौरी में किसानों को उनके आंदोलन के तहत दिल्ली की ओर मार्च करने से रोक दिया था। उसके बाद यहां फिर से नए सारा से प्रदर्शन शुरू हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दिल्ली को मिलेगी राहत

नई दिल्ली :  दिल्ली जल संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश को 137 क्यूसेक अतिरिक्त जल छोड़ने का निर्देश दिया और कहा कि हिमाचल प्रदेश द्वारा छोड़े गए अतिरिक्त पानी के प्रवाह को हरियाणा सुगम बनाने का काम करे।

दिल्ली जल संकट पर सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए। कोर्ट की ओर से हिमाचल प्रदेश को सात जून को अतिरिक्त जल छोड़ने का निर्देश दिया गया है, साथ ही उसे हरियाणा को पहले इसकी जानकारी देनी होगी।

न्यायमूर्ति पी के मिश्रा और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति नहीं है और वह उसके पास उपलब्ध अतिरिक्त जल छोड़ने को तैयार है।
पीठ की ओर से निर्देश दिया गया कि हिमाचल प्रदेश द्वारा छोड़े गए अतिरिक्त जल के प्रवाह को हरियाणा सुगम बनाए रखने में मदद करे ताकि जल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच सके।

पीठ की ओर से निर्देश दिया गया कि हिमाचल प्रदेश द्वारा छोड़े गए अतिरिक्त जल के प्रवाह को हरियाणा सुगम बनाए रखने में मदद करे ताकि जल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच सके। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जून की तारीख तय की है।

बता दें कि शीर्ष अदालत दिल्ली सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में हरियाणा को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह हिमाचल प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय राजधानी को उपलब्ध कराया जाने वाला अतिरिक्त जल छोड़े ताकि राजधानी में जारी जल संकट को कम किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में केंद्र, बीजेपी शासित हरियाणा और कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश को पक्षकार बनाने का काम किया गया था, साथ ही कहा गया है कि जीवित रहने के लिए पानी जरूरी है और यह बुनियादी मानवाधिकारों में से एक है।

 

 

 

10 राज्यों में मुंह के बल गिरी बीजेपी,  पार्टी के 400 पार का सपना रह गया अधूरा

नई दिल्ली :  लोकसभा चुनावों 2024 के नतीजे आ रहे है। ऐसे में कई रात्यों में बीजेपी की जीत हो रही है तो वही कई राज्यों में बीजेपी मुंह के बल गिरती नजर आ रही है। दरअसल 10 राज्यों के रुझानों में पार्टी बहुत ज्यादा सीटों पर आगे नहीं दिख रही है। यहां स्थानीय पार्टियों की पकड़ मजबूत नजर आ रही है, जबकि दो राज्यों में राहत है।

सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी का खेल बिगड़ता दिख रहा है। वहीं, हरियाणा और बंगाल में भी बीजेपी उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश की वीआईपी सीट अमेठी पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भारी वोटों के अंतर से पीछे चल रही हैं। यहां कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा बढ़त बनाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश में 34 सीटों पर बीजेपी, जबकि समाजवादी पार्टी 35 सीटों पर आगे चल रही है।

इसके अलावा सात सीटों पर कांग्रेस आगे है। इस तरह हिसाब से INDIA गठबंधन राज्य की 80 में से 44 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, एनडीए 35 सीटों पर आगे चल रहा है।

बिहार की बात करें तो राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से एनडीए 34 सीटों पर आगे है, जबकि 4 पर INDIA गठबंधन आगे चल रहा है और दो पर अन्य दल आगे हैं। 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 17 सीटें जीती थीं और 16 पर जनता दल (यूनाइटेड) के पास गई थीं।

हरियाणा में बीजेपी को 5 सीटों पर का नुकसान हो सकता है। 10 लोकसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी और पांच पर कांग्रेस आगे चल रही है। पिछले चुनाव के नतीजे देखें तो बीजेपी को राज्य की 10 की 10 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी का जादू चलता दिख रहा है। एक बार फिर से सत्तारूढ़ कांग्रेस 30 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बीजेपी सिर्फ 11 सीटों पर ही लीड करती दिख रही है।

मणिपुर की दोनों लोकसभा सीटों पर भी कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है।
गुजरात की 26 लोकसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस आगे चल रही है।
राजस्थान में भी बीजेपी को 10 सीटों पर नुकसान हो सकता है।
कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों पर जो रुझान सामने आए हैं, उनमें बीजेपी 16 सीटों पर आगे चल रही है।
पंजाब में 2019 में बीजेपी को दो सीटें मिली थीं। इसके अलावा तेलंगाना और ओडिशा में बीजेपी को राहत है।
ओडिशा की 21 में से 18 पर और तेलंगाना की 17 में से 8 पर बीजेपी आगे है।

Haryana: হরিয়ানায় ৫ শহরে বন্ধ হল স্কুল, সিনেমা হল

Covid 19: Upward Corona Graph, Number of Active Patients Rising in the Country

রাজ্যে ক্রমশ বর্ধমান সংক্রমণকে মাথায় রেখেই হরিয়ানায় আরও কঠোর করা হল বিধিনিষেধ। শনিবার রাজ্য সরকারের তরফে নয়া নির্দেশিকা জারি করে জানানো হয়েছে, গুরগাঁও সহ মোট ৫টি শহরে সিনেমা হল ও স্পোর্টস কমপ্লেক্সগুলি বন্ধ করা হচ্ছে। আগামী ১২ জানুয়ারি অবধি এই শহরগুলিতে সমস্ত স্কুলও বন্ধ থাকবে।

হরিয়ানা সরকারের নির্দেশিকা অনুযায়ী, গুরগাঁও, ফরিদাবাদ, অম্বালা, পঞ্চকুলা ও সোনিপতে এই বিধিনিষেধ জারি করা হয়েছে। রাজ্য সরকারের তরফে জানানো হয়েছে, এই শহরগুলিতে সংক্রমণের হার সর্বাধিক হওয়ায় বিধিনিষেধ জারি করা হয়েছে। ২ জানুয়ারি থেকে আগামী ১২ জানুয়ারি অবধি এই বিধিনিষেধ জারি থাকবে।

রাজ্য সরকারের নির্দেশিকা অনুযায়ী, আগামী ১২ জানুয়ারি অবধি গুরগাঁও, ফরিদাবাদ, অম্বালা, পঞ্চকুলা ও সোনিপতের সব স্কুল বন্ধ থাকবে। এছাড়াও সিনেমা হল, স্পোর্টস কমপ্লেক্সও বন্ধ রাখার নির্দেশ দেওয়া হয়েছে। জরুরি ও অত্যাবশ্যকীয় পরিষেবা ছাড়া সমস্ত সরকারি ও বেসরকারি অফিসগুলিতে ৫০% কর্মী নিয়ে কাজ চালানোর নির্দেশ দেওয়া হয়েছে রাজ্য সরকারের তরফে।

এই ৫ শহরের বিভিন্ন শপিং মল ও মার্কেটগুলিকে বিকেল ৫টা অবধি খোলার অনুমতি দেওয়া হয়েছে। অন্যদিকে বার, রেস্তরাঁগুলিতে কেবল ৫০% গ্রাহক প্রবেশের অনুমতি দেওয়া হয়েছে।

Haryana: বছরের শুরুতেই ভূমিধসে মৃত ১, নিখোঁজ বহু

Landslide In Haryana

News Desk: বছরের প্রথম দিনে হরিয়ানায় (Haryana) ভিওয়ানি জেলায় একটি খনি অঞ্চলে নামল ভূমিধস (land slide)। এই ধসে এখনও পর্যন্ত ১ জনের মৃত্যু হয়েছে বলে খবর। ওই ধসে ১৫ থেকে ২০ জন শ্রমিক (labour) মাটির নিচে চাপা পড়ে আছেন। চাপা পড়েছে বেশ কয়েকটি গাড়ি। ইতিমধ্যেই উদ্ধারকারী দল উদ্ধার কাজ শুরু করেছে। শেষ খবর পাওয়া পর্যন্ত তিন জনকে উদ্ধার করা গিয়েছে। বাকিদের উদ্ধারের (rescue) চেষ্টা চলছে।

সরকারিভাবে এখনও পর্যন্ত একজনের মৃত্যুর কথা ঘোষণা করা হয়েছে। তবে স্থানীয় বাসিন্দাদের আশঙ্কা, মাটিচাপা পড়ে বেশ কয়েক জনের মৃত্যু হয়েছে। ইতিমধ্যেই শ্রমিকদের উদ্ধার কাজের তদারকি করতে হরিয়ানার কৃষিমন্ত্রী ঘটনাস্থলে গিয়েছেন। জেলা প্রশাসনের নির্দেশে চিকিৎসকদের একটি দলও ঘটনাস্থলে গিয়েছে। উদ্ধার হওয়া শ্রমিকদের দ্রুত চিকিৎসার জন্যই ঘটনাস্থলে চিকিৎসকদের পাঠানো হয়েছে।

রাজ্যের কৃষিমন্ত্রী জেপি দালাল জানিয়েছেন, এখনও পর্যন্ত এক জনের মৃত্যু হয়েছে। তবে উদ্ধার কাজ শেষ না হওয়া পর্যন্ত এখনই মৃতের প্রকৃত সংখ্যা বলা সম্ভব নয়। মাটির নিচে চাপা পড়া মানুষকে দ্রুত উদ্ধারের চেষ্টা করা হচ্ছে।

কী কারণে এই ভূমিধস তা এখনও জানা যায়নি। তবে মনে করা হচ্ছে, পাহাড় কাটতে গিয়েই বিপর্যয় নেমেছে। স্থানীয় বাসিন্দারা জানিয়েছেন, ভিওয়ানি জেলার তোসাম ব্লকের দাদাম এলাকায় একটি পাহাড় ভাঙার কাজ হচ্ছিল। শনিবার যখন পাহাড় ভাঙার কাজ চলছিল সেসময় আচমকাই ধস নামে। কৃষিমন্ত্রী দালাল জানিয়েছেন, উদ্ধার কাজ শেষ হওয়ার পরে বোঝা যাবে কী কারণে এই দুর্ঘটনা।

উল্লেখ্য, হরিয়ানার তোসাম ব্লকে বিপুল পরিমান কয়লা ও খনিজ সম্পদ উত্তোলন করা হয়। সম্প্রতি এই অঞ্চলের খনিজ সম্পদ উত্তোলনের উপর নিষেধাজ্ঞা জারি করেছিল জাতীয় গ্রিন ট্রাইবুনাল। বৃহস্পতিবারই সেই নিষেধাজ্ঞা প্রত্যাহার করা হয়। তারপর শুক্রবার থেকেই খনিতে জোরদার কাজ শুরু হয়। কিন্তু ২৪ ঘন্টার মধ্যেই বড়সড় বিপর্যয় নামল সেখানে।

Haryana: রাস্তা আটকে নমাজ পড়া যাবে না, জানালেন মুখ্যমন্ত্রী

Haryana Chief Minister Manoharlal Khattar

নিউজ ডেস্ক: রাস্তা আটকে আর নমাজ (namaz) পড়া যাবে না। রাস্তার বদলে কোনও ধর্মীয় প্রতিষ্ঠান বা বাড়ির মধ্যেই নমাজ পাঠ করতে হবে। এমনটাই জানালেন হরিয়ানার (Haryana) মুখ্যমন্ত্রী মনোহরলাল খাট্টার (monoharlal khattar)।

সাধারণত মুসলিম সম্প্রদায় বড় ধরনের কোনও অনুষ্ঠানে রাস্তার উপর নমাজ পড়েন। সম্প্রতি হরিয়ানার গুরুগ্রামে (gurugram) রাস্তার উপর নমাজ পড়া নিয়ে অশান্তি বাধে। একাধিক হিন্দুত্ববাদী সংগঠন রাস্তায় নমাজ পড়ার তীব্র প্রতিবাদ জানায়। এরপরই শনিবার রাজ্যের মুখ্যমন্ত্রী মনোহরলাল খাট্টার জানালেন, প্রকাশ্যে বা রাস্তার উপর নমাজ পড়া মেনে নেওয়া হবে না।

সম্প্রতি রাস্তার উপর নমাজ পড়া নিয়ে হরিয়ানার একাধিক অশান্তির ঘটনা ঘটেছে। সেই কথা উল্লেখ করে মুখ্যমন্ত্রী বলেন, প্রার্থনা করার অধিকার প্রতিটি মানুষেরই আছে। এটা যেমন ঠিক তেমনই, প্রার্থনা করতে গিয়ে যাতে অন্য কারও সমস্যা না হয় সেটাও মাথায় রাখতে হবে। সরকার চায় প্রকাশ্যে রাস্তার উপর নমাজ পড়ার যে চল রয়েছে তা বন্ধ হোক। এই সমস্যার একটা সৌহার্দ্যপূর্ণ সমাধান অবশ্যই দরকার। সেক্ষেত্রে মুসলিম সম্প্রদায়ের মানুষ বাড়ির ভিতরে বা মসজিদের মধ্যে নমাজ পড়তে পারেন। সেক্ষেত্রে তো কারও কোনও সমস্যা হয় না।

রাজনৈতিক মহল মনে করছে, হিন্দুত্ববাদী সংগঠনগুলির প্রবল চাপের কাছে মাথা নুইয়ে মুখ্যমন্ত্রী এই সিদ্ধান্ত নিয়েছেন। সাধারণত কোনও অনুষ্ঠানের সময় রাস্তার উপর নমাজ পড়াটা মুসলিম সম্প্রদায়ের রীতি। তাতে যে অন্যের সমস্যা হয় না তা নয়, কিন্তু দীর্ঘদিন ধরে এটাই চলে আসছে। উল্লেখ্য, এর আগে ২০১৮ সালেও রাস্তার উপর নমাজ পড়া নিয়ে বেশ কয়েকটি অশান্তির ঘটনা ঘটেছিল হরিয়ানায়। সে সময় পুলিশের পক্ষ থেকে ২৯ টি জায়গাকে নমাজ পড়ার জন্য চিহ্নিত করা হয়েছিল। যদিও পরবর্তী ক্ষেত্রে গুরুগ্রাম প্রশাসন ৮টি স্থানের উপর থেকে নমাজ পড়ার অনুমতি বাতিল করেছিল। তবে এখনও পর্যন্ত হরিয়ানার বেশ কিছু এলাকায় রাস্তার উপর নমাজ পড়ার রীতিমতো প্রশাসনিক অনুমতি আছে।

যে সমস্ত রাস্তার উপর নমাজ পড়ার অনুমতি আছে সেখানে নমাজ পড়া যাবে কিনা জানতে চাওয়া হলে মুখ্যমন্ত্রী বলেন, এ বিষয়টি পুলিশ ও জেলাশাসকদের খতিয়ে দেখতে বলা হয়েছে। রাস্তায় নমাজ পড়লে সাধারণ মানুষের যে অসুবিধা হয় সেটা তো না বললেও চলে। তাই আমাদের সকলকেই এটা বুঝতে হবে। এমন একটা জায়গায় নমাজ পড়তে হবে যাতে কারও কোনও সমস্যা না হয়।

সম্প্রতি রাস্তার উপর নমাজ পড়া নিয়ে হরিয়ানায় বেশ কয়েকটি সংঘর্ষের ঘটনাও ঘটেছে। রাস্তার উপর নমাজ পড়া বন্ধ হলে আগামী দিনে এ ধরনের কোনও অশান্তি হবে না বলেই অনেকে মনে করছেন।

Delhi Pollution:পাঞ্জাব-হরিয়ানা থেকে দৈত্যের মতো এগিয়ে আসছে ধোঁয়ার কুণ্ডলী

Delhi Pollution

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি:  দিল্লির ভয়াবহ দূষণ (pollution) কমাতে গত কয়েকদিন ধরেই নানা কথাবার্তা চলছে। বিষয়টি গড়িয়েছে সুপ্রিম কোর্ট পর্যন্ত। শীর্ষ আদালতে দিল্লি (Delhi) ও কেন্দ্রীয় সরকার জানিয়েছিল মাত্রাতিরিক্ত দূষণের মূল কারণ ফসলের গোড়া পোড়ানো বা নাড়া পোড়ানো।

যদিও সুপ্রিম কোর্টের (supreme court) বেঞ্চ সহকারের ওই বক্তব্য খারিজ করে দেয়। কিন্তু শুক্রবার নাসার (NASA) উপগ্রহ চিত্রে যে ছবি দেখা গিয়েছে তা দিল্লি ও কেন্দ্রীয় সরকারের বক্তব্যকেই মান্যতা দিচ্ছে।

নাসার উপগ্রহ চিত্রে দেখা গিয়েছে, পাঞ্জাব (Punjab) ও হরিয়ানা (Haryana) থেকে নাড়া পোড়ানো বা ফসলের অবশিষ্টাংশ পোড়ানোর কালো ধোঁয়া নদীর স্রোতের মতো দিল্লির দিকে এগিয়ে আসছে। চলতি মাসের ১১ তারিখে এই ছবি ধরা পড়েছে নাসার ক্যামেরায়।

NASA satellite data shows

উপগ্রহ চিত্রে দেখা গিয়েছে, রাজধানী ও তার সংলগ্ন এলাকাগুলি ধোঁয়ায় ঢেকে রয়েছে। ওই ছবিতে যে সমস্ত জায়গায় বড় মাপের আগুন জ্বলছে সেই জায়গাগুলিকে লাল কালি দিয়ে চিহ্নিত করা হয়েছে। সেখানেই দেখা গিয়েছে, পাঞ্জাব, হরিয়ানা, এমনকী, পাকিস্তানের বেশ কিছু জায়গায় মাইলের পর মাইল জমিতে চাষিরা ফসলের গোড়া পোড়াচ্ছেন। ফসলের গোড়া পোড়ানোর কালো ধোঁয়া আগ্নেয়গিরির লাভা মতো এগিয়ে আসছে দিল্লির দিকে।

নাসার এক বিজ্ঞানী জানিয়েছেন, ফসলের গোড়া পোড়ানোর কারণে যে ভয়ঙ্কর দূষণের সৃষ্টি হয়েছে তাতে ওই একদিনই দু’কোটির বেশি মানুষ কমবেশি শারীরিক ক্ষতির মুখে পড়েছেন। ওই বিজ্ঞানীর দাবি, উপগ্রহ চিত্রে যেভাবে কালো ধোঁয়ার কুণ্ডলীকে দিল্লির দিকে এগিয়ে আসতে দেখা গিয়েছে তা অত্যন্ত উদ্বেগের বিষয়। অবিলম্বে ফসলের গোড়া পোড়ানো বন্ধ করা না গেলে দিল্লির দূষণ রোধ করা যাবে না।

উল্লেখ্য, প্রতি বছরই দেওয়ালির পর দিল্লির দূষণ মাত্রা ছাড়ায়। বাজি ফাটানোর সঙ্গে সঙ্গে নভেম্বরের শুরু থেকেই কৃষকরা ফসলের গোড়া পোড়াতে থাকেন। এই দুইয়ের যোগফলেই দিল্লির বাতাস শ্বাস নেওয়ার অযোগ্য হয়ে পড়ে। এই মুহূর্তে দিল্লির বাতাস ‘অতি খারাপ’ পর্যায়ে রয়েছে।

ভয়াবহ দূষণের হাত থেকে মানুষকে রক্ষা করতে ইতিমধ্যেই দিল্লিতে স্কুল-কলেজ বন্ধ রাখা হয়েছে। সমস্ত সরকারি-বেসরকারি অফিসে চালু করা হয়েছে ওয়ার্ক ফ্রম হোম। বন্ধ রাখা হয়েছে সব ধরনের নির্মাণকাজ ও তাপ বিদ্যুৎ উৎপাদন কেন্দ্র। সুপ্রিম কোর্ট অবশ্য এটা মেনে নিয়েছে যে, এই দূষণের অন্যতম কারণ ফসলের গোড়া পোড়ানো হলেও সেটাই একমাত্র কারণ নয়। তাছাড়া কৃষকরা যাতে এই কাজ না করেন তার জন্য সরকারকেই উদ্যোগী হতে হবে। কৃষকদের বিকল্প পথের সন্ধান দিতে হবে সরকারকেই। কিন্তু সরকার সেটা করছে না।

মেয়ে-বউদের নামে বাড়ির নামকরণ করে ব্যতিক্রমী হল এই গ্রাম

Haryana village names houses after daughters & ‘bahus’

Special Correspondent: আমাদের দেশে কন্যা সন্তানকে আজও অনেকটা নেকনজরে দেখা হয়। প্রথম সন্তান মেয়ে হলে বেশিরভাগ ক্ষেত্রে অধিকাংশ পরিবারেই মাকে শুনতে হয় অনেক গঞ্জনা। যে কারণে কন্যাভ্রূণ হত্যা এখনও আমাদের দেশে এক অভিশাপ হিসেবে রয়ে গিয়েছে।

সম্প্রতি এনসিআরবি বা ন্যাশনাল ক্রাইম রেকর্ড ব্যুরোর একটি সমীক্ষা বলছে, দেশের কয়েকটি রাজ্যে উদ্বেগজনকভাবে বেড়েছে কন্যাভ্রূণ হত্যা। যার ফলে ওই সমস্ত রাজ্যগুলিতে পুরুষের তুলনায় নারীর অনুপাত অনেকটাই কম। ওই রাজ্যগুলির মধ্যে হরিয়ানা অন্যতম। কিন্তু সেই হরিয়ানাতেই এক ব্যতিক্রমী গ্রামের সন্ধান মিলল।

পুরুষতান্ত্রিক সমাজের মাঝেই এই এক উদাহরণ তৈরি করল হরিয়ানার হিসার জেলার মায়ার গ্রাম। এই গ্রামে প্রায় হাজার দেড়েক পরিবারের বাস। এই গ্রামের প্রতিটি বাড়ির একটি করে আলাদা নাম বা পরিচয় রয়েছে। বাড়ির নাম ঠিক করা হয় মেয়ে বা বউদের নামে। মেয়ে বা বউদের নামের এক ডাকে চেনা যায় একটি পরিবারকে।

এই গ্রামে এক সময়ে সরপঞ্চ বা পঞ্চায়েত প্রধান ছিলেন সুনীল জগলান। মেয়েদের প্রতি সম্মান জানাতে ২০১৫ সালে তিনি চালু করেছিলেন ‘লাডো স্বাভিমান’ উৎসব। ভোজপুরি ভাষায় ‘লাডো’ কথার অর্থ মেয়ে। মেয়েরা যে সমাজের গর্ব সেই কথা তুলে ধরতেই এই উৎসবের সূচনা করেছিলেন জগলান। মায়ার গ্রামে প্রতিটি বাড়ির নামকরণ করা হয়ে থাকে সেই বাড়ির মেয়ে বা বউয়ের নামে। এই গ্রামের গ্রামবাসীরা এ ব্যাপারে যথেষ্ট খুশি এবং গর্বিত বলে জানিয়েছেন।

জগলান জানিয়েছেন, এখনও পর্যন্ত তিনি মায়ার-সহ আরও বেশ কয়েকটি গ্রামের ১৭ হাজার বাড়িতে মেয়েদের নামে নেমপ্লেট তৈরি করতে পেরেছেন। আগামী দিনে আরও অনেক গ্রামে তিনি এই কাজ করতে পারবেন বলে আশা করছেন।

গগনদীপ সিং নামের মায়ার গ্রামের এক বাসিন্দা জানিয়েছেন, মেয়েরাই বাড়ির প্রকৃত লক্ষ্মী। বাড়ির উন্নয়নের পিছনে মেয়েদের অবদান সবচেয়ে বেশি। মেয়েদের অবদানকে স্বীকৃতি দিতেই তাঁরা বাড়ির নাম মেয়েদের নামে করার সিদ্ধান্ত নিয়েছিলেন। তাঁদের এই সিদ্ধান্ত প্রথম দিকে হয়তো অনেকেরই পছন্দ হয়নি। কিন্তু পরবর্তী ক্ষেত্রে এই সিদ্ধান্ত সকলের কাছে জনপ্রিয় হয়ে উঠেছে।

Haryana: সিঙ্ঘু সীমান্তের কৃষক আন্দোলনস্থলে পুলিশের ব্যারিকেডে হাত-পা কাটা যুবকের দেহ উদ্ধার

farmers' protest site in Singhu border

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: দিল্লি-হরিয়ানা সীমান্তবর্তী এলাকা সিঙ্ঘুতে যেখানে কৃষকরা এক বছর ধরে আন্দোলন করছেন সেখানে এক যুবকের দেহ উদ্ধার ঘিরে তীব্র উত্তেজনা ছড়াল। কৃষকদের আটকাতে পুলিশ ব্যারিকেড তৈরি করেছে। সেই ব্যারিকেড থেকেই ঝুলছিল যুবকের দেহ। তার দুটি হাত ও পা কাটা ছিল। গোটা এলাকার ভেসে যাচ্ছিল রক্তে। শুক্রবার সকালে এই ভয়ঙ্কর দৃশ্য দেখে সকলেই চমকে উঠেছেন। 

গুজব ওঠে, ওই যুবক কৃষক আন্দোলনে অংশ নিয়েছিলেন। সেকারণেই পুলিশ তাকে নির্মমভাবে খুন করেছে। হরিয়ানা ও দিল্লি দুই রাজ্যেই এই খুনের কথা ছড়িয়ে পড়ায় তীব্র উত্তেজনা ও আতঙ্ক ছড়ায়। অনেকেই পুলিশের আচরণের তীব্র নিন্দা করেন।

কিন্তু প্রাথমিক খোঁজখবর করে জানা যায়, ওই যুবক কৃষকদের আন্দোলনে ছিলেন না। তাই কে বা কারা ওই যুবককে এমন নৃশংসভাবে খুন করল তা নিয়ে তদন্ত শুরু হয়েছে। মৃত যুবকের নাম ঠিকানা বা পরিচয় কিছুই এখনও জানা যায়নি

সোনিপত জেলার পুলিশ সুপার বলেছেন, শুক্রবার ভোর পাঁচটা নাগাদ সেনিপথের কুন্ডিতে যেখানে কৃষকরা আন্দোলন করছেন সেখানকার ব্যারিকেডে হাত কাটা এক যুবকের ঝুলন্ত দেহ উদ্ধার করা হয়। এখনও পর্যন্ত জানা যায়নি কে বা কারা এই কাজ করেছে। কী কারণে ওই যুবককে তালিবানের মত নৃশংসভাবে হত্যা করা হয়েছে তাও জানা যায়নি। তাই অচেনা কয়েকজন ব্যক্তির বিরুদ্ধে এফআইআর দায়ের করা হয়েছে। ওই যুবককে কুন্ডিতেই খুন করা হয়েছে, না অন্য কোথাও খুন করে এখানে নিয়ে আসা হয়েছে?

এই প্রশ্নের উত্তরে পুলিশ সুপার বলেন, প্রাথমিক তদন্তে মনে হচ্ছে ওই যুবককে কুন্ডিতেই খুন করা হয়েছে। এদিনই বেলার দিকে একটি ভিডিয়ো ভাইরাল হয়েছে।সোশ্যাল-মিডিয়ায়-ভাইরাল হওয়া ভিডিয়োতে দেখা যাচ্ছে, ‘নিহাঙ্গস’ সম্প্রদায়ের কিছু মানুষ এক যুবককে ঘিরে ধরে দাঁড়িয়ে আছে। ওই যুবকের একটি হাত কাটা। অঝোর ধারায় রক্ত বেরোচ্ছে। যন্ত্রণায় ছটফট করছে ওই যুবক। তবে ওই যুবকের অপর একটি হাত ও দুই পা তখনো অক্ষত ছিল। ওই ভিডিয়ো সামনে আসার পর পুলিশের অনুমান, নিহাঙ্গস সম্প্রদায়ের লোকেরাই ওই যুবককে খুন করেছে। এই ঘটনায় জড়িতদের খুঁজে বের করতে পুলিশ গোটা এলাকায় তল্লাশি চালাচ্ছে।

সূত্রের খবর, মৃত যুবক শিখদের পবিত্র ধর্মগ্রন্থকে অসম্মান করেছিল। তার শাস্তি হিসেবে ওই যুবককে এভাবে খুন করা হয়েছে। উল্লেখ্য, নিহাঙ্গস হল শিখ সম্প্রদায়ের এক গোষ্ঠী। শিখদের এই সম্প্রদায়টি মূলত যোদ্ধা হিসেবে পরিচিত।

Haryana: গান্ধী জয়ন্তীতে অনশনরত কৃষকদের উপর লাঠি চার্জ, মুখ্যমন্ত্রীর বাড়ি ঘেরাও

haryana police use water cannon against kisan

নিউজ ডেস্ক: কেন্দ্রের কৃষি আইনের বিরোধিতা করে গান্ধী জয়ন্তীতে অনশনকারী কৃষকদের উপর জলকামান ও লাঠি চার্জের ঘটনায় প্রবল উত্তপ্ত হরিয়ানা। রাজধানী চন্ডীগড়ে মুখ্যমন্ত্রী মনোহরলাল খট্টারের বাসভবন ঘেরাও করলেন কৃষকরা। বিক্ষোভকারীরা ভেঙে দিয়েছেন মুখ্যমন্ত্রীর বাসভবনের নিরাপত্তা বলয়ের ব্যারিকেড।

বিক্ষোভের এই ছবি ও সংবাদ হরিয়ানা থেকে হু হু করে ছড়িয়েছে উত্তরপ্রদেশ, দিল্লি, পাঞ্জাব, হিমাচল প্রদেশ সহ দেশ জুড়ে। উত্তপ্ত হরিয়ানার কারনাল। পার্শ্ববর্তী উত্তর প্রদেশের বিভিন্ন গ্রামাঞ্চলে বিক্ষোভ ছড়াতে শুরু করেছে।

বিক্ষোভকারী কৃষকদের অভিযোগ, আন্দোলন দমাতে হরিয়ানার বিজেপি সরকার ধান কেনার সময় দশ দিন পিছিয়ে দিয়েছে। এর ফলে বৃষ্টিতে ধান নষ্ট হওয়ার প্রবল আশঙ্কা। বিক্ষোভকারী কৃষকরা সকাল থেকেই হরিয়নার বিভিন্ন এলাকার সংশ্লিষ্ট প্রশাসনিক কেন্দ্রগুলির দিকে মিছিল করে আসতে থাকেন।

মিছিল আটকে দিয়ে পুলিশের তরফে অনুরোধ জানানো হয় এভাবে মুখ্যমন্ত্রী ও অন্যান্য মন্ত্রীদের বাসভবনের দিকে যাওয়া যাবে না। উত্তেজিত কৃষকরা পুলিশের ব্যারিকেডের উপর ঝাঁপিয়ে পড়েন। শুরু হয় ধুন্ধুমার পরিস্থিতি। পুলিশ লাঠি চালায়। পরে জলকামান চার্জ করে। মুখ্যমন্ত্রী মনোহরলাল খট্টারের বিরুদ্ধে সংযুক্ত কিষান মোর্চার অভিযোগ, তিনি কৃষকদের দাবিকে মান্যতা দিচ্ছেন না।

পূর্ব ঘোষিত কর্মসূচি অনুসারে সংযুক্ত কিষান মোর্চা (SKM) ও সারা ভারত কৃষকসভা (AIKS) নেতৃত্বে জাতির জনক মহাত্মা গান্ধীর জন্ম জয়ন্তীর দিন অনশন পালন চলছে। কৃষি আইন বাতিলের দাবিতে অনড় লক্ষ লক্ষ কৃষক। কৃষকসভার সাধারণ সম্পাদক তথা উলুবেড়িয়ার প্রাক্তন সিপিআইএম সাংসদ হান্নান মোল্লা জানিয়েছেন, দিনভর অনশন কর্মসূচি চলবে।

সংযুক্ত কিষান মোর্চা জানিয়েছে, গান্ধী জয়ন্তীর দিন স্বাধীনতা আন্দোলনের অন্যতম কেন্দ্র বিহারের চম্পারণ থেকে উত্তর প্রদেশের বারাণসী পর্যন্ত পদযাত্রা শুরু হবে। টানা ১৮ দিনের এই পদযাত্রায় ওডিশা, বিহার, উত্তর প্রদেশ থেকে কৃষকরা অংশ নেবেন। প্রধানমন্ত্রী মোদীর সংসদীয় কেন্দ্র বারাণসীতেই হবে বিক্ষোভ।

কৃষক বিক্ষোভ: প্রবল উত্তপ্ত হরিয়ানা, ইন্টারনেট বন্ধ, মমতাকে বনধ সমর্থনের আহ্বান

Farmers Protest

নিউজ ডেস্ক: কৃষক বিক্ষোভের জেরে হরিয়ানার বহু এলাকা সীমানা ইন্টারনেট বিচ্ছিন্ন। মঙ্গলবার বিক্ষোভকারী কৃষকদের মহাপঞ্চায়েত ঘিরে উত্তর প্রদেশের বিভিন্ন জেলাতেও প্রবল উত্তেজনা। দুটি রাজ্যেই বিজেপি ক্ষমতাসীন। তবে কৃষক বিক্ষোভের কেন্দ্র কার্নাল হরিয়ানার মধ্যে। সেখানেই জমায়েত।
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স্থিতি সামাল দিতে হরিয়ানার মুখ্যমন্ত্রী মনোহরলাল খট্টার পাঁচটি জেলায় ইন্টারনেট বন্ধ রাখার নির্দেশ দেন। এর জেরে আরও উত্তাপ ছড়িয়েছে। কেন্দ্রের মোদী সরকারের কৃষি নীতির বিরোধিতায় আগামী ২৭ সেপ্টেম্বর ভারত বনধ পালন করবে কৃষক সংগঠনগুলি।

আন্দোলন বন্ধ হবে না। সরকারকে বিতর্কিত কৃষি আইন বাতিল করেই ছাড়ব। এমনই জানিয়েছেন সর্বভারতীয় কৃষক নেতা উলুবেড়িয়ার প্রাক্তন বাম সাংসদ হান্নান মোল্লা। পশ্চিম ভারতের কৃষক নেতা রাকেশ টিকায়েতের হুঙ্কার বিজেপি সরকার পড়ে যাবে হরিয়ানা ও উত্তর প্রদেশে।

Farmers Protest

আন্দোলনরত কৃষকদের যৌথ মঞ্চ কৃষক সংঘর্ষ সমিতির তরফে বার্তা পাঠানো হয়েছে পশ্চিমবঙ্গের মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের কাছে। সর্বভারতীয় কৃষক নেতৃত্বের দাবি, মমতা যখন বিজেপি বিরোধী নেত্রী হিসেবে নিজেকে তুলে ধরছেন, তাহলে কৃষি আইন বাতিলের দাবিতে ধর্মঘটে অংশ নিন।

পশ্চিমবঙ্গে প্রথমবার ২০১১ সালে সরকার গড়ার পরেই তৃণমূল কংগ্রেস নেত্রী মমতা ঘোষণা করেন, তাঁর সরকার বনধ সমর্থন করবে না। গত দুটি মেয়াদে টানা সরকার চালিয়ে তৃণমূল কংগ্রেস একবারও বনধ ডাকেনি। বিরোধীদের ডাকা বনধ রুখতে রাস্তায় থেকেছে টিএমসি সমর্থকরা।

কৃষক সংগঠনগুলির ডাকা ভারত বনধ ঘিরে উত্তর প্রদেশ, হরিয়ানা, পাঞ্জাব, হিমাচল প্রদেশ, উত্তরাখণ্ডে ব্যাহত হবে জনজীবন এমনই মনে করা হচ্ছে। বিহার, মধ্যপ্রদেশ, তামিলনাডু, কেরল, অন্ধ্রপ্রদেশ, কর্ণাটকেও বনধের প্রভাব পড়তে চলেছে। মহারাষ্ট্রে ব্যাপক প্রভাব পড়বে বলেই ধারণা।

বনধের সমর্থন করছে সমাজবাদী পার্টি, কংগ্রেস, সিপিআইএম, সিপিআই, শিবসেনা, ডিএমকে, শিরোমনি আকালি দল। দিল্লির সরকারে থাকা আম আদমি পার্টি কী অবস্থান নেয় তাও লক্ষ্যণীয়। দলনেতা তথা দিল্লির মুখ্যমন্ত্রী কেজরিওয়ালের নজরে পাঞ্জাবের নির্বাচন। তিনিও ঝুঁকি নেবেন না বলেই মনে করা হচ্ছে।

এর পরেই আসছে পশ্চিমবঙ্গের মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের নাম। কৃষক আন্দোলনে সমর্থন দেওয়া মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় কি বনধ সমর্থন করবেন? কলকাতা থেকে দিল্লি, লখনউ সর্বত্র এই প্রশ্ন।

কৃষক আন্দোলনের ধাক্কায় হরিয়ানার সরকার টলমল করছে।হরিয়ানার মুখ্যমন্ত্রী মনোহরলাল খট্টার কৃষক আন্দোলনের প্রবল বিপক্ষে। তবে তাঁর সরকারেই লেগেছে ভাঙন আতঙ্ক। শরিকদলগুলি রুষ্ঠ। এই সুযোগে তাল ঠুকছে বিরোধী কংগ্রেস।