‘मैं पीड़ित हूं और मुझे अपमान झेलना पड़ता है : धनखड़

टीएमसी सांसद द्वारा मजाक उड़ाए जाने के बाद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने एक बयान में कहा है कि वह पीड़ित हैं, जिन्हें लगातार अपमान झेलना पड़ता है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने आधिकारिक आवास पर इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस के प्रोबेशनर्स के बैच को संबोधित करते हुए यह बात कही। बता दें कि बीते दिनों विपक्षी सांसदों द्वारा राज्यसभा सभापति की मिमिक्री करने पर खूब विवाद हुआ था। सरकार ने इसे लेकर विपक्ष को निशाने पर लिया था।उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘मैं एक पीड़ित हूं! एक ऐसा पीड़ित, जिसे पता है कि इससे कैसे जूझना है और सारे अपमान को झेलते हुए भारत माता की सेवा करनी है।’ उपराष्ट्रपति ने प्रोबेशनर अधिकारियों को सलाह दी कि वह भी आलोचना झेलने के लिए तैयार रहें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘जब मैं एक संवैधानिक पद पर हूं, राज्यसभा का सभापति हूं और उपराष्ट्रपति हूं, उसके बाद भी लोग मुझे नहीं बख्शते! लेकिन क्या इससे मेरी मानसिकता बदलनी चाहिए? क्या ये मुझे मेरे पथ से डिगा सकता है? नहीं! मैं सच्चाई के रास्ते पर हूं और हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना है।’

व्यवधानों को हथियार बनाने की राजनीतिक रणनीति गलत : धनखड़

RS Chairman Jagdeep Dhankhar

संसद का शीतकालीन सत्र तय समय से एक दिन पहले गुरुवार को ही खत्म कर दिया गया। इस दौरान राज्यसभा में 65 घंटे काम हुआ। राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने अफसोस जताते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से कार्यवाही बाधित करने के कारण लगभग 22 घंटे बर्बाद हुए। साथ ही निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक रणनीति के रूप में व्यवधानों को हथियार बनाना सही नहीं है।उन्होंने कहा कि हालांकि फिर भी राज्यसभा सांसदों ने बहस के साथ महत्वपूर्ण विधायी गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। शीतकालीन सत्र में कुल 17 विधेयक पारित किए गए। जहां देश के आपराधिक कानून में आमूल-चूल बदलाव लाने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य विधेयक पारित हुए। वहीं, दूरसंचार क्षेत्र के ढांचे में बदलाव लाने वाले दूरसंचार विधेयक और मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले विधेयक भी चर्चित रहे। इसके अलावा, डाकघर विधेयक, प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन विधेयक भी पारित किए गए। उन्होंने कहा, ‘इस शीतकालीन सत्र में 14 बैठकें हुईं। इस दौरान सत्ता पक्ष व विपक्ष के 2,300 से अधिक सवाल रखे गए। इसके अलावा इसी अवधि में 4300 से अधिक कागजात सामने रखे गए। हालांकि, मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा है कि कार्यवाही बाधित करने के कारण लगभग 22 घंटे बर्बाद हो गए। इसक असर हमारी उत्पादकता पर पड़ा, जो 79 फीसदी रही। व्यवधान और हंगामे को राजनीतिक रणनीति के रूप में हथियार बनाना हमारे संवैधानिक दायित्व से मेल नहीं खाता है।

देश की मध्यस्थता व्यवस्था पर रिटायर्ड जजों का कब्जा है : धनखड़

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि रिटायर्ड जजों ने देश की मध्यस्थता व्यवस्था को अपनी मुट्ठी में किया हुआ है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अन्य योग्य लोगों को यहां मौके नहीं दिए जा रहे हैं। अब समय आ गया है, जब हमें आत्म अवलोकन करने की जरूरत है और जरूरी बदलाव करने की जरूरत है और अगर जरूरत पड़े तो कानून बनाकर ये बदलाव किए जाएं। उन्होंने कहा कि ‘मैं इसके लिए उन्हें (मुख्य न्यायाधीश) सलाम करता हूं। उन्होंने कहा कि अन्य योग्य उम्मीदवार नजरअंदाज कर दिए जाते हैं और ओल्ड बॉयज क्लब मानसिकता मध्यस्थता व्यवस्था पर हावी है।’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सीजेआई का यह बयान लंबे समय तक याद रखा जाएगा और इससे मध्यस्थता प्रक्रिया में मजबूती आएगी। भारत में पर्याप्त संख्या में योग्य लोग हैं लेकिन मध्यस्थता व्यवस्था में उन्हें नहीं चुना जाता। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति इस देश की न्यायपालिका में बड़े बदलाव कर रहा है और वो हैं देश के मुख्य न्यायाधीश। दरअसल कार्यक्रम में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ भी मौजूद रहे और उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मध्यस्थता व्यवस्था में विविधता की कमी है और रिटायर्ड जज इस क्षेत्र पर दबदबा बनाए हुए हैं।

समाज को बदलने में शिक्षा सबसे प्रभावशाली तंत्र है : धनखड़

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सोमवार सुबह को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए गुवाहाटी पहुंचे। असम के राज्यपास और मुख्यमंत्री ने उनका हवाई अड्डे पर स्वागत किया। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पौधा भी लगाया।रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि समाज को बदलने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावशाली, स्थायी, परिवर्तनकारी तंत्र है। यह असमानताओं को दूर कर सकता है और असमानताओं का मुकाबला कर सकता है। यदि हमारे पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है, तो अन्य चीजें भी अपने स्थान पर आ जाएंगी। उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई शंका नहीं है कि शिक्षा ही समाज को बदल सकती है। समाज में बदलाव तब आएगा जब हम नए-नए खोज करेंगे। रिसर्च करेंगे। विकास करेंगे।

न कानून पढ़ा, न पद की मर्यादा रखी : धनकड़

उपराष्‍ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को बिना नाम लिए इशारों-इशारों में राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की क्‍लास लगाई. लक्ष्‍मणगढ़ में एक सभा को संबोधित रते हुए उन्‍होंने कहा कि राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री को मेरा राज्‍य में आना पसंद नहीं. वो मुझसे कहते हैं कि क्‍यों आते हो बार-बार. राष्‍ट्रपति ने जवाबी हमला करते हुए अपने अंदाज में कहा कि अगर संविधान को थोड़ा पड़ लेते तो यह सवाल नहीं पूछते. कुछ दिन पहले अशोक गहलोत ने एक जनसभा के दौरान उपराष्‍ट्रपति के प्रस्‍तावित दौरे पर कहा था कि बार-बार यहां आने का कोई तुक नहीं है.

उपराष्‍ट्रपति जगदीप धनकड़ ने इसपर कहा कि मैं पहले भी कई जगह गया हूं, पर कुछ लोगों ने कहा कि आप क्‍यों आते हो बार-बार. मैं थोड़ा अचंभित हो गया क्‍योंकि कहने वाले ने न तो संविधान को पड़ा, न कानून को पढ़ा और न अपने पद की मर्यादा रखी. कानून को अगर झांक लेते तो उन्‍हें पता लग जाता कि भारत के उपराष्‍ट्रपति की कोई भी यात्रा अचानक नहीं होती. बड़े सोच-विचार और मंथन चिंतन के बाद होती है. बस कह दिया कि आपका आना ठीक नहीं है.

धनखड़ का चिदंबरम पर निशाना, लोगों की अज्ञानता को राजनीतिक समानता में बदलना शर्मनाक

Dhankhar Takes Aim at Chidambaram

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने शनिवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम पर निशाना साधा है। धनखड़ ने कहा कि लोगों की अज्ञानता को राजनीतिक समानता में बदलना शर्मनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास केंद्रीय मंत्री रह चुके राज्यसभा के एक वरिष्ठ सदस्य के महिला आरक्षण कानून पर की गई टिप्पणी पर अपनी पीड़ा जताने के लिए शब्द नहीं हैं.

चिदंबरम का नाम लिए बिना उनकी टिप्पणी उन्होंने इसे विकृत मानसिकता करार दिया और कहा कि क्या आज लगाया गया पौधा तुरंत फल देना शुरू कर देगा या क्या किसी व्यक्ति को संस्थान में प्रवेश के तुरंत बाद डिग्री मिल जाएगी। लोगों की अज्ञानता को राजनीतिक समानता में बदलना शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को इससे लड़ना होगा क्योंकि उनकी सूचना तक पहुंच है।

गौरतलब है कि धनखड़ की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता के उस बयान पर आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि विधेयक भले ही कानून बन गया है लेकिन यह कई वर्षों तक असल में लागू नहीं हो पाएगा। यह सिर्फ सरकार द्वारा लाया गया, एक भ्रम है। पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा था कि सरकार ने दावा किया है कि महिला आरक्षण विधेयक कानून बन गया है। ऐसे कानून का क्या फायदा, जो वर्षों तक लागू ही नहीं किया जाएगा। निश्चित रूप से यह कानून 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं हो पाएगा। यह सिर्फ चिढ़ाने जैसा है। जैसे पानी के कटोरे में चांद की परछाई दिखती है। केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया यह कानून सिर्फ एक चुनावी जुमला है।

महिला आरक्षण से संबंधित 128वां संविधान संशोधन विधेयक 21 सितंबर को राज्यसभा में पारित किया गया था। बिल के पक्ष में 214 वोट पड़े, जबकि किसी ने भी बिल के खिलाफ वोट नहीं डाला था। इससे पहले 20 सितंबर को विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिल गई थी। लोकसभा ने भी इस बिल को दो तिहाई बहुमत के साथ पास किया था। इसके पक्ष में 454 और विरोध में दो वोट पड़े थे। एक दिन पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिल पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद से विधेयक कानून बन गया है।

‘একবছর হয়ে গেল বাণিজ্য সম্মেলনের তথ্য চেয়েও পাইনি’, রাজ্যকে আক্রমণ ধনখড়ের

নিউজ ডেস্ক: ফের ‘অপমানিত’ রাজ্যপাল জগদীপ ধনখড়। টুইটারে অভিযোগ করলেন গত বছরের ২৫ আগস্ট বেঙ্গল গ্লোবাল বিজনেস সামিটের (Bengal Global Business Summit) বিনিয়োগ সংক্রান্ত তথ্য চেয়েছিলেন মুখ্যমন্ত্রীর কাছে। এক বছর কেটে গেলেও রাজ্য এখনও তা পাঠায়নি। গত বছর রাজ্যে শিল্প সম্মেলনকে নিশানা করে টুইট করেন রাজ্যপাল। সেখানে তিনি জানান, মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের আমলে শুরু হওয়া বেঙ্গল গ্লোবাল বিজনেস সামিটের বিষয় অর্থ সচিবের কাছে জানতে চেয়েছি। অর্থসচিবের কাছ থেকে বিজনেস সামিট নিয়ে মোট ছটি বিষয় জানতে চেয়েছেন বলে জানিয়েছিলেন ধনকড়।

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বিষয়গুলি হল-২০১৬ থেকে এখনও পর্যন্ত প্রতি বছর কত টাকা খরচ হয়েছে? কোন কোন সংস্থার মাধ্যমে এই টাকা খরচ হয়েছে? সংস্থাটি কি সরাসরি টাকা পেয়েছে নাকি, FICCI,-র মাধ্যমে পেয়েছে? প্রতি বছর কতগুলি মউ সই হয়েছে, লগ্নি ও চাকরির প্রতিশ্রুতি দেওয়া হয়েছে? প্রতি বছর আসলে কত বিনিয়োগ এসেছে, ক’জন কাজ পেয়েছেন?

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https://twitter.com/jdhankhar1/status/1433363778842738695?s=20

এক বছর কেটে যাওয়ার পরেও সেই তথ্য না পাওয়ার অভিযোগে ক্ষোভে ফেটে পড়লেন রাজ্যপাল। টুইটারে লিখলেন, “২০২০ সালের ২৫ আগস্ট বেঙ্গল গ্লোবাল বিজনেস সামিটের ১২ কোটি টাকা বিনিয়োগের তথ্য চেয়েছিলাম। কিন্তু একবছর কেটে যাওয়ার পরে এখনও তা পাইনি।”

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ধনখড়ের এই অভিযোগের পরেই তাঁকেও আক্রমণ করেছে রাজ্যের শাসকদল তৃণমূল কংগ্রেসের নেতৃত্ব। পালটা টুইট করেছেন তৃণমূল কংগ্রেসের মুখপাত্র কুনাল ঘোষ। সোশ্যাল মিডিয়ায় তিনি লিখেছেন তিনি লিখেছেন, “আমি রাজ্যপাল জগদীপ ধনকড়কে পরামর্শ দিচ্ছি সুকুমার রায়ের পাগলা দাশু পড়ার। আশা করি উনি সেটা উপভোগ করতে পারবেন এবং ওনার ভালো লাগবে।””