प्रधानमंत्री मोदी 15 सितंबर को टाटानगर स्टेशन से 21,000 करोड़ की देंगे सौगात

जमशेदपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को जमशेदपुर आयेंगे और टाटानगर स्टेशन से 21 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। इसमें नयी रेल लाइन, वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन और अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। वे टाटा-पटना और टाटा-बालेश्वर समेत देश के अन्य हिस्सों के लिए पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखायेंगे। हाल ही में कैबिनेट द्वारा पारित चाकुलिया- बुड़ामारा नयी रेल लाइन के अलावा तीसरी लाइन की लंबित परियोजनाओं को भी प्रधानमंत्री हरी झंडी दिखायेंगे।

मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय और रेलवे मंत्रालय की संयुक्त टीम ने टाटानगर स्टेशन क्षेत्र का दौरा किया। टीम ने इलाके का ड्रोन से सर्वे किया। पीएम मोदी के मूवमेंट को लेकर क्षेत्र की तस्वीरें लीं। इस दौरान आरपीएफ और रेलवे पुलिस की टीम भी थी।

टाटानगर स्टेशन के आगे वाले हिस्से में स्टेज और करीब 500 लोगों के बैठने तथा वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। तैयारियों का जायजा लेने के लिए रेलवे के जीएम अनिल मिश्रा बुधवार को टाटानगर स्टेशन का दौरा करेंगे और तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए निर्देश देंगे।

हावड़ा-मुंबई मेल के 20 डिब्बे पटरी से उतरी, दो की मौत

 रांची : झारखंड में एक बार फिर रेल हादसा हुआ है। चक्रधरपुर के पास बड़ाबंबू में मंगलवार तड़के हावड़ा-मुंबई मेल (12810) के 20 डिब्बे एक मालगाड़ी से टकराकर पटरी से उतर गए। यह हादसा राजखरसावां और बड़ाबंबू स्टेशनों के बीच हुआ। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई ।

यह घटना राज्य में पिछले छह महीनों में हुई तीसरी बड़ी रेल दुर्घटना है, जिसने रेल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले 18 जनवरी 2024 को गम्हरिया रेलवे स्टेशन पर उत्कल एक्सप्रेस की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई थी।

वहीं 28 फ़रवरी 2024 को जामताड़ा और विद्यासागर स्टेशन के बीच भी ट्रेन हादसा हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी।

दरभंगा के शोभन में जल्द शुरू होगा एम्स का निर्माण

रांची :  दरभंगा में एम्स का निर्माण बहुत जल्द ही शुरू होने जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शोभन स्थित प्रस्तावित भूमि पर एम्स के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा शोभन-एकमी बाईपास के निकट प्रस्तावित भूमि का 18-19 मार्च 2024 को केंद्र सरकार की तकनीकी टीम ने सर्वेक्षण कर अपनी रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में इस जमीन को एम्स निर्माण के लिए उपयुक्त बताया गया है. इस बात की जानकारी जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य संजय झा ने सोशल मीडिया पर दी है।

संजय झा ने सोशल मीडिया पे इस मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी और मिथिलावासियों की ओर से आभार जताया है। साथ ही कहा है कि हमें विश्वास है कि दरभंगा में एम्स का निर्माण अब जल्द शुरू होगा।

शोभन में एम्स निर्माण को लेकर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को एक पत्र लीक कर जानकारी दी है। इस पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि शोभन बाइपास की जमीन एम्स के लिए उपयुक्त पायी गयी है। पत्र में मंत्रालय ने एम्स बनाने के लिए जमीन हस्तांतरण सहित वहां बिजली, सड़क सहित मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।

झारखंड में समय से पहले हो सकता है विधानसभा चुनाव

रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग एक्टिव हो चुका है। इसकी तैयारी और समीक्षा को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की 6 सदस्यीय टीम बुधवार को झारखंड पहुंची पतरातु के लेक रिजॉर्ट में समीक्षा बैठक हो रही है. बैठक दो सत्र में चल रहा है।

पहले सत्र की बैठक 10 जुलाई के देर रात तक चली थी। जिसमें चार राज्यों के चुनाव एक साथ कराने को लेकर संकेत मिले हैं. अगर ऐसा हुआ तो राज्य में समय से पहले यानी कि अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हो सकता है। बैठक में भारत निर्वाचन आयोग के साथ-साथ झारखंड निर्वाचन आयोग के अधिकारी शामिल हुए।

गुरुवार को 11 को दूसरे सत्र की बैठक सुबह 8:30 से शुरू हुई है. जो शाम 6:00 बजे तक चलेगी। इस समीक्षा बैठक में झारखंड के सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त शामिल हुए हैं. जिसमें विधानसभा चुनाव को लेकर मतदाता सूची के प्रकाशन पुनरीक्षण समेत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा हो रही है।

बैठक के बाद ही झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीख की अंतिम रूपरेखा तय होगी। बैठक में भारत निर्वाचन आयोग के वरीय उप-निर्वाचन आयुक्त धर्मेंद्र शर्मा और नीतेश व्यास प्रधान सचिव अरविंद आनंद झारखंड निर्वाचन आयोग के सीईओ के रवि कुमार शामिल हैं। भारत निर्वाचन आयोग की टीम के सदस्य जिला निर्वाचित पदाधिकारियों से उनके जिलों में चल रहे चुनाव की तैयारियों की जानकारी ले रहे हैं। साथ ही, उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दें रहे हैं।

झारखंड में विधानसभा चुनाव समय से पहले अक्तूबर में हो सकता है। झारखंड सरकार का कार्यकाल नवंबर तक है। इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया खत्म कर सरकार का गठन कर लिया जाना है। इस साल तीन अन्य राज्यों हरियाणा, महाराष्ट्र व जम्मू कश्मीर में भी चुनाव होने हैं। ऐसे में चारों राज्यों का चुनाव एक साथ कराने की तैयारी की जा रही है। झारखंड में 2014 और 2019 में हुए विधानसभा चुनाव पांच-पांच चरण में हुए थे। लेकिन इस भारत निर्वाचन आयोग झारखंड में दो से तीन चरणों में चुनाव संपन्न कराने की तैयारी में है। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग की टीम शांतिपूर्ण संपन्न हुए लोकसभा चुनाव को आधार मानकर कार्यवाही कर सकती है।

रांची स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच में गिरी युवती

रांची : रांची रेलवे स्टेशन पर एक युवती चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान रेलगाड़ी और प्लेटफॉर्म के बीच में गिर गई। युवती धनबाद-अलप्पुझा एक्सप्रेस ट्रेन जब चल पड़ी थी, तब उसमें चढ़ने की कोशिश कर रही थी. कुछ दूर तक दौड़ लगाने के बाद ट्रेन पर चढ़ने के लिए छलांग लगाई, लेकिन वह चढ़ नहीं पाई। 1 मिनट 5 सेकेंड के वीडियो में देखें, इसके बाद क्या हुआ।

देखते ही देखते वह चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच में गिर गई। वहां मौजूद आरपीएफ के जवानों ने तुरंत गार्ड को इसकी सूचना दी। गार्ड ने ड्राइवर के साथ समन्वय बनाते हुए ट्रेन को स्टेशन पर ही रुकवा दिया। इसके बाद ट्रेन से नीचे गिरी युवती को उसमें से बाहर निकाला गया।

घटना शुक्रवार शाम में करीब 4 बजे रांची रेलवे स्टेशन पर हुई। जैसे ही युवती ट्रेन के नीचे गिरी ऑपरेशन सेवा के तहत आरपीएफ के कर्मचारी तत्काल उसकी मदद के लिए पहुंच गए। आरपीएफ के कर्मचारियों ने ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच रेलवे लाइन के किनारे गिरी युवती को किसी तरह खींचकर बाहर निकाला।

आरपीएफ के कर्मचारियों ने तत्काल इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी. स्टेशन मास्टर की पहल पर रेलवे के डॉक्टरों ने युवती का प्राथमिक उपचार किया. डॉक्टरों ने कहा कि उसके पैरों में मामूली खरोंचें आईं हैं। किसी तरह की कोई गंभीर चोट नहीं है. चिंता की भी बात नहीं है. इस बीच युवती के पिता को इस घटना की सूचना दे दी गई।

प्राथमिक चिकित्सा के बाद युवती को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। युवती ने अपना नाम मोनिका कुमारी बताया है। उसकी उम्र 21 वर्ष है। उसके पिता का नाम बिरसा उरांव है। युवती रांची जिले के चान्हो थाना क्षेत्र के डाकघर ताला गांव की रहने वाली है। उसे 13351 धनबाद-अलप्पुझा एक्सप्रेस से तमिलनाडु जाना था।

उसने बताया कि उसे तमिलनाडु जाना था। स्टेशन पहुंचने में देरी हो गई। जब तक वह स्टेशन पर पहुंची, ट्रेन खुल चुकी थी। उसे लगा कि वह भागकर ट्रेन पकड़ लेगी। इसी कोशिश के दौरान वह ट्रेन से गिर गई और रेलवे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच में जा गिरी। अच्छा रहा  कि उसकी जान बच गई।

गिरिडीह से चार साइबर अपराधी गिरफ्तार, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर गर्भवती महिलाओं से करते थे ठगी

रांची : गिरिडीह से चार साइबर अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं. इनके पास से पुलिस ने चार पहिया वाहन समेत अन्य सामान बरामद किए हैं। साइबर अपराधी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर मातृत्व लाभ की राशि दिलाने के नाम पर गर्भवती महिलाओं से ठगी करते थे। प्रतिबिंब पोर्टल पर इसकी खबर मिलने के बाद छापेमारी की गयी और साइबर अपराधियों को दबोचा गया। गिरिडीह के एसपी दीपक कुमार शर्मा ने प्रेस वार्ता कर शुक्रवार को जानकारी दी।

गिरिडीह पुलिस ने जिन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, उनमें बेंगाबाद थाना क्षेत्र के रघाईडीह का सनफराज अंसारी, हीरोडीह थाना क्षेत्र के करमाटांड़ का कमरूद्धीन अंसारी, ताराटांड़ थाना क्षेत्र के जबरदाहा का रंजीत कुमार मंडल और प्रमेश्वर कुमार मंडल शामिल हैं. इन चारों साइबर अपराधियों के पास से पुलिस ने 6 मोबाइल, 8 सिमकार्ड, 1 पासबुक, 2 एटीएम कार्ड, एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर कार, 1 पैनकार्ड और 1 आधार कार्ड बरामद किया है।

गिरिडीह के एसपी ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से साइबर क्राइम की खबर मिली कि गिरिडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र में कुछ साइबर अपराधी आम लोगों से ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर साइबर डीएसपी आबिद खान के नेतृत्व में टीम गठित की गयी। इस टीम में पुनि रोहित कुमार महतो, पुअनि पुनित कुमार गौतम, सअनि गुंजन कुमार, संजय मुखियार, घनश्याम बिरुआ, मनोज कुमार शामिल किए गए. बेंगाबाद थाना क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर इन चारों शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।

साइबर अपराधियों से जब पूछताछ की गयी तो उन्होंने बताया कि अपने आप को बैंक अधिकारी बताकर मातृत्व लाभ की राशि दिलाने के नाम पर गर्भवती महिलाओं से ठगी करते थे। फर्जी सिमकार्ड और फर्जी बैंक खाता उपलब्ध कराने का भी काम करते थे। साइबर थाने में कांड सं-26/2024 दिनांक-27.06.2024 दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया गया है. गिरफ्तार साइबर अपराधियों में एक पुराना शातिर साइबर अपराधी शामिल है, जिसका नाम प्रमेश्वर कुमार मंडल है। इसके खिलाफ ताराटांड़ थाना कांड सं. 24/2023, दिनांक-13.08.2023, धारा-411/413/ 419/420/467/468/471/120बी/34 भादवि एवं 66बी/66सी/66डी आईटी एक्ट 2000 में प्राथमिकी अभियुक्त है. इसके अलावा दिल्ली के स्पेशल सेल थाना कांड सं-221/2022 दर्ज है. दिल्ली स्पेशल सेल थाना कांड सं-254/2022 दर्ज है।

एसपी दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ गिरिडीह पुलिस का अभियान जारी है। पिछले 9 माह में 242 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 587 मोबाइल, 770 सिमकार्ड, 268 एटीएम/पासबुक, 10 चेकबुक, 38 पैनकार्ड, 66 आधार कार्ड, 43 वाहन, 3 आईपैड, 4 लैपटॉप और 14,58,310 रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं।

झारखंड के राजमहल में मतदान बहिष्कार से प्रशासन में हड़कंप

रांची : वोट बहिष्कार की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया । सामान्य प्रेक्षक सौरव पहाड़ी, एसडीओ कपिल कुमार, एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी, एलआरडीसी विमल कुमार, बीडीओ उदय कुमार सिन्हा व तीनपहाड़ थाना प्रभारी मो शाहरुख मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता की। सभी ने ग्रामीणों से अपील की कि वे लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लें। अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें।

प्रशासनिक पदाधिकारियों की अपील का ग्रामीणों पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि हर बार चुनाव में राजमहल-तीनपहाड़ टीआर पैसेंजर ट्रेन के मुरली हॉल्ट पर ठहराव का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उसे भुला दिया जाता है. इस बार आश्वासन की घुट्टी से काम नहीं चलेगा. जब तक इस हॉल्ट पर ट्रेन का ठहराव नहीं होगा, गांव के लोग मतदान नहीं करेंगे।

उधर, बोकारो से अपने गांव मतदान के लिए पहुंचे एक सरकारी कर्मी गोपीनाथ मंडल ने अपने परिवार के साथ बूथ पर मतदान किया। सुबह 11 बजे तक बूथ नंबर 176 के 1036 में से मात्र 76 मतदाताओं ने वोट किया, जबकि बूथ नंबर 177 पर कुल 527 वोटर हैं, जिसमें से 14 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। प्रशासन की ओर से वोट बहिष्कार के दावे को खारिज किया जा रहा है, जबकि मतदान केंद्र पर कोई मतदाता नहीं जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन से जुड़े लोगों से जबरन मतदान करवाया जा रहा है. कोई आम मतदाता वोट नहीं डाल रहा।

बूथ संख्या 176 में एक राजनीतिक दल के बूथ एजेंट कमल कुमार ने कहा है कि प्रत्याशी के द्वारा उन्हें इलेक्शन एजेंट बनाया गया है। इलेक्शन एजेंट की मौजूदगी में मतदान शुरू होता है, लेकिन वोट बहिष्कार की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बगैर इलेक्शन एजेंट के ही मतदान करवा दिया। यह नियम के अनुकूल नहीं है. इसकी शिकायत वहां मौजूद चुनाव पदाधिकारी से की गई है।

इनायतपुर और हरचंदपुर के वैसे नए मतदाता, जो पहली बार मतदान करने वाले हैं, उनमें खासा उत्साह है। उनकी समस्या यह है कि उनके अभिभावकों ने मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है। ऐसे में वह अपने गांव के लोगों और अभिभावकों की इच्छा के विरुद्ध नहीं जा पा रहे हैं. यही वजह है कि पहली बार वोट डालने के उनके अरमान पर पानी फिर रहा है।

मुंबई में प्रवासी मजदूर की मौत, साथियों ने चंदा इकट्ठा कर शव भिजवाया बोकारो

रांची : बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के चतरोचट्टी थाना क्षेत्र की लोधी पंचायत के तिसरी गांव के प्रवासी मजदूर भुनेश्वर यादव (42 वर्ष) की मुंबई में संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गयी है। साथियों ने चंदा जमा कर उसके शव को बोकारो स्थित उसके परिवार वालों तक भिजवाया। मौत की खबर सुनते ही गांव में शोक की लहर है। शव सोमवार को उसके गांव पहुंचा। 

मृतक की पत्नी सविता देवी ने बताया कि उसके पति पहले गांव में ही स्कूल वैन चलाते थे। इससे बहुत कम आमदनी होती थी। घर-परिवार ठीक से नहीं चल पाता था। अच्छी आय और रोजगार की तलाश में 15 दिन पहले मुंबई के वर्ली गये हुए थे। अचानक पति की मौत की खबर सुनकर दंग रह गयी। उनके घर में पति ही एकमात्र कमाऊ सदस्य थे।

बताया जा रहा है कि मुंबई में प्रवासी मजदूर की मौत के बाद आनन-फानन में उनके साथ मंबई में रहने वाले साथियों ने पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराकर पार्थिव शरीर को साथियों को सौंप दिया। जिसके बाद मृतक के शव को घर भेजने का विचार किया गया। मृतक का परिवार काफी गरीब है। इस कारण मुंबई में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों ने चंदा इकट्ठा कर किसी तरह पार्थिव शरीर को फ्लाइट से रांची तक भिजवाया।

सामाजिक कार्यकर्ता लोधी व आजसू मीडिया प्रभारी (गोमिया) मनोज महतो ने घटना की जानकारी गोमिया विधायक डॉक्टर लम्बोदर महतो को दी। विधायक ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस का इंतजाम कर पार्थिव शरीर को घर तक भिजवाया। उन्होंने आश्वासन दिया है कि श्रम विभाग से मृतक परिवार को मुआवजा दिलाया जाएगा।

इस संबंध में गोमिया के बीडीओ महादेव कुमार ने कहा कि मृतक के आश्रित परिवार को पारिवारिक लाभ के अलावा विधवा पेंशन दिलायी जाएगी। श्रम विभाग से मिलने वाली राशि भी दिलायी जाएगी। पंचायत की मुखिया जुवैदा खातून के निर्देश पर मुखिया प्रतिनिधि राजू अंसारी ने पीड़ित परिवार से मिलकर सरकार से मिलने वाली सहायता राशि दिलाने और मदद का भरोसा दिया।

जनता से लूटे गए पैसे की पाई-पाई लौटानी होगी : मोदी

PM Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ओडिशा और झारखंड में कर छापे के दौरान पार्टी के एक सांसद धीरज प्रसाद साहू ठिकानों से करोड़ों रुपये नकद जब्त होने के बाद कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला। एक्स को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा देशवासी इन नोटों के ढेर को देखें और फिर इनके नेताओं के ईमानदारी के ‘भाषणों’ को सुनें…। जनता से जो लूटा है, उसकी पाई-पाई लौटानी पड़ेगी, यह मोदी की गारंटी है।लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए विपक्षी दलों पर निशाना साधना तेज कर दिया है। मोदी ने पिछले दिनों आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे अपने अहंकार, झूठ, निराशावाद और अज्ञानता की खुशफहमी में रह सकते हैं, लेकिन लोगों को उनके विभाजनकारी एजेंडे से सावधान रहना चाहिए क्योंकि 70 साल की पुरानी आदत इतनी आसानी से नहीं जा सकती। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही थी।

Jharkhand: গাছ নিয়ে ঝামেলা, দেড়শ জনের গণপ্রহারে মৃত এক

‘মব লিঞ্চিং’ বন্ধর সঙ্গে এখন সকলেই পরিচিত। একসময় যা ছিল আমেরিকার দুশ্চিন্তার কারণ, এখন তা ভারতের। ২০২২ সালে একদল লোকের হাতে নিহত হলেন এক ব্যক্তি। ঘটনাটি ঝাড়খণ্ডের (Jharkhand)।

গাছ কাটাকে কেন্দ্র করে ঘটনার সূত্রপাত। যার সঙ্গে জড়িয়ে ধর্মীয় বিশ্বাস। মঙ্গলবার বিকেলে ঝাড়খণ্ডের সিমডেগায় গণপিটুনির ফলে মৃত্যু হল সঞ্জু প্রধান নামের এক ব্যক্তির। ১০০-১৫০ মানুষ জড়ো হয়ে হামলা চালিয়েছেন বলে অভিযোগ। ঘটনাস্থলেই মৃত্যু হয় তাঁর। এখানেই শেষ নয়, এরপর মৃতদেহ আগুন ধরিয়ে দেয় ক্ষিপ্ত জনতা। জানা গিয়েছে, মুন্ডা সম্প্রদায়ের মানুষজন একটি গাছকে পুজো করতেন। সেটিকেই কেটে ফেলেছিলেন। এর আগেও বেশ কিছু গাছ তিনি কেটেছিলেন বলে অভিযোগ। সঞ্জুর বিরুদ্ধে ক্রমে পুঞ্জিভূত হচ্ছিল ক্ষোভ। এদিন তার বহিঃপ্রকাশ।

প্রশ্ন উঠতে পারে, ভারতে মব লিঞ্চিং-এর ঘটনা এতো বাড়ল কী করে? ২০১৪ সালে নরেন্দ্র মোদী প্রধানমন্ত্রী হওয়ার পর থেকে উল্লেখযোগ্যভাবে বেড়েছে এরূপ ঘটনা। বিজেপি ক্ষমতায় আসার কয়েক দিন পরেই খবরের শিরোনামে মব লিঞ্চিং-এর ঘটনা।

২০১৪ সালের ২ জুন উত্তেজিত জনতার হাতে প্রাণ হারিয়েছিলেন মহসিন শেখ। নমাজ পড়ে ফিরছিলেন। এমন সময় তাঁকে ঘিরে ধরেছিল হিন্দু রাষ্ট্র সেনার সদস্যরা। এরপর বেধড়ক মার। শেষ পর্যন্ত মৃত্যু। মহসিনের মৃত্যুর প্রায় পরপরই উঠে আসে দাদরিতে দাদরির মহম্মদ আখলাক, আলওয়ারের পেহলু খানের মৃত্যুর খবর।

ভারত যখন অতিমারির বিরুদ্ধে মোকাবিলা করছে, তখনও থামেনি বর্বরোচিত এই ঘটনা। গুরগাঁও-এর ২৫ বছর বয়সী আসিফ খান ও তাঁর দুই ভাই, মোরাদাবাদের মহম্মদ শাকির, ছত্তিসগড়ের ৪৫ বছর বয়সী এক ব্যক্তি-সহ মোট পাঁচজন ৩২ বছর বয়সী বিহারের বাসিন্দা মহম্মদ আলমগির-দের ঘটনা কিছু উদাহরণ মাত্র। উক্ত ব্যক্তিদের কেউ কেউ প্রাণে বেঁচে ফিরতে পেরেছিলেন, কেউ কেউ পারেননি। মৃত্যু হয়েছে একাধিকজনের। উল্লেখিত ঘটনামালা ছাড়াও ‘মব’-এর কীর্তির উদাহরণ রয়েছে বেশকিছু।

প্রধানমন্ত্রীর সামনে রাখা হয়েছিল মব লিঞ্চিং-এর প্রসঙ্গ। ২০১৯ সংসদে বলেছিলেন যে তিনি ব্যথিত। সেই সঙ্গে কাঠগড়ায় তুলেছিলেন বিরোধী রাজনৈতিক দলকেও।

এমন কুকর্ম বা খুনের ঘটনায় অভিযুক্তকে শাসক দলের কোনো নেতা মালা পরিয়ে সম্বর্ধনা দিচ্ছেন, এমন ছবিও ভারতবর্ষে আর বিরল নয়। ২০২১ সালে রাজ্য সভায় দাঁড়িয়ে এক মন্ত্রী জানিয়েছিলেন, উত্তেজিত জনতার হাতে ঠিক কতজন প্রাণ হারিয়েছেন এমন তথ্য তাঁদের কাছে নেই।

Jharkhand: দুই মাথাওয়ালা শিশুর জন্ম দেওয়া সদ্যোজাতকে হাসপাতালে রেখেই চম্পট মা-বাবার

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নিউজ ডেস্ক, রাঁচি: সদ্যোজাত সন্তানকে হাসপাতালে ফেলে রেখে চলে যাওয়া আমাদের দেশে নতুন কোনও ঘটনা নয়। এমনকী, বহু ক্ষেত্রে দেখা গিয়েছে, সদ্যোজাতকে (new born) রাস্তার পাশে ঝোপেঝাড়ে ফেলে দিয়ে চলে গিয়েছে মা-বাবা। বেশিরভাগ ক্ষেত্রেই কন্যা (girl child) সন্তানদের ভাগ্যে এমনটা ঘটে থাকে।

বহু ক্ষেত্রে দারিদ্র্যের (poverty) কারণেও মা-বাবা সদ্যোজাত সন্তানকে ফেলে দিয়ে চলে যায়। এবার ঝাড়খণ্ডের (jharkhand) রাজধানী রাঁচির (ranchi) অত্যন্ত পরিচিত হাসপাতাল রাজেন্দ্র ইনস্টিটিউট অফ মেডিক্যাল সায়েন্স বা রিমসে একটি সদ্যোজাত সন্তানকে ফেলে রেখে চলে গেল তার মা-বাবা। তবে, মেয়ে হয়েছে বলে যে ফেলে রেখে গিয়েছে তা নয়। জানা গিয়েছে শিশুটির দুটি মাথা। অর্থাৎ শিশুটি স্বাভাবিক নয়। সে কারণেই তাকে ফেলে রেখে চলে গিয়েছে তার বাবা-মা।

রিমসের চিকিৎসকরা জানিয়েছেন, শুক্রবার জন্মের পরেই ওই শিশুটিকে আইসিইউতে ভর্তি করা হয়। চিকিৎসকরা যখন ওই শিশুটির অস্বাভাবিকতা ও চিকিৎসা নিয়ে ব্যস্ত সেই সুযোগে পালিয়ে যায় তার মা-বাবা। এরপরই হাসপাতাল কর্তৃপক্ষ ওই শিশুটির মা বাবার খোঁজ শুরু করে। তাদের হাসপাতাল চত্বরের কোথাও পাওয়া যায়নি।

হাসপাতলে ভর্তি হওয়ার সময় তাঁরা যে ঠিকানা দিয়েছিল সেখানে খোঁজ শুরু হয়। কিন্তু দেখা যায় ঠিকানাটি ভুল।

অর্থাৎ কোনওভাবে ওই নবজাতকের মা-বাবা আগে থেকেই জানতেন যে, তাঁদের শিশুটি স্বাভাবিক নয়। সে কারণেই তাঁরা বাচ্চাকে ফেলে রেখে চলে যাওয়ার পরিকল্পনা করেছিলেন। পরিকল্পনা মত প্রসবের কিছুক্ষণ পরেই ওই শিশুটির মা এবং বাবা হাসপাতাল থেকে চম্পট দেয়।

হতভাগ্য এই শিশুটিকে তাই বাঁচিয়ে তোলার দায়িত্ব নিয়েছেন রিমসের চিকিৎসক ও নার্সরা। খবর দেওয়া হয়েছে শিশু কল্যাণ কমিটিকেও। এছাড়াও একটি স্বেচ্ছাসেবী সংস্থা ওই শিশুটির চিকিৎসা ও অন্য যে কোনও ধরনের সাহায্যের জন্য হাত বাড়িয়ে দিয়েছে। অস্বাভাবিক ওই শিশুটির চিকিৎসার জন্য তাকে নিউরোসার্জারি বিভাগের দায়িত্বে রাখা হয়েছে।

Jharkhand: মাওবাদীদের বিস্ফোরণে উড়ল রেললাইন

Jharkhand: Maoists blew up the railway line

নিউজ ডেস্ক: রেললাইনে বিস্ফোরণের (blast) ফলে লাইনচ্যুত হল একটি ডিজেলচালিত ইঞ্জিন (engine)। তবে এই বিস্ফোরণে হতাহত হওয়ার কোনও খবর নেই। মাওবাদীরা এই বিস্ফোরণ ঘটিয়েছে বলে প্রাথমিক তদন্তে পুলিশের অনুমান। শনিবার ভোরে ঝাড়খন্ডের ধানবাদ (dhanbad) ডিভিশনে এই বিস্ফোরণ ঘটে। প্রবল বিস্ফোরণের কারণে রেললাইনের বেশ কিছুটা অংশ উড়ে যায়।

পূর্ব রেলের পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে, গারওয়া রোড (garwaya road) ও বারকানা (barkana) সেকশনের মাঝে এই বিস্ফোরণ ঘটেছে। গত পাঁচ দিনের মধ্যে এই নিয়ে বিহার ও সংলগ্ন এলাকায় দুবার মাওবাদী হামলা হল। এর আগে গত রবিবার বিহারের গয়া (gaya) জেলায় একটি পরিবারের ৪ জনকে ফাঁসি দিয়ে খুন করেছিল মাওবাদীরা। এমনকী, ওই পরিবারটির বাড়ি বিস্ফোরণে উড়িয়ে দিয়েছিল মাওবাদীরা।

Jharkhand: Maoists blew up the railway line

এখানেই শেষ নয়, কী কারণে ওই পরিবারটির সব সদস্যকে এভাবে খুন করা হয়েছিল তাও বাড়ির দেওয়ালে লিখে রেখে গিয়েছিল মাওবাদীরা। তারা জানিয়েছিল পুলিশের চরবৃত্তি করার জন্যই এই পরিবারটিকে সাজা দেওয়া হল। যদিও পুলিশের দাবি ছিল, ওই পরিবারটি কখনওই পুলিশের হয়ে কাজ করতো না। যে চার মাওবাদী খতম হয়েছিল তারা পুলিশের সঙ্গে সংঘর্ষে মারা পড়েছিল। ওই ঘটনার সঙ্গে মৃত পরিবারের কোনও সংযোগ ছিল না। এরই মধ্যে ১৩ নভেম্বর মহারাষ্ট্রের পুণেতে পুলিশ ও নিরাপত্তা বাহিনীর যৌথ অভিযানে ২৬ জন মাওবাদীর মৃত্যু হয়।

উল্লেখ্য, শনিবার ভোরের এই বিস্ফোরণের ঘটনায় একটি লোকোমোটিভ ইঞ্জিন লাইনচ্যুত হলেও বড় মাপের কোনও দুর্ঘটনা ঘটেনি। স্থানীয় রেল পুলিশ জানিয়েছে, ওই লাইন দিয়ে এদিন সকালে বেশ কয়েকটি দূরপাল্লার ট্রেনের যাওয়ার কথা ছিল। যদি দূরপাল্লার কোনও ট্রেন এভাবে লাইনচ্যুত হত তবে নিশ্চিতভাবেই অনেকেই হতাহত হতেন। ইতিমধ্যেই রেল পুলিশ বিস্ফোরণস্থল ও সংলগ্ন এলাকায় তল্লাশি চালাচ্ছে। কোথাও কোনও মাওবাদী লুকিয়ে আছে কিনা তা জানতেই তল্লাশি অভিযান চলছে।

তবে এদিন বিস্ফোরণের খবর প্রকাশ্যে আসতেই সাধারণ মানুষের মধ্যে প্রবল আতঙ্ক ছড়িয়েছে। বিস্ফোরণের কারণে রেললাইন উড়ে যাওয়ায় ওই লাইন দিয়ে চলা বেশকিছু ট্রেনকে ঘুরপথে চালানো হয়। বেশকিছু ট্রেন দীর্ঘক্ষণ আটকে পড়ে। দুপুরের পর পরিস্থিতি কিছুটা স্বাভাবিক হলে শুরু হয় রেল চলাচল।

জামশেদপুরে সস্ত্রীক গ্রেফতার হলেন শীর্ষ মাওনেতা কিষাণদা

Prashanth Bose

নিউজ ডেস্ক: শেষ পর্যন্ত ঝাড়খণ্ড পুলিশের হাতে গ্রেফতার হলেন সিপিআই মাওবাদী সংগঠনের শীর্ষ স্থানীয় নেতা প্রশান্ত বসু (Prashanth Bose) ওরফে কিষানদা (kishan da)। এই শীর্ষ মাও নেতার সঙ্গেই গ্রেফতার করা হয়েছে তাঁর স্ত্রী শীলা মারান্ডিকেও (shila marandi)। জানা গিয়েছে, চিকিৎসার জন্য এই মাওবাদী নেতা শুক্রবার জামশেদপুরে (jamshedpur) এসেছিলেন। সেখানেই একটি বাড়ি থেকে তাঁকে গ্রেফতার করা হয়।

আদতে কলকাতার যাদবপুরের (yadavpur) বাসিন্দা কিষানদা। যদিও পরে তিনি অন্ধ্রপ্রদেশের হায়দরাবাদে (hyderabad) থাকতে শুরু করেন। মাওবাদী ও সিপিআইএম-এর সংযুক্তিকরণের সময় তিনি ছিলেন সংগঠনের মিলিটারি কমিশনের প্রধান। একইসঙ্গে পূর্বাঞ্চলীয় আঞ্চলিক কমিটির সম্পাদক ছিলেন তিনি। কিষানদা সম্পর্কে কোনও খবর দিতে পারলে বা তাঁকে ধরিয়ে দিতে পারলে দু’কোটি টাকা পর্যন্ত পুরস্কার ঘোষণা করা হয়েছিল। পাশাপাশি ঝাড়খণ্ড (jharkhand goverment) সরকারের পক্ষ থেকেও কিষানদা সম্পর্কিত কোনও খবর বা তথ্য দিতে পারলে এক কোটি টাকা পুরস্কার দেওয়ার কথা ঘোষণা করা হয়েছিল।

একাধিক ভাষায় কথা বলার অসাধারণ ক্ষমতা ছিল তাঁর। খুব সহজেই তিনি যুবসমাজের মন জয় করে ফেলতেন। তাই কিষানদার বিশেষ দায়িত্ব ছিল নতুন যুবকদের সংগঠনের কাজে নিয়ে আসা। একসময় লালগড়ে (lalgarh) মাওবাদী নেতা কিষানজির সঙ্গেও তিনি একাধিকবার বৈঠক করেছেন।

শুক্রবার জামশেদপুরের চন্ডেলের কাছে একটি বাড়ি থেকে সস্ত্রীক এই শীর্ষ মাও নেতাকে গ্রেফতার করেছে ঝাড়খণ্ড পুলিশ। কিষানদাকে ধরার ব্যাপারে ঝাড়খণ্ড পুলিশকে সবধরনের সহযোগিতা করেছে অন্ধপ্রদেশের স্পেশাল ইন্টেলিজেন্স ব্যুরো।

প্রশান্ত বসুর গ্রেফতারে পশ্চিমবঙ্গ, বিহার, ঝাড়খণ্ড, ওড়িশা, অন্ধপ্রদেশের মতো বিভিন্ন রাজ্যে মাওবাদী সংগঠনের ক্ষেত্রে বড় ধাক্কা বলেই মনে করা হচ্ছে।

কিষানদার স্ত্রী শীলা ছিলেন সিপিআই মাওবাদী সংগঠনের কেন্দ্রীয় কমিটির একমাত্র মহিলা সদস্য। শেষ পাঁচ বছর ধরে তিনি সংগঠনের মহিলা শাখার দায়িত্ব সামলাতেন। এর আগে ২০০৬ সালে একবার রৌরকেল্লা থেকে শীলাকে গ্রেফতার করা হয়েছিল। যদিও তিনি পরে জামিনে মুক্তি পান। শীলাও সংগঠনের কর্মীদের কাছে একাধিক নামে পরিচিত ছিলেন। অনেকেই শীলাকে বুধানি (budhani), কেউ বা হেমা (hema) নামে চিনতেন। তবে বারবার নাম বদলেও শেষ পর্যন্ত তাঁরা কিছুই করতে পারলেন না।

৭৫ বছর বয়সি কিষানদার আসল নাম প্রশান্ত বসু (prasanta basu) হলেও তিনি একাধিক নামে পরিচিত ছিলেন। অনেকেই কিষানদাকে কাজল (kajal), মহেশ (mahesh), নির্ভয় (nirbhay) মুখোপাধ্যায় নামেও চিনতেন। গোটা উত্তর-পূর্ব ভারতের মাওবাদী সংগঠনের কার্যকলাপ পর্যবেক্ষণের দায়িত্বে ছিলেন তিনি। বয়সজনিত কারণে সম্প্রতি বিভিন্ন রোগে ভুগছিলেন এই মাও নেতা। যে কারণে সম্প্রতি তিনি সংগঠনের সক্রিয় কার্যকলাপের সঙ্গে যুক্ত না থাকলেও ঝাড়খণ্ডের সারান্ডা (saranda) জঙ্গল থেকে সংগঠনের যাবতীয় কাজ পরিচালনা করতেন। শারীরিক সমস্যা বেড়ে চলায় সম্প্রতি তিনি গেরিলা জোন ছেড়ে বেরিয়ে এসেছিলেন লোকালয়ে। চিকিৎসা করানোর জন্যই তিনি জামশেদপুরে এসেছিলেন বলে পুলিশ জানিয়েছে।