संसद में हिंदुओं को लेकर राहुल गांधी का विवादित बयान, बीच में खड़े हो गए मोदी

नई दिल्ली: लोकसभा में आज सोमवार(01 जुलाई) को भारी हंगामा देखने को मिला है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हिंदू समाज को लेकर विवादित टिप्पणी की है। इसके बाद जिससे पीएम मोदी को उठकर खड़ा होना पड़ गया। राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष को कह दिया कि वे हिंदू है ही नहीं और उन्होंने हिंदू धर्म को हिंसा, नफरत से जोड़ दिया। राहुल के बयान पर खुद पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने ही राहुल गांधी को फटकार लगाई है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा- “हमारे सभी महापुरुषों ने अहिंसा और डर खत्म करने की बात की है…लेकिन, जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं वे केवल हिंसा, नफरत, असत्य की बात करते हैं…आप हिंदू हैं ही नहीं।

पीएम मोदी ने राहुल को दिया जवाबराहुल गांधी की बयानबाजी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए और राहुल गांधा को फटकार लगाई। पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि पूरे हिंदू समुदाय को हिंसक कहना बहुत गंभीर मामला है। पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान ने मुझे सिखाया है कि मुझे विपक्ष के नेता को गंभीरता से लेना चाहिए।

राहुल गांधी की टिप्पणी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जो लोग गर्व से हिन्दू कहते हैं क्या वो हिंसक हैं। विपक्ष के नेता को माफी मांगनी चाहिए। राहुल गांधी ने हिन्दुओं को हिंसक कहा है। इसके बाद सदन में राहुल गांधी का भाषण और हंगामा जारी रहा। प्रधानमंत्री को दोबारा अपनी सीट से खड़ा होना पड़ा और उन्होंने कहा कि मुझे संविधान ने सिखाया है कि विपक्ष के नेता को गंभीरता से लेना चाहिए।

NDA संसदीय दल की बैठक 7 जून की सुबह 11 बजे

नई दिल्ली : केंद्र में सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसी क्रम में सात जून को एनडीए संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना जाएगा। संसदीय दल की बैठक सुबह 11 बजे संसद के सेंट्रल हाॅल में आयोजित की जाएगी। अबतक प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ या फिर नौ जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं।

दिल्ली में पीएम आवास पर बुधवार शाम एनडीए के घटक दलों की बैठक हुई। इस बैठक में जेडीयू नेता नीतीश कुमार, ललन सिंह, टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू और हम के नेता जीतन राम मांझी भी उपस्थित थे और सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन दिया और जल्दी सरकार बनाने की बात कही।

ज्ञात हो कि एनडीए गठबंधन को केंद्र में बहुमत मिला है. लोकसभा चुनाव में एनडीए को 292 सीटों पर जीत हासिल हुई है. वहीं इंडिया गठबंधन को 234 सीटें मिली हैं. चूंकि बीजेपी को अकेले बहुमत प्राप्त नहीं है, इसलिए सरकार गठन में जेडीयू और टीडीपी की भूमिका अहम हो गई है. सूत्रों के हवाले से इस तरह की जानकारी सामने आ रही है कि नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू अभी दिल्ली में ही रहेंगे और सरकार गठन की प्रक्रिया को पूरा करेंगे.

व्यवधानों को हथियार बनाने की राजनीतिक रणनीति गलत : धनखड़

RS Chairman Jagdeep Dhankhar

संसद का शीतकालीन सत्र तय समय से एक दिन पहले गुरुवार को ही खत्म कर दिया गया। इस दौरान राज्यसभा में 65 घंटे काम हुआ। राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने अफसोस जताते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से कार्यवाही बाधित करने के कारण लगभग 22 घंटे बर्बाद हुए। साथ ही निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक रणनीति के रूप में व्यवधानों को हथियार बनाना सही नहीं है।उन्होंने कहा कि हालांकि फिर भी राज्यसभा सांसदों ने बहस के साथ महत्वपूर्ण विधायी गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। शीतकालीन सत्र में कुल 17 विधेयक पारित किए गए। जहां देश के आपराधिक कानून में आमूल-चूल बदलाव लाने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य विधेयक पारित हुए। वहीं, दूरसंचार क्षेत्र के ढांचे में बदलाव लाने वाले दूरसंचार विधेयक और मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले विधेयक भी चर्चित रहे। इसके अलावा, डाकघर विधेयक, प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन विधेयक भी पारित किए गए। उन्होंने कहा, ‘इस शीतकालीन सत्र में 14 बैठकें हुईं। इस दौरान सत्ता पक्ष व विपक्ष के 2,300 से अधिक सवाल रखे गए। इसके अलावा इसी अवधि में 4300 से अधिक कागजात सामने रखे गए। हालांकि, मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा है कि कार्यवाही बाधित करने के कारण लगभग 22 घंटे बर्बाद हो गए। इसक असर हमारी उत्पादकता पर पड़ा, जो 79 फीसदी रही। व्यवधान और हंगामे को राजनीतिक रणनीति के रूप में हथियार बनाना हमारे संवैधानिक दायित्व से मेल नहीं खाता है।

143 सांसदों के निलंबन को लेकर कांग्रेस का हल्लाबोल

इस सप्ताह 143 सांसदों के निलंबन के विरोध में इंडिया ब्लॉक के विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को दिल्ली में संसद भवन से विजय चौक तक मार्च निकाला। लोकसभा से 97 और राज्यसभा से 46 सहित निलंबित सांसदों पर 13 दिसंबर को हुए अभूतपूर्व सुरक्षा उल्लंघन पर बहस की मांग के बीच कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था। इस घटना के दौरान, दो व्यक्ति लोकसभा कक्ष में कूद गए। दर्शक दीर्घा से गैस कनस्तर छोड़े, जिससे संसदीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गईं।निलंबन के जवाब में इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना की घोषणा की है, जिसके बाद अतिरिक्त राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। सांसदों को निलंबित करने की सरकार की कार्रवाई दो चरणों में हुई, शुरुआत में 78 सदस्यों को निलंबित किया गया, उसके बाद अन्य 49 को निलंबित किया गया, 14 दिसंबर से अब तक कुल 141 सदस्यों को निलंबित किया गया है।कांग्रेस प्रमुख और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे पर बात नहीं करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने सत्ता पक्ष के सांसदों पर आरोप लगाया कि जब भी विपक्षी सांसद इस मामले को सदन में चर्चा के लिए लाने की कोशिश करते हैं तो वे व्यवधान उत्पन्न करते हैं। विपक्षी सांसदों के संसद से विजय चौक तक मार्च करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह सदन के विशेषाधिकार के हनन का मामला है

विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया डेरेक का मामला

derek o'brien

संसद की सुरक्षा में चूक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करते हुए वेल तक पहुंचने की कोशिश करना और निलंबन के बाद भी सदन से बाहर न जाना टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को भारी पड़ गया। सभापति धनखड़ ने इसके लिए उन्हें निलंबित कर दिया और उनका मामला विशेषाधिकार समिति के पास जांच के लिए भेज दिया। इस दौरान धनखड़ ने कहा कि डेरेक का सदन में बने रहना आदेश का गंभीर उल्लंघन और जानबूझकर की गई अवहेलना है। वहीं, अपने निलंबन को लेकर टीएमसी सांसद सहित सभी निलंबित सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया है। कुल 15 सांसदों को शीतकालीन सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित या। इसमें 14 लोकसभा से और 1 राज्यसभा से हैं। हालांकि बाद में लोकसभा से निलंबित सांसदों में एक का निलंबन वापस ले लिया गया। धनखड़ ने कहा कहा कि ओ’ब्रायन का सदन में बने रहना आदेश का गंभीर उल्लंघन और जानबूझकर की गई अवहेलना है। इसके बाद, सदन के नेता पीयूष गोयल ने इस मुद्दे को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने के लिए नियम 192 के तहत एक प्रस्ताव पेश किया। जिसे सभापति ने तुरंत स्वीकार कर लिया और ध्वनि मत से पारित कर दिया। इसके बाद सभापति धनखड़ ने डेरेक ओ ब्रायन के मामले को जांच करने के लिए राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजे जाने की घोषणा की। उन्होंने समिति को रिपोर्ट के लिए तीन महीने का वक्त भी दिया है। बता दें कि सदन से निलंबन और प्रस्ताव पारित करने के बाद भी ओ’ब्रायन ने सदन नहीं छोड़ा तब सभापति ने उनसे दोबारा आग्रह किया। लेकिन जब वह न माने तो सदन को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

संसद से विपक्ष के 15 सांसद निलंबित

RS Chairman Jagdeep Dhankhar

संसद के शीत सत्र के नौवें दिन संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर विपक्ष की तरफ से हंगामे के आसार हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले सांसदों के साथ बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, अनुराग ठाकुर समेत कई अन्य मंत्री और सांसद मौजूद रहे। राज्यसभा में गलत बर्ताव के लिए टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है। दरअसल संसद की सुरक्षा में चूक के मामले पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया, इसी दौरान टीएमसी सांसद के बर्ताव के लिए सभापति ने उन्हें निलंबित कर दिया। डेरेक ओ ब्रायन को पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया है। दरअसल ब्रायन संसद में सुरक्षा चूक के मसले पर नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए थे, जिस पर सभापति ने नाराजगी जताई और टीएमसी सांसद को निलंबित कर दिया। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने 13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा में हुई चूक पर कहा कल की घटना को पूरी देश ने देखा। हर दिन सुरक्षा, सत्ता और विकास पर बातें की जा रही हैं लेकिन देश के अंदर ही सुरक्षा खोखली है। क्या पीएम मोदी को इससे कोई फर्क पड़ता है? लोग कहेंगे कि ‘मोदी मतलब मुश्किल है’।

अमीत ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो बिल संसद में पेश किया

Home Minister Amit Shah

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। आज दूसरा दिन था। लोकसभा में आज जम्मू कश्मीर से जुड़े दो विधेयकों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया। उन्होंने कहा कि एक देश में दो प्रधानमंत्री, दो संविधान और दो झंडा कैसे हो सकते हैं? वहीं डीएम के सांसद सेंथिल कुमार के बयान की वजह से भी हंगामा मच गया जिसमें उन्होंने हिंदी भाषी राज्यों को गौमूत्र राज्य कहा। अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि देश में एक ध्वज, एक प्रधानमंत्री, एक संविधान की अवधारणा कोई राजनीतिक नारा नहीं है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस सिद्धांत में दृढ़ता से विश्वास करती है तथा उसने जम्मू कश्मीर में आखिरकार यह कर दिखाया है।केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जम्मू कश्मीर में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय की गयी ‘गलतियों’ को सुधारा है और पिछले चार वर्ष में केंद्रशासित प्रदेश में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

Derek O’Brien: তৃণমূলের বিপুল জয়ের দিন সাসপেন্ড সাংসদ ডেরেক

derek o'brien

News Desk: বিশৃঙ্খল আচরণ ও সংসদের রুলবুক ছোড়ার অভিযোগে সাসপেন্ড করা হল তৃণমূল কংগ্রেস সাংসদ ডেরেক ও’ব্রায়েনকে (Derek O’Brien)। তিনি যখন সাসপেন্ড হলেন তখন তাঁর দল কলকাতা পুর নিগম ভোটে বিপুল জয় পেয়েছে।

মঙ্গলবার রাজ্যসভায় নির্বাচনী আইনি সংশোধনী বিল, ২০২১ পাশ করানোর বিপক্ষে সরব হয় বিরোধীরা। তৃণমূল সাংসদ এই বিল ও ১২ জন সাংসদকে সাসপেন্ড করার প্রতিবাদে রাজ্যসভা থেকে ওয়াকআউট করার সময় রুলবুকটি সাংবাদিকদের টেবিলের দিকে ছুঁড়ে ফেলেন। তাঁর এই আচরণের জন্যই ফের একবার সাসপেন্ড করা হল তাঁকে।

শীতকালীন অধিবেশনের বাকি দিনগুলির জন্য রাজ্যসভা থেকে সাসপেন্ড করা হয়েছে ডেরেক ওব্রায়েন কে।
তৃণমূল সাংসদ ডেরেক ও’ব্রায়েন টুইটে লিখেছেন, শেষবার যখন রাজ্যসভা থেকে সাসপেন্ড হয়েছিলাম তখন কেন্দ্রীয় সরকার কৃষি আইন পাশ করিয়েছিল। তারপর কি হয়েছিল তা আমাদের সকলেরই জানা। আজ নির্বাচনী আইনি সংশোধনী বিল, ২০২১ একইভাবে পাশ করানো হল। আশা করি এই বিলটিও দ্রুত বাতিল করা হবে।’

উল্লেখ্য, সোমবার লোকসভায় নির্বাচনী আইনি সংশোধনী বিল, ২০২১ পাশ করিয়েছে মোদী সরকার। মঙ্গলবার রাজ্যসভায় এই বিল পাশ করায় কেন্দ্রীয় সরকার। এই আইন অনুসারে ভোটার কার্ডের সঙ্গে আধার কার্ডের সংযুক্তিকরণ আইনত হবে। তবে বিরোধীদের দাবি, এই আইনের মাধ্যমে সাধারণ মানুষের ব্যক্তি স্বাধীনতায় হস্তক্ষেপ করার চেষ্টা করছে কেন্দ্র।

Privatization: একাধিক রাষ্ট্রায়ত্ত সংস্থা বেসরকারি হাতে তুলে দেওয়ার পরিকল্পনা ফাঁস সংসদে

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নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: ২৯ নভেম্বর সংসদের শীতকালীন অধিবেশন (winter season) শুরু হয়েছে। অধিবেশনের শুরুতেই কৃষক ও বিরোধী রাজনৈতিক দলের চাপের কাছে মাথা নুইয়ে তিন কৃষি আইন (farm law) প্রত্যাহার করে নিয়েছে মোদী সরকার (modi government) । কৃষি আইন প্রত্যাহারের পর সংসদের কাজকর্ম স্বাভাবিক ভাবেই চলছে। বিরোধীরা বিশেষ করে তৃণমূল কংগ্রেসের (trinamul congress) পক্ষ থেকে প্রতিদিনই মোদী সরকারের কাছে রাখা হচ্ছে একাধিক প্রশ্ন। সেই প্রশ্নের উত্তর দিতে গিয়েই বেরিয়ে আসছে নরেন্দ্র মোদী সরকারের অন্তঃসারশূন্যতা। বেশিরভাগ প্রশ্নের উত্তরেই দেখা যাচ্ছে মোদী সরকার দৈনন্দিন কার্যকলাপ পরিচালনার ক্ষেত্রও সম্পূর্ণ ব্যর্থ।

সোমবার কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রকের কাছে তৃণমূল কংগ্রেস সাংসদ মালা রায় জানতে চান, পরবর্তী তিন বছরে সরকার কোন কোন ব্যাংক, আর্থিক প্রতিষ্ঠান এবং রাষ্ট্রায়ত্ত সংস্থা বেসরকারিকরণ (Privatization) বা বিলগ্নিকরণের সিদ্ধান্ত নিয়েছে? এই বিলগ্নিকরণ থেকে সরকারের কোষাগারে কী পরিমাণ টাকা আসবে?

তৃণমূল সাংসদের এই প্রশ্নের উত্তরে অর্থ মন্ত্রকের প্রতিমন্ত্রী ভগৎ কৃষ্ণরাও কারাড বলেন, ২০১৬ সাল থেকে এখনও পর্যন্ত ৩৬ টি রাষ্ট্রায়ত্ত বা তাদের অধীনস্থ সংস্থায় কৌশলগত বিলগ্নীকরণের সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছে। এই সমস্ত সমস্ত সংস্থা বিলগ্নিকরণ করে সরকারের ঘরে কী পরিমাণ অর্থ আসবে সেটা বাজার এবং নিলামে অংশ গ্রহণকারীদের দেওয়া দরের উপর নির্ভর করছে।

সরকার যে সমস্ত ব্যাংক বা রাষ্ট্রায়ত্ত সংস্থা বিলগ্নিকরণের সিদ্ধান্ত নিয়েছে তার নামগুলিও জানিয়ে দিয়েছেন অর্থ মন্ত্রকের প্রতিমন্ত্রী কারাড।

মন্ত্রীর দেওয়া তথ্য অনুযায়ী যে সমস্ত সংস্থার বিলগ্নিকরণের প্রক্রিয়া চলছে তার মধ্যে উল্লেখযোগ্য কয়েকটি সংস্থা হল ব্রিজ অ্যান্ড রুফ কোম্পানি লিমিটেড, সেন্ট্রাল ইলেকট্রনিক্স লিমিটেড, শিপিং কর্পোরেশন অফ ইন্ডিয়া, কন্টেইনার কর্পোরেশন অফ ইন্ডিয়া, নীলাচল ইস্পাত নিগম লিমিটেড, রাষ্ট্রীয় ইস্পাত নিগম লিমিটেড, পবন হংস লিমিটেড, এয়ার ইন্ডিয়া এবং তার পাঁচটি অধীনস্থ সংস্থা, আইডিবিআই ব্যাঙ্ক প্রভৃতি। যার মধ্যে এয়ার ইন্ডিয়ার বিলগ্নিকরণের প্রক্রিয়া ইতিমধ্যে শেষ হয়েছে।

কয়েকটি সংস্থার বিলগ্নিকরণ নিয়ে বিভিন্ন মন্ত্রকে আলোচনা শেষ পর্যায়ে রয়েছে। যার মধ্যে রয়েছে ট্যুরিজম ডেভলপমেন্ট কর্পোরেশন লিমিটেড, হিন্দুস্তান অ্যান্টিবায়োটিক লিমিটেড, বেঙ্গল কেমিক্যালস অ্যান্ড ফার্মাকিউটিক্যালস লিমিটেড। দুটি ক্ষেত্রে মামলার জন্য বিলগ্নিকরণের প্রক্রিয়া আটকে আছে। এই দুটি সংস্থা হল হিন্দুস্থান নিউজপ্রিন্ট লিমিটেড এবং কর্নাটক অ্যান্টিবায়োটিক ফার্মাসিউটিক্যালস লিমিটেড।

নানাবিধ কারণে কয়েকটি সংস্থার বিলগ্নিকরণের বিষয়টি আটকে রয়েছে। এই সংস্থাগুলির মধ্যে রয়েছে স্কুটার ইন্ডিয়া লিমিটেড, ভারত পাম্প অ্যান্ড কম্প্রেসর লিমিটেড, সিমেন্ট কর্পোরেশন অফ ইন্ডিয়া প্রভৃতি।

পাশাপাশি যে সমস্ত সংস্থার বিলগ্নিকরণ প্রায় চূড়ান্ত হয়ে গিয়েছে সেগুলিও নামও জানিয়েছেন মন্ত্রী। যার মধ্যে রয়েছে হিন্দুস্থান পেট্রোলিয়াম কর্পোরেশন লিমিটেড, রুরাল ইলেকট্রনিক্স কর্পোরেশন লিমিটেড, এইচএসসিসি লিমিটেড, কামরাঝাড় পোর্ট লিমিটেড প্রভৃতি।

Nagaland: নাগাল্যান্ড ইস্যুতে আজ শাহের সঙ্গে তৃণমূলের সাক্ষাৎ

Trinamool delegation cancels visit to Nagaland

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: নাগাল্যান্ডের (Nagaland) মন জেলার ওটিং গ্রামে জঙ্গি সন্দেহে অসম রাইফেলস গুলি চালায়। ভুলবশত এই হামলা হয়েছে বলে দাবি করে কেন্দ্র সরকার। এই পরিস্থিতিতে আজ অমিত শাহর সঙ্গে দেখা করবে তৃণমূলের প্রতিনিধিদল। বিকেল পৌনে ৪টে নাগাদ সংসদ ভবনের ৮ নম্বর ঘরে কেন্দ্রীয় স্বরাষ্ট্রমন্ত্রীর সঙ্গে সাক্ষাৎ করার কথা রয়েছে। 

মূলত, নাগাল্যান্ডে আধা সেনার গুলিতে গ্রামবাসীদের মৃত্যুর ঘটনার পর সরব হন তৃণমূল নেত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। ঘটনার তীব্র নিন্দা করেন তিনি। পরের দিনই নাগাল্যান্ড যাওয়ার কথা ছিল তৃণমূলের প্রতিনিধিদলের। কিন্তু নাগাল্যান্ডে ১৪৪ ধারা জারি থাকায় সেই কর্মসূচি বাতিল হয়। এবার নাগাল্যান্ড নিয়ে অমিত শাহকে স্মারকলিপি দেবে তৃণমূলের প্রতিনিধিদল। এদিন অমিত শাহের (amit shah) সঙ্গে দেখা করবেন তৃণমূলের ৮ সদস্যের প্রতিনিধিদল। এর আগে, সাক্ষাতের সময় চেয়ে অমিত শাহকে (Amit Shah) চিঠি দিয়েছিল তৃণমূল কংগ্রেস (TMC)। 

অন্যদিকে, মঙ্গলবার রায়গঞ্জের কর্ণজোড়া অডিটোরিয়ামে উত্তর ও দক্ষিণ দিনাজপুর জেলার প্রশাসনিক পর্যালোচনা বৈঠক করার সময় নাগাল্যান্ড গুলিকাণ্ডের প্রসঙ্গ টেনে বিএসএফের এক্তিয়ার নিয়ে প্রশ্ন তোলেন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। নির্দেশ দিয়ে তিনি বলেন, ‘বিভিন্ন থানার আইসি ও বিডিওরা সজাগ থাকুন।  বিএসএফের ডিজি-র সঙ্গে কথা বলুন।’ বিএসএফের কথা প্রসঙ্গে মুখ্যমন্ত্রীর বক্তব্য, ‘বিএসএফ গ্রামে গ্রামে ঢুকে সাধারণ মানুষের উপর অত্যাচার করে, অভিযোগ আসে। এমনকী ভোটের লাইনেও তাদের দেখা যায়। তোমরা কী কখনও বিএসএফের সঙ্গে কথা বলেছ? পুলিশকে জানিয়ে মাত্র ১৫-২০ কিমি আসার কথা। কিন্তু পুলিশকে না জানিয়ে যেখানে সেখানে ঢুকে যায় ওরা।’

Parliament With Liquor: সংসদে মদের বোতল হাতে নিয়ে হাজির বিজেপি সাংসদ

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নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি : সোমবার সংসদে বিজেপি (BJP) সাংসদ পারভেশ সাহিব সিং ভার্মা (Parvesh Sahib Singh Verma) মদের বোতল হাতে নিয়ে হাজির হলেন। তাঁর অভিযোগ মদ্যপানে উৎসাহ দিচ্ছে দিল্লি সরকার।

পারভেশ সাহিব সিং ভার্মা বলেন, ‘করোনার (COVID-19)র সময় যখন ২৫,০০০ মানুষ মারা গিয়েছিল, দিল্লি (Delhi) সরকার এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলে মদের ব্যবহার বৃদ্ধির লক্ষ্যে একটি নতুন আবগারি নীতি তৈরি করতে ব্যস্ত ছিল। আজ, ৮২৪ টি নতুন মদের দোকান খোলা হয়েছে। আবাসিক এলাকা, কলোনি, গ্রাম, নন-কনফর্মিং অঞ্চলেও মদের দোকান খুলছেন মানুষ।

রাত ৩টে পর্যন্ত মদের দোকান খোলা থাকবে, মহিলারা বারে রাত ৩টে পর্যন্ত পান করলে ছাড় দেওয়া হবে। অ্যালকোহল সেবনের বয়সসীমা ২৫ থেকে ২১-এ নামিয়ে আনা হয়েছে।’ তাঁর মতে, ‘এর পিছনে উদ্দেশ্য হল মুখ্যমন্ত্রী সর্বাধিক রাজস্ব উপার্জন করতে চান। যাতে তিনি নিজের প্রচার অভিযানকে প্রসারিত করতে পারেন। তিনি ২০২২ সালের বিধানসভা নির্বাচনের প্রচারের জন্য পাঞ্জাবে গিয়েছিলেন এবং বলেছিলেন যে তিনি অ্যালকোহল সংস্কৃতির অবসান ঘটাবেন। কিন্তু তা না করে তিনি দিল্লিতে মদ্যপান বাড়াচ্ছেন।

দিল্লি সরকারের নতুন আবগারি নীতি অনুসারে ১ অক্টোবর থেকে দিল্লিতে ব্যক্তিগত মদের দোকানগুলি বন্ধ করে দেওয়া হয়েছিল। তবে এখন দোকানগুলি আবার খুলেছে।’

Parliament Winter Session: বিরোধীদের বাধায় রাজ্যসভায় এখনও পর্যন্ত ৫২ শতাংশ সময় জলে গিয়েছে

Rajyasabha lost amid opposition protest

News Desk:  দেশের গণতন্ত্রের মন্দির হল সংসদ ভবন (Parliament)। সংসদ ভবনের প্রতিটি অধিবেশন যথেষ্ট গুরুত্বপূর্ণ। সংসদের অধিবেশন চালাতে সরকারের কোটি টাকা খরচ হয়। কিন্তু কোটি কোটি টাকা খরচ করে সংসদ চালাতে গিয়ে যদি কোনও কাজ না হয় তাহলে এই বিপুল অর্থ অপচয়ের (Misuse) কী যুক্তি থাকতে পারে!

২৯ নভেম্বর থেকে শুরু হয়েছে সংসদের শীতকালীন অধিবেশন (Winter Season)। শুক্রবার পর্যন্ত এই অধিবেশনে রাজ্যসভায় (Rajya Shabha) মোট কাজের ৫২ শতাংশের বেশি সময় নষ্ট হয়েছে। বুধবার পর্যন্ত সময় নষ্ট হয়েছে সবচেয়ে বেশি। মূলত বিরোধীদের হই হট্টগোল, চিৎকার চেঁচামেচির কারণেই এই সময় নষ্ট হয়েছে। তবে আশার কথা, বৃহস্পতিবার ও শুক্রবার পরিস্থিতির অনেক উন্নতি হয়েছে। রাজনৈতিক মহলের আশা, সংসদের বাকি কাজের দিনগুলিতে স্বাভাবিক কাজকর্মে হবে।

শীতকালীন অধিবেশনের শুরুতেই বিরোধী দলের ১২ জন সাংসদকে সাসপেন্ড করে ছিলেন রাজ্যসভার চেয়ারম্যান এম ভেঙ্কাইয়া নায়ডু। ওই সিদ্ধান্তের প্রতিবাদ জানাতেই বিরোধীরা অধিবেশন চালাতে প্রবল বাধা দিয়েছে।

রাজ্যসভার সচিবালয়ের পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে, গত সপ্তাহে অধিবেশনের জন্য নির্ধারিত সময়ের ৫২ শতাংশ সময় কোনও কাজ হতে পারেনি। তবে বৃহস্পতিবার পরিস্থিতির কিছুটা উন্নতি হওয়ায় ওই দিন নির্ধারিত সময়ের থেকে রাজ্যসভা ৩৩ মিনিট বেশি চলেছিল। বৃহস্পতিবার রাজ্যসভার অধিবেশন আধঘন্টা বেশি চলায় ওই সপ্তাহে রাজ্যসভার মোট কাজের সময়ের ৪৭.৭০ শতাংশ সময় কাজ হয়েছে। রাজ্যসভার পক্ষ থেকে আরও জানানো হয়েছে, বৃহস্পতিবার রাজ্যসভার মোট কাজের ৯৫ শতাংশ এবং শুক্রবার ১০০ শতাংশ সময় কাজ হয়েছে।

নরেন্দ্র মোদী সরকার অবশ্য সংসদ অচল থাকার দায় বিরোধীদের ঘাড়েই চাপিয়েছেন। সরকারের পক্ষ থেকে বলা হয়েছে, বিরোধীদের বাধা দানের ফলেই সংসদের কাজ বন্ধ হয়ে যাওয়ায় কোটি কোটি টাকা জলে গিয়েছে। এই টাকা সাধারণ মানুষের পকেট থেকেই সরকার রাজস্ব হিসেবে সংগ্রহ করে। তাই বিরোধী দলের সাংসদদের আরও দায়িত্বশীল হওয়া উচিত। অন্যদিকে বিরোধীদের দাবি, সরকার পক্ষ তাঁদের সংসদে কোনও কথাই বলতে দেয় না। সরকারপক্ষ তাঁদের কথা বলতে না দিয়ে গণতন্ত্রের কণ্ঠরোধ করতে চাইছে। এটা কোনওভাবেই মেনে নেওয়া যায় না। তাই প্রতিবাদস্বরূপ তাঁরা চিৎকার-চেঁচামেচি করতে বাধ্য হন। তাঁদের এই আচরণের জন্য সরকারই দায়ী।

Parliament Winter Session: বিরোধীদের হেনস্থা করতে গান্ধী মূর্তির পাদদেশে পাল্টা চিৎকার বিজেপি সাংসদদের

opposition MP

Parliament Winter Session: Opposition, BJP protest near Mahatma Gandhi statue
News Desk, New Delhi: সংসদের শীতকালীন অধিবেশনের (Winter Session) শুরুতেই রাজ্যসভা থেকে ১২ জন বিরোধী সাংসদকে সাসপেন্ড (Suspend) করা হয়েছে। সাসপেনশনের সিদ্ধান্ত প্রত্যাহারের দাবিতে ওই সাংসদরা সংসদ ভবন (Parliament Bhavan) চত্বরে গান্ধী মূর্তির (Gandhi Statue) সামনে অনশন (Hunger Strike) করছেন।

শুক্রবার বিরোধীদের ধরনা মঞ্চের সামনে হই হট্টগোল শুরু করেন বিজেপির রাজ্যসভার সাংসদরা। কার্যত বিরোধীদের উপর চড়াও হয় গেরুয়া দলের সাংসদরা। বিজেপি সাংসদদের এই আচরণে রীতিমতো উত্তেজনাপূর্ণ পরিস্থিতি তৈরি হয় গান্ধী মূর্তির পাদদেশে। বিষয়টি রাজ্য সভায় জানানো হলেও চেয়ারম্যান বেঙ্কাইয়া নায়ডু তা নিয়ে কোনও পদক্ষেপ করেননি।

নির্দিষ্ট সূচি মেনে শুক্রবারও গান্ধী মূর্তির সামনে রাজ্যসভার ১২ জন বিরোধী সংসদ ধরনা দিচ্ছিলেন। ওই সাংসদদের কটাক্ষ করতেই রাজ্যসভার বেশকিছু বিজেপি সাংসদ সেখানে হাজির হন। বিজেপি সাংসদরা গান্ধী মূর্তির পাদদেশে চিৎকার-চেঁচামেচি শুরু করেন। বিরোধী সাংসদদের কটাক্ষ করে রীতিমতো স্লোগান দিতে ও নানা মন্তব্য করতে থাকেন বিজেপি সাংসদরা। বিজেপি সাংসদের হাতে ছিল গণতন্ত্র বাঁচাও লেখা প্লাকার্ড। লেখা ছিল গুন্ডাগিরি চলবে না।

স্বাভাবিকভাবেই বিরোধীরা বিজেপি সাংসদদের আচরণের তীব্র প্রতিবাদ জানান। প্রথমে তাঁরা সরকারপক্ষের সাংসদদের অন্যত্র বিক্ষোভ দেখানোর জন্য অনুরোধ করেন। কিন্তু বিজেপি সাংসদরা সেই অনুরোধ রক্ষা না করায় উভয় পক্ষের মধ্যে তীব্র বাদানুবাদ হয়। বেশ কিছুক্ষণ তর্কাতর্কি চলার পরে বিরোধী সাংসদরাই ধরনাস্থল ছেড়ে সংসদ কক্ষে ঢুকে পড়েন। বিরোধীদের পক্ষ থেকে রাজ্যসভার চেয়ারম্যানকে বিষয়টি জানানো হয়। কিন্তু চেয়ারম্যান বেঙ্কাইয়া নায়ডু বিরোধীদের অভিযোগককে আদৌ গুরুত্ব দেননি। চেয়ারম্যান বলেন, গান্ধী মূর্তির পাদদেশে যে কেউ বিক্ষোভ দেখাতে পারেন। তাই বিরোধীরা যেমন সেখানে বিক্ষোভ দেখাতে পারেন, তেমনই শাসক শাসক দলের বা অন্য কোনও দলের সাংসদরাও সেখানে বিক্ষোভ দেখালে সরকারের কিছু করার থাকে না।

কিন্তু রাজনৈতিক মহল স্পষ্ট জানিয়েছে, আসলে বিজেপি সাংসদরা মানুষের নজর ঘোরাতেই এটা করেছে। কারণ বিরোধীরা যেভাবে একটানা বিক্ষোভ দেখিয়ে চলেছে তাতে অনেকেই তাঁদের প্রতি সহানুভূতি দেখিয়েছেন। তাছাড়া বিরোধীরা অনেক আগে থেকেই তাঁদের কর্মসূচি ঘোষণা করে সেখানে বিক্ষোভ দেখাচ্ছিলেন। বিজেপির যদি বিক্ষোভ দেখানোই উদ্দেশ্য হত তাহলে তারা সংসদ চত্বরের অন্য কোনও জায়গায় বিক্ষোভ দেখাতে পারত। আসলে বিজেপির একমাত্র উদ্দেশ্য ছিল পায়ে পা দিয়ে ঝামেলা বাধানো। চিৎকার-চেঁচামেচি, হই-হট্টগোল করে বিরোধীদের বাধা সৃষ্টি করা।

এদিনই ত্রিপুরার পুরভোটে ব্যাপক অনিয়মের অভিযোগ তুলে একটি মুলতবি প্রস্তাব পেশ করে কংগ্রেস। কংগ্রেসের সঙ্গে সেই প্রস্তাবে স্বাক্ষর করেছে আরজেডি, সিপিআই, সিপিএম এবং আপ।

Parliament building: শীতকালীন অধিবেশন চলাকালীন দিল্লির সংসদ ভবনে আগুন

fire broke out in the Parliament building in Delhi

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: সোমবার থেকে শুরু হয়েছে সংসদের শীতকালীন অধিবেশন (Winter season)। শীত অধিবেশন দু’দিন চলার পর বুধবার (Wednesday) সকালে সংসদ (Parliament) ভবনে আগুন (fire at parliament) লাগে। এই ঘটনায় এলাকায় তীব্র আতঙ্ক ছড়ায়। যদিও দমকলকর্মীরা (fire brigade ) কিছুক্ষণের মধ্যেই আগুন নিয়ন্ত্রণে আনেন। কী কারণে এই আগুন লাগল তা এখনও স্পষ্ট নয়।

দু’দিন ধরে সংসদের অধিবেশন চলছে। কেন্দ্রীয় মন্ত্রী, শাসক ও বিরোধী পক্ষের সাংসদ সকলেই হাজির থাকছেন সংসদে। সংসদ ভবনের বাইরে চলছে বিরোধীদের ধরনা কর্মসূচি। এরই মধ্যে হঠাৎই সংসদ ভবনে আগুন লাগায় গোটা এলাকায় তীব্র চাঞ্চল্য ছড়ায়। তবে সাতসকালে আগুন লাগায় সে সময় কোনও মন্ত্রী বা সাংসদ সংসদ ভবনে ছিলেন না।

পুলিশ জানিয়েছে, বুধবার সকাল ৮টা নাগাদ সংসদের ৫৯ নম্বর ঘরে আগুন লাগে। সঙ্গে সঙ্গেই খবর দেওয়া হয় দমকলে। ছুটে আসে দমকলবাহিনী। কিছুক্ষণের মধ্যেই আগুন নিয়ন্ত্রণে আনে দমকল কর্মীরা। তবে কী কারণে আগুন লাগল দমকলের পক্ষ থেকে তা এখনও জানা যায়নি। অগ্নিকাণ্ডের কারণ জানতে ইতিমধ্যে তদন্ত শুরু হয়েছে। এদিনের অগ্নিকাণ্ডের ঘটনায় কোনও ক্ষয়ক্ষতি হয়েছে কিনা তা এখনও স্পষ্ট নয়। দমকল বাহিনীর প্রাথমিক অনুমান, সম্ভবত শর্ট সার্কিট থেকে আগুন লেগে থাকতে পারে। তবে সব সম্ভাবনাই খতিয়ে দেখছে দমকল।

নেহরুর জন্মদিনে সংসদে দেখা মিলল না কোনও প্রথম সারির কেন্দ্রীয় মন্ত্রীর

No first-line Union Minister was seen in Parliament on Nehru's birthday

News Desk: ১৪ নভেম্বর দেশের প্রথম প্রধানমন্ত্রী জওহরলাল নেহরুর (nehru) জন্মদিন । প্রতিবছরের মতো এবারও নেহেরুর জন্মদিন (birthday) উপলক্ষ্যে সংসদ ভবনে বিশেষ অনুষ্ঠানের আয়োজন করা হয় কিন্তু সেই অনুষ্ঠানে কোনও শীর্ষস্থানীয় কেন্দ্রীয় মন্ত্রীকে দেখা গেল না।

এমনকী, অনুষ্ঠানে দেখা যায়নি লোকসভার স্পিকার ওম বিড়লা (om birla) এবং রাজ্যসভার চেয়ারম্যান বেঙ্কাইয়া (benkia naidu) নাইডুকেও। কেন্দ্রীয় মন্ত্রী বা বিজেপি নেতাদের এহেন আচরণে প্রবল ক্ষুব্ধ কংগ্রেস।

যথারীতি রবিবার সংসদের সেন্ট্রাল হলে (central hall) নেহরুর প্রতিকৃতিতে মাল্যদান করা হয়। মাল্যদান পর্ব শেষ করে প্রাক্তন কেন্দ্রীয় মন্ত্রী ও কংগ্রেস নেতা জয়রাম রমেশ (jayram ramesh) টুইট করে ক্ষোভ উগরে দেন। তিনি বলেন, সংসদের সেন্ট্রাল হলে আজ এক অভাবিত ঘটনা দেখা গেল।

সেন্ট্রাল হলে যাঁদের ছবি রয়েছে তাদের মধ্যে একজন অর্থাৎ দেশের প্রথম প্রধানমন্ত্রী জওহরলাল নেহরুর আজ জন্মদিন। জন্মদিন উপলক্ষে আয়োজিত অনুষ্ঠানে নেহরুকে শ্রদ্ধা জানানো হয়। কিন্তু সেই অনুষ্ঠানে লোকসভার স্পিকার বা রাজ্যসভার চেয়ারম্যানকেই দেখা গেল না। প্রথম সারির কোনও কেন্দ্রীয় মন্ত্রীকেও ধারেকাছে দেখা যায়নি। মোদি সরকারের এর চেয়ে বড় ঔদাসীন্য ও ঔদ্ধত্য আর কী হতে পারে!

এদিন কেন্দ্রীয় সরকারের তরফে সেন্ট্রাল হলে উপস্থিত ছিলেন ক্ষুদ্র ও মাঝারি শিল্প মন্ত্রকের প্রতিমন্ত্রী ভানুপ্রতাপ (bhanupratap sing) সিং বর্মা। এছাড়াও ছিলেন রাজ্যসভার বিরোধী নেতা মল্লিকার্জুন খাড়গে। কংগ্রেস সভানেত্রী সোনিয়া (sonia)গান্ধী-সহ বেশ কয়েকজন কংগ্রেস সাংসদ। রাজনৈতিক মহল মনে করছে, বিজেপি নেতা বা কেন্দ্রীয় মন্ত্রীরা ইচ্ছাকৃতভাবেই এদিনের অনুষ্ঠান এড়িয়ে গিয়েছেন। কারণ তাঁরা মনে করছেন, এদিনের অনুষ্ঠানে উপস্থিত থাকলে নেহরুকে অধিক গুরুত্ব দেওয়া হয়। বিজেপি কোনওভাবেই নেত্বরক বাড়তি গুরুত্ব দিতে চায় না । সে কারণেই তাঁরা জন্মদিনের অনুষ্ঠান এড়িয়ে গিয়েছেন।

Malawi: পার্লামেন্টে প্রাক্তন স্পিকারের ভয়াবহ আত্মহত্যা, রক্তাক্ত পরিবেশ

Former Malawi deputy speaker Commits Suicide at Parliament

নিউজ ডেস্ক: কিছু সরকারি সুযোগ সুবিধা পেতে চান এমনই আর্জি নিয়ে এসেছিলেন প্রাক্তন ডেপুটি স্পিকার। আচমকা বন্দুক বের করে গুলি চালিয়ে দিলেন। সে এক ভয়াবহ কান্ড। পরে দেখা গেল রক্তাক্ত দেহ। ঘটনার কেন্দ্র আফ্রিকার দেশ মালাউয়ি।

বিবিসি জানাচ্ছে, মালাউইয়ের প্রাক্তন ডেপুটি স্পিকার ক্লিমেন্ট চিউওয়ায়া পার্লামেন্টের অভ্যন্তরে নিজের ওপর গুলি চালিয়ে আত্মহত্যা করেন। পার্লামেন্ট কর্তৃপক্ষ জানিয়েছে একটি বৈঠকে যোগ দিতে তিনি সেখানে যান।
২০১৯ সালে দায়িত্ব ছাড়ার পর প্রাপ্য গাড়ি সুবিধা নিয়ে আলোচনা করতে পার্লামেন্টে গিয়েছিলেন তিনি।সেখানেই আত্মহত্যা করেন। তদন্তে উঠে এসেছে, তাঁর এই আত্মঘাতী হওয়ার কারণ চাকরির সুবিধা সংক্রান্ত শর্ত পালন নিয়ে হতাশা।

Former Malawi deputy speaker Commits Suicide at Parliament

২০১৯ সালে পাঁচ বছর মেয়াদ শেষে ক্লিমেন্ট চিউওয়ায়াকে সরকারের তরফ থেকে গাড়ি কিনে দেওয়া হয়। একটি দুর্ঘটনায় গাড়িটি ক্ষতিগ্রস্ত হয়। তিনি চাইছিলেন পার্লামেন্ট ওই ক্ষতিপূরণ দিক। এনিয়ে তিনি আদালতেও যান। সেখানে মামলাটি এখনও বিচারাধীন।

জানা গিয়েছে মালাউইয়ের প্রাক্তন ডেপুটি স্পিকার হুইলচেয়ারে চলাফেরা করেন। তিনি নিরাপত্তারক্ষীদের লুকিয়ে পার্লামেন্টেরর ভিতরে বন্দুক নিয়ে প্রবেশ করেন। এর জেরে দেশটির পার্লামেন্টের নিরাপত্তা ব্যবস্থা নিয়েই প্রশ্ন উঠছে। ক্লিমেন্ট চিউওয়ায়া ডেপুটি স্পিকার হওয়ার আগে ২০০৪ সাল থেকেই পার্লামেন্ট সদস্য ছিলেন।

সংসদের বাদল অধিবেশনে বিরোধীদের ‘হাঙ্গমায়’ ক্ষতি ১৩০ কোটি টাকা

Opposition Parliament Deadlock

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: সংসদের চলতি বাদল অধিবেশনে প্রায় দেড়শো কোটি টাকার ক্ষতি হয়েছে৷ সংসদের পেগাসাস ইস্যুতে বিরোধীদের হই হট্টগোলের কারণেই এই বিপুল পরিমাণ আর্থিক ক্ষতি হয়েছে৷ একই সঙ্গে ১০৭ ঘণ্টার পরিবর্তে মাত্র ১৮ ঘণ্টা কাজ হয়েছে সংসদে৷

সংসদের বাদল অধিবেশন শুরুর একদিন আগে পেগাসাস সংক্রান্ত প্রতিবেদন প্রকাশ্যে আসে৷ তাতে দাবি করা হয়েছিল যে, দেশের নামী বড় সাংবাদিক, রাজনীতিবিদের ফোনে গুপ্তচরবৃত্তি করা হয়েছিল। আর এই নিয়ে সংসদের উভয় কক্ষে ক্রমাগত হৈচৈ চলছে। সাংসদরা প্রায় প্রতিদিন হৈ -হুল্লোড় করে বাইরে চলে যান৷ কিন্তু তাদের কটূক্তির কারণে এখনও পর্যন্ত ১৩০ কোটি টাকারও বেশি ক্ষতি হয়েছে।

সংবাদ সংস্থা এনডিটিভি সরকারি সূত্রকে উল্লেখ করে বলেছে, সংসদে অচলাবস্থা থাকার কারণে লোকসভার সম্ভাব্য ৫৪ ঘণ্টার মধ্যে মাত্র ৭ ঘণ্টা কাজ হয়েছে৷ আর রাজ্যসভার সম্ভাব্য ৫৩ ঘণ্টার মধ্যে ১১ ঘণ্টা কাজ করেছে। চলতি বাদল অধিবেশনে এখন পর্যন্ত পার্লামেন্টে ১০৭ ঘন্টা কাজ করার কথা ছিল৷ কিন্তু মাত্র ১৮ ঘন্টা কাজ হয়েছে৷ এই পরিস্থিতিতে ৮৯ ঘন্টা সময় পুরোপুরি নষ্ট হয়েছে৷ এরফলে করদাতাদের মোট ক্ষতি ১৩০ কোটি টাকারও বেশি।

সম্প্রতি কংগ্রেস এবং বিরোধীদের মধ্যে হৈচৈ নিয়েও প্রধানমন্ত্রী মোদী অসন্তুষ্টি প্রকাশ করেছিলেন। বিজেপি পার্লামেন্টারি পার্টির সভায় তিনি বলেছেন, কংগ্রেস না হাউসকে কাজ করতে দেয়, না আলোচনার অনুমতি দেয়। আমি ১৫ আগস্ট জনসাধারণের উদ্দেশ্যে এই সব কথা বলব।

পেগাসাসের ঘটনা সামনে আসার পর থেকেই বিরোধী দলগুলি এর তদন্তের দাবি জানিয়ে আসছে। কংগ্রেসের মতে, যে সংস্থাটি পেগাসাস তৈরি করেছে, তারা বলেছে তারা শুধু সফটওয়্যারটি সরকারকে দেয়। এমন পরিস্থিতিতে এটা স্পষ্ট যে, ভারত সরকার নিজেই গুপ্তচরবৃত্তি করেছিল। যদি অন্য কেউ গুপ্তচরবৃত্তি করে থাকে, তাহলে এটি আরও উদ্বেগের বিষয়। এই পরিস্থিতিতে যৌথ সংসদীয় কমিটি বা সুপ্রিম কোর্টের তত্ত্বাবধানে এটি তদন্ত করা উচিত। সরকার অবশ্য সব অভিযোগ অস্বীকার করে তদন্ত করতে রাজি হয়নি।

দেশকে করোনামুক্ত করতে ১০০ কোটি ভ্যাকসিন রবাত দিয়েছে মোদী-সরকার

Women and the Covid-19 Vaccine

নিউজ ডেস্ক: দেশজুড়ে করোনার টিকা দেওয়ার প্রচারণা শুরু হওয়ার ছয় মাসেরও বেশি সময় পেরিয়ে গিয়েছে৷ ইতিমধ্যে কেন্দ্রীয় সরকার ১০০ কোটি করোনা ভ্যাকসিন অর্ডার করেছে। কেন্দ্রীয় স্বাস্থ্য প্রতিমন্ত্রী ভারতী প্রবীণ পাওয়ার রাজ্যসভায় এক প্রশ্নের জবাবে এই তথ্য জানান। মাত্র দু’সপ্তাহ আগে সরকার কোভিশিল্ড এবং কোভ্যাকসিনের ৬৬ কোটি ডোজ দেওয়ার জন্য একটি আদেশ দিয়েছে। সংসদে দ্বিতীয় এক প্রশ্নের উত্তর দেওয়ার সময় প্রবীণ বলেছেন, দেশে কমপক্ষে ৩৪.৪ কোটি মানুষ করোনা প্রথম ডোজ পেয়েছে।

১৬ জুলাইয়ের মধ্যে কেন্দ্রীয় সরকার ১০০ কোটি করোনার ভ্যাকসিন অর্ডার করেছিল। ভারতী প্রবীণ বলেন, এই ভ্যাকসিনগুলিতে কোভাক্স (বিভিন্ন দেশের জন্য একটি বিশ্বব্যাপী ভ্যাকসিন সংগ্রহের উদ্যোগ) থেকে আসা ভ্যাকসিনগুলি অন্তর্ভুক্ত নয়৷ ১২ মার্চ পর্যন্ত সরকার কেবল ১৮.৬ কোটি ডোজ অর্ডার করেছিল৷ তারপরে ১ মে ১৬ কোটি ডোজ করে। মে মাসের শেষের দিকে কোভিশিল্ডের ২৬.৬ কোটি ডোজ এবং কোভাকিনের আট কোটি ডোজ অর্ডার করেছিল।

বিদেশি ভ্যাকসিন নির্মাতাদের দেওয়া আদেশের বিশদ জানতে চাইলে মন্ত্রী বলেন, বিদেশি নির্মাতাদের কাছ থেকে সিভিডির ভ্যাকসিন সংগ্রহ সংক্রান্ত বিভিন্ন সমস্যা মোকাবিলায় সরকার একটি দল গঠন করেছে ৷ এই দলটি বিদেশি নির্মাতাদের সঙ্গে নিয়মিত আলোচনায় বসে।

রাজ্যসভায় অন্য একটি প্রশ্নের জবাবে, স্বাস্থ্য প্রতিমন্ত্রী ভারতী প্রবীন পাওয়ার বলেছেন, কোভিন পোর্টাল অনুযায়ী ২৫ জুলাই পর্যন্ত প্রায় ৩৪.৪ কোটি লোককে কমপক্ষে করোনার একটি ডোজ দেওয়া হয়েছে। এই সময়কালে ১৮ বছর বা তারও বেশি বয়সের প্রায় ৬৫.৫% মানুষকে করোনার ভ্যাকসিনের দ্বিতীয় ডোজ দেওয়া হয়েছিল।

মূল্যবৃদ্ধির বিরুদ্ধে সাইকেল চালিয়ে সংসদের সামনে প্রতিবাদ তৃণমূল সাংসদের

Trinamool MPs protest in front of the parliament by cycling

নিউজ ডেস্ক: কেন্দ্রের বিরুদ্ধে বিভিন্ন ইস্যুতে সূর চড়িয়েছে তৃণমূল কংগ্রেস। দিল্লিতে সংসদে অধিবেশনের প্রথম দিন তার অন্যথা হল না ।বৃষ্টিভেজা রাজধানীর পথে সোমবার সাইকেল নিয়ে বেরিয়ে পড়লেন ডেরেক ও ব্রায়েন, কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায়, অর্পিতা ঘোষ, নাদিমুল হক, শান্তনু সেনের মতো সাংসদরা।

অস্বাভাবিক পেট্রো পণ্যের মূল্যবৃদ্ধির প্রতিবাদে সোমবার   দিল্লির সাউথ অ্যাভিনিউয়ের সদর দফতর থেকে সংসদ পর্যন্ত সাইকেল মিছিল করেন তৃণমূল সাংসদরা। ‘গ্যাস প্রাইস লুঠ’ প্লাকার্ড গলায় ঝুলিয়ে স্লোগান দিতে দিতে সংসদের বাদল অধিবেশনের উদ্দেশ্যে যাত্রা করেন তৃণমূল সাংসদরা। তবে তাদের সংসদে যাওয়ার পথের মাঝে একটি জায়গায় আটকে দেয় পুলিস।

তৃণমূল সাংসদ সুখেন্দু শেখর রায় বলেন সংসদের বাইরে এবং সংসদের ভেতরে এই মূল্যবৃদ্ধি নিয়ে তারা প্রতিবাদ চালিয়ে যাবেন। মূল্যবৃদ্ধির কারণে সাধারণ মানুষ কতটা সমস্যায় পড়ছেন সে বিষয়টি মাথায় রেখেই তারা এই আন্দোলনে নেমেছেন বলে জানান তিনি।

তৃণমূলের সংসদীয় দলের নেতা সুদীপ বন্দ্যোপাধ্যায় বলেন, ‘এই প্রতিবাদ সবে শুরু হল। নরেন্দ্র মোদি সরকার পেট্রোল ডিজেলের দাম বৃদ্ধি নিয়ে কী পদক্ষেপ নেয় সেটাই দেখার” ।আগামী দিনেও তাদের এই আন্দোলন চলবে বলেও জানান তিনি।