महिषादल के मंदिर को तोड़ने आया बुलडोजर, फिर हुआ हैरान करने वाला वाकया

Mahishadal Temple Row: Public Outrage Stops Bulldozer in Purba Medinipur

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के महिषादल क्षेत्र में एक हिंदू मंदिर (Mahishadal Temple) को तोड़ने के लिए प्रशासन की ओर से बुलडोजर लाया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों के गुस्से और विरोध के कारण यह प्रयास विफल हो गया। इस घटना ने देशव्यापी हलचल मचा दी है, और यह एक बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक विवाद का विषय बन गया है।

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महिषादल के राजरामपुर गाँव में स्थित श्री भीम मंदिर प्रशासन का निशाना बन गया था। प्रशासन का दावा था कि मंदिर अवैध रूप से निर्मित हुआ है और इसे तोड़ने के लिए अदालत का आदेश है। लेकिन स्थानीय हिंदू समुदाय ने इस आदेश को खारिज कर दिया और मंदिर को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का एक अंग माना। परिणामस्वरूप, जब बुलडोजर मंदिर के नजदीक पहुँचा, स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग सभी मिलकर प्रशासन के खिलाफ खड़े हो गए।

इस विरोध का सामना करते हुए प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। बुलडोजर को वापस ले लिया गया, लेकिन इस घटना ने सोशल मीडिया पर तीव्र चर्चा शुरू कर दी। कई लोग इस घटना को हिंदू समुदाय पर अन्याय का एक उदाहरण मान रहे हैं, जबकि अन्यों के अनुसार, यह कानून के शासन का हिस्सा है। इस विवाद के बीच, मंदिर का इतिहास और उसका सांस्कृतिक महत्व भी चर्चा का केंद्र बन गया है।

श्री भीम मंदिर महिषादल क्षेत्र में एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जो साल में एक बार बंगाली महीने चैत्र में भीम मेला का आयोजन करता है। यह मेला स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम है, जो उनकी जीवनशैली का एक हिस्सा माना जाता है। मंदिर भीम सेन की उपासना का केंद्र है, और इसे तोड़ने का प्रयास स्थानीय लोगों के बीच गहरा आघात पहुंचा है।

यह घटना भारत के विभिन्न हिस्सों में मंदिर तोड़ने की एक बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा मानी जा रही है। पहले दिल्ली के प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ने की कोशिश और गुजरात के धार्मिक स्थानों को तोड़ने की घटनाएँ इस प्रवृत्ति को और स्पष्ट करती हैं। इन घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की है, जहाँ कानून के शासन और धार्मिक स्थानों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

महिषादल की घटना पर राजनीतिक दलों ने भी सक्रियता दिखाई है। भाजपा इस घटना को हिंदू समुदाय पर अन्याय का एक उदाहरण मान रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इस आदेश को कानून के शासन का हिस्सा मानकर इसका बचाव कर रही है। इस विवाद के बीच, स्थानीय लोग मंदिर के संरक्षण के लिए आंदोलन शुरू कर चुके हैं, और यह आंदोलन देशव्यापी समर्थन प्राप्त कर रहा है।

इस घटना पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। हिंदू सामाजिक संगठन मंदिर के संरक्षण के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने की योजना बना रहे हैं, जबकि अन्यों के अनुसार, इस तरह की घटनाएँ देश की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं। इस घटना पर देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं, और यह एक राष्ट्रीय विवाद का विषय बन गया है।

संक्षेप में, महिषादल के मंदिर को तोड़ने का प्रयास स्थानीय लोगों के बीच गहरा आघात पहुंचा है, और इस घटना ने देशव्यापी चर्चा का केंद्र बन गया है। इस घटना पर राजनीतिक, धार्मिक एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य में विभिन्न मत व्यक्त किए जा रहे हैं, और यह देश की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

Purba Medinipur: চাকরির আশা! নিয়োগ হবে আশাকর্মীরা

Purba Medinipur: Job hope! Ashakarmi will be recruited

News Desk: রাজ্যের পূর্ব মেদিনীপুর জেলার কয়েকটি ব্লকে অস্থায়ী চুক্তিতে নিয়োগ করা হবে একাধিক আশাকর্মী। যাবতীয় তথ্য সহ জারি করা হয়েছে বিজ্ঞপ্তি।

বিজ্ঞপ্তি অনুযায়ী, পূর্ব মেদিনীপুর জেলার ১৩ টি ব্লকে মোট ৭৫ টি শূন্যপদে কর্মী নিয়োগ করা হবে। নির্দিষ্ট ব্লকের বিবাহিত, বিধবা অথবা ডিভোর্সি মহিলারা বিনামূল্যে আবেদন করতে পারবেন। আবেদনকারীদের নূন্যতম যোগ্যতা থাকতে হবে মাধ্যমিক পাশ। আবেদনকারীদের বয়স হত হবে ৩০-৪০ বছরের মধ্যে। তবে এসসি ও এসটিদের ক্ষেত্রে বয়সসীমা ২২ থেকে ৪০ বছর।

বিজ্ঞপ্তিতে জানানো হয়েছে, অফলাইনে চাকরির আবেদন করা যাবে। আবেদনকারীদের একটি ফর্ম ফিলাপ করতে হবে। এরপর জরুরি নথিসহ (মাধ্যমিকের রেজাল্ট, আধার কার্ড, রেশন কার্ড, মাধ্যমিকের অ্যাডমিট কার্ড, স্বামী থাকলে তার প্রমাণপত্র, দু কপি পাসপোর্ট সাইজের ফটো) একটি খামে ভরে স্থানীয় বিডিও অফিসে জমা দিতে হবে।

BJP: বিধায়করা মুখ ঘোরাচ্ছেন, বার্তা পেলেন শুভেন্দু

suvendu adhikari

News Desk: মন্ত্রী সৌমেন মহাপাত্রের দাবি, খোদ বিরোধী দলনেতার লালবাতি দেওয়া গাড়ি চাপতে পারবেন না।  বিজেপি বিরোধী দলের তকমা হারাতে চলেছে। তাঁর মন্তব্য উড়িয়ে দিলেও খোদ পূর্ব মেদিনীপুর ও অন্যান্য জেলার বেশ কিছু বিধায়ক মুখ ঘোরাতে শুরু করেছেন এমনই বার্তা পেয়ে গেলেন শুভেন্দু অধিকারী।

নিজ জেলাতেই জমি আলগা হচ্ছে নন্দীগ্রামের বিধায়ক তথা বিরোধী দলনেতার। রাজ্য বিজেপির অন্দরে এমনই বার্তা এসে গিয়েছে। তৃণমূল কংগ্রেস রাজ্য নেতাদের কটাক্ষ, শুভেন্দু অধিকারীর ডাকে তাঁর জেলার নেতা বিধায়করা আর তেমন সাড়া দিতে চাইছেন না। শুভেন্দু কি এটা জানেন না?

Suvendu Adhikari

বিজেপি অন্দরে গুঞ্জন, পুর নির্বাচনে কাঁথিতে দলের কী হাল হবে তা ‘রাম জানে’। আর জানেন শুভেন্দু অধিকারী। রাজ্য নেতৃত্বের কাছে খুব কি়ছু আশা নেই। তবে কাঁথির লড়াই শুভেন্দুবাবুর কাছে মান রক্ষার। শুভেন্দু অধিকারী বলেছেন,আমি মমতা ব্যানার্জিকে হারাতে পারি। এখানেও কাঁথি শহরে কয়েকটা পাড়াকে বাদ দিয়ে পুরসভা বিজেপি দখল করবে।

রাজ্য বিজেপি নেতাদের বড় অংশ মনে করছেন, শুভেন্দুর হম্বিতম্বি শেষের মুখে। পূর্ব মেদিনীপুরে়ই বড় ধস নামবে। কর্মী সমর্থকদের মধ্যে ধস শুরু হয়েছে বিধানসভা ভোটের ফল ঘোষণার পর থেকেই। কতজন বিধায়ক তৃণমূল কংগ্রেসে যাবেন সেটি আলোচ্য বিষয়।

বিতর্কের সূত্রপাত শুক্রবার। কাঁথি সাংগঠনিক জেলা বিজেপির ডাকে জ্বালানি মূল্য হ্রাসের দাবিতে রাজ্য সরকারের বিরুদ্ধে পদযাত্রা এবং পথসভা আয়োজন করা হয়েছিল। সেই পদযাত্রায় শুভেন্দু অধিকারী উপস্থিত ছিলেন। তবে জেলার অন্যান্য বিজেপি বিধায়করা দেখা দেননি।

পরে দলের তরফে এই অনুপস্থিত বিধায়কদের কাছে কারণ জানতে চাওয়া হয়। সূত্রের খবর তাঁরা অজুহাত দেখিয়েছেন। ঠারে ঠোরে অনেকেই অধিকারী পরিবার কেন্দ্রিক রাজনীতি মানতে চাইছেন না।

জেলা রাজনৈতিক মহলে গুঞ্জন অধিকারী পরিবারের বড়কর্তা নিজেও দ্বিধান্বিত। তবে এই বিষয়ে কেউ মুখ খুলতে নারাজ।

আছে করোনা ভয়, তা থাক, সৈকত শহর দিঘার ডাকে স্পেশাল ট্রেনের বুকিং শুরু

special train to digha for upcoming puja holidays

নিউজ ডেস্ক: করোনা ও ইয়াস ঝড়ের জোড়া ধাক্কায় দিঘা (Digha) বেসামাল। তবে উত্তাল সাগর দেখার জন্য সবাই যেতে মরিয়া। জনপ্রিয় উপকূল পর্যটন কেন্দ্রে আসন্ন শারদোৎসবে মাসে নামতে চলেছে পর্যটক স্রোত। আগামী ৭ সেপ্টেম্বর থেকে দিঘা-হাওড়া স্পেশাল ট্রেন চালু হচ্ছে। তাম্রলিপ্ত এক্সপ্রেসের সময়সূচি অনুযায়ী ওই স্পেশাল এক্সপ্রেস ট্রেন চলাচল করবে। বিজ্ঞপ্তি জারি হয়েছে রেলের তরফে।

দিঘার হোটেল মালিক সংগঠন রুম ভাড়ায় ছাড় দিচ্ছে। দীঘায় পর্যটক সমাগম বাড়ানোর লক্ষ্য এই সিদ্ধান্ত। ইতিমধ্যেই উত্তরবঙ্গে শুরু হয়েছে বিশেষ পর্যটন ট্রেন।

করোনার দ্বিতীয় ঢেউয়ে গত মে মাসের প্রথম সপ্তাহ থেকে দিঘাগামী সবকটি ট্রেন বন্ধ করা হয়। রেল জানিয়েছে, দীঘা-আসানসোল, দিঘা-মালদহ টাউন, দীঘা-বিশাখাপত্তনম এবং নিউ জলপাইগুড়ি-দিঘা সাপ্তাহিক ট্রেনের চলাচল শুরু হয়েছে। কিন্তু, দিঘা যাওয়ার রোজগার এক্সপ্রেস চালু নেই। এবার স্পেশাল ট্রেন চালু হলেই বুকিং বাড়বে।

করোনা ও ঘুর্ণিঝড় ইয়াসের হামালায় রাজ্যের উপকূল পর্যটনে লোকসানের ধাক্কা লেগেছে পরপর। দুর্গা পুজোর আগে স্পেশাল ট্রেন চালু হলে সেই লোকসান কিছুটা কমবে বলে মনে করছেন হোটেল মালিক ও স্থানীয় দোকানদারগণ।

তবে স্বাস্থ্য বিশেষজ্ঞদের আশঙ্কা, অক্টোবরে দুর্গা পুজোর সময় সংক্রমণের হাড় ফের বাড়বে। পরিস্থিতির উপর বিচার করেই সরকার পরবর্তী সিদ্ধান্ত নেবে বলে মনে করা হচ্ছে।