SC का अल्टिमेटम बेअसर, डॉक्टर्स ने और तेज किया आंदोलन, स्वास्थ्य भवन घेरकर बैठे

कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद डॉक्टर्स का प्रदर्शन जारी है। 5 बजे तक काम पर लौटने की चेतावनी के बावजूद प्रदर्शन और उग्र हो गया है। पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि वे आरजी कर अस्पताल की उस डॉक्टर के लिए न्याय की मांग को लेकर ‘काम बंद’ करना जारी रखेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद काम पर न लौटने को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय चाहिए। अब डॉक्टर्स स्वास्थ्य भवन का घेराव करके बैठ गए हैं और कहा है कि मांगे पूरी होने तक वे वहीं डटे रहेंगे। 

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने राज्य के स्वास्थ्य सचिव के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने मंगलवार दोपहर को साल्ट लेक में स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय स्वास्थ्य भवन तक रैली निकाली। इस दौरान हजारों डॉक्टर्स शामिल हुए। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में से एक ने कहा कि हमारी मांगें पूरी नहीं हुई हैं और पीड़िता को न्याय नहीं मिला है। हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे और साथ ही ‘काम बंद’ भी करेंगे। हम चाहते हैं कि स्वास्थ्य सचिव और डीएचई इस्तीफा दें।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त को एक ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। घटना के समय डॉक्टर ड्यूटी पर थी। अस्पताल परिसर में हुई इस भयावह घटना को लेकर पूरे देश में गुस्सा फैल गया। घटना के कारण पूरे देश में आक्रोश और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जूनियर डॉक्टर करीब एक महीने से सरकारी अस्पतालों में ‘काम बंद’ करके हड़ताल पर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदर्शनकारी चिकित्सा पेशेवरों को राज्य सरकार की कार्रवाई से बचने के लिए मंगलवार शाम 5 बजे तक अपनी ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया। अदालत ने डॉक्टरों को यह निर्देश तब दिया जब पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ स्थानांतरण जैसे दंडात्मक उपाय नहीं किए जाएंगे।

রাজ্যে করোনা চিকিৎসার প্রোটোকল থেকে বাদ পড়ল মোলনুপিরাভির-মনোক্লোনাল

Molnupiravir-monoclonal was excluded from the corona treatment protocol in the state

গত ৩১ জানুয়ারি রাজ্যের করোনা চিকিৎসায় জরুরী ভিত্তিতে ব্যবহারের জন্য অনুমোদন পেয়েছিল মোলনুপিরাভির এবং ককটেল থেরাপি বা মনোক্লোনাল অ্যান্টিবডি থেরাপি। তবে তিনদিনের মাথায় সেই সিদ্ধান্ত বদল করল স্বাস্থ্য দফতর। কেন্দ্রের নির্দেশিকা না থাকায় আপাতত ব্যবহার করা হবেনা এই দুটি ওষুধ, এমনটাই জানিয়েছেন স্বাস্থ্য অধিকর্তা অজয় চক্রবর্তী।

রাজ্যের তরফে এই নয়া চিকিৎসাবিধি প্রকাশ হওয়ার পরই বিভিন্ন প্রশ্ন ওঠে। বিশেষজ্ঞ মহল সেইসময় প্রশ্ন তোলে, ওমিক্রন রুখতে মনোক্লোনাল কার্যকরী না, তাহলে করোনা চিকিৎসায় ব্যবহার করা হবে কেন। আইসিএমআরের নির্দেশিকা ছাড়াই কীভাবে বাংলা এই দুটি চিকিৎসা পদ্ধতিতে অনুমোদন দিল। মোলনুপিরাভির বাজারে সহজলভ্য নয় তাহলে কীকরে যে ওষুধ বাজারেই আসেনি তা চিকিৎসায় ব্যবহার করা হবে। ককটেল থেরাপির মত ব্যয়বহুল চিকিৎসার খরচ কীভাবে সামলাবে রাজ্য।

উল্লেখ্য, ২০২১-এর শেষের দিকে সৌরভ গাঙ্গুলি করোনা আক্রান্ত হয়ে একটি বেসরকারি হাসপাতালে ভর্তি হন। সেখানে তাঁর চিকিৎসায় ককটেল থেরাপি ব্যবহার করা হলে তিনি দ্রুত সুস্থ হয়ে ওঠেন। এরপরই নতুন চিকিৎসাবিধি জারি করে স্বাস্থ্য ভবন। যদিও, হাসপাতাল সূত্রে খবর, ওমিক্রন নয় করোনার ডেল্টা প্লাস ভ্যারিয়েন্টে আক্রান্ত হয়েছিলেন বিসিসিআই সভাপতি।