HC के जज की माफ़ी स्वीकारते हुए SC ने कहा- भारत के किसी हिस्से को पाकिस्तान नहीं कह सकते

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारत के किसी भी हिस्से को ‘पाकिस्तान’ कहना देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है। अदालत इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा था।

पांच न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यह बात उस मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणियों के वीडियो क्लिप का स्वतः संज्ञान लिया था।

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस वेदव्यसचार श्रीशनंदा ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के एक मुसलमान बहुल इलाके को ‘पाकिस्तान’ कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से रिपोर्ट मांगी थी।

बुधवार को पीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन किया जिसमें कहा गया था कि न्यायाधीश ने 21 सितंबर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ’21 सितंबर, 2024 को खुली अदालत की कार्यवाही के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा मांगी गई माफी को ध्यान में रखते हुए हम न्याय और संस्था की गरिमा के हित में इन कार्यवाहियों को आगे नहीं बढ़ाएंगे।’

पीठ ने कहा, ‘रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट इस बात का पर्याप्त संकेत है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के दौरान जो टिप्पणियां की गईं, वे कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों से संबंधित नहीं थीं और उन्हें टाला जाना चाहिए था। समाज के हर वर्ग के लिए न्याय की धारणा उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी कि न्याय को एक वस्तुनिष्ठ तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना।’

ज्ञात हो कि हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस वेदव्यासचार श्रीशनंदा को सुनवाई के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिख रहे थे। एक क्लिप में न्यायाधीश को बेंगलुरु के मुस्लिम बहुल इलाके गोरी पाल्या को ‘पाकिस्तान’ कहते हुए सुना जा सकता है, जबकि दूसरे में वह एक महिला वकील पर अनुचित टिप्पणी करते हैं।

अदालत ने कहा, ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कार्यवाही की लाइव स्ट्रीम न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए अदालतों की एक महत्वपूर्ण आउटरीच सुविधा के रूप में उभरी है। साथ ही, न्यायिक प्रणाली में सभी हितधारकों, जिनमें न्यायाधीश, वकील और वादी, विशेष रूप से व्यक्तिगत रूप से पक्षकार शामिल हैं, को इस तथ्य के प्रति सचेत रहना होगा कि अदालत में होने वाली कार्यवाही की पहुंच केवल उन लोगों तक ही सीमित नहीं है जो शारीरिक रूप से मौजूद हैं, बल्कि अदालत के परिसर से कहीं आगे के दर्शकों तक भी इसकी महत्वपूर्ण पहुंच है।’

पीठ ने आगे कहा, ‘न्यायाधीशों के रूप में हम इस तथ्य के प्रति सचेत हैं कि प्रत्येक व्यक्ति के पास जीवन के अनुभवों के आधार पर एक निश्चित मात्रा में पूर्वाग्रह होते हैं… यह महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक न्यायाधीश को अपने स्वयं के पूर्वाग्रहों के बारे में पता होना चाहिए। न्याय करने का मूल तत्व निष्पक्ष और न्यायसंगत होना है. इस प्रक्रिया में प्रत्येक न्यायाधीश के लिए अपनी स्वयं की प्रवृत्तियों के बारे में जागरूक होना आवश्यक है, क्योंकि केवल ऐसी जागरूकता के आधार पर ही हम न्यायाधीश के उद्देश्यपूर्ण और निष्पक्ष न्याय प्रदान करने के मौलिक दायित्व के प्रति वास्तव में वफादार हो सकते हैं।’

अदालत ने कहा, ‘हम इस बात पर जोर देते हैं क्योंकि संस्था में प्रत्येक हितधारक के लिए यह समझना आवश्यक है कि न्यायिक निर्णय लेने में केवल वही मूल्य शामिल होने चाहिए जो भारत के संविधान में निहित हैं. आकस्मिक अवलोकन व्यक्तिगत पूर्वाग्रह की एक निश्चित सीमा को दर्शा सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें किसी विशेष लिंग या समुदाय के लिए निर्देशित माना जाता है। इसलिए, न्यायालयों को न्यायिक कार्यवाही के दौरान ऐसी टिप्पणियां न करने के लिए सावधान रहना चाहिए, जिन्हें महिलाओं के प्रति द्वेषपूर्ण या हमारे समाज के किसी भी वर्ग के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण माना जा सकता है।’

अदालत ने कहा, ‘ऐसी टिप्पणियों को नकारात्मक रूप में समझा जा सकता है, जिससे न केवल न्यायालय या उन्हें व्यक्त करने वाले न्यायाधीश पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि व्यापक न्यायिक प्रणाली पर भी प्रभाव पड़ता है।’ पटना हाईकोर्ट की ‘विधवा को मेकअप की जरूरत नहीं’ टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद आपत्तिजनक कहा इसी दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (25 सितंबर) को कहा कि पटना हाईकोर्ट द्वारा की गई यह टिप्पणी कि विधवा को मेकअप करने की जरूरत नहीं है, ‘बेहद आपत्तिजनक’ है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट संपत्ति विवाद को लेकर एक महिला के अपहरण और हत्या के मामले की सुनवाई कर रहा था। मृतक से जुड़े गवाहों ने बताया था कि घटना के समय वह एक घर में रह रही थी और बाद में पुलिस को वहां से मेकअप का सामान मिला था. हालांकि बाद में पता चला कि वह सामान घर में रहने वाली एक अन्य महिला का था।

उस समय पटना हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि मेकअप का सामान दूसरी महिला का नहीं हो सकता, क्योंकि वह विधवा है और उसे मेकअप करने की कोई जरूरत नहीं है। जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने पटना हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘हमारे विचार में उच्च न्यायालय की टिप्पणी न केवल कानूनी रूप से अपुष्ट है, बल्कि अत्यधिक आपत्तिजनक भी है. इस तरह की व्यापक टिप्पणी कानून की अदालत से अपेक्षित संवेदनशीलता और तटस्थता के अनुरूप नहीं है, खासकर तब जब रिकॉर्ड पर मौजूद किसी भी साक्ष्य से ऐसा साबित न हो।’

‘केजरीवाल ने ईडी मामले में जमानत के बाद CBI की कार्रवाई को ‘इंश्योरेंस गिरफ्तारी’ बताया, कोर्ट में दी दलील

नई दिल्ली :  दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। दिल्ली शराब नीति घोटाले में जेल में बंद केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ दिल्ली सीएम की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है। वहीं वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, केजरीवाल का पक्ष रख रहे हैं।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ‘सीबीआई ने आबकारी नीति मामले में जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें केजरीवाल का नाम नहीं है। साथ ही केजरीवाल को बीते दिनों अंतरिम जमानत देते हुए भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सीएम समाज के लिए खतरा नहीं हैं।’ सिंघवी ने ये भी कहा कि दो बार सुप्रीम कोर्ट और एक बार ट्रायल कोर्ट केजरीवाल को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे चुका है।

सिंघवी के अनुसार, एक बार सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए जमानत पर रिहा किया था और एक बार ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है। सिंघवी ने दलील दी कि केजरीवाल एक संवैधानिक पद पर हैं और समाज के लिए खतरा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ‘सीबीआई ने दो वर्षों में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी, लेकिन फिर बीती 26 जून को केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया गया। केजरीवाल की गिरफ्तारी एक तरह से इंश्योरेंस गिरफ्तारी थी।’ सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की जमानत पर 23 अगस्त को सीबीआई से हलफनामा देने को कहा था। साथ ही केजरीवाल को दो दिनों के भीतर सीबीआई के हलफनामे पर जवाब देने का निर्देश दिया था।

सिंघवी की दलीलों पर सीबीआई का पक्ष रख रहे एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने केजरीवाल की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पहली आपत्ति तो ये है कि केजरीवाल को जमानत के लिए पहले ट्रायल कोर्ट जाना चाहिए न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए। राजू ने कहा कि ऐसा लगता है कि केजरीवाल कोई खास व्यक्ति हैं, जिनके लिए अलग तरीका अपनाया जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। एक याचिका में केजरीवाल ने सीबीआई द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। वहीं दूसरी याचिका में केजरीवाल ने जमानत देने की अपील की है। इससे पहले 5 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें ट्रायल कोर्ट जाने को कहा था। हाईकोर्ट ने केजरीवाल की जमानत का विरोध करते हुए सीबीआई ने दलील दी थी कि दिल्ली सीएम जमानत पर बाहर आने के बाद गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

High Court: মিলল অনুমতি, হবে গঙ্গাসাগর মেলা

high court

গঙ্গাসাগর মেলা শর্ত সাপেক্ষে অনুমতি দিল হাই কোর্ট। (High Court) তবে, ১) মানবাধিকার কমিশনের চেয়ারম্যান, ২) বিরোধী দলনেতা, ৩) রাজ্যের মুখ্য সচিব- এই তিন সদস্যের কমিটি করোনা পরিস্থিতির কথা মাথায় রেখে সব সময় পর্যালোচনা করবে। পরিস্থিতি নিয়ন্ত্রণের বাইরে চলে গেলে কমিটি মেলা বন্ধের সিদ্ধান্ত গ্রহণ করতে পারবে।

কী শর্ত দেওয়া হয়েছে আদালতের পক্ষ থেকে?

রাজ্য সরকার যে বিজ্ঞপ্তি জারি করে বলেছিল কোন ধর্মীয় অনুষ্ঠানে ৫০ জনের বেশি উপস্থিত থাকতে পারবে না। গঙ্গাসাগর মেলার ক্ষেত্রেও সেই বিজ্ঞপ্তি প্রযোজ্য হবে। বিষয়টি স্বরাষ্ট্র সচিবকে বিজ্ঞপ্তি দিয়ে জানিয়ে দিতে হবে। গঙ্গাসাগর মেলায় একত্রে ৫০ জনের বেশি উপস্থিত থাকতে পারবে না। এই সম্পূর্ণ বিষয়টি দেখার জন্য একটি তিন সদস্যের কমিটি গঠন করে দিল কলকাতা হাইকোর্ট।
কমিটিতে থাকবেন:—
১) মানবাধিকার কমিশনের চেয়ারম্যান।
২) বিরোধী দলনেতা
৩) রাজ্যের মুখ্যসচিব বা মুখ্যসচিব মনোনীত কোনও রাজ্যের প্রতিনিধি।

এই কমিটি নজরদারি করবে এবং যদি রাজ্য সরকারের ওই বিজ্ঞপ্তির অবমাননা হয় বা সঠিক ভাবে পালিত না হয় তাহলে এই কমিটি মেলা বন্ধ করে দেওয়ার নির্দেশ দিতে পারবে।

High Court: পাওনা কেন বকেয়া? মমতার অস্বস্তি বাড়িয়ে আদালতের তলব

এখনও বকেয়া রয়েছে পাওনা৷ অভিযোগের তির রাজ্যের অর্থসচিব-সহ ৪ আধিকারিকেএ বিরুদ্ধে। তাঁদের ডেকে পাঠিয়েছে কলকাতার উচ্চ আদালত (High Court)। আগামী শুক্রবার দিতে হবে হাজিরা।

অভিযুক্ত প্রত্যেকের বিরুদ্ধে উঠেছে আদালত অবমাননার অভিযোগ। চাকরি থেকে অবসর নেওয়ার দীর্ঘদিন পরেও পুরকর্মীর বকেয়া পাওনা-গন্ডা মেটানো হয়নি, এমনটাই অভিযোগ তাঁদের বিরুদ্ধে। রাজ্যের অর্থসচিব পুনিত যাদবের বিরুদ্ধে আদালত অবমাননার মামলায় রুল ইস্যু হয়েছে বলে প্রকাশ সংবাদমাধ্যমে। অভিযোগ রয়েছে বহরমপুরের মহকুমা শাসক, বহরমপুর পুরসভা এগজিকিউটিভ অফিসার ও সেখানকার বর্তমান প্রশাসক বোর্ড প্রধানের বিরুদ্ধেও।

বকেয়া পাওনা না পেয়ে আদালতের দ্বারস্থ হয়েছিলেন এক অবসরপ্রাপ্ত কর্মী স্ত্রী ডলি সরকার। গত ২৮ অক্টোবর সমস্ত পাওনা-গন্ডা মিটিয়ে দেওয়ার নির্দেশ দেওয়া হয়েছিল কোর্টের পক্ষ থেকে। কিন্তু তারপরেও পাওনা দেওয়া হয়নি বলে অভিযোগ। ফের বিচারপতির দরবারে যান ডলি সরকার। করেন আদালত অবমাননার মামলা। তারই প্রেক্ষিতে কলকাতা হাইকোর্টের এই রুল ইস্যু।

সাফাই দেওয়া হয়েছে বহরমপুর পুরসভার তরফে৷ জানানো হয়েছে, কর্মীদের কাছে ৮-১০ কোটি টাকা বকেয়া রয়েছে। কিন্তু তা মেটানোর সামর্থ্য এখন পুরসভার নেই। রাজ্য সরকারের কাছে আর্থিক সাহায্যের আবেদন জানিয়েছে স্থানীয় এই প্রশাসন। বহরপুর ছাড়াও রাজ্যের একাধিক জায়গায় বকেয়া সম্পর্কিত এমন সমস্যা রয়েছে বলে মনে করছেন অনেকে। এমতাবস্থায় আদালতের এই পদক্ষেপে নড়েচড়ে বসেছেন রাজ্যের একাংশ। অর্থসচিবকেও দিতে হবে হাজিরা৷ বিচারপতি রাজা শেখর মন্থর এজলাসে আগামী দিনে কী হয়, এখন সে দিকেই তাকিয়ে সকলে।

Uttar Pradesh: ওমিক্রন উদ্বেগ, ভোট পিছানোর অনুরোধ এলাহাবাদ হাইকোর্টের

Uttarpradesh: Omicron concerns, Allahabad court requests to withdraw vote

প্রতিবেদন, ২০২০ সালের এপ্রিল-মে মাসে পাঁচ রাজ্যে বিধানসভা নির্বাচন হয়েছিল। ওই নির্বাচনের পরেই সংশ্লিষ্ট রাজ্যগুলিতে আছড়ে পড়েছিল করোনার দ্বিতীয় ঢেউ (second wave)। বহু মানুষ অকালেই প্রাণ হারিয়েছিলেন। কেউই আর সেই ঘটনার পুনরাবৃত্তি কোনওভাবে চাইছে না। সে কারণে এলাহাবাদ হাইকোর্ট (allahabad high court) প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদীর (narendra modi) কাছে উত্তরপ্রদেশ বিধানসভা নির্বাচন (assembly election) পিছিয়ে দেওয়ার আরজি জানাল। প্রধানমন্ত্রী এবং নির্বাচন কমিশনের কাছে এলাহাবাদ হাইকোর্টের অনুরোধ, দয়া করে দেশের বৃহত্তম রাজ্যের বিধানসভা নির্বাচন অন্তত এক-দু’মাস পিছিয়ে দেওয়া হোক।

বৃহস্পতিবার একটি মামলার শুনানি চলছিল এলাহাবাদ হাইকোর্টের বিচারপতি শেখর যাদবের এজলাসে। সেখানেই বিচারপতি যাদব বলেন, করোনার সংক্রমণ এখনও পুরোপুরি নিয়ন্ত্রণে আসেনি। এরইমধ্যে করোনার নতুন ভেরিয়েন্ট ওমিক্রন ক্রমশই সংক্রমণ ছড়াচ্ছে। তাই আসন্ন বিধানসভা নির্বাচনের দিকে তাকিয়ে বিভিন্ন রাজনৈতিক দল উত্তরপ্রদেশে জনসভা করতে শুরু করেছে। কিন্তু এই জনসভাগুলি অবিলম্বে বন্ধ না করলে দ্বিতীয় ঢেউয়ের থেকেও ভয়ঙ্কর পরিস্থিতির মুখোমুখি হতে হবে আমাদের।

বিচারপতি যাদব আরও বলেন, ওই জনসভাগুলিতে কাউকেই সামাজিক দূরত্ব বিধি মানতে দেখা যাচ্ছে না। বেশিরভাগ মানুষের মুখে মাস্ক থাকছে না। এক ভয়ঙ্কর পরিস্থিতি। তাই প্রধানমন্ত্রীর কাছে অনুরোধ, অবিলম্বে সমস্ত নির্বাচনী জনসভাগুলি বাতিল করে দেওয়া হোক। মানুষ প্রাণে বাঁচলো তো সব হবে। দু-এক মাস পর ভোট হলে কিছু এসে যাবে না। প্রয়োজনে উত্তরপ্রদেশের ভোট দু-এক মাস পিছিয়ে দেওয়া হোক। যেভাবে ওমিক্রনের সংক্রমণ দ্রুত ছড়াচ্ছে তাতে যদি ভোট পিছিয়ে দেওয়া না হয়, যদি এভাবেই জনসভা চলতে থাকে তবে তৃতীয় ঢেউ আছড়ে পড়া শুধু সময়ের অপেক্ষা।

এই অনুরোধ জানাতে গিয়ে বিচারপতি যাদব পশ্চিমবঙ্গ সহ পাঁচ রাজ্যের বিধানসভা ভোটের কথাও টেনে এনেছেন। তিনি বলেছেন, আমরা দেখেছি পশ্চিমবঙ্গ, কেরল, তামিলনাড়ু-সহ কয়েকটি রাজ্যে নির্বাচনে পর কিভাবে করোনা ছড়িয়ে পড়েছিল। কিভাবে মৃত্যু হয়েছিল হাজার হাজার মানুষের। ইতিমধ্যেই বিশেষজ্ঞরা জানিয়ে দিয়েছেন, ফেব্রুয়ারি-মার্চ মাসে করোনার প্রকোপ শীর্ষে পৌঁছতে পারে। ঠিক ওই সময়েই উত্তরপ্রদেশ বিধানসভা নির্বাচন হওয়ার কথা। তাই প্রধানমন্ত্রী এবং নির্বাচন কমিশনের কাছে অনুরোধ, ভোট কিছু দিন পিছিয়ে দিন। মানুষ যদি সুস্থ থাকে তাহলে কয়েক মাস পরে ভোট হতে কোন সমস্যা হবে না। কিন্তু নির্বাচনী ঢেউয়ে গা ভাসালে আগামী দিনে করোনার তৃতীয় ঢেউয়ে ভেসে যাবে রাজ্য।

উল্লেখ্য, নির্বাচনের দিন তারিখ ঠিক করার ব্যাপারে আদালত কখনও কমিশনকে সরাসরি কোনও নির্দেশ দিতে পারে না। সে কারণেই বিচারপতি শেখর যাদব কমিশনকে ভোট কিছুদিন পিছিয়ে দেওয়ার অনুরোধ জানিয়েছেন।

Netaji is alive or dead: নেতাজী জীবিত না মৃত, ৮ সপ্তাহের মধ্যে জানাতে কেন্দ্রকে নির্দেশ হাইকোর্টের

Netaji is alive or dead

News Desk: নেতাজী সুভাষচন্দ্র বসু (Netaji Subhas Chandra Bose) জীবিত আছেন নাকি, তাঁর মৃত্যু হয়েছে তা ৮ সপ্তাহের মধ্যে হলফনামা দিয়ে কেন্দ্রকে জানানোর নির্দেশ দিল কলকাতা হাইকোর্ট। হাইকোর্টের প্রধান বিচারপতির প্রকাশ শ্রীবাস্তবের নেতৃত্বাধীন ডিভিশন বেঞ্চ সোমবার এই নির্দেশ জারি করে।

নেতাজী জীবিত আছেন নাকি তাঁর মৃত্যু হয়েছে তা জানতে চেয়ে আদালতে একটি জনস্বার্থ মামলা দায়ের হয়। ওই আবেদনের প্রেক্ষিতে সোমবার এই নির্দেশ দেয় কলকাতা হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চ। এদিন বেঞ্চ তার নির্দেশে দেশে ব্যবহৃত টাকায় নেতাজির ছবি ব্যবহার করা যাবে কিনা তাও হলফনামা দিয়ে কেন্দ্রকে জানাতে বলেছে।

সোমবার আবেদনকারীর আইনজীবী রবীন্দ্রনারায়ণ দত্ত আদালতে বলেন, নেতাজীর অন্তর্ধান রহস্যের সমাধান করতে কেন্দ্র বিভিন্ন সময়ে একাধিক কমিশন গঠন করেছে। ওই কমিশনের জন্য সরকারের বিপুল অর্থ খরচ হয়েছে। কিন্তু এখনও প্রকৃত সত্য সামনে আসেনি। অযথা সরকারি অর্থের অপচয় না করে নেতাজির অন্তর্ধান রহস্যের প্রকৃত তথ্য প্রকাশ করুক কেন্দ্রীয় সরকার। আদালত এ বিষয়ে নির্দেশ জারি করুক বলে আইনজীবী রবীন্দ্রনারায়ণ দত্ত দাবি করেন।

আইনজীবী দত্ত বলেন, নেতাজী দেশের জন্য যা করেছেন তা মানুষ কোনওদিন ভুলবে না। তাই ভারতীয় মুদ্রায় নেতাজির ছবি ছাপানোর জন্য ইতিমধ্যেই রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়াকে প্রস্তাব দেওয়া হয়েছে। এই প্রস্তাবে উৎসাহ দেখিয়েছে আরবিআই। কিন্তু এ বিষয়ে চূড়ান্ত কোনও সিদ্ধান্ত হয়েছে কিনা তা এখনও জানা যায়নি। সেই তথ্যও আদালতকে জানাক সরকার।

আবেদনকারীর আইনজীবীর এই বক্তব্যের পর হাইকোর্টের প্রধান বিচারপতি প্রকাশ শ্রীবাস্তবের নেতৃত্বাধীন ডিভিশন বেঞ্চ জানায়, নেতাজীর অন্তর্ধানের বিষয়ে সরকার তাদের বক্তব্য স্পষ্ট করুক। একইসঙ্গে নেতাজির ছবি দেশের টাকায় ছাপা হবে কিনা তাও জানানোর জন্য কেন্দ্রকে নির্দেশ দিয়েছে বেঞ্চ।

আগামী ২১ ফেব্রুয়ারির মধ্যে কেন্দ্রকে হলফনামা দিয়ে এই দুই প্রশ্নের উত্তর জানাতে হবে হাইকোর্টকে। উল্লেখ্য, নেতাজীর অন্তর্ধানের বিষয়ে সাম্প্রতিক কিছু ফাইল প্রকাশ করা হয়েছে। কিন্তু তাঁর বেঁচে থাকা বা মৃত্যু হয়েছে কিনা সে বিষয়ে কোনও ফাইল প্রকাশ করা হয়নি।

১৯৪৫ সালে তাইহোকু বিমান বন্দরে দুর্ঘটনায় নেতাজীর মৃত্যু হয়েছিল কিনা সে ব্যাপারে অসংখ্য প্রশ্ন রয়ে গিয়েছে। সেই জট এখনও কাটানো যায়নি। এরইমধ্যে কলকাতা হাইকোর্টের এই নির্দেশ বিশেষ তাৎপর্যপূর্ণ বলেই মনে করা হচ্ছে।

Netai Mass Killing: নেতাই গণহত্যার CBI তদন্তের গতি নিয়েই প্রশ্ন হাইকোর্টে

Netai killing

News Desk: নেতাই (Netai mass killing) গুলি চালানো ঘটনায় CBI তদন্তের রিপোর্ট তলব করল হাই কোর্ট। আগামী ১৪,ফেব্রুয়ারির মধ্যেই রিপোর্ট জমা দেওয়ার নির্দেশ দিয়েছে প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চ।

রাজ্যে বাম জমানায় মুখ্যমন্ত্রী বুদ্ধদেব ভট্টাচার্যের সময় পশ্চিম মেদিনীপুর জুড়ে আইন শৃঙ্খলা একেবারেই প্রশাসনের হাতের বাইরে চলে গিয়েছিল। জঙ্গলমহলে মাওবাদী হামলায় বহু বাম কর্মী সমর্থক ও সাধারণ মানুষের মৃত্যু যেমন হয়, তেমনই সিপিআইএমের বিরুদ্ধে উঠেছে নেতাই গণহত্যার মতো অভিযোগ।

২০১১ সালের ৭ জানুয়ারি পশ্চিম মেদিনীপুরের লালগড় ব্লকের নেতাই গ্রামে গুলিতে ৯ জনের মৃত্যু হয়। চাঞ্চল্যকর এই ঘটনায় জঙ্গলমহলের দাপুটে সিপিআইএম নেতা ও প্রাক্তন মন্ত্রী সুশান্ত ঘোষের নাম জড়ায়। তবে তিনি অভিযোগ অস্বীকার করেছেন প্রথম থেকেই।

নেতাই গ্রামে মাওবাদীদের আস্তানা গুঁড়িয়ে দিয়েছেন এলাকাবাসী এমনই পাল্টা দাবি উঠতে থাকে। সবমিলে নেতাই গণহত্যা তীব্র বিতর্কিত। রাজ্যে তৃণমূল কংগ্রেস সরকার তৈরি হলে নেতাই গণহত্যার বিচার হবে বলেছিলেন মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। সেই সরকারের আমলে নেতাই তদন্ত কতদূর তা নিয়েই প্রশ্ন তুলল আদালত।

গণহত্যার অভিযোগে হাইকোর্ট বার অ্যাসোসিয়েশনের তরফে সিবিআই তদন্ত ও মৃত এবং আহতদের পরিবারকে ক্ষতিপূরণের দাবিতে মামলা হয়। রাজ্য ক্ষতিপূরণ দেয়। হাইকোর্টের নজরদারিতে সেই মামলা এখনও চলছে। চার্জসিট জমা পড়লেও এখনও অভিযুক্তরা সাজা পায়নি। প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চ সিবিআইকে তদন্ত ও বিচারের অগ্রগতি নিয়ে রিপোর্ট তলব করেন।

সুপ্রিম কোর্ট ও হাইকোর্টে শূন্যপদে দ্রুত বিচারপতি নিয়োগ করতে চায় কেন্দ্র, জানালেন আইনমন্ত্রী

Kiren Rijiju

Kolkata24x7 Desk: ভারতীয় বিচারব্যবস্থার (judicial system) দীর্ঘসূত্রতা সর্বজনবিদিত। বিচার ব্যবস্থার দীর্ঘসূত্রতার অন্যতম কারণ পর্যাপ্ত বিচারপতির (justice) অভাব। বেশিরভাগ হাইকোর্ট (high court) এবং সুপ্রিম কোর্টে (supreme court) পর্যাপ্ত বিচারপতি না থাকায় বিচার প্রক্রিয়া দীর্ঘায়িত হয়।

এ প্রসঙ্গটি আজ লোকসভায় উত্থাপন করেন তৃণমূল কংগ্রেস সাংসদ কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায়। সাংসদ জানতে চান, বিভিন্ন রাজ্যের হাইকোর্ট ও সুপ্রিম কোর্টে ৪০৭ জনেরও বেশি বিচারপতির পদ শূন্য আছে। এর কারণ কী? বিভিন্ন রাজ্যের হাইকোর্টের ২৩৩ জন স্থায়ী বিচারপতি এবং ১৭৪ জন অতিরিক্ত বিচারপতি নিয়োগের সুপারিশ করেছে কলেজিয়াম। সেই সুপারিশ কি বাস্তবায়িত হয়েছে? যদি হয়ে থাকে তবে সরকার বিষয়টি বিস্তারিত জানাক।

কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায়ের এই প্রশ্নের উত্তরে কেন্দ্রীয় আইন ও বিচার মন্ত্রী কিরেন রিজিজু জানান, চলতি বছরের ৩০ নভেম্বর পর্যন্ত সুপ্রিম কোর্টে একজন মাত্র বিচারপতির পদ ফাঁকা আছে। অন্যদিকে বিভিন্ন রাজ্যের হাইকোর্টে ৪০২ জন বিচারপতির পদ শূন্য রয়েছে। যার মধ্যে ১৬৪ জন বিচারপতি নিয়োগের প্রস্তাব কেন্দ্র ও কলেজিয়ামের মধ্যে আলোচনার বিভিন্ন পর্যায়ে রয়েছে। অন্যদিকে বিভিন্ন রাজ্যের হাইকোর্টের কলেজিয়াম থেকে ২৩৮ টি পদে নিয়োগের ব্যাপারে এখনও পর্যন্ত কোনও সুপারিশ এসে পৌঁছয়নি। সুপ্রিম কোর্টের কলেজিয়াম যে সমস্ত নাম সুপারিশ করেছে একমাত্র তাঁদেরই হাইকোর্টের বিচারপতি পদে নিয়োগ করা হয়েছে।

রিজিজু আরও বলেন, বিভিন্ন হাইকোর্টের বিচারপতি নিয়োগের ক্ষেত্রে সংশ্লিষ্ট হাইকোর্টের প্রধান বিচারপতি এবং অন্যান্য সিনিয়র বিচারপতিরা আলোচনা করেই চূড়ান্ত সিদ্ধান্ত নিয়ে থাকেন। শূন্যপদে তৈরির ছয় মাস আগেই তাঁরা এই নিয়োগের বিষয়টি চূড়ান্ত করেন। বিচারপতি নিয়োগের ক্ষেত্রে কেন্দ্র ও রাজ্য স্তরে সংশ্লিষ্ট বিভিন্ন সাংবিধানিক কর্তৃপক্ষের সঙ্গে আলোচনা করতে হয়। তবে সরকার চেষ্টা করছে, বিভিন্ন হাইকোর্ট এবং সুপ্রিম কোর্টের শূন্যপদের দ্রুত নিয়োগ করতে। বিভিন্ন বিচারপতির অবসর নেওয়া, বদলি হওয়া এবং পদোন্নতির হওয়ার কারণে বিভিন্ন হাইকোর্টের শূন্যপদ তৈরি হয় বলে রিজিজু জানান।

একই সঙ্গে তিনি বলেন, চলতি বছরের ৩০ নভেম্বর পর্যন্ত সুপ্রিম কোর্টের ৯ জন এবং বিভিন্ন হাইকোর্টের ১১৮ জন বিচারপতি নিয়োগের বিজ্ঞপ্তি জারি হয়েছে।

School fees: বেসরকারি স্কুলে ফি বাকি থাকলেও পরীক্ষা আটকাবে না, হাইকোর্টের নির্দেশ

School fee

নিউজ ডেস্ক, কলকাতা: রাজ্যের বেসরকারি স্কুল গুলিতে যদি ফি (School fees) দিতে না পারেন অভিভাবকরা সে ক্ষেত্রে কোনও ছাত্র বা ছাত্রীকে পরীক্ষা বসা থেকে বিরত করা যাবে না। অ্যাডমিট কার্ড বা রেজাল্ট আটকানো যাবে না।

বেসরকারি স্কুলগুলোতে ছাত্রছাত্রীরা যথাসময়ে স্কুলের ফি জমা দিতে না পারলেও তাদের পরীক্ষায় বসা থেকে বঞ্চিত করা যাবে না নির্দেশ হাইকোর্টের (High Court) বিচারপতি ইন্দ্র প্রসন্ন মুখোপাধ্যায় ও বিচারপতি মৌসুমী ভট্টাচার্যের ডিভিশন বেঞ্চ। পাশাপাশি বেসরকারি স্কুল গুলির ছাত্র-ছাত্রীদের পঠন-পাঠনে কোনও রকম যাতে ব্যাঘাত না ঘটে তা নিশ্চিত করবেন স্কুল কর্তৃপক্ষ গুলি।

শুক্রবার মামলার শুনানি চলাকালীন অ্যাডামাস ইন্টারন্যাশনাল স্কুলের পক্ষ থেকে আদালতে দৃষ্টি আকর্ষণ করে আইনজীবী জানান, স্কুলের প্রিন্সিপাল কে রাজ্যের শিশু সুরক্ষা ও মহিলা কমিশনের পক্ষ থেকে নির্দেশ দেওয়া হয়েছিল যে সমস্ত অভিভাবকেরা এই স্কুলের ফি দিতে পারছেন না তাদেরও স্কুলে পঠন-পাঠনের সম্পূর্ণভাবে সুবিধা দিতে হবে। এই ঘটনায় পুলিশের পক্ষ থেকে বারংবার তলব করা হয় অ্যাডামাস ইন্টারন্যাশনাল স্কুলের প্রিন্সিপাল কে।

এই ঘটনায় আতঙ্কে রয়েছে স্কুলের ছাত্র-ছাত্রীরা। আদালতে দাবি করলেন স্কুলের পক্ষ থেকে আইনজীবী। বিচারপতি ইন্দ্র মুখোপাধ্যায়ের ডিভিশন বেঞ্চ নির্দেশ দেন এখনই পুলিশি তলবে হাজিরার প্রয়োজনীয়তা নেই স্কুলের প্রিন্সিপা লের।আদালতের পরবর্তী নির্দেশ না আসা পর্যন্ত প্রিন্সিপালের হাজিরার প্রয়োজনীয়তা নেই। মামলার পরবর্তী শুনানি আগামী ১৭ই ডিসেম্বর।

File missing: হাইকোর্ট থেকে ‘ভ্যানিশ’ ফরেন্সিক রিপোর্ট ফাইল!

high court

নিউজ ডেস্ক, কলকাতা: মামলার ফাইলের হদিস (File missing) নেই। শুনানির দিন ধার্য থাকলেও মামলার ফাইল আসেনি এজলাসে। ফাইল কোথায় বিভাগীয় তদন্তের নির্দেশ রেজিষ্টার জেনারেল কে।

২০১২ সালে কল্লোল গুহ ঠাকুরতা ফরেনসিক পরীক্ষার বিলম্ব নিয়ে জনস্বার্থ মামলা দায়ের করেন। এর আগে শুনানির দিন থাকলেও সেদিনও এজলাসে মামলার ফাইল পাঠায়নি হাইকোর্টের ফাইল বিভাগ। শুক্রবার পুনরায় শুনানির দিন থাকলেও কোর্ট মাস্টার প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চকে জানায় আজও ফাইল পাওয়া যাচ্ছে না।

এরপরই প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চের নির্দেশ বিভাগীয় তদন্ত করে উপযুক্ত ব্যবস্থা নিতে হবে।

High Court: পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না আনার জন্য করোনা পরিস্থিতি কোনও কারণ হতে পারে না

petroleum products

নিউজ ডেস্ক, তিরুঅনন্তপুরম: প্রায় সব ধরনের পণ্যকেই জিএসটির (gst) আওতায় আনা হয়েছে। তাহলে পেট্রোল (petrol), ডিজেলের (disel) মত পেট্রোপণ্যকে কেন জিএসটির আওতায় আনা হল না। কেন্দ্রের কাছে এই প্রশ্নের জবাব চাইল কেরল হাইকোর্ট (High Court)।

পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না রাখার জন্য করোনা, (corona cituation) পরিস্থিতির কথা উল্লেখ করে জিএসটি কাউন্সিল। কিন্তু কাউন্সিলের এই বক্তব্যে স্পষ্টতই অসন্তোষ প্রকাশ করে কেরল হাইকোর্ট।

বৃহস্পতিবার কেরল হাইকোর্টের প্রধান বিচারপতি এস মণিকুমার এবং বিচারপতি শাহজি পি চালির বেঞ্চে পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় নিয়ে আসার বিষয়ে একটি মামলার শুনানি হয়।

এদিনের শুনানিতে জিএসটি কাউন্সিল আদালতকে জানায় করোনাজনিত কারণে বিষয়টি নিয়ে জিএসটি পরিষদের বৈঠকে আলোচনা হয়নি। কাউন্সিলের ওই বক্তব্যে দৃশ্যতই ক্ষোভ প্রকাশ করে বেঞ্চ। বেঞ্চের পক্ষ থেকে বলা হয়, করোনা পরিস্থিতি একটা অজুহাত মাত্র। পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না নিয়ে আসার বিষয়ে এটা কোনও কারণ হতে পারে না। কারণ করোনা পরিস্থিতির মধ্যেও কাউন্সিল বেশ কয়েকবার বৈঠক করেছে। ওই বৈঠকে বিভিন্ন পণ্যের উপর আরোপিত করের হার নিয়ে পর্যালোচনা হয়েছে। তাহলে কেন বাদ পড়ল পেট্রোল ডিজেল। কাউন্সিল যা বলছে এটা কখনওই কোনও কারণ হতে পারে না। আদালত জানতে চায়, পেট্রোপণ্যকে কী কারণে জিএসটির আওতায় আনা যাচ্ছে না।

আদালত বলে, পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না আনার বিষয়ে কিছু সুনির্দিষ্ট কারণ থাকা উচিত। আদালত সেই কারণগুলি জানতে চায়। ওই বক্তব্যের পর বেঞ্চ জিএসটি কাউন্সিলকে পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না আনার কারণ বিস্তারিত জানানোর জন্য নির্দেশ দেয়।

পেট্রোপণ্যের দাম বৃদ্ধি সম্পর্কে আদালতের পর্যবেক্ষণ, পেট্রোল-ডিজেলের সাম্প্রতিক অস্বাভাবিক দাম সাধারণ মানুষের জীবন বিশেষ করে নিম্ন আয়ের পরিবারগুলিকে চরম সঙ্কটে ফেলেছে। নষ্ট করেছে দেশের আর্থিক স্থিতিশীলতা। বেঞ্চ আরও বলে, পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না নিয়ে আসার কারণে সংবিধানের ১৪ ও ২১ নম্বর ধারা লংঘন করা হয়েছে। পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় না আনার জন্য করোনা পরিস্থিতিকেই ঢাল করেছে কাউন্সিল।

কিন্তু হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চ সেই দাবি খারিজ করে দিয়েছে। আদালত স্পষ্ট বলেছে, করোনা পরিস্থিতির জন্য পেট্রোপণ্যকে জিএসটির আওতায় আনা সম্বিভব হয়নি, এই যুক্তি হাস্যকর। এটা মেনে নেওয়া যায় না। কেন আনা হয়নি এ বিষয়ে পরিষদ উপযুক্ত কারণ দেখাক। ডিসেম্বরের দ্বিতীয় সপ্তাহে এই মামলার পরবর্তী শুনানি হবে বলে বেঞ্চ জানিয়েছে।

Calcutta High Court: জলাশয় ভরাট রুখতে হাইকোর্টে মামলা, সরকার অস্বস্তিতে

court order

News Desk: রাজ্যে যথেচ্ছ পুকুর ভরাট (illegal filling) বন্ধ করতে এবার অবসরপ্রাপ্ত বিচারপতির নেতৃত্বে কমিটি গড়ার আবেদন নিয়ে মামলা হলো হাইকোর্টে (Calcutta High Court)। 

বহরমপুরের একটি প্রায় এক বিঘার পুকুর গত কয়েকদিন ধরে বেআইনিভাবে বুজিয়ে ফেলার পরিপ্রেক্ষিতেই মামলা দায়ের হয়েছে। সেখানেই বিচারপতির নেতৃত্বে কমিটির দাবি তোলা হয়েছে।

মামলাকারীর বক্তব্য, ২০১১ সালে এমনভাবে বেআইনি পুকুর ভরাটের বিরুদ্ধে পদক্ষেপের জন্য রাজ্যকে হাই পাওয়ার কমিটি গড়ার নির্দেশ দিয়েছিল হাইকোর্ট। তার পরিপ্রেক্ষিতে পরের বছর শহর ও গ্রাম অঞ্চলে প্রতিটি থানা এলাকায় ওসি, ভূমি, মৎস্য দপ্তর সহ বিভিন্ন আধিকারিকদের রেখে কমিটি গড়ার নির্দেশ দেয় রাজ্য। অভিযোগ তা কার্যকর না থাকায় যথেচ্ছ পুকুর ভরাট হচ্ছে।

প্রধান বিচারপতির বেঞ্চে আইনজীবী শ্রীজীব চক্রবর্তী মামলাটি দ্রুত শোনার আবেদন করেন। পুরসভার তরফে আইনজীবী অরিন্দম দাস ওই আবেদনের পরে পুরসভার পদক্ষেপ করবে বলে আদালতেই আশ্বস্ত করেন।

গত কয়েকদিন ধরে দিনে রাতে ট্রাকে বোঝাই আবর্জনা এনে বহরমপুরের ওই জলাশয়টি ভরাট করা হচ্ছে বলে অভিযোগ। একই সঙ্গে তারা বলেন, এই ভাবে যাতে ভরাট না হয়, সে ব্যাপারে পুরসভা, পুলিশ, প্রশাসনকে এখনই নির্দেশ দিক আদালত। মামলাটির ৭ ডিসেম্বর শুনানির আশ্বাস দিয়েছে প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চ।

Alapan Banerjee: আলাপন মামলায় হাইকোর্টের নির্দেশে রাজনীতির রং পেয়েছে নয়াদিল্লি

Alapan Banerjee

নিউজ ডেস্ক: আলাপন বন্দ্যোপাধ্যায়ের (Alapan Banerjee ) বদলির নির্দেশের বিরুদ্ধে সুপ্রিম কোর্টে যে মামলা চলছে তাতে কেন্দ্রের পক্ষ থেকে দাবি করা হল, কলকাতা হাইকোর্টের নির্দেশে রয়েছে রাজনৈতিক প্রভাব (political influence)। এদিন কেন্দ্রের পক্ষে সলিসিটর জেনারেল তুষার মেহতা (Tushar Mehota) এই মন্তব্য করেছেন।

উল্লেখ্য, সেন্ট্রাল অ্যাডমিনিস্ট্রেটিভ ট্রাইবুনাল আলাপন বন্দ্যোপাধ্যায়ের মামলাটি দিল্লির প্রিন্সিপাল বেঞ্চে (principle bench) সরিয়ে নিয়ে যাওয়ার নির্দেশ দিয়েছিল। কিন্তু কলকাতা হাইকোর্ট সেই নির্দেশ খারিজ করে দেয়। হাইকোর্টের নির্দেশকে চ্যালেঞ্জ জানিয়ে সুপ্রিম কোর্টে যায় কেন্দ্র। কেন্দ্রের পক্ষ থেকে আগেই শীর্ষ আদালতে কলকাতা হাইকোর্টের এক্তিয়ার নিয়ে প্রশ্ন তোলা হয়েছিল। সেই মামলার শুনানিতে মেহতা এদিন বলেন, আলাপন মামলায় হাইকোর্টের নির্দেশে রয়েছে রাজনীতির রং ও প্রভাব। এ ধরনের পর্যবেক্ষণ এড়িয়ে চলাই উচিত।

অন্যদিকে, আলাপন বন্দ্যোপাধ্যায়ের হয়ে এই মামলায় সওয়াল করেন প্রবীণ আইনজীবী অভিষেক মনু সিংভি। যদিও সুপ্রিম কোর্টের বিচারপতি এ এম খানউইলকর ও বিচারপতি সিটি রবিকুমারের ডিভিশন বেঞ্চ সোমবার এই মামলার রায় দান। স্থগিত রাখে।

উল্লেখ্য, আলাপন মামলা কেন দিল্লির প্রিন্সিপাল বেঞ্চে সরানো হল তা জানতে চেয়েছিল কলকাতা হাইকোর্ট। রাজ্যের বিষয় দিল্লিতে পাঠানোর জন্য আপত্তি জানিয়েছিল হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চ। এমনকি হাইকোর্ট এটাও বলেছিল যে, আলাপন প্রকৃত ন্যায় বিচার পাচ্ছেন না। তাই আলাপনের মামলা দিল্লিতে সরানো যাবে না। আলাপন মামলা সরানোর এই নির্দেশ যুক্তরাষ্ট্রীয় কাঠামোর পরিপন্থী।

হাইকোর্টের ওই পর্যবেক্ষণের উত্তরে সলিসিটর জেনারেল সর্বোচ্চ আদালতে বলেন, এখানে যুক্তরাষ্ট্রীয় কাঠামোর কথা কোথা থেকে আসছে? ক্যাটের চেয়ারম্যান শুধু মামলাটি এক বেঞ্চ থেকে থেকে অন্য বেঞ্চে স্থানান্তর করেছেন। হাইকোর্টের পর্যবেক্ষণে রয়েছে রাজনীতির রং। অন্যদিকে আলাপনের আইনজীবী সিংভি বলেন, কলকাতা হাইকোর্টের পর্যবেক্ষণ কাউকে আঘাত করেনি। আলাপন পশ্চিমবঙ্গ ক্যাডারের আইএএস অফিসার। তিনি বরাবরই কলকাতাতেই কাজ করেছেন। অবসর গ্রহণের পর তিনি কলকাতাতেই থাকছেন। তাই এই মামলা অবশ্যই কলকাতাতেই থাকা উচিত। উভয় পক্ষের আইনজীবীর বক্তব্য শোনার পর দুই সদস্যের ডিভিশন বেঞ্চ সোমবার আলাপন মামলার রায় দান স্থগিত রাখেন।

Delhi High Court: বুস্টার ডোজ সরকার দেবে না কেন, কেন্দ্রের কাছে জবাবদিহি আদালতের

covid booster shot

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: করোনার মতো মারণব্যাধি প্রতিরোধ করতে কেন বুস্টার ডোজ (booster dose) দেওয়া হবে না, কেন্দ্রের কাছে তার জবাব চাইল দিল্লি হাইকোর্ট (Delhi High Court )। শুক্রবার আদালত স্পষ্ট জানায়, আর্থিক অবস্থা বিবেচনা করে কখনওই বুস্টার ডোজ দেওয়ার সিদ্ধান্ত নেওয়া ঠিক নয়। বুস্টার ডোজ সংক্রান্ত বিষয়ে যত শীঘ্র সম্ভব কেন্দ্রীয় সরকারকে (central goverment) তার মতামত জানাতে বলল হাইকোর্ট।

করোনা প্রতিরোধ করতে ইতিমধ্যেই আমেরিকা (America) ও ইউরোপের (Europe) কয়েকটি দেশে বুস্টার ডোজ দেওয়া শুরু হয়ে গিয়েছে। অন্যদিকে, ভারত সরকার চাইছে চলতি বছরের মধ্যেই দেশের প্রতিটি প্রাপ্তবয়স্ক মানুষকে টিকার দু’টি ডোজ দিতে। যদিও সরকার নিজের ঠিক করা সেই লক্ষ্যমাত্রা পূরণ করতে পারবে কিনা তা নিয়েও প্রশ্ন রয়েছে। চলতি পরিস্থিতিতে বুস্টার ডোজ নিয়ে মোদী সরকারকে নিজেদের বক্তব্য স্পষ্টভাবে জানাতে বলল দিল্লি হাইকোর্ট।

এদিন হাইকোর্টের বিচারপতি বিপিন সিংঘি এবং বিচারপতি জসমীত সিংয়ের ডিভিশন বেঞ্চে করোনা সংক্রান্ত একটি মামলার শুনানি হয়। এই মামলায় দুই বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চ বুস্টার ডোজ নিয়ে বিভিন্ন দেশের বিশেষজ্ঞদের মতামত খতিয়ে দেখেন। বেঞ্চ এদিন বলে, বুস্টার ডোজের বিষয়ে ভারতীয় বিশেষজ্ঞরা কোনও জোরদার সওয়াল করেননি। তবে পরিস্থিতি বিবেচনা করে দেখা যাচ্ছে রোগ প্রতিরোধ করতে হলে বুস্টার ডোজ আবশ্যিক।

আমরা জানি, বুস্টার ডোজ দেওয়া যথেষ্টই ব্যয়বহুল। তবে দেশের মানুষের পরিস্থিতির কথা বিবেচনা করে সকলকেই একেবারে বিনামূল্যেই বুস্টার ডোজ দিতে হবে। দেশের খুব কম মানুষই আছেন যারা এই বুস্টার ডোজ কিনবেন। সরকারের উচিত নয়, মানুষের আর্থিক অবস্থা খতিয়ে দেখে বুস্টার ডোজ দেওয়ার বিষয়ে সিদ্ধান্ত নেওয়া। যেহেতু বুস্টার ডোজ দেওয়ার খরচ অনেকটা বেশি সম্ভবত সে কারণেই সরকার এখনই বিষয়টি নিয়ে ভাবনাচিন্তা করছে না। যদিও এটা একেবারেই ঠিক নয়।

কারণ আমরা করোনার দ্বিতীয় ঢেউয়ের ভয়াবহতা দেখেছি। নতুন করে আমরা ফের এ ধরনের পরিস্থিতির মুখোমুখি হতে চাই না। সে কারণেই বুস্টার ডোজ দেওয়া আবশ্যিক। তাই সরকার জানাক, বুস্টার ডোজ দেওয়ার বিষয়ে তারা কী ভাবনাচিন্তা করছে।

একইসঙ্গে বেঞ্চ এদিন বলে, ভ্যাকসিনের বহু ডোজ অব্যবহৃত অবস্থায় পড়ে আছে। সেই সমস্ত ভ্যাকসিনের মেয়াদও দ্রুত শেষ হয়ে যাবে। তাই আরও জোর গতিতে টিকাকরণ করতে হবে।

শিশুদের টিকাকরণ নিয়েও দুই বিচারপতির বেঞ্চ এদিন মুখ খুলেছে। বিচারপতিরা বলেন, বিশ্বের বহু দেশে ইতিমধ্যেই শিশুদের টিকাকরণ চলছে। আমাদের দেশেও স্কুল-কলেজ খুলে গিয়েছে। তাই শিশুদের টিকাকরণও দ্রুত শুরু হওয়া দরকার। এ বিষয়ে সরকার কী ভাবছে তা আমাদের জানা দরকার।

মানহানির মামলায় নবাবের জবাব তলব করল বম্বে হাইকোর্ট

nawab malik

News Desk: এই মুহূর্তে গোটা দেশের নজর আরিয়ান খান (Ariyan khan) মামলার দিকে। আরও নির্দিষ্ট করে বললে বলতে হয় এই মামলায় মহারাষ্ট্রের মন্ত্রী নবাব মালিক (nawab Malik) বনাম এনসিবি অফিসার সমীর ওয়াংখেড়ের (Samir Wanghkhere) মধ্যে বাগযুদ্ধ খবরের শিরোনামে।

মন্ত্রী তথা এনসিপি নেতা নবাব প্রায় প্রতিদিনই সমীরের বিরুদ্ধে একের পর এক অভিযোগ করে চলেছেন। এ ঘটনায় নবাবের বিরুদ্ধে মানহানির মামলা দায়ের করেছেন সমীরের বাবা ধ্যানদেব ওয়াংখেড়ে (dhandeb)। মানহানির মামলায় নবাবের জবাব তলব করল বম্বে হাইকোর্ট (bombey highcourt)।

সোমবার বম্বে হাইকোর্টের বিচারপতি মাধব জামদারের (madhab jamder) অবকাশকালীন বেঞ্চ নবাবকে মঙ্গলবারের মধ্যে হলফনামা দিয়ে তাঁর বক্তব্য জানানোর নির্দেশ দিয়েছে। একইসঙ্গে বিচারপতি এদিন জানিয়েছেন, বুধবার এই মামলার পরবর্তী শুনানি হবে। এদিনের শুনানিতে বিচারপতি মাধব এনসিপি নেতা তথা রাজ্যের মন্ত্রীর উদ্দেশ্যে বলেন, আপনাকে আগামীকাল অর্থাৎ মঙ্গলবারের মধ্যেই জবাব দিতে হবে। আপনি তো টুইটারে সব প্রশ্নের জবাব দেন। তাহলে আদালতেও প্রশ্নের জবাব দিতে পারবেন। যদিও বিচারপতি এদিন ধ্যানদেবের বিরুদ্ধে নতুন করে কোনও মন্তব্য না করার জন্য নবাবের বিরুদ্ধে নির্দেশ জারি করেননি।

একদিনের শুনানিতে ধ্যানদেবের আইনজীবী আদালতে বলেন, মন্ত্রী নবাব মালিক প্রতিদিনই তাঁর মক্কেলের বিরুদ্ধে একের পর এক মানহানিকর মন্তব্য করছেন। পরবর্তী ক্ষেত্রে সোশ্যাল মিডিয়ায় ওই বিবৃতি পোস্ট করার পর আরও অনেকেই আপত্তিকর মন্তব্য করছেন। অন্যদিকে নবাবের আইনজীবী হলফনামা দাখিলের জন্য আদালতের কাছে সময় চান।

মন্ত্রীর আইনজীবী বলেন, ধ্যানদেব তাঁর প্রাপ্ত বয়স্ক সন্তানদের জন্য কখনওই কথা বলতে পারেন না। এমনকী, সোশ্যাল মিডিয়ায় কে কী মন্তব্য করছে তার জন্য মোটেও নবাবকে দায়ী করতে পারেন না। যদিও আদালত শেষ পর্যন্ত মন্ত্রীর আইনজীবীর বক্তব্য খারিজ করে দেয়। একইসঙ্গে মন্ত্রীকে মঙ্গলবারের মধ্যেই তাঁর বক্তব্য জানাতে নির্দেশ দিয়েছেন বিচারপতি।

উল্লেখ্য সমীরের বাবা ধ্যানদেব নবাবের বিরুদ্ধে ১ কোটি ২৫ লাখ টাকা ক্ষতিপূরণ চেয়ে মামলা করেছেন। একই সঙ্গে তিনি আদালতের কাছে আবেদন করেছিলেন, সোশ্যাল মিডিয়ায় বা সংবাদমাধ্যমের কাছে মন্ত্রী যেন তাঁর ছেলে বা পরিবারের বিরুদ্ধে কোনও মন্তব্য না করেন, সে জন্য নির্দেশ দেওয়া হোক। যদিও ধ্যানদেবের ওই আর্জি খারিজ করে দিয়েছেন বিচারপতি।

Aryan Khan: তিন দিনের শুনানি শেষে আরিয়ানকে জামিন দিল বম্বে হাইকোর্ট

Aryan Khan

News Desk: বম্বে হাইকোর্টে একটানা তিনদিন শুনানির চলার পর শেষ পর্যন্ত শেষহাসি হাসলেন শাহরুখ এবং তাঁর ছেলে আরিয়ান খান। বৃহস্পতিবার হাইকোর্ট আরিয়ানের জামিন মঞ্জুর করেছে। আদালতের নির্দেশে দীপাবলীর আগেই বাড়ি ফিরবেন শাহরুখ-গৌরির প্রথম সন্তান আরিয়ান। মাদক মামলায় একটানা ২৫ দিন জেলে রাত কাটানোর পর জামিন পেলেন আরিয়ান। আদালতের এদিনের নির্দেশে দীপাবলীর আগেই আলোর রোশনাই মন্নতে।

মঙ্গল এবং বুধবার পরপর দু’দিন হাইকোর্টে আরিয়ানের জামিনের শুনানি চললেও তা শেষ হয়নি। বৃহস্পতিবার দুপুরে হাইকোর্টে বিচারপতির এন সামব্রের এজলাস যথারীতি জামিনের শুনানি শুরু হয়। এদিন এনসিবির তরফে আইনজীবী অতিরিক্ত সলিসিটর জেনারেল অনিল সিং বক্তব্য পেশ করেন।

উভয় পক্ষের আইনজীবীর বক্তব্য শোনার পর বিচারপতি শেষ পর্যন্ত আরিয়ানের জামিন মঞ্জুর করেছেন। আদালতের নির্দেশ মেলায় মনে করা হচ্ছে শুক্রবার বিকেলে বা শনিবারে সকালেই মন্নতে ফিরতে চলেছেন আরিয়ান। আরিয়ানের সঙ্গে সঙ্গেই বিচারপতি এদিন আরবাজ মার্চেন্ট এবং মুনমুন ধমেচাকেও জামিন দিয়েছে। উল্লেখ্য চলতি মাসের ২ তারিখে মুম্বইয়ে গোয়াগামী প্রমোদতরী কর্ডেলিয়া থেকে আরিয়ানকে আটক করেছিল নারকোটিকস কন্ট্রোল ব্যুরে বা এনসিবি। দীর্ঘ ১৬ ঘণ্টা জেরা করার পর ৩ অক্টোবর এনসিবি আরিয়ানকে গ্রেফতার করে। নিম্ন আদালতে এর আগে একাধিকবার আরিয়ানের জামিনের আর্জি খারিজ হয়েছিল।

এনসিবি আদালতে জানিয়েছিল, আরিয়ানকে মুক্তি দেওয়া হলে তিনি যাবতীয় তথ্য প্রমাণ লোপাটের চেষ্টা চালাবেন। কারণ আরিয়ান একজন প্রভাবশালী ব্যক্তির পুত্র। অন্যদিকে আরিয়ানের আইনজীবী এনসিবির এই বক্তব্যকেই হাতিয়ার করেন। দেশের প্রাক্তন অ্যাটর্নি জেনারেল তথা আরিয়ানের আইনজীবী মুকুল রোহতাগি বলেন, আরিয়ান একজন বিশিষ্ট ব্যক্তির ছেলে। তাই তাঁকে জামিন দেওয়া হলে তিনি কখনই দেশ ছেড়ে পালিয়ে যাবেন না। আরিয়ানের পরিবারের একটা সম্মান আছে।

তাছাড়া এনসিবি এটা প্রমাণ করতে পারেনি যে, আরিয়ান মাদক সেবন করেছিলেন। তাই আরিয়ানকে জামিন দেওয়া হোক। আইনজীবীদের বক্তব্য শোনার পর বিচারপতি শেষ পর্যন্ত রোহতাগির মতামতকেই মান্যতা দেন। সে কারণে দীর্ঘ শুনানির পর বৃহস্পতিবার বিকেলে আরিয়ানের জামিন মঞ্জুর করে হাইকোর্ট। ২ নভেম্বর ৫৬ বছরে পা দিতে চলেছেন বলিউড তারকা শাহরুখ। জন্মদিনের আগেই ঘরে ফিরছে তাঁর বড় ছেলে আরিয়ান। তাই মন্নতে এবার শাহরুখের জন্মদিন যে যথেষ্টই ধুমধামের সঙ্গে পালন করা হবে তা না বললেও চলে। পাশাপাশি এবার মন্নতে ঢুকবে মিষ্টিও। কারণ শাহরুখের স্ত্রী গৌরী জানিয়েছিলেন, যতদিন না আরিয়ান বাড়ি ফিরছেন ততদিন মন্নতে মিষ্টি ঢুকবে না। তাঁরা কেউ মিষ্টি খাবেন না। এবার সেই প্রতীক্ষারও অবসান হল।

Bangladesh: দুর্গাপূজায় সাম্প্রদায়িক হামলার বিচারবিভাগীয় তদন্ত শুরু হচ্ছে

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News Desk: বাংলাদেশে দুর্গাপূজার সময় পাঁচ জেলায় সনাতন ধর্মাবলম্বীদের বাসস্থান ও উপাসনালয়ে হামলার ঘটনায় বিচার বিভাগীয় তদন্তের নির্দেশ দিল হাইকোর্ট। বিচারপতি মহ. মজিবুর রহমান মিয়া ও বিচারপতি মহ. কামরুল হোসেন মোল্লার বেঞ্চ আজ বৃহস্পতিবার এই আদেশ দেন।

গত ২১ অক্টোবর সারা দেশে সনাতন ধর্মাবলম্বীদের বাসস্থান ও উপাসনালয়ে হামলার ঘটনায় বিচার বিভাগীয় তদন্ত চেয়ে হাইকোর্টে রিট দায়ের করা হয়। রিটে হিন্দু সম্প্রদায়ের নিরাপত্তা নিশ্চিত করা, ক্ষতিগ্রস্তদের পুনর্বাসন ও ক্ষতিপূরণ দেওয়া এবং হিন্দু সম্প্রদায়কে নিরাপত্তা দিতে ব্যর্থ দোষী সরকারি কর্মকর্তাদের আদালতে হাজির করার নির্দেশ চাওয়া হয়।

রিট আবেদনে বাংলাদেশ সাম্প্রদায়িক সম্প্রীতি নষ্ট করে এমন সব ধরনের পোস্ট ও ভিডিও সামাজিক যোগাযোগ মাধ্যমসহ বিভিন্ন অনলাইন প্ল্যাটফর্ম থেকে অপসারণের নির্দেশ চাওয়া হয়েছে। বাংলাদেশ সুপ্রিম কোর্টের আইনজীবী অ্যাডভোকেট অনুপ কুমার সাহা ও মিন্টু চন্দ্র দাস এই রিট দায়ের করেন।

দুর্গাপূজার সময় কুমিল্লার একটি পূজামণ্ডপে কোরান শরিফ রেখে হামলা ছড়ানো হয়েছিল। এর জেরে পাঁচটি জেলায় সংখ্যালঘু হিন্দুদের উপর হামলা হয়। হামলা রুখতে পুলিশ গুলি চালায়। গুলিতে ৫ হামলাকারী মারা গেছে। হামলায় খুন হয়েছেন দুই সংখ্যালঘু।

তদন্তে নেমে পুলিশ গ্রেফতার করেছে পূজামণ্ডপে কোরান রেখে হামলা ছড়ানো ব্যক্তি ইকবাল হোসেনকে। আর ভুল ভিডিও দেখিয়ে সাম্প্রদায়িক উস্কানি ছড়ানোর অভিযোগে জেলে পাঠানো হয়েছে ঢাকার বদরুন্নেসা কলেজের অধ্যাপিকা রুমা সরকারকে।

ঘটনার পূর্ণাঙ্গ তদন্তের নির্দেশ দিয়েছেন প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনা। বাংলাদেশের স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী আসাদুজ্জামান খান কামাল বলেছেন, দুর্গাপূজায় হামলা পূর্ব পরিকল্পিত। দোষী কেউ ছাড় পাবে না।

হাইকোর্টে রিট আবেদনে স্বরাষ্ট্র সচিব, আইন সচিব, তথ্য, যোগাযোগ ও প্রযুক্তি সচিব, সমাজ কল্যাণ সচিব, পুলিশের মহাপরিদর্শক, বাংলাদেশ টেলিকমিউনিকেশন রেগুলেটরি কমিশনের (বিটিআরসি) চেয়ারম্যান, কুমিল্লা, চাঁদপুর, নোয়াখালী, চট্টগ্রাম, রংপুর ও ফেনীর জেলা প্রশাসক এবং পুলিশ সুপারসহ ১৯ জনকে বিবাদী করা হয়েছে।

বোম্বে হাইকোর্টেও জামিন পেলেন না আরিয়ান, বুধবারও শুনানি চলবে

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News Desk, Mumbai: দীর্ঘ শুনানি শেষে বম্বে হাইকোর্টেও জামিন পেলেন না শাহরুখ পুত্র আরিয়ান খান। বুধবারও আরিয়ানের জামিনের আর্জির শুনানি চলবে বলে জানিয়েছেন বিচারপতি।

মঙ্গলবার বিচারপতি এন ডব্লিউ সামব্রের এজলাসে আরিয়ানের জামিনের আর্জি শুনানি শুরু হয়। এনসিবির পক্ষে অতিরিক্ত সলিসিটর জেনারেল অনিল সিং আরিয়ানের জামিনের আর্জির বিরোধিতা করেন। তিনি বলেন, আরিয়ান যে শুধু নিজেই মাদক সেবন করতেন তা নয়, তিনি অবৈধ মাদক পাচারের সঙ্গেও যুক্ত ছিলেন। আরিয়ান এবং শাহরুখের ম্যানেজার পূজা দাদলানি বিভিন্ন তথ্য প্রমাণ লোপাটের চেষ্টা করেছেন। এমনকী, সাক্ষীদেরও প্রভাবিত করার চেষ্টা করেছেন তাঁরা। তাঁদের মূল উদ্দেশ্য ছিল তদন্তকে বিপথে চালনা করা।

অন্যদিকে শাহরুখপুত্র আরিয়ানের হয়ে আদালতে সওয়াল করেন প্রাক্তন অ্যাটর্নি জেনারেল মুকুল রোহতাগি। তিনি বলেন, মুম্বইয়ের গোয়াগামী প্রমোদতরীতে আরিয়ান খান কোনও ক্রেতা ছিলেন না। তিনি একজন বিশেষ অতিথি হিসেবে আমন্ত্রিত ছিলেন। প্রদীপ গাবা নামে এক ব্যক্তি তাঁকে আমন্ত্রণ জানিয়েছিলেন। প্রদীপ ছিলেন একজন ইভেন্ট ম্যানেজার। আরিয়ানের সঙ্গেই প্রদীপ আমন্ত্রণ জানিয়েছিলেন আরবাজকে। আমন্ত্রিত হওয়ায় ওই দুইজনকে ক্রুজে চড়ার জন্য কোনও টিকিট কিনতে হয়নি। ৩ অক্টোবর তাঁরা বিকেল সাড়ে চারটে নাগাদ ওই ক্রুজ টার্মিনালে গিয়ে পৌঁছেছিলেন।

রোহতাগি আরও বলেন, সবকিছু দেখে শুনে মনে হচ্ছে এনসিবির কাছে আগে থাকতেই খবর ছিল যে, ওই প্রমোদতরীতে ড্রাগ উঠবে। সে কারণেই তারা আগে থাকতেই সেখানে পৌঁছে গিয়েছিল। আরিয়ান এবং আরবাজ সহ আরও অনেকেই

সেদিন গ্রেফতার হয়েছিল। কিন্তু আরিয়ানের কাছ থেকে কোনও কিছুই উদ্ধার হয়নি। আরিয়ানের কোনও মেডিক্যাল চেকআপও করা হয়নি। মেডিক্যাল চেকআপ না হওয়ায় প্রমাণ হয়নি যে, আরিয়ান মাদক সেবন করেছিলেন। এনসিবি দাবি করেছে, আরবাজের জুতোর ভেতর থেকে ছয়গ্রাম মাদক পাওয়া গিয়েছে। যদিও আরবাজ সে কথা অস্বীকার করেছে। এটা এনসিবির পরিকল্পনা কিনা সে বিষয়ে আমি নিশ্চিত নই।

উভয় পক্ষের আইনজীবীর বক্তব্য শোনার পর বিচারপতি সামব্রে অবশ্য এদিন আরিয়ানের জামিন মঞ্জুর করেননি। বরং বিচারপতি জানিয়েছেন, বুধবারও তিনি এই মামলার সওয়াল শুনবেন। বুধবার আরিয়ান জামিন পান কিনা এখন গোটা দেশের নজর সেদিকেই।

তবে আরিয়ান এদিন জামিন না পেলেও তার সঙ্গেই গ্রেফতার হওয়া আভিন সাহু এবং মণীশ রাজগাড়িয়া নামে দুই ব্যক্তির জামিন মঞ্জুর করেছে বিশেষ এনডিপিএস আদালত। মুম্বইয়ের প্রমোদতরীর মাদক মামলায় এই প্রথম কোনও ধৃতের জামিন মঞ্জুর হল।