Jalpaiguri: नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप, ट्यूशन शिक्षक गिरफ्तार

Outrage in Jalpaiguri: Tuition Teacher Held for Alleged Sexual Assault on Class 7 Student

जलपाईगुड़ी, 13 जून 2025: उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी (Jalpaiguri) जिले के भक्तिनगर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोप ने गुरुवार रात को तनाव पैदा कर दिया। आरोप है कि 44 नंबर वार्ड में एक ट्यूशन शिक्षक, अमर दास ने सातवीं कक्षा की एक छात्रा के साथ ट्यूशन के बहाने यौन उत्पीड़न किया। घटना सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़िता के परिवार ने उग्र होकर शिक्षक के घर पर हमला बोल दिया। भक्तिनगर थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी अमर दास को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को उसे जलपाईगुड़ी जिला अदालत में पेश किया गया।

Read Bengali: Jalpaiguri: নাবালিকার যৌন নির্যাতনের অভিযোগে গৃহশিক্ষক গ্রেফতার

परिवार के अनुसार, पीड़िता का परिवार डेढ़ साल पहले 44 नंबर वार्ड के एक इलाके में किराए के मकान में रहने आया था। स्थानीय स्तर पर अमर दास के ट्यूशन की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपनी बेटी को वहां पढ़ने के लिए भेजा। आरोप है कि गुरुवार दोपहर ट्यूशन के लिए नाबालिग अमर दास के घर गई। ट्यूशन खत्म होने के बाद अन्य छात्रों को छुट्टी देने के बाद, अमर दास ने नाबालिग को अकेले रखकर उसके कपड़े उतारकर यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता घर लौटने पर रोते हुए परिवार को पूरी घटना बताई। परिवार का आरोप है कि यह पहली घटना नहीं थी; इससे पहले भी अमर दास ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न किया था और उसे चुप रहने के लिए हत्या की धमकी दी थी।

घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता का परिवार और स्थानीय लोग अमर दास के घर पहुंचे और उसकी पिटाई की। सूचना मिलने पर भक्तिनगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित कर आरोपी को हिरासत में लिया। परिवार की लिखित शिकायत के आधार पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अमर दास को गिरफ्तार किया गया। शुक्रवार को उसे जलपाईगुड़ी जिला अदालत में पेश किया गया, जहां जज ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की।

पीड़िता के एक रिश्तेदार ने कहा, “हमने सोचा था कि शिक्षक के पास हमारी बेटी सुरक्षित रूप से पढ़ाई करेगी। लेकिन ऐसी जघन्य घटना की कल्पना भी नहीं की थी। हम कठोर सजा की मांग करते हैं।” स्थानीय निवासियों ने भी इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया और आरोपी के लिए कड़ी सजा की मांग की।

भक्तिनगर थाने की पुलिस ने बताया कि जांच शुरू हो चुकी है और पीड़िता को शारीरिक जांच के लिए जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहे हैं। आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

इस घटना ने जलपाईगुड़ी जिले में व्यापक हड़कंप मचा दिया है। शिक्षक जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किया गया यह कृत्य समाज में शिक्षा के प्रति विश्वास को कमजोर कर रहा है। स्थानीय लोग इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़े कदम और जागरूकता की मांग कर रहे हैं।

HSBC Bank को बम की धमकी: जांच में फर्जी साबित हुआ

Police Declare Bomb Threat at HSBC Bank in Bengaluru as Fake

बेंगलुरु के ट्रिनिटी सर्कल स्थित HSBC बैंक को बुधवार को एक ईमेल के जरिए बम धमकी मिली। पुलिस ने बताया कि इस धमकी के बाद बैंक परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। हालांकि, किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता नहीं चला और इसे फर्जी धमकी घोषित किया गया। यह जानकारी डीसीपी ईस्ट डिवीजन, बेंगलुरु ने दी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जैसे ही धमकी भरा ईमेल मिला, पुलिस तुरंत हरकत में आई। बैंक के सभी कर्मचारियों और ग्राहकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने बैंक के हर कोने की गहन जांच की।

डीसीपी ईस्ट डिवीजन ने कहा,

“ट्रिनिटी सर्कल स्थित HSBC बैंक को बम धमकी वाला ईमेल मिला। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच की। कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, और इसे फर्जी धमकी घोषित किया गया।”

धमकी से फैला डर
बम धमकी की खबर से बैंक और उसके आस-पास के इलाके में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने घबराहट में बैंक छोड़ दिया। पुलिस ने आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी और स्थिति को नियंत्रण में रखा।

फर्जी धमकी की जिम्मेदारी
फर्जी बम धमकी न केवल जनता में डर पैदा करती है, बल्कि पुलिस और प्रशासनिक संसाधनों का दुरुपयोग भी करती है। पुलिस ने कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदार हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी
साइबर सेल के सहयोग से ईमेल भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह काम किसी व्यक्ति का है या किसी संगठन का। जांच में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में इस तरह की घटनाएं प्रशासन के लिए एक चुनौती हैं। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई कर स्थिति को संभाला। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

Newsclick case: न्यूजक्लिक केस में सीताराम येचुरी के घर भी पहुंची दिल्ली पुलिस

Delhi Police's Investigation in Newsclick Case Extends to Sitaram Yechury's Residence

चीन से कथिक फंडिंग लेने के आरोप में मंगलवार (3 अक्टूबर) को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ऑनलाइन पोर्टल न्यूजक्लिक (Newsclick case) से जुड़े 30 परिसरों पर छापेमारी की। इसके साथ ही पुलिस ने न्यूजक्लिक से जुड़े पत्रकारों के घरों में भी तलाशी ली। इसी केस के सिलसिले में सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी के घर भी दिल्ली पुलिस पहुंची।

येचुरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करके बताया कि उनके घर पुलिस क्यों आई थी।वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस की छापेमारी में सीपीआई (एम) का कोई हाथ नहीं है। येचुरी ने कहा कि दिल्ली पुलिस हमारे घर पहुंची है क्योंकि हमारी पार्टी के साथी हमारे साथ रहते हैं जिनका बेटा न्यूजक्लिक में काम करता है। यह छापा क्यों मार रहे, इसका कारण क्या है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

येचुरी ने आगे कहा कि पुलिस बता भी नहीं रही है कि यह सब क्यों कर रहे हैं? हम चाहते हैं कि पुलिस स्पष्टिकरण दें। यह मीडिया, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। इन्हीं वजह से दुनिया के प्रेस इंडेक्स में (भारत की) लगातार गिरावट होती जा रही है। दूसरी तरफ से प्रचार होता है कि हम लोकतंत्र की जननी है।

Helicopter Crashed: রাওয়াতের মৃত্যুর তদন্ত রিপোর্ট যেন সরকার গোপন না করে: প্রাক্তন সেনাপ্রধান

General bipin rawat's death investigation

News Desk: বুধবার দুপুরে চিফ অফ ডিফেন্স স্টাফ বিপিন রাওয়াতকে নিয়ে ওড়া একটি এমআই-১৭ভি ৫ হেলিকপ্টার (Helicopter Crashed) ভেঙে পড়ে। কীভাবে এই দুর্ঘটনা ঘটল তা নিয়ে প্রাক্তন সেনা কর্তারা মতামত ব্যক্ত করেছেন।

অবসরপ্রাপ্ত সেনা কর্তা কর্নেল রাজেন্দ্র ভাদুড়ি বলেছেন, এমআই-১৭ভি হেলিকপ্টারটি যথেষ্ট অত্যাধুনিক ও উন্নতমানের তারপরেও এই কপ্টার কীভাবে ভেঙে পড়ল তা তদন্ত করে দেখা প্রয়োজন। সাধারণত ওড়ার আগে প্রতিটি কপ্টারের সবকিছু পরীক্ষা করে দেখা হয়। তার উপর যদি কোনও ভিআইপি ব্যক্তি কপ্টারে সফর করেন তাহলে সেই পরীক্ষা আরও বেশি সতর্কতার সঙ্গে করা হয়। কিন্তু তারপরেও কীভাবে রাওয়াতকে নিয়ে ওড়া কপ্টারটি ভেঙে পড়ল তা জানা দরকার।

তিনি বলেন, সাধারণত নানা কারণে একটি বিমান বা কপ্টার দুর্ঘটনার মুখে পড়তে পারে। যার মধ্যে রয়েছে যান্ত্রিক ত্রুটি, দৃশ্যমানতা অভাব, আবহাওয়ার পরিবর্তন প্রভৃতি। তবে ওড়ার আগে পাইলটদের আবহাওয়া সম্পর্কে সর্বশেষ পরিস্থিতি জানানো হয়। এদিন তামিলনাড়ুর আবহাওয়া আদৌ খারাপ ছিল না। তাই কী কারণে রাওয়াতকে নিয়ে ওড়া কপ্টারটি ভেঙে পড়ল তা জানতে উপযুক্ত তদন্ত হওয়া দরকার।

নাশকতার গন্ধ
প্রাক্তন সেনা কর্তা কর্নেল সব্যসাচী বাগচি এদিন দুর্ঘটনা নিয়ে তাঁর প্রতিক্রিয়া জানিয়েছেন। তিনি বলেছেন, রাশিয়ার তৈরি এই এমআই-১৭ কপ্টারটি অত্যন্ত উন্নতমানের। যে কোনও প্রতিকূল পরিস্থিতিতেও এই কপ্টার উড়তে পারে। তাই কীভাবে এই দুর্ঘটনা ঘটল তা বোঝা যাচ্ছে না। যতক্ষণ না তদন্ত শেষ হয় ততক্ষণ জানা যাবে না দুর্ঘটনার প্রকৃত কারণ। যান্ত্রিক ত্রুটির কারণেও দুর্ঘটনা ঘটতে পারে। তবে এই ধরনের দুর্ঘটনার পিছনে নাশকতার সম্ভাবনা একেবারে উড়িয়ে দেওয়া যায় না।

তিনি বলেন, সম্প্রতি ভারত পাক সীমান্তের অভ্যন্তরে ড্রোনের মাধ্যমে অস্ত্রশস্ত্র পাঠানোর ঘটনা বেড়েছে। এক্ষেত্রে ড্রোনের মাধ্যমে এই কপ্টারটির উপর আক্রমণ চালানো হয়েছে কিনা তা তদন্ত করে দেখা দরকার। এদিনের দুর্ঘটনার প্রকৃত কারণ জানতে তদন্ত শেষ না হওয়া পর্যন্ত অপেক্ষা করতে হবে বলে মনে করেন কর্নেল বাগচি।

তদন্তের অপেক্ষা
চিফ অফ ডিফেন্স স্টাফ বিপিন রাওয়াতের কপ্টার দুর্ঘটনা নিয়ে মুখ খুলেছেন প্রাক্তন গ্রুপ ক্যাপ্টেন অবসরপ্রাপ্ত সেনা কর্তা আর কে দাস। ক্যাপ্টেন দাস বলেছেন, দুর্ঘটনা কখনও বলেকয়ে আসে না এটা ঠিক। যান্ত্রিক ত্রুটি, পাইলটের কোন ত্রুটি যে কোনও কারণেই এই দুর্ঘটনা ঘটতে পারে। দুর্ঘটনা ঘটতে পারে প্রাকৃতিক কারণেও। সাধারণত যখন কোনও কপ্টার আকাশে ওড়ে তখন সব পরিস্থিতির উপর পাইলটরা কড়া নজর রাখেন। যদি আবহওয়া প্রতিকূল থাকতো তাহলে পাইলট কোনওভাবেই একজন ভিআইপি ব্যক্তিকে নিয়ে ওড়ার ঝুঁকি নিতেন না। তাই আজকের দুর্ঘটনা কী কারনে সেটা এখনও পর্যন্ত স্পষ্ট নয়। যদি যান্ত্রিক ত্রুটির কারণে এই দুর্ঘটনা ঘটে থাকে তবে সেটা অত্যন্ত দুঃখজনক। খুবই আশ্চর্যের। কারণ ওড়ার অনুমতি দেওয়ার আগে বিমান বা কপ্টার সম্পূর্ণ পরীক্ষা করে দেখা হয়। বিশেষ করে ভিআইপি থাকলে তো কথাই নেই। তাই কি কারণে এই দুর্ঘটনা তা জানতে তদন্ত শেষ না হওয়া পর্যন্ত অপেক্ষা করতে হবে।

টাকার অভাব বললে হবে না
দুর্ঘটনা প্রসঙ্গে অবসরপ্রাপ্ত ব্রিগেডিয়ার প্রবীর সান্যাল বলেছেন, রাশিয়ার তৈরি এই এমআই-১৭ কপ্টারটি যথেষ্ট আধুনিক মানের। তবে সময় আরও অনেক এগিয়ে গিয়েছে। আরও অত্যাধুনিক ও উন্নত মানের কপ্টার বাজারে এসেছে। সেনাবাহিনীর উচিত এ ধরনের সর্বাধুনিক প্রযুক্তির বিমান বা কপ্টার ব্যবহার করা। এটা মনে রাখতে হবে যে, সেনাবাহিনীর সদস্যদের সব সময় অনেক ঝুঁকিপূর্ণ পরিবেশে কাজ করতে হয়। তাই তাঁরা যাতে সর্বাধুনিক জিনিসপত্র পান সে বিষয়টি নিশ্চিত করা দরকার। কিন্তু যখনই কোনও অত্যাধুনিক যুদ্ধাস্ত্র বা বিমান কেনার কথা ওঠে তখন সরকারের পক্ষ থেকে বলা হয় টাকা নেই। অথচ বিভিন্ন সরকারি ও রাজনৈতিক অনুষ্ঠানে খোলামকুচির টাকা খরচ করা হয়। এটা ঠিক নয়। যারা দেশের প্রতিরক্ষার কাজ করছেন সবার আগে তাঁদের নিরাপত্তার বিষয়টি নিশ্চিত করা দরকার।

কেন আগুন ?
কপ্টার দুর্ঘটনা নিয়ে তাঁর প্রতিক্রিয়া জানাতে গিয়ে ব্রিগেডিয়ার পৃথ্বীরঞ্জন দাস বলেছেন, এমআই-১৭-এর মত অত্যাধুনিক কপ্টার কেন দুর্ঘটনার মুখে পড়ল সবার আগে সেটা তদন্ত করে দেখা দরকার। কারণ এই অত্যাধুনিক কপ্টারটি মরুঝড় বা সমুদ্র উপকূলের ঝড়ো হাওয়ার মধ্যে অনায়াসে উড়তে পারে। এমনকি, আলো কমে এলেও এই কপ্টারের উড়তে কোনও সমস্যা হয় না। এদিনের কপ্টার দুর্ঘটনার পিছনে নিরাপত্তায় কোনও গাফিলতি ছিল একথা মানতে রাজি নন পৃথ্বীরঞ্জন।

তিনি বলেন, সুলুর থেকে ওয়েলিংটন মাত্র ২০ মিনিটের যাত্রাপথ। তাই চিফ অফ ডিফেন্স স্টাফের কপ্টারের সঙ্গে আর কোনও কপ্টার ওড়েনি। দ্বিতীয় কোনও কপ্টার না থাকার বিষয়টিকে নিরাপত্তার গাফিলতি বলে মানতে রাজি নন তিনি। বরং তিনি পাল্টা প্রশ্ন তুলেছেন, বিমানটিতে কেন আগুন ধরল তা জানা দরকার। আগুন এর পিছনে কোনও নাশকতা আছে কিনা তা নিয়ে সন্দেহ প্রকাশ করেছেন পৃথ্বীরঞ্জন।

রিপোর্ট প্রকাশ করুক সরকার
বিপিন রাওয়াতের হেলিকপ্টার দুর্ঘটনা নিয়ে মুখ খুলেছেন প্রাক্তন সেনাপ্রধান শঙ্কর রায়চৌধুরী। তিনি বলেন, ঠিক কোথায় ভুল বা ত্রুটি হয়েছিল, কী কারণে এই দুর্ঘটনা ঘটল সবকিছুই প্রকাশ্যে আনা উচিত। কারণ চিফ অফ ডিফেন্স স্টাফের মত একজন ব্যক্তির হেলিকপ্টার দুর্ঘটনার কারণ যদি প্রকাশ করা না হয় তাহলে হাজারো প্রশ্ন উঠবে। অনেকেই বিভিন্ন ধরনের গুজব ছড়াবেন। সেটা কখনওই কাম্য নয়। সেনার পক্ষেও সেটা ভাল হবে না। সরকার যদি এই দুর্ঘটনার কারণ গোপন রাখে তবে মানুষের মনে সন্দেহের উদ্রেক হবে। তাই আমি মনে করি, সেনার সঙ্গে আলোচনা করে সরকারের উচিত যত শীঘ্র সম্ভব এই দুর্ঘটনার রিপোর্ট প্রকাশ করা। যত শীঘ্র সম্ভব বললেও প্রাক্তন সেনাপ্রধান নির্দিষ্ট করে কোনও সময়সীমার কথা বলতে চাননি। তবে প্রাক্তন সেনা প্রধান শঙ্কর রায়চৌধুরী আশা করছেন, কী কারণে এই দুর্ঘটনা ঘটল তা সহজেই জানা যাবে।

সমীরসহ এনসিবির কয়েকজন আধিকারিকদের বিরুদ্ধে তদন্ত শুরু করছে মুম্বই পুলিশ

Sameer Wankhede

News Desk:মুম্বইয়ের প্রমোদতরীর মাদক মামলার রহস্য যেন জটিল থেকে জটিলতর হচ্ছে। প্রতিদিনই বদলে যাচ্ছে মামলার গতিপ্রকৃতি। ইতিমধ্যেই এই মামলার তদন্তকারী অফিসার সমীর ওয়াংখেড়ের (Sameer Wankhede) বিরুদ্ধে ঘুষ নেওয়ার অভিযোগ উঠেছে। ঘুষ নেওয়ার অভিযোগে সমীর-সহ এনসিবির আরও কয়েকজন অফিসারের বিরুদ্ধে তদন্ত শুরু করতে চলেছে মুম্বই পুলিশ। এজন্য চার সদস্যের একটি দল গঠন করা হয়েছে।

মুম্বই পুলিশের এক শীর্ষকর্তা জানিয়েছেন, চারটি পৃথক তোলাবাজির অভিযোগে শীঘ্রই তদন্ত শুরু হচ্ছে। এই চারটি পৃথক মামলার তদন্তের জন্য চারজনকে দায়িত্ব দেওয়া হয়েছে। এনসিবির মাদক মামলার অন্যতম গুরুত্বপূর্ণ সাক্ষী প্রভাকর সইল, কনিষ্ক জৈন, আইনজীবী সুধা দ্বিবেদী এবং নীতিন দেশমুখ চারটি তোলাবাজির অভিযোগ দায়ের করেছেন। ওই চারজন আলাদাভাবে ওই চার অভিযোগের তদন্ত করবে। এই অভিযোগের প্রেক্ষিতে মুম্বই পুলিশ ইতিমধ্যেই প্রভাকরের বক্তব্য রেকর্ড করেছে।

এই চারটি অভিযোগের তদন্তকারী অফিসারদের নামও এদিন জানানো হয়েছে। তদন্তকারীরা হলেন মুম্বইয়ের সহকারী পুলিশ কমিশনার মিলিন্দ খেতলে, পরিদর্শক অজয় সাওয়ান্ত , পিআই কারকরে এবং সাব-ইন্সপেক্টর প্রকাশ গাওয়ালী। এই তদন্তকারীদের যদি অতিরিক্ত সাহায্যের প্রয়োজন হয় সেক্ষেত্রে পুলিশ কমিশনার তাঁদের সাহায্য করবেন।

উল্লেখ্য, সমীরের বিরুদ্ধে ওঠা অভিযোগগুলির তদন্ত করতে এনসিবির ৫ সদস্যের একটি দল বুধবারই দিল্লি থেকে মুম্বই এসেছে। দিল্লি থেকে আসা ওই অফিসাররা বুধবার সমীরকে প্রাথমিক জিজ্ঞাসাবাদও করেছেন বলে খবর। যদিও আরিয়ান খান মামলার তদন্তভার এখনই সমীরের কাছ থেকে সরিয়ে নেওয়া হচ্ছে না বলেই জানা গিয়েছে। বরং এনসিবির শীর্ষকর্তা জ্ঞানেশ্বর সিং স্পষ্ট জানিয়েছেন, সমীরের বিরুদ্ধে ওঠা অভিযোগ প্রমাণ না হওয়া পর্যন্ত আরিয়ান মামলার তদন্তভার তাঁর হাতেই থাকবে।

উল্লেখ্য, মুম্বইয়ের প্রমোদতরীতে তল্লাশি অভিযান ও আরিয়ানকে গ্রেফতার করার নেতৃত্বে ছিলেন সমীর। মাদক মামলায় আরিয়ানকে গ্রেফতার করে রাতারাতি নায়ক বনে গিয়েছিলেন তিনি। কিন্তু ঘুষ নেওয়ার অভিযোগ ওঠায় সমীর এখন যথেষ্টই ব্যাকফুটে।

Pegasus: জাতীয় নিরাপত্তাকে অগ্রাধিকার দিয়ে পেগাসাস কাণ্ডে তদন্তের নির্দেশ সুপ্রিম কোর্টের

Pegasus case

Political Desk, New Delhi: শেষ পর্যন্ত নরেন্দ্র মোদি সরকারকে বিপাকে ফেলে পেগাসাস (Pegasus case) কাণ্ডের পূর্ণাঙ্গ তদন্তের নির্দেশ দিল সুপ্রিম কোর্ট। শুধু তদন্তের নির্দেশ দেওয়াই নয়, তদন্ত করার জন্য তিন সদস্যের একটি কমিটিও তৈরি করেছে শীর্ষ আদালত। দেশের প্রধান বিচারপতি এনভি রামান্নার নেতৃত্বাধীন বেঞ্চে বুধবার সকালে পেগাসাস মামলার শুনানি শুরু হলে এই নির্দেশ জারি হয়।

শুনানি শুরু হওয়ার পরই প্রধান বিচারপতি বলেন, সবার আগে দেশের নিরাপত্তা। তথ্যের গোপনীয়তা রক্ষা করা অবশ্যই দরকার। এটা কেন্দ্রের দায়িত্ব। কেন্দ্র কোনওভাবেই তার দায় এড়াতে পারে না। সেই কাজ ঠিক পথে এগোচ্ছে কিনা তা জানতে তিন সদস্যের একটি কমিটি গঠন করার কথা বলে বেঞ্চ।

সুপ্রিম কোর্টের বেঞ্চ এদিন জানিয়েছে, তিন সদস্যের এই কমিটিতে থাকছেন শীর্ষ আদালতের প্রাক্তন বিচারপতি আর ভি রবীচন্দ্রন ও দুই সাইবার বিশেষজ্ঞ অলোক জোশি এবং সন্দ্বীপ ওবেরয় । কমিটির নেতৃত্ব দেবেন প্রাক্তন বিচারপতি রবীচন্দ্রন।

এদিন এই নির্দেশ জারি করার আগে মোদি সরকারকে কড়া ভাষায় তিরস্কার করেন প্রধান বিচারপতি। তিনি বলেন, পেগাসাস নিয়ে সবকিছু জানানোর জন্য কেন্দ্রকে যথেষ্ট সময় দেওয়া হয়েছে। কিন্তু পেগাসাস কাণ্ড নিয়ে এখনও পর্যন্ত কেন্দ্র কোন তথ্য প্রমাণ পেশ করেনি। ব্যক্তি গোপনীয়তার অধিকার রক্ষা করা অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ বিষয়। বিশেষ কোন ব্যক্তির নয়, দেশের প্রতিটি নাগরিকের গোপনীয়তা রক্ষার বিষয়টি খুবই গুরুত্বপূর্ণ। তাই আদালত এ বিষয়ে চুপ করে বসে থাকতে পারে না। পেগাসাস নিয়ে যারা আবেদন করেছেন তারা অনেকেই আড়ি কাণ্ডের শিকার হয়েছেন বলে প্রধান বিচারপতি জানান। এরপর রামান্না মন্তব্য করেন, এ ব্যাপারে উপযুক্ত তদন্ত হওয়া উচিত।  এই নির্দেশ জারির পাশাপাশি শীর্ষ আদালতের বেঞ্চ জানিয়েছে, ৮ সপ্তাহ পর পেগাসাস মামলার শুনানি হবে।

পেগাসাস কাণ্ডকে চ্যালেঞ্জ করে যারা সুপ্রিম কোর্টে আবেদন করেছেন তাদের মধ্যে রয়েছেন সিপিএমের রাজ্যসভার সাংসদ জন ব্রিটন এবং আইনজীবী মনোহরলাল শর্মা। আবেদনকারীদের মধ্যে আছেন বিশিষ্ট সাংবাদিক এন রাম ও শশী কুমার। পাশাপাশি পেগাসাস মামলার তদন্তের দাবি জানিয়েছে এডিটর গিল্ডস অফ ইন্ডিয়া। অনেকেই মনে করছেন, এদিনের সুপ্রিম নির্দেশে নরেন্দ্র মোদি সরকারকে অবশ্যই বেকায়দায় পড়তে হবে। কারণ মোদি সরকার কিছুতেই পেগাসাস নিয়ে সরকারের অবস্থান স্পষ্ট করেনি। কিন্তু তদন্ত কমিটির সামনে এবার সেই বিষয়টি প্রকাশ হবে।

লখিমপুরের ঘটনার তদন্তকে কি আপনারা ছেলেখেলা মনে করছেন, যোগী সরকারকে প্রশ্ন প্রধান বিচারপতির

Lakhimpurkheri

নিউজ ডেস্ক: লখিমপুর খেরির ঘটনায় উত্তর প্রদেশ সরকারকে ফের তীব্র ভৎসনা করল সুপ্রিম কোর্ট। ৩ অক্টোবর লখিমপুরে ৪ কৃষক সহ ৮ জনের মৃত্যু নিয়ে উত্তর প্রদেশ সরকারের তদন্তে শীর্ষ আদালত যে খুশি নয় সে কথা আগেই জানিয়েছে। এবার লখিমপুরের ঘটনায় রিপোর্ট জমা দিতে দেরি করায় তীব্র অসন্তোষ প্রকাশ করল সর্বোচ্চ আদালত। বুধবারের শুনানিতে শীর্ষ আদালতের বেঞ্চ উত্তরপ্রদেশ সরকারকে লক্ষ্য করে বলে, “দয়া করে এবার আপনারা পা ঘষে চলার অনুভূতিটা বাদ দিন।”

৩ অক্টোবর উত্তরপ্রদেশের লখিমপুরে আন্দোলনরত কৃষকদের উপর বিজেপি নেতা তথা কেন্দ্রীয় মন্ত্রী অজয় মিশ্রর ছেলে আশিস মিশ্র গাড়ি চালিয়ে দেওয়ায় ৪ কৃষক সহ ৮ জনের মৃত্যু হয়। সেই ঘটনায় জনস্বার্থ মামলার দ্বিতীয় দিনের শুনানি ছিল বুধবার।

এদিন শুনানি শুরু হলে লখিমপুরের ঘটনার রিপোর্ট দেরিতে জমা দেওয়ার জন্য শীর্ষ আদালতের বেঞ্চ উত্তরপ্রদেশ সরকারকে তীব্র ভৎসনা করে। প্রধান বিচারপতি এনভি রামান্না বলেন, “আমরা রিপোর্টের জন্য মঙ্গলবার রাত ১টা অবধি অপেক্ষা করেছি। কিন্তু কোনও রিপোর্টই জমা পড়েনি। আপনারা কি বিষয়টাকে ছেলেখেলা মনে করছেন। ” বিচারপতি হিমা কোহলি বলেন, “আমাদের মনে হচ্ছে আপনারা পা ঘষে চলছেন। দয়া করে এই মনোভাব ছাড়ুন।”

প্রধান বিচারপতির প্রশ্নের জবাবে যোগী আদিত্যনাথ সরকারের আইনজীবী হরিশ সালভে বলেন, বুধবার এই রিপোর্ট জমা দেওয়া হয়েছে। সালভের ওই বক্তব্যের সঙ্গে সঙ্গেই প্রধান বিচারপতি ফের প্রশ্ন করেন, “যদি শুনানি শুরু হওয়ার কয়েক মিনিট আগে আপনারা রিপোর্ট জমা দেন, তবে আমরা ওই রিপোর্ট কীভাবে পড়ব? শুনানির অন্তত একদিন আগে রিপোর্ট জমা দেবেন, এটা তো আশা করা যায়। আমরা তো মুখ বন্ধ খামে রিপোর্ট চাইনি।” রিপোর্ট জমা দিয়ে আইনজীবী সালভে শুক্রবার শুনানির জন্য আবেদন জানান। প্রধান বিচারপতি অবশ্য সাফ জানিয়ে দেন, তাঁরা আজই রিপোর্ট পড়বেন। ২৬ অক্টোবর এই মামলার পরবর্তী শুনানি রয়েছে।

ওই দিন রাজ্য সরকারকে ফের একটি রিপোর্ট জমা দিতে নির্দেশ দিয়েছে প্রধান বিচারপতি রামান্নার নেতৃত্বাধীন বেঞ্চ। শীর্ষ আদালত তার নির্দেশে জানিয়েছে, লখিমপুরের ঘটনায় কাদের গ্রেফতার করা হয়েছে, এবং কী কারণে তাদের গ্রেফতার করা হয়েছে, সে সম্পর্কে বিস্তারিত তথ্য ওই রিপোর্টে জানাতে হবে। নির্ধারিত সময়ের মধ্যেই সমস্ত সাক্ষীদের বয়ান রেকর্ড করার নির্দেশও দিয়েছে শীর্ষ আদালত। একই সঙ্গে বেঞ্চ বলেছে, “এটা যেন কোনও অসমাপ্ত গল্পে পরিণত না হয় সে দিকে খেয়াল রাখবেন।”

এদিন শুনানি চলাকালীন শীর্ষ আদালতের বেঞ্চ উত্তরপ্রদেশ সরকারের কাছে জানতে চায়, “লখিমপুরের ঘটনায় আপনারা বলেছিলেন ১৬৪ জন সাক্ষী রয়েছে। তাদের মধ্যে মাত্র ৪৪ জনকে জিজ্ঞাসাবাদ করা হয়েছে। তা হলে বাকিদের সাক্ষ্য কোথায় গেল?” জবাবে আইনজীবী সালভে বলেন, “জিজ্ঞাসাবাদের প্রক্রিয়া এখনও চলছে। দুটি অপরাধের কারণে সমস্ত প্রধান অভিযুক্তকেই গ্রেফতার করা হয়েছে।

প্রথম অপরাধ হল গাড়ির ধাক্কা দিয়ে সাধারণ মানুষকে মারা। দ্বিতীয় অপরাধ হল, গাড়িতে থাকা দুইজনকে মারধর করে হত্যা করা। ঘটনাস্থলে বিপুল ভিড় থাকায় তদন্তে কিছুটা সমস্যা হচ্ছিল।” সালভের জবাবে সুপ্রিম কোর্টের বেঞ্চ পাল্টা বলে, “পুলিশ সাক্ষীদের সকলকে জিজ্ঞাসাবাদ না করলে আমরা সমস্ত তথ্য জানতে পারব না। তাই এটা যেন কোনওভাবেই অসমাপ্ত গল্পে পরিণত না হয় সে দিকে সতর্ক থাকবেন।” ২৬ অক্টোবর মামলার পরবর্তী শুনানির দিন সরকারের তরফে পরবর্তী রিপোর্ট জমা দেওয়া হবে।

Delhi violence: তদন্তে ইচ্ছাকৃত দেরির অভিযোগে পুলিশকেই জরিমানার নির্দেশ আদালতের

Delhi violence

নিউজ ডেস্ক: নাগরিকত্ব সংশোধনী আইনকে কেন্দ্র করে ২০২০-র শুরুতে উত্তর-পূর্ব দিল্লিতে দাঙ্গা (Delhi violence) ছড়িয়ে ছিল। সেই দাঙ্গার ঘটনায় একটি মামলার তদন্ত ইচ্ছাকৃত দেরির কারণে এক পুলিশ অফিসারকে ২৫ হাজার টাকা জরিমানার নির্দেশ দিলেন দিল্লির চিফ মেট্রোপলিটন ম্যাজিস্ট্রেট অরুণ কুমার গর্গ।

সোমবার মামলার শুনানি চলাকালীন বিচারক বলেন, তদন্তে দেরি করার কারণে অভিযুক্তরা অকারণ হেনস্তার শিকার হয়েছেন। যে কারণে এখনও দু’জনকে জেল হেফাজতের থাকতে হচ্ছে। একজন পুলিশ অফিসার ইচ্ছাকৃতভাবে তদন্তের কাজে গাফিলতি করবেন এটা মেনে নেওয়া যায় না। তাই সংশ্লিষ্ট পুলিশ অফিসারকে ২৫ হাজার টাকা জরিমানা করা হল। শুধু তাই নয়, বিচারক পুলিশ অফিসারের বেতন থেকে জরিমানার টাকা আদায় করার নির্দেশও দিয়েছেন।

এদিনের শুনানিতে দিল্লির দাঙ্গা মামলার তদন্ত যাতে দ্রুত শেষ করা যায় সেজন্য পুলিশ কমিশনারকে নির্দেশ দিয়েছেন বিচারক। যত শীঘ্র সম্ভব তদন্ত শেষ করার জন্য কি ব্যবস্থা নেওয়া হয়েছে সে বিষয়েও পুলিশ কমিশনারকে সাত দিনের মধ্যে আদালতের কাছে রিপোর্ট দিতে বলেছেন বিচারক।

উল্লেখ্য, দিল্লি দাঙ্গা মামলায় আকিল আহমেদ নামে এক ব্যক্তির বিরুদ্ধে অভিযোগ দায়ের করা হয়েছিল। পরবর্তী ক্ষেত্রে আকিলের বিরুদ্ধে আনা অভিযোগ আলাদা করার নির্দেশ দিয়েছিল দায়রা আদালত। ম্যাজিস্ট্রেট কোর্টে শুনানির সময় স্পেশাল পাবলিক প্রসিকিউটর বলেন, আকিলের মামলা ইতিমধ্যে আলাদা করা হয়েছে। কিন্তু তদন্তকারী অফিসার জানান, তিনি আকিল সম্পর্কে আলাদা করে কোনও তদন্তই করেননি।

পাবলিক প্রসিকিউটর ও তদন্তকারী পুলিশ অফিসারের বক্তব্য আলাদা হওয়ায় বিচারক গর্গ দু’জনকেই তীব্র ভর্ৎসনা করেন। বিচারক বলেন, দেখে শুনে মনে হচ্ছে তদন্তকারী অফিসার জানেন না কীভাবে এই মামলায় এগুতে হবে। সেকারণেই তাঁরা আদালতের কাছে আরও সময় চাইছেন। তবে তদন্তের প্রয়োজনে সময় চাইছেন তা নয়। বরং তাঁরা তদন্ত বানচাল করার জন্যই অতিরিক্ত সময় চাইছেন। তাই এটা মেনে নেওয়া যায় না।

উল্লেখ্য, এর আগে সেপ্টেম্বর মাসে দিল্লির কারকারডুমা আদালতের বিচারক বিনোদ যাদব বলেছিলেন, দিল্লির দাঙ্গার তদন্তকে প্রহসনে পরিণত করেছে পুলিশ। পুলিশের সাক্ষীরা শপথ নিয়ে একের পর এক অসত্য কথা বলে চলেছেন। সোমবার বিনোদ যাদব এর সুরে সুর মিলিয়ে একই কথা বললেন চিফ মেট্রোপলিটন ম্যাজিস্ট্রেট অরুণকুমার গর্গ।