BSNL की ओर दौड़े लोग, Jio और Airtel के महंगे प्लान से है परेशान

रांची : आज मोबाइल हर व्यक्ति की जरूरत बन गया है। इसके बिना आज के डिजिटल युग में रह पाना अब असंभव है। मोबाइल के बिना सरकारी योजनाओं का लाभ से लेकर छात्र हो या मजदूर, रेहड़ी वाल हो या ठेलावाला, दुकानदार हो या कोई आम व्यक्ति, हर किसी को मोबाइल एक आवश्यकता बन गई है।

ऐसे में जियो, एयरटेल, वोडाफोन जैसी निजी कंपनियों ने तीन जुलाई से मोबाइल रिचार्ज प्लान की कीमत में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, तो लोगों को एक बार फिर बीएसएनएल की याद आने लगी है।

निजी कंपनियों के मोबाइल रिचार्ज की रेट बढ़ाने से आम लोग परेशान हैं। खासकर निम्न आय वर्ग के लोग। ऐसे में मोबाइल उपभोक्ता अब सस्ता प्लान देने वाली सरकारी कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड की ओर रुख कर रहे हैं। बीएसएनएल के कार्यालय में अपना नंबर पोर्ट कराने वाले लोगों की भीड़ जुट रही है. इनमें निम्न व मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है।

देश के कई राज्यों में से झारखंड़ के बिष्टुपुर का बीएसएनएल कार्यालय में इन दिनों सिम लेने वाले लोगों की भीड़ जुट रही है। बीएसएनएल के एजीएम, मार्केटिंग हेड अजहर इमाम कहते है कि जुलाई महीने में बीएसएनएल में अपना नंबर पोर्ट कराने व नये सिम लेने वालों की संख्या चार गुना बढ़ी है। उन्होंने बताया कि बीएसएनएल अन्य कंपनियों के मुकाबले काफी बेहतर प्लान दे रही है। इससे लोगों का झुकाव बीएसएनएल की ओर बढ़ा है।

जानकारी के अनुसार जमशेदपुर सर्किल में बीएसएनएल के कुल 1.5 लाख उपभोक्ता हैं।  निजी कंपनियों के मोबाइल रिचार्ज प्लान की रेट बढ़ाने से बीएसएनएल के यूजर की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमशेदपुर में सिर्फ जुलाई के महीने में 974 उपभोक्ता बीएसएनएल से जुड़े हैं, जो अन्य दिनों की अपेक्षा चार गुना अधिक है। इनमें नये सिम लेनेवालों की संख्या 846 व पोर्ट करानेवालों क संख्या 128 है।

बीएसएनएल कर्मी ने बताया जुलाई महीने में पूरे राज्य में कंपनी में 7200 नये उपभोक्ता जुड़े हैं। इनमें नये सिम लेने वालों की संख्या 6500, जबकि पोर्ट करानेवालों की संख्या 700 है।

इलाके के कर्मचारी  ही एक बीएसएनएल कर्मी ने बताया कि जबसे निजी कंपनियों ने मोबाइल रिचार्ज प्लान की दर बढ़ाने की घोषणा की है, तब से ही लोग अपने पुराने बंद पड़े बीएसएनएल के सिम की खोज खबर लेने कार्यालय पहुंच रहे हैं. जिनका सिम दूसरे को आवंटित नहीं किया गया है, उन्हें दिया जा रहा है। जिनका सिम पूरी तरह से बंद हो गया है, वे नये सिम ले रहे हैं। इन दिनों काउंटर पर काफी भीड़ जुट रही है. उपभोक्ता बीएसएनएल के टैरिफ प्लान की जानकारी ले रहे हैं।

निजी कंपनियों के टैरिफ प्लान की रेट बढ़ने से भारी संंख्या में लोग बीएसएनएल में शिफ्ट हो रहे हैं, तो कई असमंजस में भी हैं।  लोगों का कहना है कि बीएसएनएल की सेवा ठीक नहीं है। कई स्थानों पर नेटवर्क नहीं रहता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर बीएसएनएल अपनी सेवा दुरुस्त कर दे, तो निजी कंपनियों की मोनोपॉली समाप्त हो जायेगी. साथ ही इससे देश को बेहतर राजस्व की भी प्राप्ति होगी।

 

फोन की भी होती है Expiry डेट? डिब्बे पर लिखा होता है सीक्रेट कोड

मुंबई :  एक्सपायरी डेट खत्म होने का मतलब होता है कि अब वह सामान काम का नहीं रहा और वह इस्तेमाल करने लायक नहीं है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपक जिस फोन को इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी भी एक्सपायरी डेट हो सकती है। एक्सपायरी डेट से ये तय होता है कि सामान को कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे हर सामान की एक्सपायरी डेट होती है, उसी तरह फोन में भी कुछ ऐसे संकेत मिलने लगते हैं जिससे कि ये तय होता है कि अब आपको नया फोन ले लेना चाहिए।

ऑफिशियल तौर पर कभी फोन की कोई एक्सपायरी डेट नहीं तय की जाती है। लेकिन कुछ ऐसी चीज़ें होती है जिससे हमें ये मालूम चल जाता है कि अब फोन बदलने का समय आ गया है।

मोबाइल बनाने वाली कंपनियां 2-3 साल बाद स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर अपडेट देना बंद कर देती हैं। इससे पुराने स्मार्टफोन यूज करने लायक नहीं रहते हैं और आपको न चाहते हुए भी स्मार्टफोन बदलना पड़ता है। सॉफ्टवेयर अपडेट कितने साल तक मिलेगा ये उस दिन से नहीं शुरू होता है, जिस दिन से आपने फोन इस्तेमाल करना शुरू करते हैं। बल्कि उस दिन से शुरू होता है जो डेट फोन के बॉक्स पर मैनुफैक्चरिंग के तौर पर लिखी होती है।

आज स्मार्टफोन औसतन 2.5 साल की लाइफ के साथ आता है। हालांकि कुछ डिवाइस के लिए के लिए टाइम कम या ज्यादा हो सकता है। कहा जाता है कि एक आईफोन की लाइफ करीब 4 से 8 साल तक, सैमसंग फोन की लाइफ 3 से 6 साल तक और गूगल पिक्सल की लाइफ 3 से 5 साल तक हो सकती है। हालांकि ये इसपर भी निर्भर भी करता है कि आप अपने फोन का इस्तेमाल किस तरीके से करते हैं।

कुछ लोग होते हैं जो फोन को ऐसे प्यार और केयर करके इस्तेमाल करते हैं कि उनकी फोन की लाइफ बढ़ जाती है। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो फोन पर उतना ध्यान नहीं देते हैं और चार्जिंग को लेकर भी सावधानियां नहीं बरतते हैं जिससे फोन समय से पहले ही खराब होने लगता है।

मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने की योजना शुरू, NASA के बने घर में 378 दिन रहकर लौटे चार वैज्ञानिक

नई दिल्ली : इंसानों को चांद पर पहुंचाने के बाद उनको अब मंगल ग्रह पर बसाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। अगर सब कुछ सही रहा तो अगले सात साल यानि 2030 तक लाल ग्रह पर इंसानों को भेजना शुरू हो जाएगा। मंगल ग्रह पर इंसान कैसे रह पाएंगे, इसी को लेकर एक ट्रायल किया गया जिसके लिए NASA ने चार लोगों को चुना जिनमें कनाडाई जीवविज्ञानी केली हेस्टन भी शामिल थीं। अब एक साल बाद नासा के अंतरिक्ष यात्री एक अनोखा अनुभव करके वापस आ चुके हैं। नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के उप निदेशक स्टीव कोर्नर ने कहा, ‘हम लोगों को मंगल ग्रह पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।’

नासा के एक अंतरिक्ष यात्री ने एक दरवाजे के पीछे से तीन बार जोर से पूछा कि क्या आप बाहर आने के लिए तैयार हैं? उनका उत्तर तब साफ सुनाई देता है, जब दरवाजा खुलता है। दरअसल, नासा के चार वैज्ञानिक एक साल तक इंसानी संपर्क से दूर रहकर वापस लौट आए हैं। उनके आते ही तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल गूंज उठता है। बता दें, नासा मंगल ग्रह पर मानव अन्वेषण की तैयारी कर रहा है। इसी के लिए एक खास कमरा बनाया गया था। ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में एक घर तैयार किया गया था। इसमें चार लोगों के रहने की व्यवस्था है। इस घर को मंगल ग्रह के हालात जैसा बनाया गया था। एंका सेलारियू, रॉस ब्रॉकवेल, नाथन जोन्स और टीम लीडर केली हेस्टन ने इस घर में करीब 378 दिन बिताए। इस दौरान इन लोगों ने सब्जियां उगाईं। वहीं मार्सवॉक भी किया।

इस एक साल में सबसे ज्यादा इन लोगों के लिए कठिन था अपने परिवार से इतने दिन दूर रहना। यह एक तरह से ऐसा अनुभव था, जब महामारी के तरह लॉकडाउन लगा था। चारों लोग जब शनिवार को इस घर से बाहर निकले तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी। उनके बाल थोड़े अधिक बिखरे हुए थे। मगर उनकी खुशी साफ देखी जा सकती थी। केली हेस्टन ने हंसते हुए कहा, ‘हेलो, आप लोगों से फिर हेलो करना वाकई शानदार है।’

डॉक्टर जोन्स ने कहा, ‘मैं आशा करता हूं कि आप सभी के सामने यहां खड़े होकर रोऊंगा नहीं।’ उन्होंने भीड़ में अपनी पत्नी को देखा और वैसे ही उनको रोना आ गया। क्रू हेल्थ एंड परफॉर्मेंस एक्सप्लोरेशन एनालॉग  का मार्स ड्यून अल्फा ह्यूस्टन एक 3डी प्रिंटेड 1,700 वर्ग फुट का कक्ष है। इसका उद्देश्य मंगल ग्रह की सतह पर उनके आवास का अनुकरण करना है।इसमें चार बेडरूम हैं। इसके अलावा जिम, किचन, रिसर्च सेंटर बनाया गया है। इस घर को एयरलॉक द्वारा अलग किया गया। यहां पर चारों ने मार्स वॉक की भी प्रैक्टिस की।

‘Tesla भारत में नहीं करेगी इन्वेस्ट’, OLA के CEO ने दिया इसे लेकर अपना बयान

नई दिल्ली :  हाल ही में एक रिपोर्ट में ये खुलासा किया गया है कि Tesla ने नई दिल्ली में अधिकारियों के साथ बातचीत में हुई दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है और अब Tesla से भारत में निवेश की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट में टेस्ला की वित्तीय समस्याओं का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि टेस्ला की भारत में नया निवेश करने की कोई योजना नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Tesla की जगह सरकार अब महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसे घरेलू खिलाड़ियों की ओर रुख कर सकती है ताकि भारत में ईवी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद OLA के सीईओ Bhavish Aggarwal ने एक बयान जारी कर कहा है कि टेस्ला द्वारा भारतीय बाजार में निवेश नहीं करना एलोन मस्क की स्वामित्व वाली वाहन कंपनी के लिए एक बड़ा नुकसान है, भारत के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय ईवी और लिथियम उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं और टेस्ला के लिए कुछ सालों में भारत को गंभीरता से लेने में बहुत देर हो जाएगी।

X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “अगर यह सच है, तो यह टेस्ला का नुकसान है, भारत का नहीं। जबकि भारतीय ईवी और लिथियम इको सिस्टम प्रारंभिक अवस्था में है, हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। टेस्ला के लिए कुछ सालों में जब वे भारत को गंभीरता से देखेंगे तो बहुत देर हो जाएगी।”

टेस्ला ने इस तिमाही में वैश्विक वितरण में लगातार दूसरी गिरावट दर्ज की है और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। वाहन निर्माता ने भी इस साल नौकरी में कटौती की घोषणा की, अपने प्रमुख साइबरट्रक स्टॉल को बेच दिया और अपने मेक्सिको संयंत्र के निर्माण में देरी की।

न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी एक्सप्रेस के विस्टाडोम कोच से यात्रियों को मिलेगा खूबसूरत नजारा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के हावड़ा से न्यू जलपाईगुड़ी के यात्री सोमवार से विस्टाडोम कोच में लग्जरी रेल यात्रा का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। इस ट्रेन से दार्जिलिंग और हिमालय जाने के इच्छुक यात्री अब मार्ग में पड़ने वाले उत्तर बंगाल (न्यू जलपाईगुड़ी) की खूबसूरत वादियों का भी लुत्फ उठा सकेंगे। सोमवार को हावड़ा मंडल के डीआरएम संजीव कुमार ने हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी एक्सप्रेस को नये विस्टाडोम कोच (पारदर्शी कोच) के साथ रवाना किया

इस दौरान रेलवे के सीनियर डीसीएम राहुल रंजन, पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के साथ अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। यात्रा के शौकीनों के लिए रेलवे ने हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी एक्सप्रेस में फिल्हाल एक विस्टाडोम कोच लगाया गया है। हावड़ा मंडल के डीआरएम संजीव कुमार ने बताया कि हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी एक्सप्रेस के विस्टाडोम कोच को खास बनाते हैं , उसकी पारदर्शी फाइवर की छत और बड़ी खिड़कियां, शीशों और फाइवर की बनी खिड़कियों के साथ छत भी पारदर्शी है।

इससे यात्री ट्रेन के अंदर अपनी सीट पर बैठे-बैठे ही पहाड़ों के साथ बारिश और काले उमड़ते-घुमड़ते बादलों का नजारा भी देख सकेंगे। पूर्व रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार यह अस्थायी व्यवस्था एक जुलाई 2024 से अगले वर्ष 30 जून 2025 तक रहेगी। 12041/12042 हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी-हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस में निर्धारित अवधि के दौरान ट्रेन 14 कोचों के बजाय 15 कोचों के साथ चलेगी। विस्टाडोम कोच यात्रियों की यात्रा को और भी बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इन कोचों में 360 डिग्री घूमने वाली लग्जरी पुशबैक कुर्सियां लगायी गयी हैं। जिससे यात्री अधिकतम आराम के लिए अपनी सीटिंग को एडजस्ट कर सकते हैं।

उक्त बोगी में कुल 24 बर्थ हैं। इसका किराया 2430 रुपये जबकि शताब्दी एक्सप्रेस में प्रथम श्रेणी की बर्थ का किराया 1430 रुपये है। इसके साथ ही विस्टाडोम कोच स्व-संचालित स्लाइडिंग दरवाजे, एक ग्लास बैक और वाईफाई और जीपीएस कनेक्टिविटी जैसी उन्नत सुविधाओं से लैस किया गया है। यात्रा के दौरान यात्री अपनों से लगातार कनेक्ट रह सकते हैं. ट्रेन के अंदर एक इंफोटेनमेंट सिस्टम लगाया गया है, जो यात्रियों का मनोरंजन करने के साथ ही देशभर की सूचनाएं प्रदान करता रहेगा।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कौशिक मित्रा ने कहा कि विस्टाडोम कोच की शुरुआत यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं और एक यादगार यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2017 कंचन कन्या एक्सप्रेस में भी इस तरह का विस्टाडोम कोच ( पारदर्शी कोच) लगाया गया था। यह ट्रेन सियालदह से अलीपुरदुआर तक जाती थी। इस कोच का जिम्मा आईआरसीटीसी के पास था।

SIM कार्ड को लेकर 1 जुलाई से बदल गया नियम

नई दिल्ली : टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मोबाइल सिम कार्ड के लिए नया नियम जारी किया है जो 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है। यह नियम बीते 15 मार्च 2024 को जारी किया गया था, जो कल यानी 1 जुलाई 2024 से देशभर में लागू होने जा रहा है। यह नया नियम फ्रॉड की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लाया गया है।

दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियमों के तहत एक प्रमुख बदलाव सिम स्वैप के बाद मोबाइल नंबर पोर्ट करने की वेटिंग पीरिड को 10 दिनों से घटाकर 7 दिन कर दिया गया है। इससे पहले, सिम स्वैप के बाद 10 दिन की वेटिंग पीरिड लागू थी, लेकिन ट्राई ने दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियम, 2024 में नए संशोधन में इसे घटाकर 7 दिन कर दिया है।

आज के दौर में सिम स्वैप फ्रॉड काफी ज्यादा बढ़ गए हैं, जिसमें फ्रॉड करने वाले आपके पैन कार्ड और आधार की फोटो काफी आसानी से हासिल कर लेते हैं। इसके बाद मोबाइल खो जाने का बहाना बनाकर नया सिम कार्ड जारी करा लेते हैं। इसके बाद आपके नंबर पर आने वाली ओटीपी फ्रॉड करने वालों के पास पहुंच जाती है।

सुनीता विलियम्स की वापसी पर बोले इसरो चीफ, स्पेस स्टेश लंबे सयम तक रहन के लिए सुरक्षित

नई दिल्ली : नासा यात्री सुनीता और बुच विलमोर 5 जून को स्पेस पर गए थे। उन्हें 13 जून को धरती पर लौटना था, लेकिन स्पेसक्राफ्ट में खराबी के चलते अब तक चार बार उनकी वापसी टाली गई है। 

इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (ISRO) चीफ डॉ. एस सोमनाथ ने कहा है कि स्पेस स्टेशन से भारतवंशी सुनीता विलियम्स की वापसी में देरी चिंता की बात नहीं है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) लंबे समय तक लोगों के रहने के लिए एक सुरक्षित जगह है।

इसरो चीफ ने निजी चैनेल को एक इंटरव्यू में कहा कि यह सिर्फ सुनीता विलियम्स या किसी अन्य अंतरिक्ष यात्री का मामला नहीं है। स्पेस स्टेशन में फंसना या अटक जाना कोई मुद्दा नहीं है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए। अभी वहां नौ अंतरिक्ष यात्री हैं। उनमें से सभी फंसे हुए नहीं हैं।

एस सोमनाथ ने कहा- सभी अंतरिक्ष यात्री को किसी न किसी दिन वापस आना है। पूरा मामला बोइंग स्टारलाइनर नाम के नए क्रू मॉड्यूल की टेस्टिंग, उसके स्पेस तक ​​जाने और फिर सुरक्षित वापस आने की क्षमता से जुड़ा है। ग्राउंड लॉन्च प्रोवाइडर्स के पास उन्हें धरती पर लाने के लिए पर्याप्त क्षमता हैं।

डॉ सोमनाथ ने कहा- हम सभी को सुनीता पर गर्व है। उनके नाम कई मिशन हैं। किसी नए स्पेस व्हीकल की पहली फ्लाइट में यात्रा करना साहस की बात है। वह खुद इसके डिजाइन टीम का हिस्सा रही हैं। उन्होंने अपने एक्सपिरिएंस के इनपुट का इस्तेमाल किया है।

इसरो चीफ ने कहा- हम भी एक क्रू मॉड्यूल बना रहे हैं और इसलिए मैं समझ सकता हूं कि उनके साथ किस तरह की बातचीत हुई होगी। हमारे पास अनुभव है, लेकिन सुनीता के पास हमसे कहीं अधिक अनुभव है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 17 दिन से अंतरिक्ष में फंस गई हैं। सुनीता 5 जून 2024 को बोइंग स्टारलाइनर नाम के स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर स्पेस मिशन पर गई थीं। ये अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनी बोइंग और नासा का संयुक्त ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ है।

इसमें सुनीता, स्पेसक्राफ्ट की पायलट हैं। उनके साथ गए बुश विलमोर इस मिशन के कमांडर हैं। दोनों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में 8 दिन रुकने के बाद 13 जून को वापस पृथ्वी पर आना था, लेकिन स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी दिक्कतों और हीलियम गैस के रिसाव के चलते अब तक ऐसा नहीं हो पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि असली दिक्कत का पता नहीं चल पा रहा है। अगर यही स्पेसक्राफ्ट वापसी आता है तो इसमें आग लगने की आशंका है। नासा पर भी दिक्कतों की अनदेखी का आरोप लग रहा है।

नासा ने स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण लगातार चार बार सुनीता की वापसी टाली है। पहली घोषणा 9 जून को की गई थी, जिसमें बताया गया था कि लैंडिंग को 18 जून तक आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके बाद वापसी को बढ़ाकर 22 जून किया गया।

फिर, वापसी की तारीख 26 जून कर दी गई। 24 जून को नासा ने कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर लौटने में और समय लग सकता है। हालांकि, इनके वापस लौटने की कोई नई तारीख नहीं बताई गई है।

NASA ने बताया कि दोनों यात्री किसी खतरे में नहीं है। जिस स्पेसक्राफ्ट में उन्हें वापस आना था उसमें हीलियम लीकेज हो रहा है। खामी दूर करने के प्रयास चल रहे हैं।

बोइंग का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट सिर्फ 45 दिन तक स्पेस स्टेशन में रुक सकता है। स्पेसक्राफ्ट को स्टेशन में डॉक करने के बाद करीब 22 दिन हो चुके हैं। स्टारलाइनर, स्पेस स्टेशन के हार्मनी नाम के जिस मॉड्यूल से जुड़ा है उसकी फ्यूल कैपेसिटी सीमित होती है। अब स्पेसक्राफ्ट के पास सिर्फ 24 दिन का ईंधन बाकी है।

इसलिए 45 दिन के बाद स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से अन-डॉक नहीं किया जा सकता। इस समय-सीमा के पूरा होने के बाद सुनीता और विलमोर को दूसरे एयरक्राफ्ट से वापस लाने की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में स्पेसएक्स का क्रू-ड्रैगन और रूसी स्पेसक्राफ्ट सोयूज, दोनों एस्ट्रोनॉट्स को वापस धरती पर ला सकते हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये तय समय पर लॉन्च किए जा सकें।

सुनीता विलियम्स को अभी स्पेस स्टेशन पर और समय बिताना पड़ सकता है। नासा के अनुसार बोइंग स्टारलाइनर का मिशन अब 45 दिन से 90 दिन के लिए बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

ऐसे में संभावना है कि सुनीता की वापसी का इंतजार और बढ़ सकता है। नासा ने फिलहाल स्टारलाइनर की वापसी की तारीख बताने से इनकार किया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युवाओं के जॉब रहेंगे सिक्योर

नई दिल्ली : AI या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे आधुनिक युग के महान अविष्कारों में से एक है। AI की उन्नति ने स्वास्थ्य सेवा, व्यवसाय, शिक्षा और समाज जैसे विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति ला दी है और वैश्विक स्तर पर इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे कही न कही संभावित नौकरी छूटने की चिंता भी बढ़ रही है। युवा वर्ग तो इस बात से और भी डरा हुआ है, पर चिंता करने की बात नही है । AI किसी की नौकरी नहीं खाने वाला है, उल्टा नई नौकरियां लाने वाला है, ऐसा कहना है Deloitte के रोहित टंडन का।

इस विषय के ऊपर अनेक जानकारों के अलग अलग मत हैं। कुछ लोगो का अनुमान है कि AI भविष्य में कई नौकरियों को खत्म कर देगा, वहीं बहुत से लोगो का मत है कि ये नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। AI के पक्ष में बोलने वालों में अब डेलॉइट कंपनी के कार्यकारी रोहित टंडन का भी नाम जुड़ गया है . युवाओं को आने वाले समय में AI से डरने की जरूरत नहीं है, क्युकी कृत्रिम मेधा भविष्य में लोगो के लिए और नए नौकरी के अवसर लेके आ सकती है।

मीडिया से बातचीत के दौरान डेलॉइट एलएलपी के एआई प्रभाग के एमडी रोहित टंडन ने बताया कि एआई नौकरियों को खत्म नहीं करेगा, बल्कि कुछ सरल कार्यों का स्थान लेगा और नई नौकरियों के अवसर पैदा करेगा। टंडन ने बताया कि उन्हें भविष्य में ऐसा लगता है कि एआई इंसानों के साथ मिलकर काम करेगा, उन पर कब्ज़ा नही।

5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी आज, रिलायंस जियो-एयरटेल पर लोगों की नजरे

नई दिल्ली :  सरकार ने मंगलवार 25 जून 2024 से 96,000 रुपये से अधिक कीमत की 4जी और 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू कर दी है। मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की इसकी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर नजर बनी हुई है। संभावना जाहिर की जा रही है कि इसमें रिलायंस जियो टॉप बोलीदाता हो सकती है। सरकार अगस्त 2022 के बाद पहली बार 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी कर रही है। हालांकि, अगस्त 2022 में भी 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की गई थी।

सरकार करीब 96,317 करोड़ रुपये के आधार मूल्य पर मोबाइल फोन सेवाओं के लिए आठ स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी करेगी। सरकार की ओर से जारी किए गए बयान के अनुसार, मौजूदा टेलिकॉम सर्विस को बढ़ाने और सर्विस की निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार मंगलवार 25 जून 2024 से स्पेक्ट्रम नीलामी शुरू हो चुकी है।

स्पेक्ट्रम के लिए हो रही नीलामी में 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में उपलब्ध सभी स्पेक्ट्रम 10वीं नीलामी का हिस्सा हैं।

दूरसंचार विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने सामूहिक रूप से एडवांस रकम के रूप में करीब 4350 करोड़ रुपये जमा किए हैं। भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जिओ ने पूरे 300 करोड़ रुपये जमा किए हैं। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों ने करीब 1050 करोड़ रुपये और 300 करोड़ रुपये जमा किए हैं. रिलायंस जियो जैसी कंपनी 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम जोड़ सकती है।

भारती एयरटेल कंपनी स्पेक्ट्रम नीलामी में कम से कम 3800 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि कंपनी को 6 सर्किलों में 1800 मेगाहट्र्ज और 900 मेगाहर्ट्ज बैंड में 42 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का नवीनीकरण करना होगा।

जैफरीज ने एक नोट में बताया है कि कंपनी को कुछ सर्किलों में अपनी होल्डिंग बढ़ाने के लिए 1800 मेगाहर्ट्ज या 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में 10 से 15 मेगाहर्ट्ज तक की बोली लगानी होगी। वहीं 2300 बैंड में 400 मेगाहट्र्ज की बोली लगानी पड़ सकती है. जिससे कंपनी का कुल खर्च 12,300 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है. इसके साथ ही एयरटेल ग्रामीण कवरेज को बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठा रहे हैं। कंपनी रिन्यूअल के अलावा महाराष्ट्र ,गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल और पश्चिम बंगाल में कम से कम 25000,नई 5G साइट्स लगाने की योजना बना रही है।

भारतीय सेना जल्द ही अगली पीढ़ी की वायरलेस तकनीक से लैस होगी

नई दिल्ली : भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (एसएएमईईआर) ने भारतीय सेना के लिए अगली पीढ़ी की वायरलेस प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

देश की सुरक्षा और देश में लोगों को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण जिम्मा संभालने वाली भारतीय सेना के संचार माध्यम को और उन्नत करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। एक ऐतिहासिक पल के स्वरूप भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (एसएएमईईआर) ने भारतीय सेना के लिए अगली पीढ़ी की वायरलेस प्रौद्योगिकियों  में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।रक्षा मंत्रालय की ओर से एक बयान में इसकी जानकारी दी गई।

बयान में कहा गया कि एमओयू पर लेफ्टिनेंट जनरल के एच गवास, कमांडेंट एमसीटीई और कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल्स और डॉ पी एच राव, महानिदेशक समीर ने हस्ताक्षर किए। यह पहल भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से इस सहयोग को फिर से बल मिलने की उम्मीद है, जिसमें एमसीटीई में ‘उन्नत सैन्य अनुसंधान और इनक्यूबेशन केंद्र’ स्थापित करने की योजना है। इस केंद्र का उद्देश्य भारतीय सेना के लिए उन्नत वायरलेस प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना है।

समीर और एमसीटीई के बीच साझेदारी एक समझौते से कहीं बढ़कर है और यह नई तकनीकी सीमाओं की खोज और आधुनिक युद्धक्षेत्र चुनौतियों का समाधान करने में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वायरलेस प्रौद्योगिकियों में समीर की विशेषज्ञता और संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर संचालन में एमसीटीई के अनुप्रयोग कौशल को मिलाकर, यह सहयोग रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति का वादा करता है।

BMW भारत में लॉन्च करेगी प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर, सिंगल चार्ज पर 130 किमी रेंज

नई दिल्ली: BMW अपनी प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर को भारत में लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर BMW CE 04 की लॉन्च डेट को जारी कर दिया है। BMW दावा कर रही है कि उनका यह स्कूटर फुल चार्ज होने के बाद 130km तक की दूरी तय की जा सकती है।

इस स्कूटर का नाम BMW CE 04 है। यह कंपनी का एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर है। इसे पहले दिसंबर 2022 में भारत में पेश किया गया था, लेकिन अब इसे लॉन्च किया जा रहा है। 

इस स्कूटर में 15kW, परमानेंट मैग्नेट, लिक्विड-कूल्ड सिंक्रोनस इलेक्ट्रिक मोटर लगाया गया है, जो 41bhp का पावर और 61Nm का टॉर्क जनरेट करता है। BMW दावा करती है कि इसे एक बार फुल चार्ज करने पर 130km की दूरी तय की जा सकती है। वहीं, इसे फुल चार्ज होने में करीब चार घंटे से थोड़ा अधिक समय लगता है। यह स्कूटर महज 2.6s में 0 से 50kmph की स्पीड पकड़ लेती है। इस स्कूटर की टॉप स्पीड 120 किमी प्रति घंटे है।

यह स्कूटर किसी साइंस-फिक्शन मूवी की तरह दिखता है। इसके चारों तरफ बड़े एप्रन और फ्लैट बॉडी पैनल लगाए गए हैं। इसके सीट का डिजाइन काफी आकर्षक है। इसमें स्टील डबल लूप फ्रेम लगाया गया है। इसमें आपको डिस्क ब्रेक और ABS मानक मिलेंगे।

इसके साथ ही इसमें कनेक्टिविटी और नेविगेशन के साथ 10.25 इंच का TFT डिस्प्ले भी दिया गया है। फोन को चार्ज करने के लिए USB टाइप-C चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है। इसमें डायनेमिक ट्रैक्शन कंट्रोल के साथ ही तीन राइड मोड- इको, रेन और रोड मोड दिए गए हैं।

BMW CE 04 की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10 लाख रूपये के आस-पास रहने वाली है। वहीं, यह स्कूटर लॉन्च होने के तुरंत बाद से ही डिलीवरी के लिए उपलब्ध रहेगी।

भारत आयो Gooogle का Free AI Gemini ऐप

नई दिल्ली : Google का Al जेमिनी App अब भारत में आ गया है। जेमिनी ऐप को एंड्रॉयड फोन के लिए उपलब्ध कराया गया है। Google ने आखिरकार हिंदी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलुगु और उर्दू सहित 9 भारतीय भाषाओं के साथ भारत में अपना जेमिनी एआई ऐप लॉन्च कर दिया है।

बता दें कि Google ने फरवरी में अपने बार्ड AI चैटबॉट को जेमिनी के रूप में रीब्रांड किया और बाद में एक अलग ऐप लॉन्च किया। हालाँकि, भारत में जेमिनी यूजर्स को स्टैंडअलोन ऐप के लिए लगभग चार महीने तक इंतजार करना होगा, जिससे चैटबॉट का उपयोग अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में जेमिनी के भारत ऐप लॉन्च के संबंध में घोषणा की। पिचाई ने लिखा कि एक रोमांचक खबर है, आज हम भारत में जेमिनी मोबाइल ऐप लॉन्च कर रहे हैं, जो अंग्रेजी और 9 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। हम इन स्थानीय भाषाओं को जेमिनी एडवांस्ड के साथ-साथ अन्य नई सुविधाओं में भी जोड़ रहे हैं।

कैसे करें गूगल जेमिनी ऐप डाउनलोड
गूगल जेमिनी ऐप को डाउनलोड करने के लिए आपको गूगल प्ले स्टोर पर जाना होगा। यहां सर्च बॉक्स में ‘Google Gemini’ लिखकर सर्च करें। इसके बाद ऐप आपको दिखने लगेगा। अब इसे डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें। बता दें कि iOS पर जेमिनी एक्सेस अगले कुछ हफ्तों में सीधे Google ऐप से शुरू हो रहा है। गूगल जेमिनी ऐप ऑनलाइन सर्च को आसान बना देगा। इसके साथ ही जेमिनी ऐप में कई एडवांस्ड फीचर दिए गए हैं, जिससे आप ऑटोमेटिक मोड में बोलकर कोई भी चीज सर्च कर सकेंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को $15 अरब का नुकसान, एक लाख नौकरियां गई

नई दिल्ली: चीन के साथ जारी तनाव भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है। इस कारण पिछले चार साल में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को 15 अरब डॉलर का प्रॉडक्शन लॉस हुआ है। साथ ही इस दौरान करीब 100,000 नौकरियों का मौका भी हाथ से निकल गया।

चीन के नागरिकों को वीजा जारी करने में देरी और भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों की जांच के बीच ऐसा हुआ है। विभिन्न मंत्रालयों को भेजे गए ज्ञापन में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री ने कहा कि भारत ने 2 अरब डॉलर के वैल्यू एडिशन नुकसान के अलावा 10 अरब डॉलर का निर्यात अवसर भी खो दिया है।

इंडस्ट्री के लोगों के मुताबिक चीनी अधिकारियों के 4,000-5,000 वीजा आवेदन सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की विस्तार योजनाओं में बाधा आ रही है। यह स्थिति तब है जब सरकार ने 10 दिन के भीतर बिजनस वीजा आवेदनों को मंजूरी देने के लिए एक व्यवस्था बना रखी है।

इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) और मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) लॉबी ग्रुप ने केंद्र सरकार से चीनी अधिकारियों के लिए वीजा मंजूरी में तेजी लाने का अनुरोध किया है। अभी इसमें एक महीने से अधिक समय लग रहा है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि चीनी अधिकारियों की जरूरत टेक और स्किल ट्रांसफर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना और कमीशनिंग, एफिशियंसी प्रोसेसेज की स्थापना और मेंटनेंस के लिए है। साथ ही चीनी की उन कंपनियों के अधिकारियों के वीजा आवेदन भी लंबित हैं, जिन्हें स्थानीय कंपनियों के साथ पार्टनरशिप में यहां मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने के लिए बुलाया गया है।

आईसीईए ने कहा कि हमारी घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) योजना पर गंभीर असर पड़ा है। जब मोबाइल के लिए पीएलआई योजना (2020-21 में) शुरू की गई थी, तो उम्मीद थी कि आपूर्ति श्रृंखला चीन से हट जाएगी। लेकिन इस गतिरोध और प्रेस नोट 3 (भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश की अधिक जांच अनिवार्य करना) के कारण सप्लाई चेन के ट्रांसफर में भारी गिरावट आई है।

यह एसोसिएशन ऐपल, ओप्पो, वीवो, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और लावा जैसे टॉप मोबाइल ब्रांड्स और मैन्युफैक्चरर्स का प्रतिनिधित्व करता है। आईसीईए का अनुमान है कि अगर भारत और चीन के बीच बिजनस एक्टिवीज सामान्य होती तो भारतीय कंपनियों का वैल्यू एडिशन वर्तमान 18% से बढ़कर 22-23% होता। इससे घरेलू मोबाइल फोन ईकोसिस्टम में सालाना 15,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डीवीए कंट्रीब्यूशन होता।

 

 

गूगल ने माना, लीक हुआ सर्च एल्गोरिदम से जुड़ा डेटा, कंपनी ने की पुष्टि

नई दिल्ली :  टेक वर्ल्ड की दिग्गज कंपनी गूगल का 2,500 इंटर्नल डॉक्यूमेंट्स का एक कलेक्शन हाल ही में ऑनलाइन लीक हो गया। कंपनी ने इस बात की पुष्टि की है कि लीक हुआ डेटा उनका वास्तविक डेटा था। हालांकि कंपनी ने उस डेटा के कंटेंट पर फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है।

खबरों की मानें, तो लीक डेटा पर सबसे पहले सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन एक्सपर्ट रैंड फिशकिन और माइक किंग की नजर पड़ी थी। उन्होंने इसी हफ्ते डेटा और उनके कंटेंट का प्रारंभिक विश्लेषण प्रकाशित करने का काम किया था।

गूगल का लीक हुआ डेटा सर्च एल्गोरिदम से जुड़ा हुआ है। जो कंटेंट लीक हुआ है, उससे पता चलता है कि गूगल ऐसे डेटा को इकट्ठा करती है और उसका उपयोग करती है। हालांकि कंपनी के अधिकारियों ने इसके बारे में कहा है कि गूगल सर्च में पेजों की रैंकिंग में इनका कोई योगदान नहीं होता है। इस डेटा से यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि डेटा के कौन-से वाले हिस्से को कंपनी सर्च कंटेंट को रैंक करने के लिए इस्तेमाल करती है।

गूगल का सर्च एल्गोरिदम कैसे काम करता है, कंपनी इस बात की जानकारी आमतौर पर गुप्त रखती है। लेकिन लीक हुए डॉक्युमेंट्स ने इस बारे में जानकारी अधिक स्पष्ट कर दी है कि वेबसाइट्स को रैंक करने के मामले में गूगल किन संकेतों के बारे में क्या प्लान कर रही है। कुल मिलाकर, जो डेटा सार्वजनिक हुआ है, उससे एसईओ मार्केटिंग और प्रकाशन जगत में हलचल मच सकती है। बहरहाल, गूगल ने लीक हुए डॉक्युमेंट के कंटेंट पर जानकारी देने से मना कर दिया है।

iPhone Alert: केंद्र ने iPhone, iPad और MacBook उपयोगकर्ताओं के लिए “उच्च जोखिम” चेतावनी जारी की

एडवाइजरी एक महत्वपूर्ण भेद्यता पर प्रकाश डालती है, जिसे विभिन्न ऐप्पल (iPhone Alert) उत्पादों में “रिमोट कोड निष्पादन” के संबंध में पहचाना गया है।..

भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-इन) की केंद्र की सुरक्षा सलाह ने ऐप्पल के आईफोन,(iPhone Alert) मैकबुक, आईपैड और विज़न प्रो हेडसेट के उपयोगकर्ताओं के लिए “उच्च जोखिम” चेतावनी जारी की है। एडवाइजरी एक महत्वपूर्ण भेद्यता पर प्रकाश डालती है, जिसे विभिन्न ऐप्पल उत्पादों में “रिमोट कोड निष्पादन” के संबंध में पहचाना गया है।
भेद्यता Apple सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर की एक श्रृंखला को प्रभावित करती है, जिसमें 17.4.1 से पहले के Apple Safari संस्करण, 13.6.6 से पहले के Apple macOS वेंचुरा संस्करण, 14.4.1 से पहले के Apple macOS Sonoma संस्करण, 1.1.1 से पहले के Apple VisionOS संस्करण शामिल हैं। 17.4.1 से पहले के Apple iOS और iPadOS संस्करण, और 16.7.7 से पहले के Apple iOS और iPadOS संस्करण।

यह भेद्यता एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करती है क्योंकि यह दूरस्थ हमलावरों को लक्षित सिस्टम पर मनमाना कोड निष्पादित करने की अनुमति देती है। यह शोषण WebRTC और CoreMedia में आउट-ऑफ़-बाउंड लेखन समस्या का लाभ उठाता है, जिससे हमलावरों को दूरस्थ रूप से उपकरणों से समझौता करने में सक्षम बनाया जाता है।
एडवाइजरी के अनुसार, iPhone XS, iPad Pro 12.9-इंच, iPad Pro 10.5-इंच, iPad Pro 11-इंच, iPad Air, iPad और iPad Mini के उपयोगकर्ता अतिसंवेदनशील हैं यदि उनके डिवाइस 17.4 से पहले के iOS और iPadOS संस्करण चला रहे हैं। .1. इसके अतिरिक्त, iPhone 8, iPhone 8 Plus, iPhone .

मैकबुक उपयोगकर्ताओं से भी अपने सिस्टम को अपडेट करने का आग्रह किया जाता है, 13.6.6 से पहले के मैकओएस वेंचुरा संस्करण और 14.4.1 से पहले के मैकओएस सोनोमा संस्करण असुरक्षित हैं। इसके अलावा, ऐप्पल विज़न प्रो हेडसेट के उपयोगकर्ताओं को 1.1.1 से पहले के विज़नओएस संस्करणों में भेद्यता पर ध्यान देना चाहिए।

सीईआरटी-इन समझौते के जोखिम से बचने के लिए कई एहतियाती उपायों की सिफारिश करता है:

सुनिश्चित करें कि Apple iOS, iPadOS, macOS और VisionOS सुरक्षा पैच वाले नवीनतम संस्करणों में अपडेट किए गए हैं।

नेटवर्क सुरक्षा: अनधिकृत पहुंच के जोखिम को कम करने के लिए असुरक्षित या सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट होने से बचें।

दो-कारक प्रमाणीकरण (2FA) सक्षम करें: संभावित क्रेडेंशियल समझौतों के खिलाफ सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ने के लिए 2FA लागू करें।
विश्वसनीय स्रोतों से डाउनलोड करें: मैलवेयर के जोखिम को कम करने के लिए केवल ऐप्पल ऐप स्टोर जैसे प्रतिष्ठित स्रोतों से ऐप्स और सॉफ़्टवेयर डाउनलोड करें।

नियमित बैकअप: सुरक्षा उल्लंघनों या सिस्टम विफलताओं के कारण डेटा हानि से सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण डेटा का नियमित रूप से बैकअप लें।

पीएम के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने भी ‘डीप फेक’ को लेकर जताई चिंता

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपराधियों द्वारा जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने और डीप फेक को लेकर चिंता जाहिर की। राष्ट्रपति ने शनिवार को पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी हमेशा तकनीक के क्षेत्र में अपडेट रहने की जरूरत है। राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में 2022 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के प्रोबेशनर्स अधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि ‘पुलिस फोर्स के सामने साइबर अपराध, ड्रग तस्करी, वामपंथी कट्टरपंथ और आतंकवाद जैसी चुनौतियां हैं।

पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि देश में कानून व्यवस्था कायम रखने और देश को एकजुट रखने में पुलिस बल का अतुलनीय योगदान है। सरकार का उद्देश्य हर नागरिक के टैलेंट का विकास और उसे विकास के लिए पूरे अवसर मुहैया कराना है और यह हमारी प्राथमिकता है कि सभी नागरिक मिलकर देश के विकास में योगदान दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन राज्य सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन आईपीएस अधिकारी, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पुलिस कर्मियों का नेतृत्व करते हैं। इस तरह देश की पुलिस व्यवस्था एकजुट होकर काम करती है।

স্বাভাবিকের তুলনায় দ্রুত ঘুরছে মঙ্গল গ্রহ

বিজ্ঞানীরা প্রকাশ করেছেন যে মঙ্গল গ্রহ (Mars) আগের চেয়ে দ্রুত ঘুরছে। নেচারে প্রকাশিত গবেষণাটি ইনসাইটের একটি যন্ত্রের উপর নির্ভর করে , রোটেশন অ্যান্ড ইন্টেরিয়র স্ট্রাকচার এক্সপেরিমেন্ট (আরআইএসই)। গ্রহের স্পিন রেট ট্র্যাক করতে NASA-এর ডিপ স্পেস নেটওয়ার্ক অন আর্থের মধ্যে উন্নত রেডিও প্রযুক্তি এবং অ্যান্টেনাগুলিতে আপগ্রেড ব্যবহার করেছে৷ এর সৌর প্যানেলের ধূলিকণা সেই বছরের ডিসেম্বরে ল্যান্ডারটির শক্তি […]

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Smart Doorbell: একা বাড়িতে নিরাপত্তায় ব্যবহার করুন জুনপালস স্মার্ট ডোরবেল

আপনার বাড়ির নিরাপত্তা অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ। জুনপালস স্মার্ট ডোরবেল (Zunpulse Smart Doorbell) একাধিক ক্যামেরা ইনস্টল করার ঝামেলা ছাড়াই আপনার বাড়ির নিরাপত্তা বাড়ানোর একটি চমৎকার উপায়।

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Samsung Galaxy Z Fold 5 এর ফিচারগুলি জেনে নিন

Samsung Galaxy Z Fold 5 উন্মোচন করেছে। Z Fold 4 থেকে Z Fold 5 কে আলাদা করা কঠিন; দেখতে প্রায় অভিন্ন। Z Fold 5 এর তুলনায় পাতলা এবং হালকা।

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Airtel Xstream AirFiber: ভারতের প্রথম 5G ওয়্যারলেস Wi-Fi চালু, ৬৪ টি ডিভাইসে একসঙ্গে চলবে ইন্টারনেট

ভারতী এয়ারটেল (Bharti Airtel) সোমবার ফিক্সড ওয়্যারলেস অ্যাক্সেস (এফডাব্লুএ) ডিভাইস – এয়ারটেল এক্সস্ট্রিম এয়ারফাইবার (Airtel Xstream AirFiber) চালু করেছে। এটি ভারতের প্রথম 5G ওয়্যারলেস Wi-Fi ডিভাইস। যে দেশে ফাইবার ওয়াই-ফাই নেই সেখানে ইন্টারনেট পরিষেবা দিতে সাহায্য করবে এয়ারটেলের ডিভাইস। টেলিকম সংস্থাটি বলেছে যে এটি ভারতের গ্রামীণ এবং শহুরে এলাকায় সংযোগ প্রদান করবে যেখানে ফাইবার কাঠামো […]

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