दोबारा चुनाव लड़ रहे 324 सांसदों की संपत्ति में 43% की वृद्धि, ADR ने जारी की रिपोर्ट

कोलकाता : एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में इन सांसदों की औसत संपत्ति लगभग 21.55 करोड़ रुपये थी, जबकि मौजूदा चुनावी चक्र में औसत संपत्ति मूल्य महत्वपूर्ण रूप से बढ़कर 30.88 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले पांच वर्षों में 9.33 करोड़ रुपये की वृद्धि को दर्शाता है। इसमें 2024 के आम चुनाव में फिर से चुनाव लड़ रहे संसद सदस्यों की संपत्ति में वृद्धि का विश्लेषण किया गया। लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण का मतदान एक जून को होगा और मतों की गिनती चार जून को की जाएगी।

एडीआर ने कहा कि 2019 और 2024 के चुनावों के बीच इन 324 सांसदों की संपत्ति में औसतन 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख दलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दोबारा चुनाव लड़ रहे 183 सांसदों की औसत संपत्ति में 39.18 प्रतिशत (18.40 करोड़ रुपये से 25.61 करोड़ रुपये) की वृद्धि देखी गई। वहीं, कांग्रेस के दोबारा चुनाव लड़ रहे 36 सांसदों की संपत्ति में 48.76 प्रतिशत (44.13 करोड़ रुपये से 65.64 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई है।

दोबारा चुनाव लड़ रहे द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के 10 सांसदों की संपत्ति में 19.96 प्रतिशत (30.93 करोड़ रुपये से 37.10 करोड़ रुपये), शिवसेना के आठ सांसदों की संपत्ति में 48.13 प्रतिशत (19.77 करोड़ रुपये से 29.28 करोड़ रुपये), समाजवादी पार्टी (सपा) के पांच सांसदों की संपत्ति में 20.53 प्रतिशत (20.56 करोड़ रुपये से 24.78 करोड़ रुपये) और युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के आठ सांसदों की संपत्ति में 84.13 प्रतिशत (28.66 करोड़ रुपये से 52.78 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोबारा चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस के 16 सांसदों की संपत्ति में औसत वृद्धि 53.84 प्रतिशत (15.69 करोड़ रुपये से 24.15 करोड़ रुपये), जनता दल (यूनाइटेड) के 11 सांसदों की संपत्ति में 35.54 प्रतिशत (4.55 करोड़ रुपये से 6.17 करोड़ रुपये), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के एक सांसद की संपत्ति में 14.34 प्रतिशत (12 करोड़ रुपये से 14 करोड़ रुपये), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के तीन सांसदों की संपत्ति में 52.94 प्रतिशत (38 करोड़ रुपये से 59 करोड़ रुपये) और राकांपा (शरद चंद्र पवार) के तीन सांसदों की संपत्ति में 21.05 प्रतिशत (48 करोड़ रुपये से 58 करोड़ रुपये) तथा जनता दल (सेक्युलर) के एक सांसद की संपत्ति में 317 प्रतिशत (9 करोड़ रुपये से 40 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई है।

एडीआर ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दोबारा चुनाव लड़ रहे सांसदों की संपत्ति में 25.37 प्रतिशत (8.46 करोड़ रुपये से 10.61 करोड़ रुपये), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए 68.4 प्रतिशत (7.01 करोड़ रुपये से 11.80 करोड़ रुपये), बीजू जनता दल के लिए 184.02 प्रतिशत (2.41 करोड़ रुपये से 6.85 करोड़ रुपये), तेलुगु देशम पार्टी के मामले में 143.2 प्रतिशत (18.90 करोड़ रुपये से 45.97 करोड़ रुपये), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के लिए 104.9 प्रतिशत (13.07 करोड़ रुपये से 26.78 करोड़ रुपये) और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के लिए संपत्ति में 3000.51 प्रतिशत (4.78 लाख रुपये से 1.48 करोड़ रुपये) की औसत वृद्धि हुई है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के दोबारा चुनाव लड़ रहे सांसदों की संपत्ति में 35.12 प्रतिशत (10.43 करोड़ रुपये से 14.09 करोड़ रुपये) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के मामले में 97.61 प्रतिशत (85.40 लाख रुपये से 85.40 लाख रुपये से 1.68 करोड़) की औसत वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में कहा गया कि कि विदुथलाई चिरुथिगल काची के मामले में यह वृद्धि 117.36 प्रतिशत रही और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के दोबारा चुनाव लड़ रहे सांसदों की संपत्ति में तीन प्रतिशत की मामूली कमी देखी गई।

MP में वेल्डिंग बेल्ट से टकराई वंदे भारत, विस्फोट, यात्रियों के उड़े होश

मुरैना: देश की सबसे आधुनिक ट्रेन वंदे भारत बुधवार को मुरैना स्टेशन पर वेल्डिंग बेल्ट ट्यूमर से टकरा गई। जिससे ट्रेन में तेज धमाका हुआ है। ट्रेन में बैठे लोगों घबरा गए, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई। बताया जाता है कि वे‍ल्‍ड‍िंंग बेल्‍ट वंदे भारत एक्‍सप्रेस से टकरा गया। इसके बाद जोरदार धमाका हुआ। इस घटना के बाद करीब 40 मिनट तक वंदे भारत एक्‍सप्रेस मुरैना स्‍टेशन के पास खड़ी रही। इस दौरान यात्री परेशान होते रहे।

वंदे भारत एक्‍सप्रेस रानी कमलापति स्‍टेशन से हजरत निजामुद्दीन स्‍टेशन जा रही थी। जोरदार धमाके के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों में दहशत का वातावरण हो गया।

भोपाल से दिल्ली जा रही वंदेभारत ट्रेन के साथ मुरैना के शिकारपुर फाटक के पास यह हादसा हुआ। रेलवे पटरियों पर मेंटेनेंस का काम चल रहा था। मेंटेनेंस के लिए रखे उपकरणों का कुछ हिस्सा उस ट्रैक पर आ गया था, जिस पर वंदेभारत ट्रेन आने वाली थी। लोहे का भारी उपकरण टकराने से तेज धमाका हुआ।

हालांकि इस बात को रेलवे के अधिकारी स्वीकार नहीं रहे हैं। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि ब्रेक पाइप में खराबी आने से ट्रेन को रोका गया, लेकिन टकराने की आवाज इतनी तेज थी, कि ट्रेन में बैठे यात्री डर गए। इस हादसे के कारण ट्रेन को मुरैना में ज्यादा समय तक रोकना पड़ा था। यह ट्रेन मुरैना स्टेशन पर नहीं रुकती और हादसे के ग्वालियर आगरा रेलवे स्टेशन पर 1 घंटा सात मिनट की देरी से पहुंची।

संसद से विपक्ष के 15 सांसद निलंबित

RS Chairman Jagdeep Dhankhar

संसद के शीत सत्र के नौवें दिन संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर विपक्ष की तरफ से हंगामे के आसार हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले सांसदों के साथ बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, अनुराग ठाकुर समेत कई अन्य मंत्री और सांसद मौजूद रहे। राज्यसभा में गलत बर्ताव के लिए टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है। दरअसल संसद की सुरक्षा में चूक के मामले पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया, इसी दौरान टीएमसी सांसद के बर्ताव के लिए सभापति ने उन्हें निलंबित कर दिया। डेरेक ओ ब्रायन को पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया है। दरअसल ब्रायन संसद में सुरक्षा चूक के मसले पर नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए थे, जिस पर सभापति ने नाराजगी जताई और टीएमसी सांसद को निलंबित कर दिया। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने 13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा में हुई चूक पर कहा कल की घटना को पूरी देश ने देखा। हर दिन सुरक्षा, सत्ता और विकास पर बातें की जा रही हैं लेकिन देश के अंदर ही सुरक्षा खोखली है। क्या पीएम मोदी को इससे कोई फर्क पड़ता है? लोग कहेंगे कि ‘मोदी मतलब मुश्किल है’।

ট্রেনে বোমা আছে বলে আতঙ্ক ছড়ালেন বিজেপি সাংসদ উমা ভারতী

Uma bharati

নিউজ ডেস্ক: রাত ৯টা ৪০। উত্তরপ্রদেশের ললিতপুর স্টেশনে(lalitpur station) ঢুকছে খাজুরাহো-কুরুক্ষেত্র এক্সপ্রেস। ওই ট্রেনের এইচএ-১ বগিতে যাত্রী হিসেবে ছিলেন বিজেপি সাংসদ উমা ভারতী (uma bharati)। হঠাৎই তিনি চিৎকার করতে শুরু করেন ট্রেনে বোমা আছে। সাংসদের চিৎকারে ছুটে আসেন রেল রক্ষীরা।

প্ল্যাটফর্মে দাঁড় করিয়ে রেখে সমস্ত যাত্রীদের ট্রেন থেকে নামিয়ে দিয়ে তল্লাশি চালায় রেলরক্ষীরা। সাংসদের চিৎকারে গোটা স্টেশন ও ট্রেন যাত্রীদের মধ্যে তীব্র আতঙ্ক ছড়ায়। যদিও সেই তল্লাশি অভিযানে বোমার কোনও চিহ্ন মেলেনি। কিন্তু বোমাতঙ্কের কারণে ট্রেনটিকে প্রায় দু’ঘণ্টা ললিতপুর স্টেশনে দাঁড়ি করিয়ে রাখা হয়। বিজেপি সাংসদ হঠাৎই কেন এভাবে বোমাতঙ্ক ছড়ালেন তা বোধগম্য হয়নি পুলিশের (police)। উল্লেখ্য, উমা ওই ট্রেনে মধ্যপ্রদেশের টিকমগড় (tikamgarh) থেকে দিল্লি (delhi) যাচ্ছিলেন।

উমা ভারতী হঠাৎই কেন বোমা বোমা বলে চিৎকার করে উঠলেন সেই প্রশ্নের কোনও উত্তর মেলেনি। সাংসদ নিজেও কিসের ভিত্তিতে বোমা রাখার কথা বললেন তা তিনি জানাননি। শোনা যাচ্ছে, নেত্রীর মনে ট্রেনে বোমা আছে এমন একটা আশঙ্কা তৈরি হয়েছিল। সে কারণেই তিনি সঙ্গে সঙ্গেই বিষয়টি পুলিশকে জানান। কেন্দ্রের শাসক দলের সাংসদদের কাছ থেকে এই সতর্কবার্তা পেয়ে পুলিশ অবশ্য কোনও ঝুঁকি নেয়নি। সঙ্গে সঙ্গেই আরপিএফ ও জিআরপি চিরুনি তল্লাশি শুরু করে। আনা হয় ডগ স্কোয়াডের সদস্যদের।

ললিতপুর থেকে ট্রেনটি ঝাঁসি পৌছলে শেখানও একদফা কিছুক্ষণ তল্লাশি চালানো হয়। পাশাপাশি সাংসদের নিরাপত্তাও বাড়ায় পুলিশ। তবে শেষ পর্যন্ত ওই ট্রেনে কোনও সমস্যা হয়নি। তবে ঘটনার জেরে নির্দিষ্ট সময়ের বেশ কিছুটা পর নিরাপদেই ওই ট্রেন দিল্লি পৌঁছয়।

যাত্রীদের মধ্যে অনেকেই অবশ্য সাংসদের এই আচরণে তীব্র ক্ষোভ প্রকাশ করেছেন। তাঁরা বলেছেন, শাসক দলের সাংসদ নিজের ক্ষমতা দেখাতেই অকারণে বোমাতঙ্ক ছড়িয়েছেন। এটা যদি অন্য কোনও যাত্রী করত তবে পুলিশ আইনমাফিক তার বিরুদ্ধে ব্যবস্থা নিত। কিন্তু শাসক দলের সাংসদ হওয়ার কারণে ছাড় পেয়ে গেলেন উমা। বরং তিনি সংবাদমাধ্যমে জায়গা করে নিলেন।

Derek O’Brien: তৃণমূলের বিপুল জয়ের দিন সাসপেন্ড সাংসদ ডেরেক

derek o'brien

News Desk: বিশৃঙ্খল আচরণ ও সংসদের রুলবুক ছোড়ার অভিযোগে সাসপেন্ড করা হল তৃণমূল কংগ্রেস সাংসদ ডেরেক ও’ব্রায়েনকে (Derek O’Brien)। তিনি যখন সাসপেন্ড হলেন তখন তাঁর দল কলকাতা পুর নিগম ভোটে বিপুল জয় পেয়েছে।

মঙ্গলবার রাজ্যসভায় নির্বাচনী আইনি সংশোধনী বিল, ২০২১ পাশ করানোর বিপক্ষে সরব হয় বিরোধীরা। তৃণমূল সাংসদ এই বিল ও ১২ জন সাংসদকে সাসপেন্ড করার প্রতিবাদে রাজ্যসভা থেকে ওয়াকআউট করার সময় রুলবুকটি সাংবাদিকদের টেবিলের দিকে ছুঁড়ে ফেলেন। তাঁর এই আচরণের জন্যই ফের একবার সাসপেন্ড করা হল তাঁকে।

শীতকালীন অধিবেশনের বাকি দিনগুলির জন্য রাজ্যসভা থেকে সাসপেন্ড করা হয়েছে ডেরেক ওব্রায়েন কে।
তৃণমূল সাংসদ ডেরেক ও’ব্রায়েন টুইটে লিখেছেন, শেষবার যখন রাজ্যসভা থেকে সাসপেন্ড হয়েছিলাম তখন কেন্দ্রীয় সরকার কৃষি আইন পাশ করিয়েছিল। তারপর কি হয়েছিল তা আমাদের সকলেরই জানা। আজ নির্বাচনী আইনি সংশোধনী বিল, ২০২১ একইভাবে পাশ করানো হল। আশা করি এই বিলটিও দ্রুত বাতিল করা হবে।’

উল্লেখ্য, সোমবার লোকসভায় নির্বাচনী আইনি সংশোধনী বিল, ২০২১ পাশ করিয়েছে মোদী সরকার। মঙ্গলবার রাজ্যসভায় এই বিল পাশ করায় কেন্দ্রীয় সরকার। এই আইন অনুসারে ভোটার কার্ডের সঙ্গে আধার কার্ডের সংযুক্তিকরণ আইনত হবে। তবে বিরোধীদের দাবি, এই আইনের মাধ্যমে সাধারণ মানুষের ব্যক্তি স্বাধীনতায় হস্তক্ষেপ করার চেষ্টা করছে কেন্দ্র।

সাসপেনশনের প্রতিবাদে এবার অনশনে বসতে চলেছেন বিরোধী সাংসদরা

Opposition Parliament Deadlock

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: সংসদের চলতি শীতকালীন অধিবেশন (winter season) শুরুর প্রথম দিনেই রাজ্যসভা (rajyashava) থেকে ১২ জন বিরোধী সাংসদকে সাসপেন্ড করেছিলেন সভার চেয়ারম্যান এম বেঙ্কাইয়া নায়ডু। ওই সিদ্ধান্তের প্রতিবাদে ৩০ নভেম্বর থেকে গান্ধী মূর্তির (gandhi statue) পাদদেশে সকাল ১০ টা থেকে সন্ধ্যা ৬ টা পর্যন্ত প্রতিদিন ধরনা দিচ্ছেন সাসপেন্ড হওয়া সাংসদরা। শুধু যে সাসপেন্ড হওয়া ১২ জন সাংসদ ধরনা দিচ্ছেন তা নয়, বিভিন্ন বিরোধী দলের একাধিক সাংসদও (member of parliament) নিয়মিত যোগ দিচ্ছেন ওই ধরনায়।

একটানা ১০ দিনের বেশি ধরনা চলার পরও সরকারপক্ষ অবশ্য তাদের সিদ্ধান্ত থেকে পিছিয়ে আসেনি। তাই সরকারের প্রতি হুমকি দিয়ে শুক্রবার সাসপেন্ড হওয়া সাংসদরা বলেছেন, তাঁরা আগামী সপ্তাহে প্রতীকী অনশনের প্রস্তুতি নিচ্ছেন। সাসপেনশন প্রত্যাহারের দাবিতে বিরোধী আন্দোলনের তীব্রতা বাড়লেও সরকার কোনও রকম ভাবে নরম মনোভাব দেখায়নি।

রাজ্যসভার চেয়ারম্যান প্রথমে জানিয়েছেন, সাংসদরা ক্ষমা চাইলে তিনি সাসপেনশন প্রত্যাহার করবেন। প্রত্যেককে আলাদা আলাদাভাবে চিঠি লিখে ক্ষমা চাইতে হবে। কিন্তু রাজ্যসভার চেয়ারম্যানের এই প্রস্তাব পত্রপাঠ খারিজ করে দিয়েছে বিরোধীরা। পরবর্তী ক্ষেত্রে চেয়ারম্যান সাংসদের প্রস্তাব দিয়েছেন, যদি দু’জন সাংসদ আলাদা করে তাঁর কাছে ক্ষমা চেয়ে নেন তবে তিনি সকলের সাসপেনশন প্রত্যাহার করে নেবেন।

তবে বিরোধীরা ওই প্রস্তাবও উড়িয়ে দিয়েছে। বিরোধীরা মনে করছে, এই প্রস্তাব দিয়ে সরকার আসলে বিরোধী ঐক্যে চিড় ধরানোর চেষ্টা করছে। তাই সাসপেনশনের প্রতিবাদে আগামী সপ্তাহে অনশন শুরুর প্রস্তুতি নিতে শুরু করেছেন তাঁরা। শেষ পর্যন্ত সাংসদরা যদি অনশন ধর্মঘটে বসেন তাতে সরকারের উপর চাপ আরও বাড়বে বলেই মনে করছে রাজনৈতিক মহল। পাশাপাশি তাঁরা এটাও জানতে চাইছেন যে, বিরোধীরা একদিনের প্রতীকী অনশন করবেন নাকি, অনির্দিষ্টকালের জন্য তাঁদের এই অনশন চলবে।

Suspension of 12 Rajya Sabha MPs: বরখাস্তের সিদ্ধান্তকে অসাংবিধানিক বললেন সোনিয়া

Sonia Gandhi

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: বাদল অধিবেশনে হই হট্টগোল করার কারণে রাজ্যসভার ১২ জন বিরোধী সাংসদকে চলতি শীতকালীন অধিবেশন থেকে বহিষ্কার (Suspension of 12 Rajya Sabha MPs) করেছেন রাজ্যসভার চেয়ারম্যান এম বেঙ্কাইয়া নায়ডু। বেঙ্কাইয়ার এই সিদ্ধান্তকে অসাংবিধানিক বলে মন্তব্য করলেন কংগ্রেস সভানেত্রী সোনিয়া গান্ধী।

তিন কৃষি আইন প্রত্যাহার হয়েছে। কৃষকদের সঙ্গে কেন্দ্রের আলাপ-আলোচনা চলছে। সেই আলোচনার জেরে কৃষকরা সম্ভবত তাঁদের আন্দোলনের পথ থেকে সরে আসবেন এমন ইঙ্গিতও মিলেছে। কিন্তু কৃষক আন্দোলনকে হাতিয়ার করেই মোদি সরকারকে কোণঠাসা করতে চাইছে কংগ্রেস।

বুধবার কংগ্রেসের সংসদীয় দলের বৈঠকে সোনিয়া গান্ধী দীর্ঘ আলোচনা করেন। সেখানেই সোনিয়া স্পষ্ট জানিয়ে দেন, গত একবছরে আন্দোলন করতে গিয়ে যে ৭০০ জন কৃষক শহিদ হয়েছেন সরকারকে তাঁদের উপযুক্ত সন্মান দিতে হবে। মৃত কৃষকদের পরিবারকে আর্থিক ও অন্যান্য সাহায্য করতে হবে। দলীয় সাংসদদের ওই বৈঠকে সোনিয়া বলেন, রাজ্যসভার সাংসদদের বরখাস্ত করার সিদ্ধান্তটি অসাংবিধানিক এবং অনৈতিক।

ইতিমধ্যেই নতুন কৃষি আইন বাতিল হওয়ায় তার আর কোনও প্রাসঙ্গিকতা নেই। তাই চলতি অধিবেশনে বিজেপি সরকারকে কোন কোন ইস্যুতে আক্রমণ করা হবে তা স্থির করতেই বুধবার কংগ্রেস সংসদীয় দলের বৈঠক বসে। এদিনের বৈঠকে উপস্থিত ছিলেন রাহুল গান্ধী, অধীর চৌধুরী, মল্লিকার্জুন খাড়্গের মত শীর্ষ নেতারা। রাজ্যসভার সাংসদের বহিষ্কারের দায় মল্লিকার্জুন সরকারের ঘাড়েই চাপিয়ে।

তিনি বলেছেন, বিরোধী দল হিসেবে আমরা সর্বদাই সরকারের সঙ্গে সহযোগিতামূলক মনোভাব নিয়ে চলেছি। কিন্তু সরকার বিরোধীদের কোনও কথাই শুনতে রাজি নয়। অন্যদিকে ভেঙ্কাইয়া নায়ডু জানিয়েছেন, বিরোধী সাংসদরা ক্ষমা চাইলে তিনি তাঁদের সাসপেনশন প্রত্যাহার করে নেবেন। এই বক্তব্যকেও উড়িয়ে দিয়েছেন মল্লিকার্জুন। কংগ্রেস নেতা বলেছেন, ক্ষমা চাওয়ার কোনও প্রশ্নই ওঠে না। কারণ সাংসদরা প্রতিবাদ জানিয়ে কোনও অন্যায় করেননি। অন্যায় করেছে সরকার।

একই সঙ্গে এই প্রবীণ কংগ্রেস নেতা বলেন তাঁরা নাগাল্যান্ডের ঘটনা এবং পেট্রোল-ডিজেল-সহ প্রতিটি জিনিসের দাম বৃদ্ধির মত একাধিক বিষয় নিয়ে সংসদে আলোচনা করতে চান। কিন্তু সরকার আলোচনার কোনও সুযোগই দিচ্ছে না। দেখে শুনে মনে হচ্ছে, মোদি সরকার সংসদ চালাতে চায় না। তাই বিরোধীদের দেখলেই তারা পালিয়ে যাওয়ার চেষ্টা করছে। সরকারের বিরুদ্ধে কোনও কথা বললেই সাংসদদের সংসদ থেকে বের করে দেওয়া হচ্ছে। এটা অসাংবিধানিক বিষয়। একই সঙ্গে এ দিনের বৈঠকে সোনিয়া জানান, ইডি ও সিবিআই কর্তাদের মেয়াদ বৃদ্ধির সিদ্ধান্তেরও তাঁরা বিরোধিতা করবেন।

সোনিয়া গান্ধী জানিয়েছেন, তাঁরা মনে করছেন এই নিয়ম বদলের ফলে কেন্দ্রীয় তদন্তকারী সংস্থাগুলির নিয়ন্ত্রণভার সম্পূর্ণভাবে মোদি সরকারের হাতেই থাকবে। অর্থাৎ কেন্দ্রীয় তদন্তকারী সংস্থাগুলির নিরপেক্ষতা বজায় থাকবে না। এদিন রাজ্যসভার অধিবেশন শুরু হলে কংগ্রেস সাংসদ দীপেন্দ্র হুডা কৃষক সমস্যা নিয়ে আলোচনা করতে চেয়ে একটি মুলতুবি প্রস্তাব পেশ করেন। এছাড়াও ফসলের ন্যূনতম সহায়ক মূল্য নিশ্চিত করা এবং কৃষকদের বিরুদ্ধে দায়ের হওয়া সব মামলা প্রত্যাহারের দাবিও জানান।

Show Cause Mimi-Nusrat: দলীয় সংসদ সদস্য মিমি, নুসরতকে শোকজ করল TMC

Mimi Chakraborty Nusrat Jahan

নিউজ ডেস্ক, কলকাতা: সংসদের শীতকালীন অধিবেশনের (winter season) বাকি দিনগুলিতে দল কোন পথে চলবে তা নিয়ে আলোচনা করতে মঙ্গলবার  দিল্লিতে উপস্থিত সাংসদদের সঙ্গে বৈঠক করেন তৃণমূল কংগ্রেসের (TMC) সর্বভারতীয় সাধারণ সম্পাদক অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় (Avishek Banerjee)।

আজকের এই বৈঠকে কিভাবে শাসক দল বিজেপির মোকাবিলা করা হবে তা নিয়ে রণকৌশল তৈরি করেন অভিষেক। এদিন এই তরুণ তৃণমূল নেতা দলীয় সাংসদদের (member of parliament) স্পষ্ট বার্তা দিয়েছেন আগামী দিনে সংসদের ভিতরে এবং বাইরে বিজেপির বিরুদ্ধে আরও বেশি আক্রমণাত্মক হতে হবে।

দ্বিতীয় যে বার্তাটি অভিষেক দিয়েছেন সেটা হল, কংগ্রেসের মুখের দিকে তাকিয়ে না থেকে তৃণমূল সাংসদরা যেন নিজেদের মত করেই বিজেপির বিরুদ্ধে লড়াই করেন। অভিষেক স্পষ্ট বুঝিয়ে দিয়েছেন, কংগ্রেস হল একটি পৃথক দল। সেই দলের রণকৌশল আলাদা। তাই তারা কী ভাবছে বা কী করছে সেটা কখনওই তৃণমূলের বিবেচনার বিষয় হতে পারে না। তৃণমূল একটি সম্পূর্ণ আলাদা রাজনৈতিক দল। তাদের আদর্শ ও চিন্তাভাবনা আলাদা। তারা নিজেদের মত করেই বিজেপির মোকাবিলা করবে। কোন দল কী করছে সে কথা দ্বিতীয়বার ভাববে না।

এই বৈঠকের আগে অভিষেক বন্দ্যোপাধ্যায় দিল্লিতে থাকা সব সংসদকেই এদিন উপস্থিত থাকার কথা বলেছিলেন। কিন্তু এ দিনের বৈঠকে দুই তারকা সাংসদ নুসরত জাহান ও মিমি চক্রবর্তী অনুপস্থিত ছিলেন। শোনা যাচ্ছে এবার দুই তারকা সাংসদকে কারণ দর্শানোর নোটিশ দিতে চলেছে দল। বৈঠকের মধ্যেই অভিষেক জানিয়ে দিয়েছেন, আজকের বৈঠকে যাঁরা অনুপস্থিত আছেন তাঁরা কেন থাকলেন না সে বিষয়ে সুস্পষ্ট ব্যাখ্যা দিতে হবে।

দলের দুই রাজ্যসভার সাংসদকে সাসপেন্ড করার সিদ্ধান্তের প্রতিবাদে গান্ধী মূর্তির পাদদেশে ধরনা দিচ্ছেন দুই তৃণমূল সাংসদ। মঙ্গলবার সেই ধরনায় সাংসদদের সঙ্গে যোগ দেন অভিষেক।

সম্প্রতি জাতীয় রাজনীতিতে কার্যত একাই লড়ছে তৃণমূল। কয়েকটি রাজ্যে অন্য ছোট আঞ্চলিক দলগুলিকে তৃণমূল জোট সঙ্গী হিসেবে পেতে চাইলেও কংগ্রেসকে ধর্তব্যের মধ্যে আনছে না। বরং কংগ্রেসকে ভেঙেই নিজেদের ঘর গোছাতে চাইছে তৃণমূল। তৃণমূলের এই রণকৌশল স্বাভাবিকভাবেই কংগ্রেসের উষ্মা বাড়িয়েছে। তাই আগামী দিনে কংগ্রেস ও তৃণমূল কংগ্রেসের সম্পর্কের রসায়ন কোথায় গিয়ে পৌঁছয় তা নিয়ে রাজনৈতিক মহলের কৌতূহল রয়েছে।

MPs suspended: সাংসদদের সাসপেনশন কংগ্রেস ও তৃণমূলকে ফের নিয়ে এল এক মঞ্চে

suspend the MP

News Desk, New Delhi: বেশ কিছুদিন ধরেই দেশের প্রধান বিরোধী দলকে, তা নিয়ে কংগ্রেস ও তৃণমূল (Congress and Trinamul Congress ) কংগ্রেসের মধ্যে একটা লড়াই চলছিল। কার্যত গোটা দেশেই কংগ্রেসকে এড়িয়ে চলছিল তৃণমূল কংগ্রেস। কিন্তু ১২ জন রাজ্যসভা সাংসদকে (Rajya shabhaa mp) সাসপেন্ড (MPs Suspended) করার সিদ্ধান্ত কংগ্রেস ও তৃণমূল কংগ্রেসকে ফের এক মঞ্চে নিয়ে এল। এই দুই দল ছাড়াও আরও প্রায় ১৩ টি বিরোধী দল এই মঞ্চে সামিল হয়েছে।

পূর্ব নির্ধারিত কর্মসূচি অনুযায়ী বৃহস্পতিবার সংসদ চত্বরে (parliament premises) গান্ধী মূর্তির (Gandhi statue)৷ পাদদেশে সাসপেন্ড হওয়া ১২ জন সাংসদ ধরনায় বসেছিলেন। এদিন ওই সাংসদদের পাশে এসে বসেন রাহুল গান্ধী ও লোকসভায় কংগ্রেস দলনেতা অধীর চৌধুরী। একই সঙ্গে বিভিন্ন বিরোধী দলের প্রতিনিধিরাও ওই ধর্না মঞ্চে হাজির হন।

তৃণমূল কংগ্রেস আগেই ঘোষণা করেছিল, সাসপেনশনের নির্দেশ যতদিন না প্রত্যাহার হবে ততদিন তাদের দুই সাংসদ গান্ধী মূর্তির সামনে ধর্না দেবেন। কিন্তু বাস্তবে দেখা যায়, শুধু দুই তৃণমূল সাংসদ নয়, অপর ১০জন সাংসদও ধরনা দিচ্ছেন। যাদের মধ্যে ছয়জন কংগ্রেসের, দুজন শিবসেনার এবং সিপিএম সিপিআইএয়ের একজন করে সাংসদ রয়েছেন।

কিন্তু বৃহস্পতিবার সকালে রাজনৈতিক মহলকে কিছুটা চমকে দিয়ে ধরনা মঞ্চে এসে বসেন রাহুল গান্ধী। বুধবারই মুম্বই সফররত বাংলার মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় রাহুল তথা কংগ্রেসকে তীব্র কটাক্ষ করেছিলেন। মমতার দাবি, একমাত্র তৃণমূল কংগ্রেসই বিজেপির বিরুদ্ধে রাস্তায় নেমে আন্দোলন করছে। একই সঙ্গে নাম না করে রাহুলকে তীব্র কটাক্ষ করে তৃণমূল সুপ্রিমো বলেন, বছরের অর্ধেক দিন বিদেশে কাটালে বিজেপির বিরুদ্ধে লড়াই করা যায় না।

সোশ্যাল মিডিয়ায় নয়, লড়াইটা করতে হয় মাঠে নেমে, রাজনীতির ময়দানে। মমতার এহেন বাক্যবাণের পরেই যেভাবে রাহুলকে তৃণমূল সাংসদের পাশে এসে বসতে দেখা গিয়েছে তা অবশ্যই গুরুত্বপূর্ণ বলে মনে করছে রাজনৈতিক মহল। পাশাপাশি রাহুলের এই সিদ্ধান্তে এটাও প্রমাণ হয়ে গেল যে, বিরোধীদের মধ্যে যতই মতবিরোধ থাক না কেন, বিভিন্ন গুরুত্বপূর্ণ ইস্যুতে বিজেপির বিরুদ্ধে লড়াই করতে তারা একজোট হয়েই চলবে।

রাহুলের এদিনের সিদ্ধান্তে এক ঢিলে দুই পাখি মরেছে বলে রাজনৈতিক মহলের ধারণা। কারণ ঐক্যবদ্ধ বিরোধী জোটের ছবি তুলে ধরে রাহুল একদিকে যেমন বিজেপির উপর চাপ সৃষ্টি করেছেন, তেমনই তৃণমূলকেও এটা বুঝিয়ে দিয়েছেন যে কংগ্রেসকে ছাড়া কখনই বিরোধী মঞ্চ গড়ে তোলা সম্ভব নয়।

তবে বিরোধী সাংসদদের এই ধরনাকে খুব একটা আমল দিচ্ছেন না রাজ্যসভার চেয়ারম্যান বেঙ্কাইয়া নায়ডু। তিনি বলেছেন, ক্ষমা না চাওয়া পর্যন্ত ওই সাংসদদের সাসপেনশন কোনওভাবেই প্রত্যাহার করা হবে না। বরং বিরোধীদের এই আন্দোলনকে অগণতান্ত্রিক বলে উল্লেখ করেছেন নায়ডু।

MPs suspend: বাদলের অশান্তির জেরে শীতে সাসপেন্ড ১২ সাংসদ

parlament house

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: দেশের সংসদীয় ইতিহাসে তৈরি হল এক নতুন রেকর্ড। বাদল অধিবেশনে (Winter Season ) গন্ডগোল, অশান্তি পাকানোর ঘটনায় শীতকালীন অধিবেশনে সাসপেন্ড (suspend) করা হল ১২ জন সাংসদকে।

সাসপেন্ড হওয়া সাংসদদের মধ্যে দুজন তৃণমূল কংগ্রেসের (TMC)। এই দুই সাংসদ হলেন তৃণমূলের রাজ্যসভার সাংসদ দোলা সেন (Dola Sen) এবং শান্তা ছেত্রী (Shanta Chatri) । সাসপেন্ড হওয়া অপর ১০ জন সাংসদের মধ্যে ৬ জন কংগ্রেসের, সিপিএম ও সিপিআইয়ের একজন করে এবং দুজন শিবসেনার।

উল্লেখ্য, বাদল অধিবেশনের শেষ দিনে পেগাসাস ইস্যুতে উত্তাল হয়েছিল রাজ্যসভা। সভার ওয়েলে নেমে এসে বিক্ষোভ দেখিয়েছিলেন বিরোধীরা। মোদি সরকারের বিরুদ্ধে স্লোগান দেওয়ার পাশাপাশি তাঁরা সংসদের বিভিন্ন নথিপত্র ছিঁড়ে ফেলে প্রতিবাদ জানিয়েছিলেন তাঁরা। ওই ঘটনায় সরকার পক্ষ বিরোধী সাংসদদের শাস্তির দাবি তুলেছিল। অধিবেশনের প্রথম দিনে অভিযুক্ত ১২ জন সাংসদের শাস্তির দাবিতে একটি প্রস্তাব আনে সরকার পক্ষ। সেই দাবি মেনে নিয়েই ১২ জন সাংসদকে শীতকালীন অধিবেশন থেকে সাসপেন্ড করার সিদ্ধান্ত নেন রাজ্যসভার চেয়ারম্যান বেঙ্কাইয়া নাইডু। স্বাভাবিকভাবেই এই ১২ জন সাংসদ আর শীতকালীন অধিবেশনে কোনও বিতর্কে অংশ নিতে পারবেন না।

বিরোধী সাংসদদের সাসপেন্ড হওয়ার ঘটনা একেবারেই নতুন কিছু নয়। এর আগেও বাদল অধিবেশনে বিরোধী সাংসদদের দমন করতে সাসপেনশনকেই হাতিয়ার করেছিল মোদি সরকার। কিন্তু পূর্ববর্তী অধিবেশনের অশান্তির জেরে চলতি অধিবেশনে সাংসদদের সাসপেন্ড হওয়ার ঘটনা রাজনৈতিক মহলের কাছে নজিরবিহীন বলা চলে। স্বাভাবিকভাবেই সরকারের এদিনের সিদ্ধান্তকে অগণতান্ত্রিক ও অনৈতিক বলে দাবি করেছে বিরোধীরা। সরকারপক্ষের এই সিদ্ধান্তের কড়া নিন্দা করে তৃণমূল সাংসদ সুখেন্দু শেখর রায় বলেছেন, মোদি সরকার নিজেদের ইচ্ছামত সংসদ চালাচ্ছে। যদি আমাদের কোথাও কোনও ভুল হয়ে থাকে তবে তার ভিডিও প্রকাশ করুক কেন্দ্র।

যাদের বিরুদ্ধে শাস্তি মূলক ব্যবস্থা নেওয়া হল তাদের বক্তব্য জানানোর কোনও সুযোগই দেওয়া হয়নি। এই প্রক্রিয়া অসাংবিধানিক ও অগণতান্ত্রিক। একইসঙ্গে সুখেন্দু শেখর প্রশ্ন তোলেন, সংসদ ভবনে যদি সাংসদদের গলার আওয়াজ শোনা না যায় তাহলে সেটা কোথায় শোনা যাবে? অন্যদিকে সাসপেন্ড হওয়া সাংসদ দোলা বলেন, যারা সরকারের বিরুদ্ধে কথা বলেছে বেছে বেছে তাদেরই সভা থেকে সাসপেন্ড করেছে মোদি সরকার।

Subramanian Swamy: নরেন্দ্র মোদী অর্থনীতির কিছুই বোঝেন না- বিস্ফোরক স্বামী

Subramanian Swamy attack on Narendra Modi

Subramanian Swamy attack on Narendra Modi
নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: মাত্র ২৪ ঘন্টা আগে দেখা করেছিলেন তৃণমূল নেত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের (Mamata Banerjee) সঙ্গে। মমতার সঙ্গে দেখা করার পর বলেছিলেন আমি তো প্রথম থেকেই তৃণমূলের সঙ্গে আছি।

বৃহস্পতিবার (Thursday) কেন্দ্রের নরেন্দ্র মোদী সরকারকে (Modi Government) কড়া ভাষায় আক্রমণ করলেন। বললেন, দেশের অর্থনীতি(economy), নিরাপত্তা, কর্মসংস্থান সবক্ষেত্রেই ব্যর্থ মোদী সরকার। মোদী সরকারের বিরুদ্ধে ব্যর্থতার এই অভিযোগ তুললেন বিক্ষুব্ধ বিজেপি সাংসদ সুব্রহ্মণ্যম স্বামী (Subramanian Swamy)।

বুধবার বিকেলে মমতার সঙ্গে দেখা করার পর দিল্লির রাজনীতিতে জল্পনা চলছে সুব্রহ্মণ্যম স্বামী কি এবার তৃণমূলে যোগ দিচ্ছেন! তার উত্তরে স্বামী বলেছেন, তিনি তো প্রথম থেকেই তৃণমূলের পাশে আছেন। বৃহস্পতিবার আরও একধাপ এগিয়ে মোদী সরকারকে তুলোধোনা করলেন তিনি।

একের পর এক বিষয় নিয়ে মোদী সরকারকে আজ কড়া ভাষায় আক্রমণ করেন স্বামী। স্বামী এদিন সম্পূর্ণ দলের লাইনের বাইরে গিয়ে মোদী সরকারকে আক্রমণ করেছেন। তিনি বলেছেন, বর্তমান সরকারের অধীনে কাশ্মীরের মানুষ সুখে-শান্তিতে নেই। তবে শুধু কাশ্মীরের মানুষ নয়, গোটা দেশের মানুষই মোদী সরকারের কাজ-কর্মে যথেষ্টই অখুশি। কারণ এই সরকার দেশকে নিরাপত্তা দিতে পারে না। অর্থনীতিকে ধরে রাখতে পারে না। নরেন্দ্র মোদী তো অর্থনীতির কিছুই বোঝেন না। উনি শুধু চিনকেই ভয় করে চলেন। কিন্তু কেন আমরা ওদের ভয় পাব? ওদের যদি পরমাণু অস্ত্র থাকে একই জিনিস তো আমাদেরও আছে। তাহলে চিনকে এত ভয় পাওয়ার কারণ কি?

স্বামী আরও বলেন, মোদী সরকার সব দিক দিয়েই ব্যর্থ। এই সরকার মানুষের কর্মসংস্থান তৈরি করতে পারে না। এমনকী, আফগানিস্তানের পরিস্থিতি নিয়ন্ত্রণেও মোদীসরকার সম্পূর্ণ ব্যর্থ। এই সরকার শুধু পেগাসাস স্পাইওয়্যার দিয়ে বিরোধীদের ওপর নজরদারি চালাতে পারে। বিরোধীদের গতিবিধি ট্র্যাক করতে পারে। এছাড়া এই সরকারের আর কোনও কাজ নেই।

এর আগেই সুব্রহ্মণ্যম স্বামী টুইট করে মমতাকে মোরারজি দেশাই, রাজীব গান্ধী, জয়প্রকাশ নারায়ণ, পিভি নরসিমা রাওয়ের মত প্রাক্তন প্রধানমন্ত্রীদের সঙ্গে একই আসনে বসান। স্বামী বলেন, আমি যতজন রাজনীতিবিদদের সঙ্গে কাজ করেছি তাঁদের মধ্যে জয়প্রকাশ নারায়ণ, মোরারজি দেশাই, নরসিমা রাও, রাজীব গান্ধীর সমকক্ষ হলেন মমতা। উনি যা ভাল বোঝেন সেটাই বলেন। যা করেন সেটা সকলকে জানান। দেশের রাজনীতিতে এটা এক বিরল গুণ।

সূত্র খবর, মোদী সরকারের কাছে যথেষ্ট কোণঠাসা স্বামী। সে কারণেই তিনি প্রথম থেকেই মোদী সরকার তথা প্রধানমন্ত্রী মোদীর কট্টর সমালোচক। তৃণমূলের সঙ্গে ঘনিষ্ঠতা বাড়ালেও এখনই অবশ্য তিনি তৃণমূলে যোগ দিচ্ছেন না।

বরং আগামী দিনে এভাবেই তিনি মোদী সরকারের বিরুদ্ধে তোপ দেগে বিরোধী শিবিরের সুবিধা করে যাবেন। বেশ কিছুদিন ধরেই বিজেপির কেন্দ্রীয় নেতৃত্বের সঙ্গে স্বামীর সম্পর্ক ভালো যাচ্ছে না। যে কারণে কিছুদিন আগেই বিজেপির কার্যনির্বাহী কমিটি থেকে বাদ পড়তে হয়েছে স্বামীকে। তবে রাজনৈতিক মহলের একাংশ মনে করছে স্বামীও এবার তৃণমূলের পথেই হাঁটতে চলেছেন।

Gautam Gambhir: বিজেপি সাংসদ গৌতম গম্ভীরকে খুনের হুমকি আইএস জঙ্গি গোষ্ঠীর

BJP MP Gautam Gambhir

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: ভারতীয় দলের প্রাক্তন ক্রিকেটার ও বিজেপি সাংসদ গৌতম গম্ভীরকে (Gautam Gambhir) খুন করার হুমকি দিল আইএস (ISIS) জঙ্গি গোষ্ঠী। হুমকি পাওয়ার পরই পুলিশের কাছে অভিযোগ জানিয়েছেন এই সাংসদ ইতিমধ্যেই গম্ভীরের নিরাপত্তা বাড়ানো হয়েছে পাশাপাশি চলছে তদন্ত।

জানা গিয়েছে, চলতি সপ্তাহের শুরুতেই গৌতম গম্ভীরকে প্রাণে মেরে ফেলার হুমকি দিয়ে একটি ই-মেল পাঠিয়েছে আইএস কাশ্মীর গোষ্ঠী ( IS kashmit)। আইএস কাশ্মীর গোষ্ঠী কাশ্মীর, কেরল, উত্তরপ্রদেশের (Utter Pradesh) মত কয়েকটি রাজ্যে যথেষ্ট সক্রিয়। জঙ্গিদের কাছ থেকে ইমেল মারফত প্রাণনাশের হুমকি পরই দিল্লি পুলিশের কাছে অভিযোগ জানিয়েছেন গম্ভীর।

দিল্লি পুলিশের ডেপুটি কমিশনার শ্বেতা চৌহান জানিয়েছেন, আইএস জঙ্গি গোষ্ঠীর হুমকির প্রেক্ষিতে পূর্ব দিল্লি লোকসভা কেন্দ্রের বিজেপি সাংসদ গম্ভীরের নিরাপত্তা আরও বাড়ানো হয়েছে। তাঁর বাড়ির সামনে মোতায়েন করা হয়েছে অতিরিক্ত নিরাপত্তা কর্মী। সাদা পোষাকের কিছু গোয়েন্দা কর্মীও গম্ভীরের বাড়ি ও তাঁর গতিবিধির ওপর নজর রাখছেন। এই হুমকির বিষয়টি নিয়ে ইতিমধ্যেই তদন্ত শুরু করেছে পুলিশ।

উল্লেখ্য কুখ্যাত আন্তর্জাতিক জঙ্গি সংগঠন ইসলামিক স্টেটের একটি শাখা সংগঠন আইএস কাশ্মীর। ইতিমধ্যেই এই সংগঠনটি কেরল এবং উত্তরপ্রদেশে ভালমতো প্রভাব বিস্তার করেছে। তবে আইএস কাশ্মীর গোষ্ঠীর একাধিক শীর্ষ কমান্ডারকে ইতিমধ্যেই খতম করেছে নিরাপত্তা বাহিনী। কিন্তু তারপরও পুলিশ কোন ঝুঁকি নিতে চায় না। সেজন্য গম্ভীরের অভিযোগ পাওয়ার পরেই তদন্ত শুরু করেছে দিল্লি পুলিশ। কোথা থেকে ওই ই-,মেইল পাঠানো হয়েছিল, কে পাঠিয়েছিল তা খতিয়ে দেখা হচ্ছে।

উল্লেখ্য ভারত ও পাকিস্তানের অধিকারে থাকা কাশ্মীরকে খিলাফতের অধীনে আনতে চায় আইএস জঙ্গি গোষ্ঠী। খিলাফতের অধীনে কঠোর ইসলামিক আইন অনুসারে চলবে শাসন। খিলাফত শাসনে জাতীয়তাবাদের বা আবেগের কোনও জায়গা নেই। খিলাফত মানে শুধুই কঠোর ইসলামিক আইন। আইএস জঙ্গি গোষ্ঠীর লক্ষ্য হল যে কোনওভাবে ইসলামিক সাম্রাজ্যের পরিধি বাড়িয়ে তোলা।

Farm Laws: ৭০০ কৃষকের মৃত্যুর পর কেন কৃষি আইন প্রত্যাহার: সুখেন্দু শেখর রায়

Sukhendu Shekhar Roy

নিউজ ডেস্ক, কলকাতা: প্রধানমন্ত্রী কৃষি আইন প্রত্যাহার ঘোষণা করার পর রাজনৈতিক মহলে আলোড়ন। তৃণমূল কংগ্রেস নেত্রী ও মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় আন্দেলনরত কৃষকদের অভিনন্দন জানান। এর পরেই টিএমসি সাংসদ সুখেন্দু শেখর রায় জানান, সুখেন্দু শেখর রায় সাতশো জন কৃষক মারা গিয়েছেন। কেন এতদিন পরে ? এতদিন তো কেন্দ্র বলছিল আমরা এই আইন ফেরাবো না।

এটা ওরা বাধ্য হয়ে করেছে। আগামি ফেব্রুয়ারি মার্চ মাসে উত্তরপ্রদেশ সহ পাঁচটা রাজ্যে বিধানসভা নির্বাচন রয়েছে। তাই এই কালা কানুন ওরা ফিরিয়ে নিলো। এতদিন তো এই আন্দোলনরত কৃষকদের কে শদ্রোহী বলে বলছিলেন। এটা কৃষকদের জয়, অন্নদাতাদের জয়।

modi farm laws withdrawal announcement

তিনি আরও বলেছেন, প্রধানমন্ত্রী কে এর জন্য জনসমক্ষে প্রকাশ্যে ক্ষমা চাইতে হবে। এবং আমরা দাবি করছি যারা মারা গিয়েছেন তাদের পরিবারের জন্য উপযুক্ত ক্ষতিপূরণ দিতে হবে। এই জয় প্রতিটা কৃষকের জয় যারা নিরবিচ্ছিন্নভাবে এই আইনের বিরুদ্ধে লড়াই করছিলেন।

এটা একটা ভোটের গিমিক। আপনারা জানেন কিছুদিন আগেই একজন কেন্দ্রীয় মন্ত্রীর ছেলে উত্তরপ্রদেশের লখিমপুর খেরি তে গাড়ি চাপা দিয়ে আন্দোলন রত কৃষকদের মেরে দিয়েছে। অভিযুক্ত কেন্দ্রীয় মন্ত্রীর বিরুদ্ধে এখনো কোনো ব্যবস্থা নেওয়া হয়নি।

Farmers to hold rail roko on Oct 18

এদিন তৃণমূল সংসদ সদস্য বলেন, দেশের অধিকাংশ কৃষক যারা আন্দোলন করছিলেন তারা ইতিমধ্যেই ঘোষনা করেছিলেন যে নভেম্বরের শেষ সপ্তাহে সংসদে যে শীতকালীন অধিবেশন শুরু হতে চলেছে সেই সময় প্রতিদিন দিল্লিতে বিক্ষোভ দেখাবে। এই সিদ্ধান্ত তার‌ই আরো এক প্রতিফলন। ৩৫ টা কৃষক সংগঠন এর বিরুদ্ধে আন্দোলন করেছেন। আজ প্রধানমন্ত্রী এমন ভাব করছেন যে উনি কৃষকদের প্রতি দয়া করছেন।

video proved that the farmers were crushed to death by the wheel of the car

ওরা অনেকদিন ধরেই চেষ্টা করেছেন। কিন্তু বিল আনার আগে এই বিষয়ে ওরা কোনো কৃষক সংগঠনের সঙ্গে আলাপ আলোচনাও করেনি। ওদের মন্ত্রী রবি শংকর প্রসাদ সংসদে মিথ্যা বলেছিলেন। ওরা ২০২৪ এ নিজেদের পরাজয় কে ঠেকাতে একটা মিথ্যা প্রয়াস করছে।

তিনি জানান, সংসদে আমরা এই বিষয়টা অবশ্যই তুলবো। অন্য রাজনৈতিক দলের সাথেও কথা বলবো। এতদিন একবারের জন্যেও এই কালা কানুন ফেরানোর কথা ভাবেনি। আজ নির্বাচনের আগে হঠাৎ করে ফিরিয়ে নিলো। সকলেই বুঝতে পারছে কারণ টা কি। এটা লোকতন্ত্রের জয়। তৃণমূল কংগ্রেস এই বিক্রেতা সরকারের সব ধরনের জনবিরোধী কাজের বিরোধিতা করছে এবং করবে। কেন্দ্র সরকার অবশ্যই ব্যাকফুটে।

CBI-ED ডিরেক্টরের মেয়াদ বৃদ্ধির অর্ডিন্যান্সকে চ্যালেঞ্জ

mahua moitra

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: সিবিআই এবং ইডির মেয়াদ বৃদ্ধির সিদ্ধান্তকে চ্যালেঞ্জ করে সুপ্রিম কোর্টে আবেদন করলেন তৃণমূল কংগ্রেস সাংসদ মহুয়া মৈত্র (mahua moitra)। নিজের টুইটার হ্যান্ডলে মহুয়া সুপ্রিম কোর্টে আর্জি জানানোর কথা জানিয়েছেন।

তিনি লিখেছেন, সিবিআই (cbi) এবং ইডির (ed) ডিরেক্টরের মেয়াদ বৃদ্ধি করতে নরেন্দ্র মোদি সরকার যে অর্ডিন্যান্স জারি করেছে সেই অর্ডিন্যান্সকে চ্যালেঞ্জ করে আমি সুপ্রিম কোর্টে একটি আবেদন করেছি। কারণ মোদি সরকারের এই সিদ্ধান্ত সুপ্রিম কোর্টের একটি রায়ের পরিপন্থী।

চলতি সপ্তাহের শুরুতেই সিবিআই এবং ইডির ডিরেক্টরের কার্যকালের মেয়াদ দুই বছর থেকে বাড়িয়ে পাঁচ বছর করেছে মোদি সরকার।

দিল্লি স্পেশাল পুলিশ এস্টাবলিশমেন্ট অ্যাক্ট এবং সেন্ট্রাল ভিজিলান্স কমিশন অ্যাক্ট অনুযায়ী সিবিআই ও ইডির আধিকারিকদের কার্যকালের মেয়াদ ছিল দু’বছর। তাই ওই আইন সংশোধন করতেই মোদি সরকার অধ্যাদেশ জারি করে। কিন্তু সেই অধ্যাদেশকে সুপ্রিম কোর্টে (supreme court) চ্যালেঞ্জ জানালেন তৃণমূল সাংসদ মহুয়া। এ ব্যাপারে তিনি শীর্ষ আদালতের পূর্ববর্তী একটি রায়কে হাতিয়ার করেছেন।

D Director Sanjay Kumar Mishra

মহুয়া বলেন, ২০১৯ সালে ইডির ডিরেক্টর সঞ্জয় কুমার (sanjay kumar mishra) মিশ্রের দু’বছরের কার্যকালের মেয়াদ শেষ হয়েছিল। ওই মেয়াদ শেষ হওয়ার পর সঞ্জয়ের কার্যকালের মেয়াদ আরও একবছর বাড়ানো হয়েছিল। সে সময় কেন্দ্রের ওই সিদ্ধান্তকে চ্যালেঞ্জ করে দায়ের হওয়া এক মামলায় শীর্ষ আদালত রায় দিয়েছিল, নতুন করে আর সঞ্জয় কুমারের মেয়াদ বাড়ানো যাবে না। কিন্তু সুপ্রিম কোর্টের সেই নির্দেশকে বুড়ো আঙুল দেখিয়ে নতুন করে ফের সিবিআই ও ইডি আধিকারিকর মেয়াদ বাড়ানোর ব্যবস্থা করেছে মোদি সরকার।

যা কার্যত আদালত অবমাননার সামিল। অর্থাৎ মোদি সরকার সুপ্রিম কোর্টকেও গ্রাহ্য করছে না। সে কারণেই মহুয়া কেন্দ্রের ওই অর্ডিন্যান্সকে চ্যালেঞ্জ জানিয়ে সুপ্রিম কোর্টে গিয়েছেন। মহুয়া তথা তৃণমূল শিবিরের অভিযোগ, মোদি সরকার নিজেদের রাজনৈতিক আখের গোছাতেই সিবিআই, ইডি-সহ অন্য কেন্দ্রীয় সংস্থার ডিরেক্টরদের কার্যকালের মেয়াদ বাড়িয়েছে। যদিও রাজনৈতিক হস্তক্ষেপ এড়াতে সিবিআই, ইডির মত কেন্দ্রীয় সংস্থাগুলির প্রধানদের কার্যকালের মেয়াদ দু’বছর করা হয়েছিল। কিন্তু মোদি সরকার তা মানতে রাজি নয়। উল্লেখ্য, শুধু সিবিআই ডিরেক্টর নয় গোয়েন্দা বিভাগ বা আইবির প্রধান, র এর প্রধানের কার্যকালের মেয়াদও বাড়ানো হয়েছে। মেয়াদ বাড়ানো হয়েছে কেন্দ্রীয় স্বরাষ্ট্র সচিব ও প্রতিরক্ষা সচিবেরও।

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p style=”text-align: justify;”>এরই মধ্যে অর্ডিন্যান্স জারির তিনদিনের মধ্যেই বিতর্কিত আধিকারিক সঞ্জয় কুমারের চাকরির মেয়াদ আরও এক বছর বাড়িয়ে দিল মোদি সরকার। বৃহস্পতিবারই ইডির ডিরেক্টর পদে সঞ্জয় কুমার মিশ্রের চাকরির মেয়াদ শেষ হওয়ার কথা ছিল। গত বছরও একইভাবে তাঁর চাকরির মেয়াদ বাড়ানো হয়েছিল।

চলতি বছর থেকেই সাংসদদের দেওয়া হবে এমপি ল্যাডের টাকা, জানাল কেন্দ্র

parlament

News Desk, New Delhi: চলতি অর্থবছর থেকেই ফের সাংসদের এলাকার উন্নয়নের জন্য এলাকা উন্নয়ন তহবিল বা এমপি ল্যাডের (MP LAD) টাকা দেওয়া হবে। বুধবার প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদির (,narendra modi) পৌরহিত্যে বসেছিল কেন্দ্রীয় মন্ত্রিসভার বৈঠক। সেই বৈঠকেই এমপি ল্যাডের টাকা ফের চালু করার সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছে।

বৈঠক শেষে কেন্দ্রীয় মন্ত্রী অনুরাগ ঠাকুর (Anurag Thakur) জানিয়েছেন, চলতি বছরে আংশিকভাবে এবং ২০২২ সাল থেকে পূর্ণাঙ্গভাবেই সাংসদদের নিজস্ব এলাকায় উন্নয়নের জন্য অর্থ দেওয়া হবে। চলতি অর্থবর্ষে সাংসদরা এককালীন দু’কোটি টাকা করে পাবেন। পরের বছর অর্থাৎ ২০২২ সাল থেকে সাংসদরা আগের মতোই বছরে ৫ কোটি টাকা করে পাবেন। তবে এই টাকা দুটি কিস্তিতে আড়াই কোটি করে দেওয়া হবে। লোকসভা (Lokshava) এবং রাজ্যসভার (Rajya shava) সব সাংসদই এই টাকা পাবেন। ২০২৫-২৬ অর্থবর্ষ পর্যন্ত প্রতিবছর সাংসদরা নিজেদের এলাকার উন্নয়নের জন্য ৫ কোটি টাকা করে পাবেন।

উল্লেখ্য করোনাজনিত কারণে ২০১৯ সালের এপ্রিল মাসে এমপি ল্যাডের টাকা দেওয়া বন্ধ রাখার সিদ্ধান্ত নিয়েছিল নরেন্দ্র মোদি সরকার। কেন্দ্র সিদ্ধান্ত নিয়েছিল, দু’বছর এই টাকা দেওয়া হবে না।

এমপি ল্যাডের টাকা বাতিল করার সিদ্ধান্তে গোটা দেশ জুড়ে তীব্র শোরগোল পড়েছিল। বিরোধী রাজনৈতিক দল মোদি সরকারের এই সিদ্ধান্তের কড়া সমালোচনা করে। বিরোধীদের দাবি ছিল, এভাবে এমপি ল্যাডের বরাদ্দ বাতিল করে এলাকার মানুষের নৈতিক অধিকার হস্তক্ষেপ করছে মোদি সরকার। সাধারণ মানুষকে কখনওই তাদের অধিকার থেকে বঞ্চিত করা যায় না। এই সিদ্ধান্ত অগণতান্ত্রিক। সরকারের উচিত ছিল করোনা পরিস্থিতির মোকাবিলা করতে এমপিদের টাকা বাড়ানো। কিন্তু সেটা না করে সরকার উল্টো পথে হেঁটে মানুষের সমস্যা বাড়ালো।

উল্লেখ্য, সাংসদদের টাকা দু বছর বন্ধ রাখা হয়েছিল। তবে সেই টাকা গিয়েছিল সংসদের স্থায়ী তহবিলে। একজন সাংসদ প্রতিবছর এলাকার উন্নয়নের জন্য ৫ কোটি টাকা করে পান। অর্থাৎ দু’বছরে একজন সাংসদ পেয়ে থাকেন ১০ কোটি টাকা। দু’বছর এমপি ল্যাডের টাকা বন্ধ থাকায় সরকারের সাশ্রয় হয়েছে ৭৯০ কোটি টাকা।
অন্যদিকে আর্থিক বিশেষজ্ঞরা মনে করছেন, মোদি সরকার করোনারজনিত পরিস্থিতি ধীরে ধীরে কাটিয়ে উঠছে। অর্থনীতি ঘুরে দাঁড়াতে শুরু করেছে। সে কারণেই এমপি ল্যাডের টাকা পুনরায় চালু করার সিদ্ধান্ত নেওয়া হল।

কৃষকদের হাত কেটে ও চোখ উপড়ে নেওয়ার হুমকি দিলেন বিজেপি সাংসদ অরবিন্দ শর্মা

Arvind Sharma

News Desk: আন্দোলনরত কৃষকদের হাত কেটে নেওয়া হবে। তাদের চোখও উপড়ে নেওয়া হবে বলে হুমকি দিলেন হরিয়ানার (Hariyana) বিজেপি সাংসদ অরবিন্দ শর্মা (Arvind Sharma)। বিজেপি সাংসদের এই মন্তব্যে যথারীতি দেশ জুড়ে তীব্র সমালোচনা শুরু হয়েছে।

নরেন্দ্র মোদি সরকারের আনা তিন কৃষি আইন বাতিলের দাবিতে এক বছর ধরে বিক্ষোভ দেখাচ্ছেন কৃষকরা। বিশেষ করে পাঞ্জাব ও হরিয়ানার কৃষকরা এ ব্যাপারে মুখ্য ভূমিকা নিয়েছেন।

প্রশ্ন হল, হঠাৎ করে কেন কৃষকদের এ ধরনের হুমকি দিলেন সাংসদ শর্মা। শুক্রবার হরিয়ানার বিজেপি নেতা মণীশ গ্রোভার রোহতকের Rohotak) কিলোই গ্রামে একটি মন্দিরে গিয়েছিলেন। মণীশের সঙ্গে ছিলেন রাজ্যের মন্ত্রী রবীন্দ্র রাজু, রোহতকের মেয়র মনমোহন গয়াল (Monmohan Goyal), বিজেপি নেতা সতীশ নন্দাল-সহ (Satish Nandal) আরও কয়েকজন বিজেপি নেতা।

বিজেপি নেতা মণীশকে ওই মন্দিরে দীর্ঘক্ষণ আটকে রাখেন স্থানীয় কৃষকরা। আন্দোলনরত কৃষকদের অভিযোগ, বিজেপি নেতা মণীশ আন্দোলনরত কৃষকদের ‘বেকার, মদ্যপ, বাজে লোকজন’ বলে অভিহিত করেছেন। ওই মন্তব্যের জন্য বিজেপি নেতাকে ক্ষমা চাইতে হবে। যতক্ষণ না ওই বিজেপি নেতা ক্ষমা চাইবেন ততক্ষণ তাঁকে আটকে রাখা হবে। এভাবেই ওই বিজেপি নেতাকে প্রায় আট ঘণ্টা আটকে রাখা হয়।

শেষ পর্যন্ত মুক্তি পেতে মনীশ কৃষকদের কাছে হাতজোড় করে ক্ষমা চেয়ে নেন। ক্ষমা চাওয়ার পরই কৃষকরা মণীশকে মন্দির থেকে বেরিয়ে যাওয়ার রাস্তা করে দেন। যদিও পরবর্তী ক্ষেত্রে মণীশ কৃষকদের কাছে ক্ষমা চাওয়ার কথা অস্বীকার করেন। শনিবার তিনি বলেছেন, আমাকে বাইরের লোকজনের উদ্দেশ্যে হাত নাড়তে বলা হয়েছিল। আমি হাত নেড়েছিলাম, কখনওই ক্ষমা চাইনি। আমার যখন ইচ্ছা হবে তখনই এই মন্দিরে আসব। দেখব আমায় কে আটকায়!

রাজ্যের মন্ত্রী-সহ অন্য নেতাদের এভাবে আটকে রাখার কারণে কৃষকদের ওপর প্রবল ক্ষুব্ধ হন বিজেপি সাংসদ অরবিন্দ শর্মা। এই কীর্তিমান সাংসদ এদিন বলেন, যারা তাঁর বন্ধু মণীশ-সহ অন্য বিজেপি নেতাদের বিরোধিতা করবে তিনি তাদের চোখ উপড়ে নেবেন। এমনকী প্রয়োজনে হাত কেটে নিতেও দ্বিধা করবেন না।

যথারীতি বিজেপি সাংসদের এই মন্তব্যে তীব্র প্রতিক্রিয়া দেখা দিয়েছে। হরিয়ানা, পাঞ্জাব সহ অন্যান্য রাজ্যের কৃষক নেতারাও ওই মন্তব্যের তীব্র নিন্দা করেছেন। অনেকেই একধাপ এগিয়ে শর্মাকে ওই মন্তব্য প্রত্যাহার করে নিতে হবে বলে দাবি তুলেছেন। কেউ বলেছেন, ওই মন্তব্যের জন্য অরবিন্দ শর্মাকে প্রকাশ্যে ক্ষমা চাইতে হবে।

Suvendu Adhikari: শুভেন্দু কি ফিরছেন মমতা শিবিরে? তীব্র জল্পনা

Suvendu Adhikari

News Desk: উপনির্বাচনে বিজেপির জামানত খুইয়ে দিশেহারা পরিস্থিতি। এক ডজন বিধায়ক দলত্যাগে প্রস্তুত। তারা সবাই তৃণমুল কংগ্রেসে ঢুকছেন বলেই রাজ্য সরগরম। এর মাঝে টিএমসি সাংসদ কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায়ের একটি ব্যাঙ্গাত্মক গান ও সংবাদ মাধ্যমের মন্তব্যের জেরে তীব্র গুঞ্জন বিরোধী দলনেতা শুভেন্দু অধিকারী (Suvendu Adhikari) বিজেপি ত্যাগ করতে চলেছেন।

কল্যাণ বন্দ্যোপাধ্যায় তাঁর মন্তব্যে শুভেন্দু অধিকারীকে ভাই বলে ডেকেছেন। তাঁকে ফিরে আসার বার্তা দিয়েছেন। এর পরেই গুঞ্জন শুভেন্দুবাবুর দলত্যাগ নিয়ে ছড়াতে শুরু করেছে। তবে শুভেন্দুবাবু নিরুত্তর।

বিজেপির প্রাক্তন রাজ্য সভাপতি দিলীগ ঘোষের দাবি, দলে এমন অনেকেই আছে যারা চায় না রাজ্যে বিজেপির শক্তি বাড়ুক। তাদের তাড়ানোর প্রক্রিয়া শুরু হবে বলেই তিনি ইঙ্গিত দিয়েছেন।

বিধানসভা ভোটের আগে তৃণমূল কংগ্রেস ত্যাগ করে বিজেপিতে যোগ দেন শুভেন্দু অধিকারী ও তাঁর পিতা শিশির অধিকারী। পূর্ব মেদিনীপুরের নন্দীগ্রাম কেন্দ্রে মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়কে পরাজিত করেন শুভেন্দু। যদিও টিএমসি বিপুল শক্তি নিয়ে সরকার গড়েছে। আর পরপর উপনির্বাচনে বিজেপির ভরাডুবি হতে শুরু করেছে।

বিজেপি সরকার দখল করতে না পারায় বিধানসভা নির্বাচনের পর দলত্যাগের হিড়িক লেগেছে বিরোধী দলে। সম্প্রতি দলত্যাগ করেন রাজীব বন্দ্যোপাধ্যায়।আবার তৃণমূলে ফিরেছেন। রাজীব বলেছেন, বিজেপি দলটাই সাইনবোর্ড হয়ে যাবে।

Maharashtra: বিজেপি করলে কোনও তদন্ত হয় না, বললেন গেরুয়া সাংসদ সঞ্জয় পাতিল

Maharashtra leader Sanjay Patil

News Desk: বিরোধীরা হামেশাই অভিযোগ করেন, সিবিআই, ইডির মতো কেন্দ্রীয় সংস্থাগুলিকে তাদের বিরুদ্ধে কাজে লাগানো হচ্ছে। কেন্দ্রের নরেন্দ্র মোদি সরকার এই সমস্ত কেন্দ্রীয় সংস্থাকে নিজেদের প্রয়োজনে বা রাজনৈতিক প্রতিহিংসা চরিতার্থ করতে কাজে লাগাচ্ছে।

যদিও কেন্দ্র বিরোধীদের সেই অভিযোগ বারেবারে উড়িয়ে দিয়েছে। কিন্তু বিরোধীদের তোলা অভিযোগ যে এতটুকু ভিত্তিহীন নয় সেটাই প্রমাণ করে দেখালেন মহারাষ্ট্রের বিজেপি সাংসদ সঞ্জয় পাতিল। রবিবার সঞ্জয় বলেন, এখন আমি বিজেপি সাংসদ। তাই সিবিআই বা ইডি কেউ আর আমার পিছনে আসবে না।

দিন কয়েক আগে হর্ষবর্ধন পাতিল নামে এক বিজেপি নেতাও একই কথা বলেছিলেন। হর্ষবর্ধন বলেছিলেন, বিজেপিতে যোগ দেওয়ার পর থেকেই তিনি নিশ্চিন্তে ঘুমোচ্ছেন। কারণ এখন আর তাঁকে কোনও ধরনের জিজ্ঞাসাবাদের মধ্যে পড়তে হচ্ছে না। যথারীতি বিজেপি সাংসদ ও এক নেতার এ ধরনের কথায় তীব্র বিতর্ক শুরু হয়েছে রাজনৈতিক মহলে।

বাস্তব অভিজ্ঞতায় দেখা গিয়েছে, নরেন্দ্র মোদি সরকার সর্বদাই সিবিআই, ইডি, আয়কর বিভাগের মতো কেন্দ্রীয় সংস্থাকে বিরোধীদের পিছনে লাগিয়ে রেখেছে। বিরোধীদের নানাভাবে হেনস্তা করাই যে মোদি সরকারের একমাত্র লক্ষ বারেবারে এমন অভিযোগ উঠেছে। কিন্তু সেই অভিযোগের সাপেক্ষে তেমন কোনও জোরালো প্রমাণ মেলেনি। এবার সেই প্রমাণ বিরোধীদের হাতে তুলে দিলেন মহারাষ্ট্রের এই বিজেপি সাংসদ সঞ্জয়।

সঞ্জয় পাতিল একমাত্র বিজেপি সাংসদ যিনি প্রথম প্রকাশ্যে এই মন্তব্য করলেন। শুধু সঞ্জয় একা নন, চলতি মাসে হর্ষবর্ধন পাতিল নামে এক বিজেপি নেতাও একই মন্তব্য করেছেন। ২০১৯ সালে কংগ্রেস ছেড়ে বিজেপিতে এসেছেন হর্ষবর্ধন। এই বিজেপি নেতা বলেন, কেউ যদি আমার কাছে জানতে চায় আমি কেন বিজেপিতে যোগ দিয়েছি, তবে আমি বলব নিশ্চিন্তে ঘুমানোর জন্য আমি গেরুয়া দলে যোগ দিয়েছি। বিজেপিতে যোগ দেওয়ার পর আমাকে আর এখন কারও কোনও প্রশ্নের মুখে পড়তে হচ্ছে না। যথারীতি হর্ষবর্ধনের এই মন্তব্যে তীব্র বিতর্ক তৈরি হয়। হর্ষবর্ধন অবশ্য পাল্টা বলেন, তাঁর মন্তব্যের ভুল ব্যাখ্যা করেছে সংবাদমাধ্যম। তিনি বলতে চেয়েছিলেন, কংগ্রেস প্রতিশ্রুতি দিয়েও তাঁকে প্রার্থী করেনি। সে কারণেই তিনি কংগ্রেস ছেড়েছেন।

২০১৪ সালে কেন্দ্রে ক্ষমতা দখলের পরই বিজেপি বিরোধীদের বিরুদ্ধে বিভিন্ন কেন্দ্রীয় সংস্থাকে ব্যবহার করছে বলে একাধিকবার অভিযোগ উঠেছে। পশ্চিমবঙ্গের মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় বরাবরই বিজেপির বিরুদ্ধে কেন্দ্রীয় তদন্তকারী সংস্থাগুলিকে নিজেদের কাজে লাগানোর অভিযোগ তুলেছেন। মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় এজন্যই বিজেপিকে ‘ওয়াশিং মেশিন’ বলেও কটাক্ষ করেছেন। নেত্রীর দাবি, বিরোধীদলে থাকলেই নেতারা দুর্নীতিগ্রস্ত হন। কিন্তু সেই দুর্নীতিগ্রস্ত নেতারাই বিজেপিতে যোগ দিলে সব সাদা হয়ে যান। সে কারণেই মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় বিজেপিকে ‘ওয়াশিং মেশিন’ বলেন।

সম্প্রতি মুম্বইয়ের মাদক মামলায় শাহরুখ খানের ছেলে আরিয়ান খান গ্রেফতার হওয়ার পর থেকে কেন্দ্রের বিজেপি সরকারের বিরুদ্ধে এনসিবিকে ব্যবহার করার অভিযোগ উঠেছে। বিরোধীরা বারবার অভিযোগ করেছেন, যে যত দুর্নীতিগ্রস্ত হোক না কেন, বিজেপিতে যোগ দিলে তার বিরুদ্ধে চলতে থাকা সব তদন্তই ধামাচাপা পড়ে যায়। বিরোধীরা যে এতটুকু ভুল বলছেন না, সেটা প্রমাণ হয়ে গেল বিজেপি সাংসদ সঞ্জয় পাতিলের মন্তব্যে। শুধু সঞ্জয় নন, হর্ষবর্ধনও একই কথা বলায় বিজেপি সরকারের বিরুদ্ধে বিরোধীদের তোলা অভিযোগ আরো মজবুত হয়েছে বলে মনে করছে রাজনৈতিক মহল।

কেন্দ্রের কৃষি নীতি সম্পর্কে ফের সুর চড়ালেন বিজেপি সংসদ সদস্য বরুণ গান্ধী

BJP MP Varun Gandhi criticized the Centre's agricultural policy

নিউজ ডেস্ক: ফের আন্দোলনরত কৃষকদের পক্ষে মুখ খুললেন বিজেপি সাংসদ বরুণ গান্ধী। শনিবার গেরুয়া দলের এই সাংসদ বলেন, কেন্দ্রীয় সরকারের উচিত অবিলম্বে তিন কৃষি আইন পুনর্বিবেচনা করে দেখা। কৃষকদের পক্ষে দাঁড়াতে শনিবার টুইটারে একটি ভিডিয়ো পোস্ট করেন বরুণ।

ওই ভিডিওতে দেখা গিয়েছে একজন কৃষক তাঁর জমির ধান পুড়িয়ে ফেলছেন। বরুণ বলেন, সামোধ সিং নামে উত্তরপ্রদেশের এই কৃষক ১৫ দিন ধরে এক মাণ্ডি থেকে আর এক মাণ্ডিতে ছুটে বেড়িয়েছেন। কিন্তু তিনি কোনভাবেই তাঁর জমির ফসল বিক্রি করতে পারেননি। সে কারণেই হতাশ হয়ে পড়া ওই কৃষক জমির সব ফসল পুড়িয়ে দিয়েছেন। সরকারের উচিত, এ ধরনের ঘটনা বন্ধের জন্য কৃষি নীতি পুনর্বিবেচনা করে দেখা। বহু কষ্ট করে কৃষকরা ফসল উৎপাদন করে থাকেন। কতটা জ্বালায় জ্বললে তবে একজন কৃষক শরীরের রক্ত জল করা পরিশ্রমের সেই ফসল পুড়িয়ে দিতে পারেন তা আমাদের ভেবে দেখতে হবে।

এর আগে লখিমপুর খেরির ঘটনা নিয়ে সরব হয়েছিলেন বরুণ। পিলভিটের এই বিজেপি সাংসদই দলের একমাত্র নেতা যিনি লখিমপুরের ঘটনায় কৃষকদের পক্ষ নিয়েছেন। তবে লখিমপুরের ঘটনা নিয়ে মুখ খোলায় বরুণকে শাস্তির মুখেও পড়তে হয়েছে। শাস্তিস্বরূপ দলের এই তরুণ নেতা ও তাঁর মা মানেকা গান্ধীকে বিজেপির জাতীয় কার্যনির্বাহী কমিটি থেকে বাদ দেওয়া হয়েছে।

কিন্তু দলের কার্যনির্বাহী কমিটি থেকে বাদ পড়লেও বরুণ কিন্তু পিছিয়ে যাননি। বরং তিনি মোদি সরকারের বিরুদ্ধে আরও আক্রমণাত্মক হয়েছেন। বরুণ গান্ধী বলেছেন, এক বছর ধরে কৃষকরা আন্দোলন করছেন। তাঁরা কি বলতে চাইছেন সেটা কি সরকার একবার ভেবে দেখতে পারে না? সরকার তার এই উন্নাসিকতার জবাব একদিন পাবেই। কৃষকরাই দেশের অন্নদাতা। সবার আগে সরকারের উচিত কৃষকদের কথা ভাবা। তাঁরা কি বলতে চাইছেন সেটা শোনা। কিন্তু সরকার সেটা করছে না। বরং উল্টো পথে হেঁটে কৃষকদের এড়িয়ে যাচ্ছে। সরকারের এই সিদ্ধান্ত এক আত্মঘাতী পদক্ষেপ।

শুধু কৃষকদের পাশে থাকাই নয়, উত্তর প্রদেশের বন্যা পরিস্থিতি নিয়েও এদিন মুখ খুলেছেন তিনি। বন্যা কবলিত মানুষকে উদ্ধার ও ত্রাণ বণ্টনে ব্যর্থতার জন্য যোগী আদিত্যনাথ সরকারকে কাঠগড়ায় তুলেছেন বরুণ। আর কয়েক মাস পরেই উত্তর প্রদেশ বিধানসভা নির্বাচন। তার আগে বরুণ যেভাবে রাজ্য ও কেন্দ্রের বিজেপি সরকারকে আক্রমণ করে চলেছে তাতে গেরুয়া দল নিঃসন্দেহে অস্বস্তিতে পড়েছে বলে মনে করছে রাজনৈতিক মহল।

Subramanian Swamy: বাংলাদেশের হিংসার ঘটনায় মোদি সরকার নীরব কেন, প্রশ্ন বিজেপি সাংসদ স্বামীর

Narendra Modi Subramanian Swamy

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: বাংলাদেশে সাম্প্রদায়িক হিংসা নিয়ে এবার সরাসরি নরেন্দ্র মোদি সরকারকে আক্রমণ করলেন বিজেপির বিক্ষুব্ধ সাংসদ সুব্রহ্মণ্যম স্বামী (Subramanian Swamy)। দলের এই সাংসদের প্রশ্ন, বাংলাদেশের সাম্প্রদায়িক হিংসা নিয়ে কেন্দ্রীয় সরকার নীরব কেন? এই মৌনতার কারণ কী? ভারত সরকার এখন কি বাংলাদেশকেও ভয় পাচ্ছে?

বাংলাদেশে সাম্প্রদায়িক হিংসা তথা অসংখ্য হিন্দু পরিবারের আক্রান্ত হওয়ার ঘটনার পর প্রায় এক সপ্তাহ কেটে গিয়েছে। এখনও বাংলাদেশের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে ছোটখাট হিংসার ঘটনা সামনে আসছে। বিশ্বের বিভিন্ন প্রান্তে এই হিংসার প্রতিবাদ জানানো হয়েছে। বুদ্ধিজীবীরাও সরব হয়েছেন। রাষ্ট্রসংঘও এক বিবৃতিতে বাংলাদেশের ঘটনার নিন্দা করেছে। কিন্তু এই হিংসা নিয়ে কেন্দ্রের নরেন্দ্র মোদি সরকার একটি শব্দও খরচ করেনি। এমনকী, তথাকথিত হিন্দুত্ববাদী দল হিসাবে পরিচিত বিজেপির শীর্ষ নেতৃত্ব বাংলাদেশের ঘটনায় নীরব দর্শক।

পশ্চিমবঙ্গের বিজেপির নেতারা বাংলাদেশের ঘটনা নিয়ে অল্প-বিস্তর প্রতিবাদ জানালেও দলের সর্বভারতীয় স্তরের কোনও শীর্ষ নেতাকেই এ ঘটনায় মুখ খুলতে দেখা যায়নি। যা নিয়ে এবার দলের অন্দরেই কটাক্ষের শিকার হতে হল কেন্দ্রের মোদি সরকারকে। বিজেপির রাজ্যসভা সাংসদ সুব্রহ্মণ্যম স্বামী এদিন বলছেন,”বাংলাদেশে হিন্দুদের হত্যা হচ্ছে। ভেঙে দেওয়া মন্দির ও দেবতার মূর্তি। এ নিয়ে বিজেপি কেন প্রতিবাদ করছে না? মোদি সরকার কি এখন বাংলাদেশকেও ভয় পাচ্ছে? লাদাখে সীমান্ত পেরিয়ে চিন আমাদের দেশে ঢুকে পড়ছে। আফগানিস্তানে তালিবান আমাদের ভয় দেখাচ্ছে। ওদের ভয়ে আমরা জঙ্গিগোষ্ঠীর সঙ্গে আলোচনায় বসতে বাধ্য হচ্ছি। এরপর কি আমরা নেপাল, ভুটান মালদ্বীপকেও ভয় পাব?”

স্বামী এর আগেও একাধিক বিষয়ে কেন্দ্রের বিজেপি সরকারের বিরুদ্ধে মুখ খুলেছেন। মোদির আর্থিক নীতির তীব্র বিরোধী হিসাবেই চিহ্নিত স্বামী। রাজনৈতিক মহল মনে করছে, বাংলাদেশের হিংসার মতো জ্বলন্ত ইস্যুতে স্বামীর এই আক্রমণ মোদি সরকারকে নিশ্চিতভাবেই অস্বস্তিতে ফেলবে। দল হিসাবে বিজেপি যেমন বাংলাদেশের ঘটনা নিয়ে চুপ করে আছে, তেমনই মোদি সরকারও এ বিষয়ে তার অবস্থান স্পষ্ট করেনি। ভারত সরকারের কোনও শীর্ষ কর্তাকেও সেভাবে বাংলাদেশের ঘটনার নিন্দা করতে দেখা যায়নি ।

গত সপ্তাহে এক বিবৃতিতে বিদেশমন্ত্রক জানিয়েছে, “সম্প্রতি বাংলাদেশের কিছু ধর্মীয় অনুষ্ঠানে অপ্রত্যাশিত কিছু ঘটনার খবর আমরা পেয়েছি। তবে আমরা এটাও লক্ষ্য করেছি যে, বাংলাদেশ সরকার ওই ঘটনায় দ্রুত যথাযথ ব্যবস্থা নিয়ে পরিস্থিতি নিয়ন্ত্রণে এনেছে।” রাজনৈতিক মহল মনে করছে, বাংলাদেশের ঘটনা নিয়ে মোদি সরকার ধরি মাছ না ছুঁই পানি অবস্থান নিয়েছে। সে কারণেই সরকার বাংলাদেশের ঘটনায় কোনও কড়া প্রতিক্রিয়া জানায়নি।