RBI सितंबर 2025 से ATM से ₹500 के नोट बंद करने जा रहा है!

Rs 500 Notes Safe: RBI Refutes ATM Ban Claims for 2025

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सितंबर 2025 से देशभर के ATM से ₹500 के नोट निकालने की योजना बना रहा है, ऐसी एक खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस खबर ने रविवार की शाम से ही देश भर में हलचल मचा दी है। कुछ लोग इसे डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ते कदम के रूप में देख रहे हैं, तो कई लोग इसे बैंकिंग व्यवस्था के लिए संकट की संभावना मान रहे हैं। इस खबर की सत्यता पर अभी तक RBI या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है।

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खबर का स्रोत और पृष्ठभूमि
यह जानकारी सबसे पहले एक X पोस्ट के माध्यम से सामने आई, जिसमें एक यूजर ने दावा किया कि RBI ATM से ₹500 के नोट हटाने की योजना बना रहा है। इस पोस्ट को सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली हैं। कुछ लोग इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, जबकि कई इसे अफवाह और गलत जानकारी करार दे रहे हैं। हालाँकि, RBI के हालिया निर्देशों में बैंकों को ₹100 और ₹200 के नोटों की आपूर्ति बढ़ाने की सलाह दी गई है, लेकिन ₹500 के नोट बंद करने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया है।

डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ता भारत
भारत की आर्थिक स्थिति पर नजर डालें, तो इस तरह के कदम के पीछे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की कोशिश हो सकती है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में UPI ने डिजिटल लेनदेन का 70% हिस्सा कवर किया, और दिसंबर 2024 में 16.73 बिलियन ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड किए गए। सरकार का ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान कैशलेस ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित कर रहा है, जो कालेधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मददगार हो सकता है। लेकिन ₹500 के नोट हटाने से यह लक्ष्य कितना हासिल होगा, इस पर अलग-अलग राय हैं।

जनता की प्रतिक्रिया
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों में शुरुआती प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि कई लोग इस बदलाव से परेशानी महसूस कर रहे हैं। एक व्यापारी ने कहा, “₹500 के नोट के बिना छोटे-मोटे लेनदेन में दिक्कत होगी। बाजार में ₹100 या ₹200 के नोट की उपलब्धता कम होती है, इसलिए यह हमारे लिए समस्या बन सकता है।” दूसरी ओर, युवा वर्ग का एक हिस्सा डिजिटल पेमेंट को स्वीकार्य मान रहा है। एक IT विशेषज्ञ ने कहा, “अगर ₹500 के नोट हटते हैं, तो हम UPI और अन्य डिजिटल तरीकों पर ज्यादा निर्भर होंगे, जो तेज और सुरक्षित हैं।”

इतिहास पर नजर
₹500 के नोट हटाने की बात सुनकर 2016 का नोटबंदी कांड याद आता है। उस समय सरकार ने ₹500 और ₹1000 के पुराने नोट बंद कर नए नोट जारी किए थे, जिसका उद्देश्य कालाधन और नकली मुद्रा पर लगाम लगाना था। लेकिन RBI की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, बंद नोटों का 99.3% बैंक में वापस आ गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कदम कालेधन को नियंत्रित करने में विफल रहा। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में, क्या ATM से ₹500 के नोट हटाना सफल होगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

आर्थिक प्रभाव
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर यह कदम सही है, तो इसके व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं। भारत की छाया अर्थव्यवस्था (shadow economy) अभी भी GDP का 23-26% है, जहाँ नकदी की भूमिका महत्वपूर्ण है। ₹500 के नोट हटने से छोटे व्यापारियों पर दबाव पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ डिजिटल पेमेंट का दायरा अभी सीमित है। हालाँकि, अगर सरकार डिजिटल पेमेंट पर सब्सिडी या मुफ्त सेवाएं शुरू करती है, तो यह बदलाव स्वीकार्य हो सकता है।

सावधानी और सलाह
RBI या सरकार की ओर से अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए विशेषज्ञ सोशल मीडिया की अपुष्ट खबरों से भ्रम से बचने की सलाह दे रहे हैं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे आधिकारिक स्रोतों से जानकारी जाँचकर ही कोई कदम उठाएँ।

सितंबर 2025 से ATM से ₹500 के नोट हटाने की बात अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह अफवाह देशव्यापी चर्चा का विषय बन गई है। चाहे यह डिजिटल भारत की ओर बढ़ते कदम हो या आर्थिक सुधार का हिस्सा, सरकार का अगला कदम नागरिकों की जिंदगी पर गहरा असर डालेगा। आने वाले दिनों में RBI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार ही एकमात्र विकल्प है।

বিজেপি শাসিত রাজ্যে নির্মাণ শ্রমিকদের মজুরি সবচেয়ে কম

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ভারতের গ্রামীণ এলাকায় নির্মাণ শ্রমিকদের দৈনিক মজুরি (Construction Workers Wages) নিয়ে রিজার্ভ ব্যাংক অফ ইন্ডিয়া (RBI)-এর সাম্প্রতিক পরিসংখ্যান এক উদ্বেগজনক চিত্র তুলে ধরেছে। তথ্য অনুযায়ী, বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলিতে নির্মাণ শ্রমিকদের দৈনিক মজুরি দেশের অন্যান্য রাজ্যের তুলনায় উল্লেখযোগ্যভাবে কম। বিশেষ করে মধ্যপ্রদেশ, গুজরাট, ওড়িশা, বিহার ও উত্তরপ্রদেশের মতো রাজ্যগুলিতে শ্রমিকদের আয় জাতীয় গড়ের (₹৪১৭.৩) নিচে রয়েছে।

বিজেপি শাসিত রাজ্যে নিম্নতম মজুরি
পরিসংখ্যান অনুসারে, মধ্যপ্রদেশে নির্মাণ শ্রমিকদের দৈনিক মজুরি মাত্র ₹২৯২.৪, যা দেশের মধ্যে সর্বনিম্ন। বিজেপি শাসিত গুজরাটে মজুরি ₹৩৪৪.৪, ওড়িশায় ₹৩৫৫.২, বিহারে ₹৩৬৫.৭ এবং উত্তরপ্রদেশে ₹৩৭৬.৬। এই রাজ্যগুলিতে নির্মাণ শ্রমিকরা প্রতিদিন গড়ে মাত্র ₹৩০০-₹৩৭০ আয় করেন, যা জীবিকা নির্বাহের জন্য অপ্রতুল। অন্যদিকে, বিজেপি শাসিত রাজ্য রাজস্থানে এই মজুরি ₹৪৩২.৭ টাকা। আর কংগ্রেস শাসিত কর্ণাটকে ₹৪৫৭.৬, যা কিছুটা ভালো হলেও জাতীয় গড়ের তুলনায় কম।

অন্য রাজ্যের তুলনায় বিশাল পার্থক্য
অন্যদিকে, কেরালা, তামিলনাড়ু, হিমাচল প্রদেশ এবং অন্ধ্রপ্রদেশের মতো অ-বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলিতে শ্রমিকদের মজুরি তুলনামূলকভাবে অনেক বেশি। কেরালায় দৈনিক মজুরি ₹৮৯৩.৬, যা মধ্যপ্রদেশের তুলনায় তিনগুণেরও বেশি। তামিলনাড়ুতে এটি ₹৫৩৯.৭, হিমাচল প্রদেশে ₹৫২৬.৯ এবং অন্ধ্রপ্রদেশে ₹৫২৪.৫। এসব রাজ্যে নির্মাণ শ্রমিকদের আয় অনেকটাই বেশি, যা তাদের জীবনযাত্রার মান উন্নত করতে সাহায্য করে।

বিজেপি শাসিত রাজ্যে মজুরি কম থাকার কারণ
বিশেষজ্ঞদের মতে, বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলিতে নির্মাণ শ্রমিকদের মজুরি কম থাকার পেছনে কয়েকটি মূল কারণ রয়েছে—
১. শ্রম নীতির অভাব: বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলির অধিকাংশে শ্রম আইনের কঠোর প্রয়োগ নেই এবং শ্রমিকদের অধিকার সুরক্ষার দিকে খুব একটা নজর দেওয়া হয় না।
2. শিল্পায়নের অভাব: মধ্যপ্রদেশ, বিহার, ওড়িশা ও উত্তরপ্রদেশের মতো রাজ্যগুলিতে পর্যাপ্ত শিল্প প্রতিষ্ঠান ও নির্মাণ প্রকল্পের অভাব রয়েছে, যা শ্রমিকদের জন্য ভালো মজুরি নিশ্চিত করতে পারত।
৩. অসংগঠিত শ্রম বাজার: এসব রাজ্যে নির্মাণ শ্রমিকদের বেশিরভাগই অসংগঠিত শ্রম বাজারের অন্তর্ভুক্ত, যেখানে তারা নিয়মিত কাজ পান না এবং ন্যূনতম মজুরির অধিকারও প্রায়শই লঙ্ঘিত হয়।
৪. কেন্দ্রের ভূমিকা: কেন্দ্রীয় সরকারের নীতিও মজুরির হ্রাসের একটি কারণ বলে মনে করছেন অর্থনীতিবিদরা। কেন্দ্রীয় প্রকল্পগুলির অধীনে শ্রমিকদের যথাযথ মজুরি দেওয়া হচ্ছে না এবং সরকারি নিয়ন্ত্রণও অনেক ক্ষেত্রে শিথিল রাখা হয়েছে।

শ্রমিকদের ভবিষ্যৎ অনিশ্চিত
বিশেষজ্ঞরা মনে করছেন, যদি এই নিম্ন মজুরির প্রবণতা চলতে থাকে, তবে ভবিষ্যতে বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলির শ্রমিকরা ব্যাপক আর্থিক সংকটে পড়তে পারেন। অনেক শ্রমিক ইতোমধ্যে উচ্চ মজুরির আশায় দক্ষিণ বা পশ্চিম ভারতের রাজ্যগুলিতে পাড়ি জমাচ্ছেন, যার ফলে স্থানীয় অর্থনীতির উপরও বিরূপ প্রভাব পড়ছে।

এছাড়া, বর্তমান মুদ্রাস্ফীতির হার ও নিত্যপ্রয়োজনীয় জিনিসের দাম বৃদ্ধির ফলে এই কম মজুরি শ্রমিকদের জীবনযাত্রাকে আরও কঠিন করে তুলছে। সরকারের উচিত দ্রুত পদক্ষেপ নিয়ে শ্রমিকদের জন্য উপযুক্ত মজুরি নিশ্চিত করা, যাতে তারা ন্যূনতম জীবনযাত্রার মান বজায় রাখতে পারেন।

রিজার্ভ ব্যাংকের এই পরিসংখ্যান স্পষ্টভাবে দেখাচ্ছে যে, বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলিতে নির্মাণ শ্রমিকদের মজুরি অত্যন্ত কম, যা তাদের আর্থ-সামাজিক উন্নয়নের পথে বড় বাধা। শ্রমিকদের সুরক্ষা ও ন্যায্য মজুরি নিশ্চিত করতে রাজ্য সরকারগুলির উচিত নীতিগত পরিবর্তন আনা এবং কেন্দ্রীয় সরকারেরও উচিত এই সমস্যা সমাধানে কার্যকর পদক্ষেপ গ্রহণ করা। নাহলে ভবিষ্যতে বিজেপি শাসিত রাজ্যগুলি আরও বেশি শ্রমিক সংকটের মুখোমুখি হতে পারে।

बंधन बैंक का कुल कारोबार 24% बढ़कर 2.73 लाख करोड़ पर पहुंचा

कोलकाता : बंधन बैंक ने वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की। बैंक का कुल कारोबार 24% बढ़कर 2.73 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कुल जमा में खुदरा हिस्सेदारी अब लगभग 68% है। पिछली तिमाही में देखी गई उत्साहजनक वृद्धि वितरण, व्यावसायिक दक्षता और अनुकूल परिचालन वातावरण में इसके विस्तार से प्रेरित है।

बैंक अब भारत में 6,300 बैंकिंग आउटलेट्स के माध्यम से 3.5 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है। बंधन बैंक में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या अब लगभग 80,000 है।

वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही के दौरान बैंक की जमाराशि में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 27% की वृद्धि हुई। कुल जमाराशि अब 1.43 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जबकि कुल अग्रिम राशि 1.31 लाख करोड़ रुपये है। चालू खाता और बचत खाता (सीएएसए) अनुपात कुल जमाराशि का 33.2% है। बैंक की स्थिरता का सूचक पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) 15.6% है, जो विनियामक आवश्यकता से अधिक है।

बैंक के प्रदर्शन पर बोलते हुए, बंधन बैंक के एमडी और सीईओ (अंतरिम) रतन कुमार केश ने कहा, “दूसरी तिमाही में बंधन बैंक का मजबूत प्रदर्शन प्रभावी जोखिम प्रबंधन और अनुपालन पर हमारे फोकस के साथ गुणवत्ता वृद्धि में गति को दर्शाता है। हमारी सफलता हमारे ग्राहकों के विश्वास और हमारे कर्मचारियों के समर्पण पर आधारित है। प्रौद्योगिकी में नवाचार पर ध्यान केंद्रित करके, हमारी प्रक्रियाओं को परिष्कृत करके, और उत्पादों और लोगों की क्षमताओं को बढ़ाकर, हम बंधन बैंक 2.0 के लिए विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।”

बैंक अपनी परिसंपत्तियों में विविधता लाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका स्पष्ट ध्यान अपने खुदरा पोर्टफोलियो के विस्तार पर है। अधिक से अधिक डिजिटलीकरण एक प्रमुख प्राथमिकता है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता और दक्षता को बढ़ावा देना है, साथ ही समग्र ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाना है। हाल के महीनों में, बैंक ने कई नए उत्पाद लॉन्च किए हैं, जिनमें व्यापार सेवाएं, पेंशन योजनाएं, अवनी बचत खाता और जीएसटी भुगतान सेवा शामिल हैं।

अगस्त महीने में 13 दिन बंद रहेंगे बैंक

नई दिल्ली: जुलाई का महीना खत्म होने जा रहा है। इसी के नए महीने अगस्त की शुरुआत हो रही है। अगले महीने स्वंत्रता दिवस के मौके पर बैंक बंद रहेंगे। स्वतंत्रता दिवस के अलावा, रक्षाबंधन और जनमाष्टमी के मौके पर भी बैंक की छुट्टी रहेगी। कुल मिलाकर अगस्त में बैंक 13 दिन बंद रहने वाले हैं, ऐसे में अगर आप भी बैंक जाकर किसी तरह का काम निपटाना चाह रहे हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। अगस्त में रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार की छुट्टी के अलावा 7 दिन त्योहारों की वजह से बैंक बंद रहेंगे। इस आर्टिकल में बैंक किस-किस दिन बंद रहने वाले हैं, को लेकर ही जानकारी दे रहे हैं-

  • 3 अगस्त- केर पूजा के अवसर पर अगरतला में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 4 अगस्त- रविवार की छुट्टी
  • 8 अगस्त- तेंदोंग लो रम फात के अवसर पर गंगटोक में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 10 अगस्त- दूसरे शनिवार की छुट्टी
  • 11 अगस्त- रविवार की छुट्टी
  • 13- देशभक्त दिवस के मौके पर इम्फाल में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 15 अगस्त- स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी शहरों में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 18 अगस्त- रविवार की छुट्टी
  • 19 अगस्त- रक्षाबंधन के मौके पर सभी शहरों में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 20 अगस्त- श्री नारायण गुरु जयंती के मौके पर सभी शहरों में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 25 अगस्त- रविवार की छुट्टी
  • 26 अगस्त- जनमाष्टमी के मौके पर सभी शहरों में बैंक हॉलिडे रहेगा।
  • 31 अगस्त- चौथे शनिवार की छुट्टी

देश का केंद्रीय बैंक आरबीआई अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर हर महीने होने वाले बैंक हॉलिडे को पहले से लिस्ट कर के रखता है। आरबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट पर बैंक हॉलिडे को आप भी चेक कर सकते हैं। इसके लिए https://www.rbi.org.in/Scripts/HolidayMatrixDisplay.aspx पर विजिट कर सकते हैं।

RBI ने ब्रिटेन के सेंट्रल बैंक से अपने खाते में डलवाया सालों से जमा किया हुआ 100 टन सोना

नई दिल्‍ली : भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ब्रिटेन से 100 टन से अधिक सोना देश में लाया गया है। यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। एक समय था, जब देश का सोना बाहर रखने की खबरें सुनने को मिलती थी, लेकिन अब हिंदुस्‍तान अपना सोना वापस ला रहा है। खबर के मुताबिक, आरबीआई अधिकाारियों का कहना है कि लगभग 100 टन सोना और आने वाले दिनों में भारत लाया जाएगा। ऐसा बताया जा रहा है कि भविष्‍य में वित्‍तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए आरबीआई देश की तिजोरी में सोने की मात्रा को बढ़ा रहा है।

बता दें कि यह साल 1991 की शुरुआत के बाद से पहली बार है, जब इतनी बड़ी मात्रा में गोल्‍ड को लोकल लेवल पर रखे गए स्टॉक में शामिल किया गया है। आने वाले महीनों में इतनी ही मात्रा में सोना फिर से देश में भेजा जा सकता है, आधिकारिक सूत्रों की माने तो ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के अंत में आरबीआई के पास 822.1 टन सोना था, जिसमें से 413.8 टन सोना विदेशों में रखा हुआ था।

अब इस सोने को धीरे-धीरे भारत लाया जा रहा है। वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, हाल के वर्षों में सोना खरीदने वाले केंद्रीय बैंकों में आरबीआई प्रमुख है, जिसने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 27.5 टन सोना अपने भंडार में शामिल किया है।

विश्‍व भर के केंद्रीय बैंकों के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड काफी समय से बड़ा भंडारगृह रहा है। भारत भी आजादी से पहले से लंदन के बैंक में अपना सोना रखता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया, “आरबीआई ने कुछ साल पहले सोना खरीदना शुरू किया था। यह समीक्षा करने का फैसला किया था कि वह कहां-कहां से भारत का सोना वापस ला सकता है। चूंकि विदेशों में स्टॉक बढ़ रहा था, इसलिए कुछ सोना भारत लाने का निर्णय लिया गया। साथ ही भविष्‍य की परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.”

भारतीयों के लिए हर घर में सोना होता है और उसे बेचना सही नहीं माना जाता है। लेकिन 1991 में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को संभालने के लिए चंद्र शेखर सरकार द्वारा कीमती धातु को गिरवी रखा गया था। हालांकि, आरबीआई ने लगभग 15 साल पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 200 टन सोना खरीदा था। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते हालात आत्मविश्वास को दर्शाता है, जो 1991 की स्थिति के बिल्कुल अलग है.”

ATM: বছরের শুরুতেই পকেটে হামলা, টাকা তুলুন সাবধানে

News Desk: নতুন বছরের প্রথম দিন থেকে কার্যকর হল রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অব ইন্ডিয়ার নির্দেশিকা। এটিএম থেকে বাড়তি লেনদেনের জন্য গ্রাহকদের এবার গুনতে হবে অতিরিক্ত অর্থ। আগে বিনামূল্য সীমা অতিক্রম করার পর আর্থিক লেনদেনের জন্য দিতে হতো ২০ টাকা। নয়া নির্দেশিকার পর বৃদ্ধি পেয়েছে এটিএম-এর এই চার্জটি।

এটিএম-এর চার্জ বৃদ্ধির বিষয়টি গত বছরেই চূড়ান্ত হয়েছিল। জুনের ২১ তারিখে আরবিআই-এর পক্ষ থেকে দেওয়া হয়েছিল অনুমতি- অটোমেটেড টেলর মেশিন থেকে অতিরিক্ত লেনদেন করলে ২০২২ সালের ১ জানুয়ারি থেকে দিতে হবে ২১ টাকা। সঙ্গে যোগ হতে পারে অতিরিক্ত শুল্ক। আগে যা ছিল ২০ টাকা। শেষবার এই চার্জ বেড়েছিল ৭ বছর আগে, ২০১৪ সালে।

এক নির্দেশিকায় আরবিআই জানিয়েছে, শেষবার ২০১২ সালে অগস্টে এটিএম লেনদেনের ফি বা চার্জের কাঠামোয় সংশোধন করা হয়েছিল। এরপর ২০১৪ সালে বদল আনা হয়েছিল গ্রাহকদের পরিষেবা মূল্যে। চার্জ বৃদ্ধির বিষয়ে সিদ্ধান্ত গ্রহণের আগে ২০১৯ সালে একটি কমিটি গঠন করেছিল কেন্দ্র। সেই কমিটির পরামর্শ মতো সিদ্ধান্ত গ্রহণ করেছে রিজার্ভ ব্যাঙ্ক।

কেন নেওয়া হল ফি বৃদ্ধির সিদ্ধান্ত? বিগত সাত বছরে বদলেছে দেশের আর্থিক খতিয়ান। যে সংস্থাগুলি গ্রাহক পরিষেবায় নিযুক্ত, এই ক’বছরে খরচ বেড়েছে তাদেরও। ফলত সুষ্ঠু পরিষেবা বহাল রাখার স্বার্থে এক টাকা করে বাড়ানো হয়েছে অতিরিক্ত লেনদেনের চার্জ। কমিটির পরামর্শ মোতাবেক গত বছর ১ অগস্টে বাড়ানো হয়েছিল সংস্থাগুলির থেকে নেওয়া পরিষেবা মূল্যও। অর্থনৈতিক লেনদেনের জন্য আগে যা ছিল ১৫ টাকা, পরে তা বেড়ে হয়েছে ১৭ টাকা। অর্থনৈতিক লেনদেন ব্যতীত লেনদেনের ক্ষেত্রে ৫ টাকা থেকে চার্জ বেড়ে হয়েছিল ৬ টাকা৷

বর্তমানে গ্রাহকরা তাঁদের নিজস্ব ব্যাঙ্কের এটিএম থেকে বিনামূল্যে টাকা লেনদেন করতে পারেন পাঁচবার। অন্য ব্যাঙ্কের এটিএম ব্যবহার করলে রয়েছে অন্য নিয়ম। মেট্রোপলিটন শহরে তিনবার কোনও চার্জ ছাড়া টাকা তোলা যায় অন্য ব্যাঙ্কের এটিএম থেকে। মেট্রোপলিটন ব্যতিরেকে অন্য কোনও জায়গা থেকে এই সুবিধাই পাওয়া যায় পাঁচবার।

Subhash chandra Bose: নেতাজীর ছবি মুদ্রায় আনতে সরকারের অবস্থান কী? জবাব চাইল বিচারপতি বেঞ্চ

Netaji Photo Rbi Indian currency

News Desk: নেতাজী সুভাষচন্দ্র বসুর (Subhash chandra Bose) ছবি গান্ধীজীর মতো ভারতীয় মুদ্রায় ছাপানো হোক। নেতাজীর অন্তর্ধান নিয়ে নির্দিষ্ট তথ্য ঘোষণা করুক কেন্দ্রীয় সরকার। আগামী ২১ ফেব্রুয়ারির মধ্যে লিখিতভাবে কলকাতা হাইকোর্ট কে জানাতে হবে কেন্দ্রীয় সরকারের অবস্থান। জানিয়ে দিলেন প্রধান বিচারপতি প্রকাশ্যে বাস্তবের ডিভিশন বেঞ্চ।

নেতাজির সহযোগী হরেন্দ্রনাথ বাগচী কলকাতা হাইকোর্টে জনস্বার্থ মামলা দায়ের করেছিলেন। তাঁর আইনজীবী রবীন্দ্রনারায়ণ দত্ত আদালতে জানান, দেশের জন্য নেতাজীর অবদান কে গুরুত্ব দিয়ে ইতিমধ্যে ভারতীয় মুদ্রায় তাঁর ছবি ছাপানোর প্রস্তাব রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়াকে দেওয়া হয়েছে। উৎসাহিত হয়েছে আরবি। সেই তথ্য আদালতে জমা করা হয়েছে।

পাশাপাশি নেতাজির অন্তর্ধান রহস্য নিয়ে কেন্দ্রীয় সরকার বিভিন্ন সময়ে কমিশন গঠন করেছে। সেই কমিশন গঠনের ফলে সরকারি তহবিল নষ্ট হচ্ছে। কিন্তু এখনো পর্যন্ত তার অন্তর্ধান রহস্যের প্রকৃত উদঘাটন করা সম্ভব হয়নি। সরকারি তহবিলের অপব্যবহার না করে নেতাজি অন্তর্ধান রহস্যের প্রকৃত তথ্য উদঘাটন করুক কেন্দ্রীয় সরকার। আদালতের এই বিষয়ে হস্তক্ষেপ করার প্রয়োজন।

আবেদনকারীর এই বক্তব্যের পরিপ্রেক্ষিতে প্রধান বিচারপতি প্রকাশক ও বিচারপতি রাজশ্রী ভরদ্বাজের ডিভিশন বেঞ্চ জানিয়ে দেন আগামী ২১ ফেব্রুয়ারির মধ্যে কেন্দ্রীয় সরকারকে এই বিষয়ে স্পষ্ট হলফনামা দিয়ে জানাতে হবে নেতাজির অন্তর্ধান সম্পর্কে তাদের প্রকৃত অবস্থান।

ATM transactions: ১ জানুয়ারি থেকে এটিএমে লেনদেনের খরচ বাড়ছে

atm transactions

You will have to pay more for ATM transactions from January 1, 2022
News Desk, Mumbai: করোনাজনিত পরিস্থিতিতে দেশের সাধারণ মানুষের আয় (Income) অনেকটাই কমেছে। বহু মানুষ তাঁদের কাজ হারিয়েছেন। এরই মধ্যে প্রত্যেকটি নিত্যপ্রয়োজনীয় জিনিস, পেট্রোল, ডিজেল ও রান্নার গ্যাসের (Petrol, Diesel, LPG) দাম বাড়িয়ে মোদি সরকার আমজনতার পকেট কাটার পথে হেঁটে চলেছে।

পেট্রোল-ডিজেলের পর এবার বাড়ছে এটিএম (ATM) থেকে টাকা তোলার খরচ। ২০২২ সালের ১ জানুয়ারি থেকে এটিএম থেকে টাকা তুলতে গেলে মানুষকে বাড়তি খরচ করতে হবে। চলতি বছরের জুন মাসেই রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়া (RBI) ব্যাংকগুলিকে এই বাড়তি খরচ আদায়ের জন্য অনুমোদন দিয়েছে। এবার সেই নতুন নিয়ম চালু হতে চলেছে।

এখন প্রশ্ন হল কিভাবে এবং কত টাকা খরচ বাড়ছে। কেন্দ্রীয় ব্যাংকের বিজ্ঞপ্তি অনুযায়ী, নিজের ব্যাংকের এটিএম থেকে লেনদেনের ক্ষেত্রে প্রতি মাসে প্রথম পাঁচবার লেনদেন করতে কোনও খরচ লাগবে না। অন্য ব্যাংকের ক্ষেত্রে সেই সীমা মেট্রো শহরগুলির ক্ষেত্রে তিনবার কিন্তু অন্যত্র হলে পাঁচবার। এখানে এটিএমের মাধ্যমে লেনদেন বলতে শুধু টাকা তোলাই নয়, টাকা জমা, ব্যালান্স চেকিংও লেনদেন হিসেবে গণ্য হবে।

এতদিন লেনদেনের নির্দিষ্ট মেয়াদ শেষ হলে প্রতি লেনদেন পিছু দিতে হত ২০ টাকা। এখন সেই খরচ বেড়ে হচ্ছে ২১ টাকা। তার সঙ্গে যোগ হবে জিএসটি। এটিএম থেকে লেনদেনের ক্ষেত্রে শেষবার খরচ বাড়ান হয়েছিল ২০১৪ সালের অগাস্টে। অর্থাৎ প্রায় সাড়ে সাত বছর পর এটিএম থেকে লেনদেনের খরচ বাড়তে চলেছে।

উল্লেখ্য, চলতি বছরেই ব্যাংক এবং এটিএম থেকে টাকা তোলার নিয়মে বেশকিছু রদবদল করেছে স্টেট ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়া। এসবিআইয়ের নিয়ম অনুযায়ী, জিরো ব্যালেন্স অ্যাকাউন্ট হোল্ডাররা মাসে সর্বোচ্চ চারবার এটিএম এবং ব্যাংক থেকে বিনা খরচে টাকা তুলতে পারেন। এরপর থেকে অবশ্য প্রতি লেনদেনের ক্ষেত্রে ১৫ টাকা করে চার্জ কাটা হয়। সেই সঙ্গে যুক্ত হয় জিএসটি। তবে নগদ নয় এমন লেনদেনের ক্ষেত্রে অবশ্য এই অতিরিক্ত চার্জ কাটা হয় না।

Cryptocurrency: ক্রিপ্টো নিয়ে শক্তিকান্ত দাসের সতর্কবার্তা উপেক্ষা উচিত নয়

Shaktikanta Das’ warnings on crypto

অর্থনৈতিক বিশেষজ্ঞ: ব্যাঙ্ক, বিনিয়োগকারী এবং সরকারও প্রত্যেকেই ভারতীয় রিজার্ভ ব্যাঙ্কের (আরবিআই) গভর্নরের পরামর্শ শোনেন ৷ কারণ আরবিআই গভর্নর হলেন কেন্দ্রীয় ব্যাঙ্কের মুখ ফলে তাঁর মন্তব্যগুলি এর বৃহত্তর চিন্তা প্রক্রিয়ার প্রতিফলন বলেই মনে করা হয়। এই প্রেক্ষাপটে, বর্তমান গভর্নর শক্তিকান্ত দাসের (Shaktikanta Das) সাম্প্রতিক ক্রিপ্টোকারেন্সিগুলি (Cryptocurrency) সম্পর্কে মন্তব্য তথা সতর্কবার্তার মধ্যে একটি নিবিঢ় দৃষ্টিভঙ্গী রয়েছে।

প্রাক্তন অর্থ সচিব পুনরাবৃত্তি করেছেন যে কেন্দ্রীয় ব্যাংক গুরুতর ভাবে উদ্বিগ্ন রয়েছেন কারণ ক্রিপ্টোকারেন্সি ঘিরে “অনেক গভীর” সমস্যা রয়েছে ।যখন গত 16 নভেম্বর এসবিআই-এর ব্যাঙ্কিং এবং ইকোনমিক্স কনক্লেভে তিনি বলেন, ” কেন্দ্রীয় ব্যাঙ্ক যখন জানাচ্ছে যে আমাদের অভ্যন্তরীণ আলোচনার পরে গুরুতর উদ্বেগ রয়েছে, তখন এতে আরও গভীর বিষয় জড়িত রয়েছে।”

ক্রিপ্টো সম্পর্কে কেন্দ্রীয় ব্যাংকের দৃষ্টিভঙ্গি সমালোচনামূলক কারণ সরকার আর্থিক ব্যবস্থার অভিভাবকদের কাছ থেকে জোরালো সতর্কতা উপেক্ষা করতে পারে না যা তারা ম্যাক্রো আর্থিক স্থিতিশীলতার প্রধান উদ্বেগের বিষয় হিসাবে দেখে। এসবিআই কনক্লেভে তার সংক্ষিপ্ত প্রতিক্রিয়াতে, দাস ভারতের ক্রিপ্টো বাজারের আকারের দাবিগুলিও খণ্ডন করেছেন, জানিয়েছেন যে সংখ্যাগুলি অতিরঞ্জিত দেখাচ্ছে, গভর্নরও এর আগেও এমনএকটি পয়েন্ট তুলেছিলেন।

এই নিয়ে বারবার সতর্ক বার্তা এমন সময়ে এসেছে যখন ক্রিপ্টো লবি ভার্চুয়াল কারেন্সি মার্কেটে নতুন বিনিয়োগকারীদের আকৃষ্ট করার জন্য দেশব্যাপী প্রচার চালাচ্ছেন। এমনকি খুচরা বিনিয়োগকারীদের জন্য ক্রিপ্টো ট্রেডিং প্রশিক্ষণের জন্য সংবাদপত্রে বিজ্ঞাপনও দেওয়া হয়েছে। আরবিআইকে স্পষ্ট জানাতে হয়েছিল যে এপ্রিল 2018 সালের একটি সার্কুলারে ক্রিপ্টোতে বিধিনিষেধ আরোপ করার পরে 2020 সালে সুপ্রিম কোর্ট এটিকে বাতিল করে ৷ কিন্তু ব্যাঙ্কগুলি কেন্দ্রীয় ব্যাঙ্কের মেসেজিং থেকে সংকেত গ্রহণ করে ক্রিপ্টোকারেন্সির বিষয়ে অত্যন্ত সতর্ক দৃষ্টিভঙ্গি গ্রহণ করেছে৷

দাসের সাম্প্রতিক মন্তব্যগুলি প্রস্তাব দেয় , ক্রিপ্টোকারেন্সি সম্পর্কে কেন্দ্রীয় ব্যাঙ্কের শীর্ষস্থানীয়দের মধ্যে চিন্তাভাবনায় একেবারেই কোনও পরিবর্তন হয়নি , তা সে বিনিয়োগের সম্পদ বা বিনিময়ের মাধ্যম যাই হোক না কেন। এই ধারণার বিরুদ্ধে থাকা রিজার্ভ ব্যাঙ্ক, সেখানে সরকার কি ভারতে ব্যক্তিগত ভার্চুয়াল মুদ্রাকে এগিয়ে দেবে? এটি অস্বাভাবিক ৷

গত কয়েক বছরে ভারতে এমন অনেক ঘটনা ঘটেছে যেখানে খুচরা বিনিয়োগকারীরা জটিল, ঝুঁকিপূর্ণ এবং প্রায়শই অনিয়ন্ত্রিত ইনস্ট্রমেন্ট এবং প্রতিষ্ঠানে বিনিয়োগ করে অর্থ হারিয়েছে। উদাহরণগুলির মধ্যে রয়েছে অনিয়ন্ত্রিত চিট ফান্ড, দুর্বলভাবে পরিচালিত সমবায় ব্যাঙ্ক এবং বেসরকারি আর্থিক প্রতিষ্ঠানগুলিতে উল্লেখযোগ্য খুচরা বিনিয়োগ। ভারতের অনিয়ন্ত্রিত ক্রিপ্টোকারেন্সি বাজারেও এই ধরনের ঘটনা যাতে ঘটা উচিত নয় আর সেটা নিয়ে চিন্তা ভাবনা করা দরকার।

Reserve Bank: ঋণ প্রদানকারী অ্যাপগুলির মধ্যে ৬০০-রও বেশি অবৈধ

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News Desk: বাসে-ট্রেনে বিভিন্ন জনবহুল এলাকায় ঋণ পাইয়ে দেওয়ার বিজ্ঞাপন হামেশাই নজরে পড়ে। এ ছাড়াও বহু অ্যাপ রয়েছে যেগুলি ডাউনলোড করে সহজেই বাড়িতে বসেই ঋণ (Loan) পাওয়ার ব্যবস্থা করে নেওয়া যায়।

গুগল (Google) সার্চে গিয়ে ‘কুইক লোন’, ‘ইনস্ট্যান্ট লোন’ প্রভৃতি লিখে সার্চ দিলেই এই অ্যাপগুলি একের পর এক বেরিয়ে আসে। রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়া (Reserve Bank) এক সতর্কবার্তায় জানাল ঋণ প্রদানকারী এই ধরনের অ্যাপগুলির মধ্যে ৬০০টিরও বেশি অ্যাপ অবৈধ।

আরবিআই এক সতর্কবার্তায় জানিয়েছে, ঋণ দিয়ে থাকে এরকম ১১০০-রও বেশি অ্যাপ আছে। যার মধ্যে ৬০০-রও বেশি অবৈধ। এই সমস্ত অ্যাপগুলি কোনও রকম রীতিনীতির ধার ধারে না। দেশে ডিজিটাল লেনদেন যত বাড়ছে, ততোই সামনে আসছে একের পর এক প্রতারণার ঘটনা। প্রতিদিনই বহু মানুষ ঠকে যাচ্ছেন। খোয়াচ্ছেন লাখ লাখ টাকা।

সতর্কবার্তায় আরবি বলেছে, অনেকেই নিজেদের আধার, প্যান কার্ডের তথ্যও এই সমস্ত অ্যাপের মাধ্যমে জালিয়াতদের হাতে তুলে দিচ্ছেন। এ ধরনের প্রতারণার ঘটনা খতিয়ে দেখতে রিজার্ভ ব্যাংক একটি বিশেষ কমিটি কমিটি তৈরি করেছিল। সেই কমিটির রিপোর্টে জানানো হয়েছে, ঋণ প্রদানকারী পরিচিত অ্যাপগুলির মধ্যে ৬০০-রও বেশি অ্যাপ অবৈধ। তবে আরবিআই সংশ্লিষ্ট অ্যাপগুলির নাম জানায়নি।

আরবিআই-এর সমীক্ষায় দেখা গিয়েছে ভারতের মোট ৮১ টি অ্যাপ স্টোর থেকে এই বিপজ্জনক অ্যাপগুলি ডাউনলোড করা হয়ে থাকে। আরবিআইয়ের সমীক্ষা বলছে, বহু ক্ষেত্রেই গ্রাহকরা নিজেদের অজ্ঞাতসারে বা না জেনেই তাঁদের অনেক গোপন ও ব্যক্তিগত তথ্য জালিয়াতদের হাতে তুলে দিয়েছেন। এই সমস্ত ঋণ প্রদানকারী সংস্থাগুলির বেশিরভাগ সংস্থাই রিজার্ভ ব্যাংকের অনুমোদন প্রাপ্ত নয়।

চলতি মাসেই বদল আসছে পিএফ, প্যান-আধার লিঙ্ক, জিএসটি সংক্রান্ত একগুচ্ছ নিয়মে

নয়াদিল্লি: পিএফ, প্যান-আধার লিঙ্ক, জিএসটি-সহ বেশ কয়েকটি নিয়ম সেপ্টেম্বর থেকে বদলে যেতে চলেছে। যেহেতু এই নতুন নিয়মগুলি সাধারণ মানুষের দৈনন্দিন জীবনে প্রভাব ফেলবে, তাই এই পরিবর্তনগুলি সম্পর্কে বিস্তারিতভাবে জানা গুরুত্বপূর্ণ।

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জিএসটি: জিএসটিএন তার উপদেষ্টায় বলেছে যে কেন্দ্রীয় জিএসটি বিধিমালার নিয়ম -৫৯ (৬) যা জিএসটিআর-১ জমা দেওয়ার ক্ষেত্রে বিধিনিষেধ প্রদান করে, চলতি বছরের ১ সেপ্টেম্বর থেকে কার্যকর হবে। যদি কেউ পূর্ববর্তী দুই মাসের জন্য জিএসটিআর-৩বি (GSTR-3B) ফর্মের রিটার্ন জমা না দেন তাহলে জিএসটিআর-১ (GSTR-1) ফর্মে পণ্য বা পরিষেবার বাহ্যিক সরবরাহের বিবরণ সরবরাহ করার অনুমতি দেওয়া হয়েছে।

নতুন পিএফ নিয়ম: পিএফ গ্রাহকদের, ১ সেপ্টেম্বর পর্যন্ত পিএফ অ্যাকাউন্টের সঙ্গে আধার কার্ড লিঙ্ক করা বাধ্যতামূলক। তা না হলে ইপিএফ সুবিধাগুলি কমিয়ে দেওয়ার সম্ভাবনা রয়েছে। যদি পিএফ অ্যাকাউন্ট আধারের সাথে সংযুক্ত না হয় বা ইউএএন (UAN) আধার যাচাই না হয়, তাহলে তার ইসিআর-ইলেকট্রনিক চালান কাম রিটার্ন পূরণ করা হবে না।

আধারের সঙ্গে প্যান লিঙ্ক করা: আধারের সঙ্গে স্থায়ী অ্যাকাউন্ট নম্বর (PAN) সংযুক্ত করার সময়সীমা সেপ্টেম্বরে শেষ হচ্ছে। এর আগে সময়সীমা ছিল জুন, ২০২১, যা পরে তিন মাস বাড়ানো হয়েছিল।

এলপিজির দাম: এলপিজি সিলিন্ডার রান্নার গ্যাসের দাম প্রতি সিলিন্ডারে ২৫ টাকা বেড়েছে, আগের দাম ৮৫৯.৫০ টাকা। ১৪.২ কেজি ভর্তুকিযুক্ত এবং ভর্তুকিহীন এলপিজি সিলিন্ডারের দাম এখন দিল্লি এবং মুম্বাইতে ৮৮৪.৫০ টাকা। কলকাতায় ১৪.২ কেজি এলপিজি গ্যাস সিলিন্ডারের দাম ৯১১ টাকা এবং চেন্নাইতে এলপিজি সিলিন্ডারের দাম বেড়ে হবে ৯০০ টাকা।

পজিটিভ পে সিস্টেম: RBI-এর পজিটিভ পে সিস্টেম যদিও ১লা জানুয়ারি থেকে কার্যকর হয়েছে। বেশ কয়েকটি ব্যাঙ্ক ইতিমধ্যেই নতুন ব্যবস্থা গ্রহণ করলেও, অ্যাক্সিস ব্যাঙ্ক ১ সেপ্টেম্বর থেকে এটির বাস্তবায়ন করবে।

ভারত সিরিজ (বিএইচ-সিরিজ): পরিবহন মন্ত্রক নতুন যানবাহনগুলির জন্য একটি নতুন নিবন্ধন চিহ্ন চালু করেছে, যেমন “ভারত সিরিজ (বিএইচ-সিরিজ)”। এই নিবন্ধন চিহ্ন বহনকারী গাড়ির মালিক যখন এক রাজ্য থেকে অন্য রাজ্যে যাবেন, তখন নতুন নিবন্ধন চিহ্নের প্রয়োজন হবে না।

পিএনবি সেভিংস অ্যাকাউন্ট: পাঞ্জাব ন্যাশনাল ব্যাঙ্ক ১ সেপ্টেম্বর থেকে আমানত সংরক্ষণের সুদের হার পুনর্বিবেচনা করবে।

ব্যয়বহুল OTT সাবস্ক্রিপশন: ডিটিএন + হটস্টার গ্রাহকদের ওটিটি সাবস্ক্রিপশনের জন্য আরও বেশি ব্যায় করতে হবে। OTT প্লেয়ার ৩৯৯ টাকা থেকে ৪৯৯ টাকা হয়েছে।