बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, 32 लोगों की मौत और कई जख्मी

ढाका :  रविवार  यानी 4 अगस्त को बांग्लादेश के कई हिस्सों में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई। प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए। इस दौरान रविवार को प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थकों के बीच कई जगहों पर झड़प हुई। झड़प में कई लोगों के मारे जाने की खबर है। वहीं 30 से ज्यादा घायल हुए हैं। ढाका ट्रिब्यून अखबार के मुताबिक झड़प के बाद पीएम शेख हसीना ने गण भवन में सुरक्षा मामलों की राष्ट्रीय समिति की बैठक भी बुलाई।

एक अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश हिंसा में 32 लोगों की मौत हो गई है। वहीं सौ से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थकों के बीच झड़प हुई है। वहीं, खबर है कि झड़प के बाद पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है। बता दें, पीएम शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी दौरान हिंसा भड़क गई। हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

वहीं, छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि देश भर में विरोध प्रदर्शन के नाम पर तोड़फोड़ करने वाले छात्र नहीं आतंकवादी हैं. ऐसे तत्वों से कड़ाई से निपटने की जरूरत है। बता दें, विरोध पर उतरे छात्र प्रधानमंत्री हसीना से इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच पीएम शेख हसीना ने अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सेना, नौसेना, वायु सेना, पुलिस, रैपिड एक्शन बटालियन, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के प्रमुख और अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। बैठक में प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार और गृह मंत्री भी मौजूद थे।

इससे पहले पुलिस और छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों में 200 से अधिक लोग मारे गये थे। बता दें, छात्र प्रदर्शनकारी देश में विवादास्पद कोटा प्रणाली को खत्म करने की मांग पर कर रहे थे, जिसके तहत 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के योद्धाओं के रिश्तेदारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण दिया गया था।

 

भारत और चीन LAC पर शांति बनाए रखने पर हुए सहमत

नई दिल्ली :  भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 30वीं बैठक 31 जुलाई को दिल्ली में आयोजित की गई। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) गौरांगलाल दास ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा और महासागरीय विभाग के महानिदेशक होंग लियांग ने किया। इस दौरान दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाए रखने पर सहमत हुए।

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अस्ताना और वियनतियाने में अपनी हालिया बैठकों में दोनों विदेश मंत्रियों के बीच चर्चा के बाद, दोनों पक्षों ने लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने के उद्देश्य से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। शांति और अमन-चैन की बहाली और एलएसी का सम्मान द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति की बहाली के लिए एक आवश्यक आधार है।

बैठक के दौरान दोनों पक्ष प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौतों, प्रोटोकॉल और समझ के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमत हुए।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि बैठक में चर्चा गहन, रचनात्मक और दूरदर्शी थी। दोनों पक्ष स्थापित राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से गति बनाए रखने पर सहमत हुए। इस दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल के नेता ने विदेश सचिव से भी मुलाकात की।

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को $15 अरब का नुकसान, एक लाख नौकरियां गई

नई दिल्ली: चीन के साथ जारी तनाव भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है। इस कारण पिछले चार साल में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को 15 अरब डॉलर का प्रॉडक्शन लॉस हुआ है। साथ ही इस दौरान करीब 100,000 नौकरियों का मौका भी हाथ से निकल गया।

चीन के नागरिकों को वीजा जारी करने में देरी और भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों की जांच के बीच ऐसा हुआ है। विभिन्न मंत्रालयों को भेजे गए ज्ञापन में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री ने कहा कि भारत ने 2 अरब डॉलर के वैल्यू एडिशन नुकसान के अलावा 10 अरब डॉलर का निर्यात अवसर भी खो दिया है।

इंडस्ट्री के लोगों के मुताबिक चीनी अधिकारियों के 4,000-5,000 वीजा आवेदन सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की विस्तार योजनाओं में बाधा आ रही है। यह स्थिति तब है जब सरकार ने 10 दिन के भीतर बिजनस वीजा आवेदनों को मंजूरी देने के लिए एक व्यवस्था बना रखी है।

इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) और मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) लॉबी ग्रुप ने केंद्र सरकार से चीनी अधिकारियों के लिए वीजा मंजूरी में तेजी लाने का अनुरोध किया है। अभी इसमें एक महीने से अधिक समय लग रहा है।

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि चीनी अधिकारियों की जरूरत टेक और स्किल ट्रांसफर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की स्थापना और कमीशनिंग, एफिशियंसी प्रोसेसेज की स्थापना और मेंटनेंस के लिए है। साथ ही चीनी की उन कंपनियों के अधिकारियों के वीजा आवेदन भी लंबित हैं, जिन्हें स्थानीय कंपनियों के साथ पार्टनरशिप में यहां मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने के लिए बुलाया गया है।

आईसीईए ने कहा कि हमारी घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) योजना पर गंभीर असर पड़ा है। जब मोबाइल के लिए पीएलआई योजना (2020-21 में) शुरू की गई थी, तो उम्मीद थी कि आपूर्ति श्रृंखला चीन से हट जाएगी। लेकिन इस गतिरोध और प्रेस नोट 3 (भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश की अधिक जांच अनिवार्य करना) के कारण सप्लाई चेन के ट्रांसफर में भारी गिरावट आई है।

यह एसोसिएशन ऐपल, ओप्पो, वीवो, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और लावा जैसे टॉप मोबाइल ब्रांड्स और मैन्युफैक्चरर्स का प्रतिनिधित्व करता है। आईसीईए का अनुमान है कि अगर भारत और चीन के बीच बिजनस एक्टिवीज सामान्य होती तो भारतीय कंपनियों का वैल्यू एडिशन वर्तमान 18% से बढ़कर 22-23% होता। इससे घरेलू मोबाइल फोन ईकोसिस्टम में सालाना 15,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डीवीए कंट्रीब्यूशन होता।

 

 

Omicron: চিনে এবার ওমিক্রন গোষ্ঠী সংক্রমণ

Omicron

চিনে ফের গোষ্ঠী সংক্রমণ। তিয়ঞ্জিন প্রদেশে অনেকেই ওমিক্রনে (Omicron) আক্রান্ত হয়েছে বলে মনে করা হচ্ছে। শক্ত হাতে পরিস্থিতি সামাল দেওয়ার চেষ্টা করছে চিনা (China) সরকার।

প্রথম থেকে অতিমারি পরিস্থিতির বিরুদ্ধে কড়া মনোভাব শি জিন পিং- এর সরকার। প্রথম এবং দ্বিতীয় পর্যায়ের পরেও প্রশাসনের পক্ষ থেকে জারি করা হয়েছিল পরীক্ষা৷ সাধারণ মানুষের দেহে কর্ণ ভাইরাস প্রবেশ করেছে কি না, তা খোঁজ করতে চলেছে লাগাতার টেস্ট। ধারাবাহিক এই প্রক্রিয়ার মাধ্যমে সরকারের র‍্যাডারে ওমিক্রণ। আশঙ্কা করা হচ্ছে, চিনের শুরু হয়েছে ওমিক্রনিক গোষ্ঠী সংক্রমণ।

বন্দর শহর তিয়ঞ্জিনে খোঁজ মিলেছে ওমিক্রণ আক্রান্তের। এখনও পর্যন্ত দু’জনের শরীরে করোনার এই উপপ্রজাতি প্রবেশ করেছে বলে সে দেশের সংবাদমাধ্যমে প্রকাশিত।

প্রাথমিকভাবে মনে করা হচ্ছে, নির্দিষ্ট কোন জায়গা থেকেই সংক্রমনের সূত্রপাত। যদিও এ ব্যাপারে পোক্ত কোনো সিদ্ধান্ত এখনও উপনীত হতে পারেনি চিন সরকার। আপাতত ভাবনার কেন্দ্র বিন্দুতে তিয়ঞ্জিন শহর।

জনজীবন স্বাভাবিক রাখতে অতিমারির বিরুদ্ধে অনমনীয় চিন। সংক্রমণ লাগামছাড়া হলে ফের লকডাউনের সম্ভাবনা। ব্যহত হতে পারে ব্যবসা-বাণিজ্য। যা যে কোনো দেশের অর্থনৈতিক পরিস্থিতির পক্ষে নেতিবাচক৷ তিয়ঞ্জিন বন্দর শহর হওয়ায় আরও উদ্বিগ্ন চিন সরকার। ব্যবসার চাকা সচল রাখতে মরিয়া বেজিং।

চিন-কিমের মাখো মাখো বন্ধুত্বের কাঁটা জাপানের সামরিক কৌশলে চমক

চিন-উত্তর কোরিয়াকে চাপে ফেলতে নয়া কৌশল জাপানের। বলতে গেলে হাত মেলাল জাপান ও আমেরিকা। চিন ও উত্তর কোরিয়ার সঙ্গে উত্তেজনার মাঝেই মার্কিন বাহিনীকে আরও সমর্থনের ঘোষণা করেছে জাপান। মার্কিন বিদেশমন্ত্রী অ্যান্টনি ব্লিঙ্কেন ঘোষণা করেছেন যে জাপানের মাটি প্রায় ৫০,০০০ মার্কিন সৈন্য মোতায়েনের মেয়াদ বৃদ্ধির ব্যাপারে দুই দেশের মধ্যে একটি চুক্তি হয়েছে। ব্লিঙ্কন ভার্চুয়ালি এক বৈঠকে বলেন, এই নতুন চুক্তি “আমাদের সামরিক প্রস্তুতি এবং আন্তঃক্রিয়াশীলতা আরও গভীর করার জন্য বৃহত্তর সম্পদ বিনিয়োগ করবে” তিনি আরও বলেন, “আমাদের মিত্রদের কেবল আমাদের কাছে থাকা সরঞ্জামগুলিকে শক্তিশালী করাই নয়, নতুন সরঞ্জামগুলিকেও আরও বিকাশ করতে হবে।”

বিগত কয়েকবছর ধরে টোকিও দেশে মার্কিন বাহিনীর পাশাপাশি মার্কিনিদের অন্যান্য ইউটিলিটিগুলির জন্যেও খরচ বহন করে। প্রসঙ্গত, পূর্ববর্তী চুক্তিটি ২০২১ সালের মার্চ শেষ হওয়ার কথা ছিল, কিন্তু ওয়াশিংটনে প্রশাসনিক রদবদলের জন্য এই মেয়াদ এক বছরের জন্য বাড়ানো হয়েছিল।

মার্কিন প্রতিরক্ষা সচিব লয়েড অস্টিন বলেন, “মিত্র দেশগুলি আঞ্চলিক শান্তি ও স্থিতিশীলতায় জাপানের ক্রমবর্ধমান অবদানের ক্ষমতা প্রতিফলিত করার জন্য আমাদের ভূমিকা এবং মিশনগুলি বিকশিত করছে”। দ্বিতীয় বিশ্বযুদ্ধের পর জাপান যুদ্ধ করার অধিকার ত্যাগ করে এবং তারপর থেকে ওয়াশিংটনের সঙ্গে ঘনিষ্ঠ জোট গড়ে তোলে, যা বিশ্বের তৃতীয় বৃহত্তম অর্থনীতি রক্ষার জন্য চুক্তিবদ্ধ। বিদেশ মন্ত্রকের তরফ থেকে জানানো হয়েছে, নতুন পাঁচ বছরের প্যাকেজের পরিমাণ হবে ২১১ বিলিয়ন ইয়েন (১.৮ বিলিয়ন ডলার), যা প্রায় ৫% বৃদ্ধি পাবে। এহেন খবরের জেরে চিনের যথেষ্ট অস্বস্তি বাড়বে তা বলাই বাহুল্য। ব্লিঙ্কেন বলেন, “বেজিংয়ের উস্কানিমূলক কর্মকাণ্ড তাইওয়ান এবং পূর্ব ও দক্ষিণ চীন সাগর জুড়ে উত্তেজনা বাড়িয়ে তুলেছে।”

Kerala: চিনে নয়, কমিউনিস্ট মুখ্যমন্ত্রী বিজয়ন চিকিৎসা করাবেন আমেরিকায়

কমিউনিজম কি কেবলই বই পড়া কিছু আপ্তবাক্য? প্রশ্ন উঠতেই পারে। কারণ কেরলের  (Kerala) মুখ্যমন্ত্রী পিনারাই বিজয় চিকিৎসা করাতে যাচ্ছেন আমেরিকায়, চিনে নয়৷

ভারতীয় বামপন্থীদের কথা উঠলে সমান্তরালভাবে চলে আসে চিনের নাম। যদিও বামেদের অনেকেই এই তুলনা শুনলে নাম সিঁটকোন। কিন্তু সে দেশেই একছত্রভাবে চলে আসছে কমিউনিস্ট শাসন। অন্য দিকে আমেরিকার নামের সঙ্গে সেঁটে রয়েছে ‘পুঁজিবাদী’ লেবেল। বামেরা কি তা অস্বীকার করবেন?

চিকিৎসা করানোর জন্য আমেরিকায় যাচ্ছেন বিজয়ন। কেরল সরকারের পক্ষ থেকে জানানো হয়েছে এই খবর। মুখ্যমন্ত্রীর চিকিৎসার জন্য যাবতীয় খরচ বহন করবে রাজ্য সরকার। জানুয়ারির ১৫ তারিখে মার্কিন মুলুকের উদ্দেশে যাত্রা শুরু করার কথা রয়েছে তাঁর। চিকিৎসা করাবেন রচেস্টারের মায়ো ক্লিনিকে। স্ত্রী কমলা এবং ব্যক্তিগত সহকর্মী ভিএম সুনীশও যাচ্ছেন সঙ্গে। ১৫-২৯ তারিখ পর্যন্ত ভারতে থাকবেন না তাঁরা।

২০১৮ সালেও মায়ো ক্লিনিকে গিয়েছিলেন বিজয়ন। যদিও প্রশাসনিক কাজকর্ম সামলেছিলেন সব নিজের হাতেই, আমেরিকা থেকে। নিজ ক্যাবিনেটে কারও কাঁধেই বাড়তি কাজ দিয়ে যাননি তিনি। জানিয়েছিলেন, অনলাইনে কাজ করতে তাঁর কিছু সমস্যা রয়েছে৷ মুখ্যমন্ত্রী কোনও সিদ্ধান্ত নেওয়ার পর সেই মতো কাজ এগোনোর দায়িত্ব পড়েছিল কেরলের তৎকালীন শিল্প মন্ত্রী ইপি জয়রাজনের হাতে। বিজয়নের অনুপস্থিতি তিনিই ক্যাবিনেট বৈঠকের তদারকি করেছিলেন।

এবারে কী করবেন পিনারাই? কাউকে নিজের কিছু কাজ বুঝিয়ে দিয়ে যাবেন, নাকি নিজেই সমস্তটা দেখবেন আমেরিকা থেকে? ঘুরছে একাধিক প্রশ্ন।

China: মাত্র তিন করোনা রোগী! ১১ লক্ষ জনবসতির চিনা শহরে লকডাউন

উপসর্গহীন মাত্র তিনজন করোনা রোগী চিহ্নিত। তাতেই ১১ লক্ষ জনবসতির শহরে লকডাউন করে দিল চিন (China)। এই নিয়ে চিনের দ্বিতীয় শহরে লকডাউন হয়েছে।

বিবিসি জানাচ্ছে, হেনান প্রদেশের ইউঝৌ শহরটির গণপরিবহণ বন্ধ করে দেওয়া হয়েছে এবং নিত্যপণ্য ছাড়া সব দোকানপাট রাতারাতি বন্ধ রাখতে বলা হয়েছে।

রাজধানী বেজিং থেকে প্রায় ৭০০ কিলোমিটার দূরে ইউঝৌ শহরের সব বাসিন্দাকে ঘরে থাকার নির্দেশ দিয়েছে কর্তৃপক্ষ। যারা স্বাস্থ্য পরিষেবা কাজে নিযুক্ত, তারা বাইরে বের হতে পারবেন।

করোনাভাইরাস প্রথম শনাক্ত হওয়ার দেশ চীনে এ পর্যন্ত ১ লক্ষ ১৫ হাজারের বেশি মানুষ করোনায় আক্রান্ত হয়েছেন। মৃত ৪ হাজার ৮৪৯ জন। চিনের ৮৬. ৩৮ শতাংশ মানুষ পূর্ণডোজ টিকা পেয়েছেন।

Galwan Valley: চিনের মুখের ওপর জবাব, গালওয়ানে উড়ল ভারতের জাতীয় পতাকা

‘নাহি দিবো সূচাগ্র মেদেনি’। ধনুক ভাঙা এই পণই করেছে ভারতীয় সেনা৷ চিনের নাকের ডগায় জওয়ানরা মেলে ধরলেন ভারতের জাতীয় পতাকা।

সম্প্রতি ভাইরাল হয়েছে একটি ভিডিও। গালওয়ান  (Galwan Valley) উপত্যকায় চিন সেনা তাদের দেশের পতাকা ওড়াচ্ছে, এমন ফুটেজ ঘোরাফেরা করছে নেট-জগতে। যদিও ভিডিওর সত্যতা নিয়ে সন্দেহ রয়েই গিয়েছে। চিন সত্যিই গালওয়ান প্রান্তে পতাকা উড়িয়েছে কি না সে ব্যাপারে নিশ্চিতভাবে এখনও কিছু বলা যাচ্ছে না। বিভিন্ন সংবাদমাধ্যমে ফুটেজটিকে উদ্দেশ্যপ্রণোদিত বলে দাবি করেছে।

ঘটনার সত্যি-মিথ্যা যা-ই হোক না কেন, একটা ব্যাপারে সকলেই একমত। লাইন অব অ্যাকচুয়াল কন্ট্রোল বরাবর উত্তাপ যতই বাড়ুক না কেন, ভারতের জাওয়ানরা এক ইঞ্চি জমিও ছাড়বেন না। তাই চিনের পতাকা উত্তোলন সম্পর্কিত উক্ত ভিডিও সামনে আসার পরেই নিজেদের অবস্থান স্পষ্ট করে দিয়েছেন তাঁরা। তেরঙ্গা মেলে ধরে বুঝিয়ে দিয়েছেন ‘এই জমি আমাদের’।

নতুন বছরের প্রথম দিন মনে হয়েছিল লাদাখ সীমান্তে আবহাওয়া বেশ উপভোগ্য। চোখে পড়েছিল ভারত-চিন সেনাদের উপহার আদানপ্রদানের ছবি। কিন্তু ভালো লাগার মতো এই ছবির রেশ কাটতে না কাটতেই একের পর এক ঘটনা।

চিনের সরকারি মিডিয়ার পক্ষ থেকে দু’টি ভিডিও প্রকাশ করা হয়েছিল। যার মধ্যে একটিতে দেখা গিয়েছিল গালওয়ান সীমান্তে লাল দেশের জাতীয় পতাকার দৃশ্য৷ অপর ফুটেজে দেখা গিয়েছে, চিনের নাগরিকদের স্যালুট করছে লাল ফৌজ। পাশেই রাখা একটি পাথরে ম্যান্ডারিন ভাষায় লেখা ‘এক ইঞ্চি জমিও ছাড়া হবে না’। প্যাংগং লেকের দুই প্রান্তকে যুক্ত করতেও বেজিং চেষ্টা চালাচ্ছে এমন ছবিও মিলেছে স্যাটেলাইট ইমেজে।

Nuclear War: মুখেই কেবল ‘শান্তি… শান্তি’! পারমাণবিক অস্ত্র প্রয়োগের ক্ষেত্রেও অস্পষ্ট চিনের অবস্থান

এক মেরুতে রাশিয়া, ব্রিটেন, মার্কিন যুক্তরাষ্ট্র এবং ফ্রান্স। পাশে থাকার আশ্বাস দিয়েছে চিন। তবে তা মৌখিকভাবে। খাতায়-কলমে এখনো রাশিয়া-ব্রিটেনের পাশে নেই জিন পিং-এর দেশ। তাই পারমাণবিক অস্ত্র ব্যবহারের (Nuclear War) ব্যাপারে এখনও পাওয়া যায়নি সম্মতি পত্র৷

ক্রেমলিন থেকে প্রকাশিত এক যৌথ বিবৃতিতে জানানো হয়েছে, পারমাণবিক শক্তি বৃদ্ধি এবং ব্যবহারের বিরুদ্ধে সায় দিয়েছে চিন (China)-সহ ৫ দেশ। আগামী দিনে যাতে পারমাণবিক শক্তি সম্পন্ন দেশগুলির মধ্যে যুদ্ধ পরিস্থিতি তৈরি না হয় সে ব্যাপারে সচেষ্ট উক্ত দেশগুলো। সেই সঙ্গে বিশ্বব্যাপী নিরাপত্তা ব্যাপারেও তারা আগ্রহী।

চিনের উপ-বিদেশমন্ত্রী মা জাউসু বলেছেন, ‘যৌথভাবে নেওয়া এই উদ্যোগ পারস্পারিক বিশ্বাসযোগ্যতা এবং ভরসা আদায় করার পক্ষে অনুঘটকের কাজ করতে পারে।’ চিন পারমাণবিক অস্ত্র ব্যবহারের ব্যাপারে ‘উৎসাহী নয়’ এমনটা প্রকাশিত হয়েছে সে দেশের সংবাদসংস্থায়।

যৌথভাবে বিবৃতি প্রকাশ করা হলেও দুশ্চিন্তার মেঘ সারাতে পারছেন না কূটনৈতিক মহলের একাংশ। শীত যুদ্ধের পর সম্প্রতি-সময়ের আমেরিকা (America), রাশিয়া (Russia) কিংবা চিনের অবস্থান সম্পর্কে তাঁরা সন্দিহান। গত বছর নভেম্বরে পেন্টাগনের পক্ষ থেকে অনুমান করা হয়েছিল ২০২৭ সালের মধ্যে লাল দেশের অস্ত্র ভাণ্ডারে থাকতে পারে প্রায় ৭০০ পারমাণবিক হাতিয়ার। ২০৩০ সালের মধ্যে সেই সংখ্যাটা ছুঁতে পারে ১,০০০। স্বভাবতই প্রশ্ন উঠতে পারে মৌখিকভাবে যুদ্ধবিরোধী চিন কেন বলীয়ান হতে চাইছেন পারমাণবিক অস্ত্রের বিষয়ে?

এর আগেও আন্তর্জাতিক ক্ষেত্রে শান্তির বার্তা শোনা গিয়েছে চিনা প্রতিনিধির মুখে। কিন্তু ভারত (India)-সহ অন্যান্য প্রতিবেশীদের সঙ্গে সম্পর্কে আদৌ কি প্রতিফলিত হচ্ছে সেই বার্তা? লাদাখ সীমান্ত নিয়ে নতুন করে দেখা দিয়েছে চাপানউতোর। প্যাংগং-এর কাছেই নাকি সেতু তৈরির কাজে উদ্যত হয়েছে চিন। ভারত সীমান্তের কাছে উড়ানো হয়েছে জাতীয় পতাকা, এমন খবরও প্রকাশিত হয়েছে বিভিন্ন সংবাদ মাধ্যমে। প্রশ্ন থাকবে, চিনের শান্তির বার্তা শুধুই মৌখিক?

Chinese flag in Galwan valley: গালওয়ানে পতাকা উড়িয়ে চিনের দাবি এক ইঞ্চি জমিও ছাড়ব না

Chinese flag unfurled in Galwan valley

লাদাখ সীমান্তের বিতর্কিত জমি সমস্যা মেটাতে ভারত ও চিনের সেনা কমান্ডার পর্যায়ের ১৩ বার আলোচনা হয়েছে। এখনও সমস্যার সমাধান হয়নি। এরই মধ্যে জানা গেল, বছরের প্রথম দিনে গালওয়ানে (Galwan valley) নিজেদের পতাকা তুলেছে চিন (china)। শুধু তাই নয়, ট্যুইট করে জানিয়েছে গালওয়ান থেকে তারা এক ইঞ্চিও সরবে না।  

চিনের সরকারি প্রচার মাধ্যম গ্লোবাল টাইমসে জাতীয় পতাকার একটি ছবি প্রকাশ করা হয়েছে। ছবির ক্যাপশনে লেখা হয়েছে, গালওয়ান উপত্যকায় তোলা হল দেশের জাতীয় পতাকা । এই পতাকা তিয়েনআনমেন স্কোয়ারেও তোলা হয়েছিল। এবার তোল হল ভারত সীমান্ত সংলগ্ন গালওয়ান উপত্যকায়।

ইতিমধ্যেই সোশ্যাল মিডিয়ায় গালওয়ান উপত্যকায় চিনের জাতীয় পতাকা উত্তোলনের ওই ভিডিও ভাইরাল হয়েছে। যথারীতি এই ভিডিও প্রকাশ্যে আসার পর মোদী সরকারকে কড়া ভাষায় আক্রমণ করেছে বিরোধীরা।

রাহুল গান্ধী অবিলম্বে এ বিষয়ে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্য জানতে চেয়েছেন। রাহুল ট্যুইট করে জানতে চেয়েছেন, গালওয়ানে আমাদের জাতীয় পতাকা কবে তোলা হবে মোদিজি? এবার সময় হয়েছে কড়া সিদ্ধান্ত নেওয়ার। শুধু ফাঁকা বুলি শুনে আর কতদিন চলবে।

জানা গিয়েছে, চিন পূর্ব লাদাখের প্যাংগং হ্রদে একটি সেতু তৈরি করছে। উপগ্রহ ক্যামেরায় সেই সেতু নির্মাণের ছবিও ধরা পড়েছে। এই সেতু তৈরি হয়ে গেলে খুব অল্পসময়ের মধ্যেই চিনা ফৌজ ভারতীয় সীমান্তের অভ্যন্তরে পৌঁছে যাবে। ড্যামিয়েন সাইমন নামে এক ব্যক্তি ওই সেতু তৈরির ছবি টুইটারে পোস্ট করেছেন। তিনি লিখেছেন, এই সেতু তৈরি হয়ে গেলে উত্তর প্যাংগংয়ের সঙ্গে দক্ষিণের সংযোগস্থাপন হবে। ভারতীয় সীমান্ত সংলগ্ন এলাকায় দ্রুত সেনা পাঠানোর জন্যই এই সেতু তৈরি করছে চিন।

গতবছর লাদাখ অঞ্চলে হিমালয় পর্বতমালার শিখরে সেনা মোতায়েন করে ভারত। ফলে কৌশলগতভাবে ভারত-চিনের থেকে কিছুটা হলেও এগিয়ে আছে। কিন্তু এই সেতু তৈরি হয়ে গেলে চিন সহজেই ভারতীয় সীমান্তে সেনা পাঠাতে পারবে।

উল্লেখ্য, ২০২০ সালের জুন মাসে গালওয়ানে ভারত ও চিনের সেনার মধ্যে প্রবল সংঘর্ষ ঘটে। ওই সংঘর্ষে ২০ জন ভারতীয় জওয়ান শহিদ হন। চিনের কয়েকজন সেনাও প্রাণ হারান। ওই ঘটনার পর দুই দেশ সিদ্ধান্ত নিয়েছিল সংঘর্ষস্থল থেকে দুই কিলোমিটার দূরে সেনা সরিয়ে আনবে। কিন্তু বৈঠকে চিন আশ্বাস দিলেও বাস্তবে তা হয়নি।

Arunachal Pradesh: অরুণাচলের ১৫টি জায়গার নাম বদলে দিল বেজিং

China has started a border war with India

নিউজ ডেস্ক: অরুণাচল প্রদেশের (Arunachal Pradesh) ১৫টি জায়গার নাম পালটে দেওয়ার অভিযোগ উঠল চিনের (China) বিরুদ্ধে। এর জেরে বৃহস্পতিবারই বেজিংয়ের তীব্র বিরোধিতা করেছে ভারত। জানিয়ে দেওয়া হয়েছে, অরুণাচল ভারতের অবিচ্ছেদ্য অংশ ছিল ও থাকবে। কেবল নতুন নাম দিয়ে সেই সত্যিকে বদলে দেওয়া যাবে না।

গত বুধবার চিনের সরকারি সংবাদমাধ্যমে প্রকাশিত এক প্রতিবেদনে দাবি করা হয়, জংনান (অরুণাচলের চিনা নাম) প্রদেশের ১৫টি জায়গার নামকরণ করা হয়েছে। চিনা, তিব্বতি ও রোমান হরফে ওই নামকরণ করা হয়েছে। এই ১৫টি জায়গার মধ্যে ৮টি জনবসতি, ৪টি পাহাড়, ২টি নদী ও ১টি গিরিখাত। এর আগেও ২০১৭ সালে অরুণাচল প্রদেশের ৬টি স্থানের নাম বদল করেছিল বেজিং।

বিদেশমন্ত্রকের মুখপাত্র অরিন্দম বাগচী এ প্রসঙ্গে জানিয়েছেন, ‘আমরা বিষয়টা জানতে পেরেছি। এই প্রথমবার নয়। এর আগেও চিন অরুণাচল প্রদেশের নানা অংশের নাম বদলাতে চেয়েছে। ২০১৭ সালে এপ্রিল থেকে এই কাজ ওরা করে আসছে। কিন্তু অরুণাচল প্রদেশ যে ভারতের অবিচ্ছেদ্য অঙ্গ ছিল এবং থাকবে, এই সত্যিটা এভাবে নাম বদল করে পালটে দেওয়া যাবে না।’

প্রসঙ্গত, গত মাসেই অরুণাচলের উত্তর সুবনসিরি কিংবা শি ইয়োমি জেলায় ঢুকে গ্রাম বানানোর অভিযোগ উঠেছে চিনের বিরুদ্ধে। উপগ্রহ চিত্রে সেই গ্রামগুলির ছবি ধরা পড়ার পরে বিতর্ক তীব্র আকার নেয়। সম্প্রতি মার্কিন প্রতিরক্ষা দফতরের (US Defense Ministry) বার্ষিক রিপোর্টেও ভারতীয় ভূখণ্ডে চিনা জবরদখলের সেই অভিযোগের স্বীকৃতি পাওয়া গেছে।

ধুর মশাই চায়নায় হায়না থাকে না ! ওখানে বাঘ নাচে

News Desk: শীতে কাঁপছে চিন দেশ। তুষারে ঢেকে থাকা চিনের বিস্তির্ণ এলাকা। চিনের শীত কেমন? প্রবল ঠান্ডায় জনজীবন কুঁকড়ে আছে। তাবলে বাঘেরা গা গরম করবে না নাকি! সেরকমই একটি ছবি নিয়ে দুনিয়া জুড়ে হই হই।

চিনা সংবাদমাধ্যম ‘China Daily’ প্রকাশ করেছে পূর্ব চিনের রঙ্গচেঙ্গ বন্যপ্রাণ পার্কের ছবি। সেখানে তুষার ঢাকা সবকিছু। ওয়াইল্ড লাইফ পার্কের চসমা বাঁদর, পান্ডারা যেমন বরফ নিয়ে মত্ত। তেমনই ডোরাকাটা বাঘেরা মেতে রয়েছে।

দুটি চিনা বাঘ বরফের মধ্যে নাচছে। চিনা ওরফে ডোরাকাটা রয়েল বেঙ্গলের এমন নৃত্যশৈলীর ছবি দেখে দুনিয়া জুড়ে চলছে আলোচনা। বাঘ কি নাচে নাকি? বিশেষজ্ঞরা বলছেন,এটি দুটি বাঘের খেলা। কোনও নাচানাচির ব্যাপার নয়। বরফের মাঝে বাঘ দুটো খেলছে। এদের ভঙ্গীতে নাচের মতো দৃশ্য তৈরি হয়েছে।

এদিকে বিভিন্ন আন্তর্জাতিক সংবাদ মাধ্যমের খবর, কিছু এলাকায় দেখা দিয়েছে খাদ্যভাব। তবে কড়া শাসনের ঘেরাটোপে সেসব এলাকার খবর ঠিক মতো আসছে না। সেই সঙ্গে ছড়িয়েছে করোনা। হু হু করে বাড়তে থাকা সংক্রমণের কারণে লক্ষ লক্ষ মানুষ গৃহবন্দি। লকডাউন চলছে বেশ কিছু শহরের।

Helicopter Crashed: জেনারেল বিপিন রাওয়াতের মৃত্যুতে কি চিনের চক্রান্ত ? প্রশ্ন প্রতিরক্ষা বিশেষজ্ঞদের

China's conspiracy in the death of General Bipin Rawat-kolkata24x7.in

News Desk: চব্বিশ ঘন্টা হয়ে গেল হেলিকপ্টার দুর্ঘটনা (Helicopter Crashed) প্রয়াত হয়েছেন দেশের প্রথম সেনা সর্বাধিনায়ক বিপিন রাওয়াত (Bipin Rawat)। স্ত্রীক ও বাকি জওয়ানদের নিয়ে ১৩ জন মৃত। এই দুর্ঘটনার প্রকৃত কারণ কী তা এখনও জানা যায়নি। মৃত্যুর কারণ জানতে তদন্ত চলছে। বিশেষজ্ঞদের একাংশ দুর্ঘটনার পিছনে বিদেশি শক্তির হাত থাকার কথা উড়িয়ে দিচ্ছেন না।

বিশেষজ্ঞরা অনেকেই মনে করছেন রাওয়াত নিজের গোটা কর্মজীবনে ছিলেন চিনের (china) পথের কাঁটা। কারণ পাহাড়ে যুদ্ধের ক্ষেত্রে রাওয়াতের অভিজ্ঞতা ও দক্ষতার ধারেকাছে ভারতে কম অফিসার আছেন। অভিজ্ঞতা ও দক্ষতাকে সম্বল করেই রাওয়াত বার বার চিনা আগ্রাসন রুখে দিয়েছেন। ডোকলামে চিনের আগ্রাসন রুখতে রাওয়াত মুখ্য ভূমিকা নিয়েছিলেন তিনি। সে সময় তিনি ছিলেন দেশের সেনাপ্রধান।

নরেন্দ্র মোদী জমানায় ভারতীয় সেনা নাগা বিচ্ছিন্নতাবাদীদের বিরুদ্ধে সার্জিক্যাল স্ট্রাইক চালিয়েছিল মায়ানমারে। এর নেতৃত্ব দিয়েছিলেন রাওয়াত। পরে সেনা সর্বাধিনায়ক হিসেবেও উত্তরাখণ্ড, অরুণাচল, লাদাখ সীমান্তে চিনা সেনার মোকাবিলা করেছেন। গালওয়ান উপত্যকায় চিনকে রুখে দিতে পরিকল্পনায় ছিলেন রাওয়াত। চিনের সেনার বিরুদ্ধে চিনের প্রাচীর হয়ে দাঁড়িয়ে ছিলেন রাওয়াত। বেজিংয়ের চক্ষুশূল। তাই রাওয়াতের কপ্টার দুর্ঘটনার পিছনে বিদেশি শক্তির হাত নেই সেই সম্ভাবনা কেউ একেবারে উড়িয়ে দিতে পারছেন না।

রাওয়াতের মৃত্যুর পর নিরাপত্তা কৌশল বিশারদ ব্রহ্মানি চেল্লানি যে মন্তব্য করেছেন তা খুবই গুরুত্বপূর্ণ বলে মনে করা হচ্ছে। চেল্লানি বলেছেন, রাওয়াতের দুর্ঘটনার সঙ্গে তাইওয়ানের চিফ অব জেনারেল স্টাফ শেন ইয়ামিংয়ের কপ্টার দুর্ঘটনার অদ্ভুত মিল রয়েছে। তবে, এর পরেই সতর্ক থাকতে তিনি বলেছেন, এই দুটি ঘটনার মিল থাকার অর্থ এই নয় যে, দুটি ঘটনার মধ্যে কোনও একই শক্তির হাত আছে।

উল্লেখ্য, তাইওয়ানকে নিজেদের ভূখণ্ড বলে দাবি করে চিন।এই দাবি বরাবরই খারিজ করেছে তাইওয়ান। ২০২০ সালে তাইপের কাছে এক পাহাড়ি এলাকায় কপ্টার দুর্ঘটনাতেই প্রাণ হারিয়েছিলেন তাইওয়ানের চিফ অব জেনারেল স্টাফ সেন ইয়ামিং। আমেরিকার তৈরি কপ্টারে সওয়ার হয়েছিলেন শেন ও আরো ৭ তাইওয়ান সেনাকর্তা।

রাওয়াতের মৃত্যু নিয়ে ইতিমধ্যেই আন্তর্জাতিক মহলেও বাক-বিতণ্ডা শুরু হয়েছে। চিন সরকার রাওয়াতের কপ্টার দুর্ঘটনার পিছনে আমেরিকার দিকেই ইঙ্গিত করেছে। চিনা সংবাদমাধ্যম গ্লোবাল টাইমসে লেখা হয়েছে, ভারত রাশিয়ার কাছ থেকে এস-৪০০ মিসাইল কেনার সিদ্ধান্ত নিয়েছে। এই সিদ্ধান্ত আমেরিকা একেবারেই পছন্দ করছে না। রাশিয়ার থেকে এই মিসাইল কেনার বিষয়ে উদ্যোগী ছিলেন তাই রাওয়াত। তাই এর মৃত্যুর পিছনে আমেরিকার যোগ থাকা অসম্ভব কিছু নয়।

আজব কাণ্ড: স্বামীর মৃত্যুতে ‘অশ্লীল নৃত্য’ করান স্ত্রী

strip dance during funeral in china

অনলাইন ডেস্ক: প্রিয়জনের মৃত্যু যে কারও কাজেই একটা বড় দুঃখজনক ঘটনা৷ কারও কারও মৃত্যু অনেক সময় বজ্রপাতের চেয়ে কম নয়৷ প্রিয়জনের দুঃখ ভুলতে বেশ কিছুটা সময় লাগে৷ কিন্তু, চিন এই ব্যাপারে একেবারে ভিন্ন। এখানে পরিবারের কারও মৃত্যুর পর তার পরিবারের সদস্যরা ‘অশ্লীল নৃত্য’ করিয়ে নেয়। সবচেয়ে বড় দুঃখ উপলক্ষে চিনের এই প্রথাটি খুবই আশ্চর্যজনক।

আসলে চিনের গ্রামাঞ্চলে অনেক পুরনো ঐতিহ্য আছে। এই ঐতিহ্যের ধারায় চিনের কিছু গ্রামাঞ্চলে কেউ মারা গেলে, তার অন্ত্যেষ্টিক্রিয়া চলাকালীন মেয়েদের অশ্লীল নৃত্য পরিবেশন করার জন্য ডাকা হয়। এই প্রথা অদ্ভুত হতে পারে! কিন্তু চিনের গ্রামে এখনও এই রীতি অব্যাহত রয়েছে। বরং সময়ের সঙ্গে সঙ্গে এই প্রথা আরও আধুনিক হয়ে উঠেছে। স্বামীর মৃত্যুর পর স্ত্রী স্ট্রিপ ড্যান্সার ডেকে নেয়।

strip dance during funeral in china

অন্ত্যেষ্টিক্রিয়া চলাকালীন স্ট্রিপ ডান্সাররা অশ্লীলভাবে নাচেন এবং কান্নার ভান করেন। এখন প্রশ্ন উঠছে এই অদ্ভুত ঐতিহ্যের পিছনে কারণ কি? এই গ্রামের মানুষরা মনে করেন, পৃথিবী ছেড়ে যাওয়ার জন্য এখানে একটি চমৎকার বিদায় হিসেবে এটি করা হয়। চিনের কিছু গ্রামে এই নৃত্যের অনুষ্ঠান একটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ আচার হিসেবে বিবেচিত হয়।

এটাও বলা হয়, চিনে এই পদ্ধতি গৃহীত হয় যাতে অন্ত্যেষ্টিক্রিয়া চলাকালীন আরও বেশি লোক জড়ো হয়। এখানকার লোকেরা বিশ্বাস করে, নৃত্যশিল্পীদের ডেকে এখানে যত বেশি মানুষ আসে এবং শেষ যাত্রায় যত বেশি মানুষ থাকবে ততই মৃতের আত্মা শান্তি পাবে।

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p style=”text-align: justify;”>তবে, চিন সরকার এই অদ্ভুত ঐতিহ্য বন্ধ করেছে। ২০০৬ এবং ২০১৫ সালে চিন সরকার এই ঐতিহ্যের বিরুদ্ধে ব্যবস্থা নিয়েছিল৷ কিন্তু তা সত্ত্বেও গ্রামাঞ্চলে এই প্রথা এখনও অব্যাহত রয়েছে।

ওষুধকে উপেক্ষা করে এই দেশে চিকিৎসা হয় গায়ে আগুন জ্বালিয়ে

Fire Therapy

নিউজ ডেস্ক: চিকিৎসার জন্য ঔষধ বা জরিবুটির কথা তো আমরা সবাই জানি। তবে কখনও শুনেছেন অসুস্থ মানুষকে সুস্থ করার জন্য গায়ে আগুন জ্বালিয়ে তার চিকিৎসা করা হচ্ছে। হ্যাঁ, ঠিকই শুনেছেন! চিনে ঠিক এমনই কিছু হয়। গায়ে আগুন লাগিয়ে চিকিৎসা করার পদ্ধতিকে চীন ‘ফায়ার থেরাপি’ নামে চেনে। প্রায় ১০০ বছরের বেশী সময় ধরে চীন চিকিৎসার জন্য এই থেরাপি ব্যবহার করে এসেছে।

চিনে একাধিক অসুখের চিকিৎসার জন্য এই ‘ফায়ার থেরাপি’ ব্যবহার করা হয়। এই পদ্ধতির মাধ্যমে যারা মানুষের চিকিৎসা করে থাকেন তাদের কে ঝাং ফেঙ্গাও বলা হয়। নিজেদের কাজের জন্য এরা যথেষ্ট বিখ্যাত। চীনের কিছু মানুষ ফায়ার থেরাপিকে খুবই গুরুত্বপূর্ণ চিকিৎসা হিসেবে মনে করে। চীনবাসীরা দাবি করে এই চিকিৎসার মাধ্যমে মানসিক অবসাদ, বদহজম থেকে নিয়ে ক্যান্সারের মতো অসুখের চিকিৎসা করা সম্ভব। আগুন দিয়ে চিকিৎসা করার এই পদ্ধতি চীনের প্রাচীনতম বিধি। এর মাধ্যমে শরীরে গরম এবং ঠান্ডার মাঝে সামঞ্জস্য বজায় রাখার ওপর জোর দেওয়া হয়।

বলা হয় ফায়ার থেরাপিতে অসুস্থ মানুষের পিঠে প্রথমে জরিবুটি দিয়ে তৈরি একটি প্রলেপ লাগানো হয়। তার ওপর একটা তোয়ালে দিয়ে ঢেকে দেওয়া হয় ।তারপরে এই তোয়ালের ওপর জল এবং অ্যালকোহল ছিটিয়ে দেয়া হয়। এরপর অসুস্থ মানুষটির শ্বরীরে আগুন দিয়ে দেওয়া হয়। তবে এই ‘ফায়ার থেরাপি’ কে নিয়ে বিভিন্ন সময়ে একাধিক প্রশ্ন উঠেছে ।এই প্রশ্নগুলির মধ্যে সব থেকে গুরুত্বপূর্ণ প্রশ্ন হল এই চিকিৎসা যারা করে থাকেন তাদের কাছে বৈধ কোন সার্টিফিকেট হয়েছে কিনা? বা বৈধ কোনও প্রশিক্ষণ তারা নিয়েছেন কিনা ?।এই ধরনের চিকিৎসা করার সময় যদি কোন দূর্ঘটনা ঘটে যায় তাহলে তার জন্য কি ধরনের সুরক্ষা ব্যবস্থা নেওয়া হয়ে থাকে?

এই বিষয় নিয়ে ঝাং ফিঙ্গাও বলে থাকেন একাধিকবার মানুষ এইভাবে চিকিৎসা করাতে গিয়ে আহত হয়েছেন। অনেক সময় অসুস্থ মানুষের শরীর এবং মুখের অন্যান্য জায়গা পুড়ে গেছে। কিন্তু এইগুলো সঠিক ভাবে ফায়ার থেরাপি ব্যবহার না করার কারণে হয়েছে বলে তারা দাবি করে থাকেন।ঝাং ফিঙ্গাও বলে থাকেন আমরা হাজার হাজার মানুষের ফায়ার থেরাপির মাধ্যমে চিকিৎসা করেছি। সঠিক পদ্ধতি জানা থাকলে এমন কোন দুর্ঘটনা হবে না বলেই দাবি করে থাকেন তারা।

ঝাং ফিঙ্গাওরা বলে থাকেন ‘ফায়ার থেরাপি’ মানব ইতিহাসের চতুর্থ বড় ক্রান্তি। এই থেরাপির মাধ্যমে চিনি এবং পশ্চিমে চিকিৎসার পদ্ধতিগুলিকে অনেক পিছনে ছেড়ে দিয়েছে। তাদের দাবি ভয়ঙ্কর কিছু অসুখের চিকিৎসার জন্য অনেক সময় মানুষ অর্থ ব্যয় করতে অসমর্থ হয়। সে ক্ষেত্রে ‘ফায়ার থেরাপি’ তাদের জন্য যথেষ্ট উপযোগী এবং তুলনামূলক অনেকটাই সাশ্রয়কর বলে দাবি করেন তাঁরা।

China: ভারতের উদ্বেগ বাড়িয়ে সীমান্তে হাইওয়ে তৈরি করেছে চিন, মোতায়েন করছে অস্ত্র ও সেনা

China has built highways

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: প্রকৃত নিয়ন্ত্রণরেখা (line of actual control) সংলগ্ন এলাকায় চিনের (China) সক্রিয়তা কমার কোনও চিহ্নই দেখা যাচ্ছে না। বরং সীমান্ত এলাকায় চিনের লালফৌজের (PLA) গতিবিধি ক্রমশই বাড়ছে।

কয়েকদিন আগেই উপগ্রহ চিত্রে (Satellite Picture) দেখা গিয়েছে, অরুণাচল প্রদেশের (Arunachal Pradesh) সীমান্তে চিন রীতিমত একটি গ্রাম তৈরি করে ফেলেছে। এমনকী, ভারত ভুটান (Bhutan) সীমান্তেও তৈরি হয়েছে চিনের গ্রাম। কিন্তু এবার সামনে এল আরও এক গুরুত্বপূর্ণ তথ্য। জানা গিয়েছে পূর্ব লাদাখে সীমান্ত সংলগ্ন এলাকার একেবারে কাছেই একটি হাইওয়ে তৈরি করছে বেজিং। শুধু তাই নয়, সীমান্তের গা ঘেঁষে চিনের রকেট ও মিসাইল রেজিমেন্টকেও প্রস্তুত রাখা হচ্ছে।

China builds village in Arunachal Pradesh

স্বাভাবিকভাবেই লালফৌজের এই অতি সক্রিয়তায় উদ্বেগে পড়েছে ভারত। পূর্ব লাদাখ সেক্টরের ঠিক বিপরীত দিকে এই হাইওয়ে তৈরি করছে চিন। বিশেষজ্ঞরা মনে করছেন, এই রাস্তা তৈরির ফলে যে কোনও সময় ও পরিস্থিতিতে প্রকৃত নিয়ন্ত্রণরেখা পেরিয়ে দ্রুত ভারতীয় ভূখণ্ডে পৌঁছে যাবে লাল ফৌজ। শুধু রাস্তা তৈরি নয়, সীমান্তে তারা রীতিমতো অস্ত্র মোতায়েনও করছে।

সম্প্রতি আমেরিকার প্রতিরক্ষা মন্ত্রকের দেওয়া এক উপগ্রহ চিত্রে দেখা গিয়েছে, তিব্বতের স্বশাসিত এলাকায় চিন রকেট ও মিসাইল মোতায়েন করেছে। সেনাবাহিনীকে লুকিয়ে রাখার জন্য তৈরি করেছে বিশেষ ধরনের বাঙ্কার। পাশাপাশি বাড়িয়েছে সেনার সংখ্যাও। একইভাবে পূর্ব লাদাখ সীমান্তে বেজিং ড্রোন মোতায়েন করেছে। এই মুহূর্তে লালফৌজ তাদের পরিকল্পনাতেও কিছু বদল এনেছে। চিনা সেনা চাইছে, লাদাখের স্থানীয় বাসিন্দাদেরকেই ভারতের বিরুদ্ধে কাজে লাগাতে।

সামরিক বিশেষজ্ঞরা স্পষ্ট জানিয়েছেন, ২০২০ সালের তুলনায় ২০২১ সালে সীমান্তে চিনের প্রস্তুতি অনেকটাই পরিকল্পিত। রীতিমতো পরিকল্পনা করেই তারা সীমান্তে সমরসজ্জা এবং পরিকাঠামো তৈরির কাজ চালাচ্ছে। সম্প্রতি মার্কিন প্রতিরক্ষা বিভাগের সদর দফতর পেন্টাগন এক রিপোর্টে জানিয়েছে, তিব্বতের স্বশাসিত অঞ্চল এবং অরুণাচল প্রদেশের প্রকৃত নিয়ন্ত্রণরেখায় ১০০টি বাড়ি তৈরি করে রীতিমত একটি গ্রাম গড়ে ফেলেছে বেজিং। প্রকৃত নিয়ন্ত্রণ রেখা বরাবর এলাকায় বেড়েছে লাল ফৌজের সংখ্যাও।

যদিও নরেন্দ্র মোদি সরকারের মন্ত্রী তথা চিফ অফ ডিফেন্স স্টাফ বিপিন রাওয়াত জানিয়েছেন, ভারতীয় ভূখণ্ড ও সংলগ্ন এলাকায় চিন গ্রাম গড়ে তুলেছে এমন কোনও প্রমাণ মেলেনি। অন্যদিকে, দেশের বিরোধী দলগুলির অভিযোগ, চিনকে ভয় পাচ্ছে মোদি সরকার। সে কারণেই তার চিনের যাবতীয় অবৈধ কার্যকলাপ দেখেও চোখ বুজে থাকছে। প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি বলেছেন, সীমান্তে চিন তাদের সক্রিয়তা বাড়িয়েছে এমন কোনও প্রমাণ সরকারের কাছে নেই। তবে চিন যদি বেশি বাড়াবাড়ি করে তবে ভারতও তার উপযুক্ত জবাব দেওয়ার জন্য প্রস্তুত আছে।

লালফৌজের থাকার জন্য ভুটান সীমান্তে চারটি গ্রাম গড়েছে চিন

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নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: একটা বা দুটো নয়, লালফৌজের থাকার জন্য একেবারে চারটে গ্রাম তৈরি করে ফেলেছে চিন। ভুটান সীমান্তের অভ্যন্তরে লালফৌজ এই গ্রামগুলি তৈরি করেছে। এখনও বেশ কিছু নির্মাণকাজ চলছে। সাম্প্রতিক উপগ্রহ চিত্রে এই চাঞ্চল্যকর ছবি ধরা পড়েছে। স্বাভাবিকভাবেই লাদাখের পর এবার ডোকলাম এলাকাতেও চড়ছে উত্তেজনার পারদ।

উপগ্রহ চিত্রের পাশাপাশি বিভিন্ন সূত্রে জানা গিয়েছে, প্রায় এক বছর ধরে ভুটান সীমান্তে চিন ধীরে ধীরে এই গ্রাম গড়ার কাজ চালাচ্ছে। প্রায় ১০০ বর্গ কিলোমিটার এলাকাজুড়ে তৈরি হয়েছে ছোট ছোট গ্রাম। ডোকলাম এলাকায় সীমান্ত সমস্যা নিয়ে চিন ও ভারতের সেনা কমান্ডার পর্যায়ের একাধিকবার আলোচনা হয়েছে। আলোচনা হয়েছে লাদাখ সীমান্ত নিয়েও। কিন্তু তারপরেও লালফৌজের আগ্রাসন কমেনি। ভারতের পক্ষ থেকে বারবার লাল ফৌজকে নিজেদের সীমানার অভ্যন্তরে সরে যাওয়ার পরামর্শ দেওয়া হলেও তারা সেই পরামর্শ কানে তোলেনি।

China builds village in Arunachal Pradesh

সে কারণেই ভুটান সীমান্তে এবার নতুন করে গ্রাম তৈরির কাজ চালাচ্ছে চিন। সেই গ্রামে থাকার বন্দোবস্ত হচ্ছে লালফৌজের। ইতিমধ্যেই ভারত ও চিন দু’দেশই সীমান্তবর্তী এলাকায় সেনার সংখ্যা অনেকটাই বাড়িয়েছে। উপগ্রহ চিত্রে এটা স্পষ্ট হয়ে গিয়েছে যে, ভুটান সীমান্তেও লালফৌজের আগ্রাসন একই রকম সক্রিয়।

উল্লেখ্য, এর আগে ভারত-ভুটান সীমান্ত এলাকায় লালফৌজের রাস্তা তৈরির তীব্র প্রতিবাদ জানিয়েছিল নয়াদিল্লি। সেই বিতর্কের রেশ কাটতে প্রায় একবছর গড়িয়ে গিয়েছিল। ভুটান সীমান্তে লালফৌজের গ্রাম গড়াকে কেন্দ্র করে ফের একই ধরনের পরিস্থিতি তৈরি হতে পারে বলে মনে করছেন বিশেষজ্ঞরা।

উল্লেখ্য, গত বছরেও দেখা গিয়েছিল ভুটানের কাছে নিজেদের সীমানার অভ্যন্তরে চিন বেশকিছু সামরিক পরিকাঠামো নির্মাণ কাজ সম্পন্ন করেছে। কিন্তু চলতি বছরের উপগ্রহ চিত্র দেখা যাচ্ছে নিজেদের সীমানা অতিক্রম করে এসে ভুটানের ভিতরেও ক্রমশ নিজেদের এলাকা বিস্তার করেছে বেজিং। শুধু গ্রাম নয়, গ্রামগুলিতে চলাচলের পথ সুগম করতে তৈরি হয়েছে রাস্তা। ডোকলামের যে জায়গায় দুবছর আগে ভারতের সঙ্গে চিনের ঝামেলা বেধে ছিল সেই এলাকাতেই এই গ্রামগুলি তৈরি হয়েছে।

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p style=”text-align: justify;”>বিশেষজ্ঞরা আরও বলছেন, ভুটান সীমান্তবর্তী এলাকায় সামরিক পরিকাঠামো নির্মাণ করে লালফৌজ নিজেদের আধিপত্য বিস্তারে বহুদিন ধরেই সক্রিয়। পূর্ব লাদাখের গালওয়ান এবং অরুণাচলের একাংশ যেমন চিন নিজেদের এলাকা বলে দাবি করে, তেমনই ভুটান সীমান্তে প্রায় ৩২০ কিলোমিটার এলাকাকেও নিজেদের বলে দাবি জানিয়ে থাকে চিন। ওই এলাকায় টহলদারির পাশাপাশি স্থায়ীভাবে সেনা রাখার জন্য পরিকাঠামো গড়ে তোলা হয়েছে বলে খবর।

ভারতের সঙ্গে সীমান্ত যুদ্ধ শুরু করে দিয়েছে চিন, বিস্ফোরক দাবি মার্কিন সেনেটরের

China has started a border war with India

News Desk: চিনের (Chania) সঙ্গে যে সমস্ত দেশের সীমান্ত রয়েছে তারা যথেষ্টই বিপদের মধ্যে রয়েছে। ভারতের (India) সঙ্গে ইতিমধ্যেই সীমান্ত যুদ্ধ শুরু করে দিয়েছে বেজিং। সম্প্রতি এমনই চাঞ্চল্যকর দাবি করলেন আমেরিকার রিপাবলিকান সেনেটর (American senator) জন কারনাইন (join Karnain)। শুধু তাই নয় তিনি আরও বলেন, পড়শি দেশগুলির জন্য বিপদ হয়ে দেখা দিয়েছে এই কমিউনিস্ট দেশটি।

সম্প্রতি মার্কিন সেনেটর জন কারনাইনের নেতৃত্বে একটি মার্কিন প্রতিনিধি দল ভারতে এসেছিল। এই প্রতিনিধি দলটি দিল্লিতে প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদি (Marendra Modi) বিদেশ মন্ত্রী এস জয়শঙ্কর (S Jaishankar) ও জাতীয় নিরাপত্তা উপদেষ্টা অজিত ডোভালের (Ajit Doval) সঙ্গে আলাদাভাবে কথা বলেন। সীমান্ত সমস্যা ছাড়াও দক্ষিণ চিন সাগরে চিনের আধিপত্য, আন্তর্জাতিক বাণিজ্যের মতো একাধিক বিষয়ে নিয়ে আলোচনা হয় তাদের।

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আমেরিকার রিপাবলিকান সেনেটর (American senator) জন কারনাইন

সূত্রের খবর সেই আলোচনাতে উঠে আসে লাদাখে চিনা আগ্রাসনের বিষয়টি। সেখানেই মার্কিন প্রতিনিধিরা জানান, প্রতিবেশি দেশগুলির কাছে চিন ক্রমশই বিপদ হয়ে উঠছে। বিশেষ করে যে সমস্ত দেশের সঙ্গে চিনের সীমান্ত রয়েছে তাদের কাছে চিন বড় মাপের বিপদ। এছাড়া চিন যেভাবে তিব্বত, তাইওয়ানকে চোখ রাঙিয়ে চলেছে সে বিষয়টি নিয়েও বৈঠকে আলোচনা হয়।

ভারতের পাশাপাশি এশিয়ার বেশ কয়েকটি দেশে সফর করেন মার্কিন প্রতিনিধি দলটি। সফর শেষ করে দেশ ফিরে দক্ষিণ এশিয়ার চলতি আঞ্চলিক পরিস্থিতি সম্পর্কে সেনেটে বক্তব্য রাখছিলেন কারনাইন। সেখানেই তিনি চিন সম্পর্কে ওই মন্তব্য করেন। আমেরিকার সঙ্গেও চিনের সম্পর্কটা খুব মধুর নয়। দক্ষিণ চিন সাগর ও দ্বিপাক্ষিক বাণিজ্য নিয়ে বেজিংয়ের সঙ্গে ওয়াশিটনের রীতিমত ঠান্ডা লড়াই চলছে। পূর্বতন প্রেসিডন্ট ডোনাল্ড ট্রাম্পের সময় এই বিরোধ তুঙ্গে পৌঁছেছিল। করোনার সংক্রমণ ছড়ানোর জন্য ট্রাম্প সরাসরি চিনকে দায়ী করেছিলেন।

উল্লেখ্য, ২০২০ সালের ১৫ জুন লাদাখের (ladakh) গালওয়ানে নিয়ন্ত্রণ রেখা পেরিয়ে ভারতীয় সীমান্তের ভিতরে ঢুকে পড়েছিল চিনের সেনাবাহিনী। ভারতীয় জাওয়ানরা বাধা দিলে গালওয়ানে দুই দেশের সেনাবাহিনীর মধ্যে সংঘর্ষ বাধে। সেই সংঘর্ষে ২০ জন ভারতীয় জওয়ান শহিদ হয়েছিলেন। চিনের চার সেনাও মারা যায় বলে খবর। যদিও লালফৌজের আরও অনেকেই প্রাণ হারিয়েছিলেন বলে খবর। এরপর নয়াদিল্লি ও বেজিংয়ের মধ্যে একাধিকবার আলোচনায় পরিস্থিতি কিছুটা স্বাভাবিক হয়। তবে সীমান্তে উত্তেজনা এখনও পুরোপুরি প্রশমিত হয়নি।

Secret File: ফের গোয়েন্দা রিপোর্টে দাবি চিন-মায়ানমারের ক্যাম্পে জঙ্গি প্রশিক্ষণ

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News Desk: গোপন সূত্রের ভিত্তিতে মণিপুরে সাম্প্রতিক জঙ্গি হামলার দিনেই ১৩.১১.২১ তারিখে kolkata24x7.in প্রকাশ করেছিল প্রতিবেশি মায়ানমারের ঘাঁটিতে ভারত বিরোধী জঙ্গি কর্মতৎপরতার সংবাদ।গোয়েন্দা রিপোর্টে এই একই তথ্য দেওয়া হয়েছে। এতে দাবি করা হয়েছে চিন ও মায়ানমারের মাটি থেকেই জঙ্গি প্রশিক্ষণের কাজ চলেছে।

উত্তর পূর্বাঞ্চলের সশস্ত্র বিচ্ছিন্নতাবাদী সংগঠনগুলির হামলায় বারবার উঠে এসেছে চিনের মদতে মায়ানমারের কাচিন ও চিন প্রদেশে জঙ্গি প্রশিক্ষণ শিবির চলছে। গত ১৩ নভেম্বর হামলার পরেই এই দাবি আরও জোরালো হয়েছে।

china and mayanmar based militant

পড়ুন:  Manipur: সেনা কনভয়ে হামলায় বিশেষ প্রশিক্ষণ হয় উত্তর মায়ানমারে

মায়ানমার সীমান্তে মণিপুরের চূড়াচন্দ্রপুরে অসম রাইফেলসের কনভয়ের উপর জঙ্গি হামলায় এক কর্নেল-সহ ৭ জনের মৃত্যু হয়। হামলার দায় স্বীকার করেছে মণিপুর পিপলস লিবারেশন আর্মি (manipur peoples libaration army) ও নাগা পিপলস ফন্ট নামে আরও একটি বিচ্ছিন্নতাবাদী সংগঠন।

গোয়েন্দা রিপোর্টে বলা হয়েছে, মণিপুর সহ উত্তর পূর্বাঞ্চলেরের বিভিন্ন সশস্ত্র বিচ্ছিন্নতাবাদী সংগঠনের মূল ডেরা মায়ানমারের অভ্যন্তরে। এবারে হামলা চালানো পিপলস লিবারেশন আর্মিকে প্রশিক্ষণ দিয়েছে চিনে সেনা। মায়ানমারের ঘন জঙ্গল এলাকার গোপন শিবিরে হয়েছিল ট্রেনিং।

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গোয়েন্দা রিপোর্টে বলা হয়েছে, হামলাকারীদের অত্যাধুনিক অস্ত্রও তুলে দিয়েছে চিন। এই দাবির স্বপক্ষে ইতিমধ্যেই গোয়েন্দা বিভাগ মণিপুর সীমানার কাছে অবস্থিত ওই সমস্ত জঙ্গি শিবিরের ছবি ড্রোনের মাধ্যমে সংগ্রহ করছে। সেই ফুটেজই স্পষ্ট শিবিরে চিনের সেনাবাহিনীর একাধিক সদস্য ছিল।

মনে করা হচ্ছে,আন্তর্জাতিক সীমান্ত প্রকৃত নিয়ন্ত্রণরেখা এলাকা নিয়ে বিরোধের জেরে চিন ভারতের উপ ক্ষুব্ধ। একইসঙ্গে তাইওয়ান (tiwan) ও তিব্বতের (tibet) প্রশ্নে ভারতের অবস্থানে চিনের ক্ষোভ আরও বেড়েছে।

গোয়েন্দা রিপোর্টে বলা হয়েছে, শুধু চিন নয় দীর্ঘ সময় ধরে মায়ানমারের সেনাবাহিনীর মদতে চলছে বিচ্ছিন্নতাবাদী সংগঠনগুলিকে উস্কানি দেওয়ার কাদের। বর্তমানে মায়ানমারে সেনা শাসন। আর ভারত সংলগ্ন এলাকায় বর্মী সেনা সবথেকে বেশি সশস্ত্র হামলার মুখে পড়েছে।

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p style=”text-align: justify;”>ভারতের পক্ষ থেকে মায়ানমারের সেনা সরকারকে সাফ জানানো হয়, সে দেশের উরতাগা অঞ্চলে বেশকিছু জঙ্গি লুকিয়ে রয়েছে। তাদের বিরুদ্ধে যেন অবিলম্বে কড়া ব্যবস্থা নেওয়া হয়।

China: ড্রাগনের গলায় সোনার লকেট! সবথেকে ‘ধনী দেশ’ চিন

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News Desk: মার্কিন যুক্তরাষ্ট্রকে টপকে চিন এখন বিশ্বের সবচেয়ে ধনী দেশ। গবেষণা প্রতিবেদনে এই তথ্য উঠে এসেছে। সোমবার ম্যাককিনেসি অ্যান্ড কোম্পানির ওয়েবসাইটে প্রকাশিত হয়েছে এই রিপোর্ট।

এই গবেষণায় বলা হয়েছে, আন্তর্জাতিক আয়ের মোট ৬০ শতাংশের বেশি যে ১০টি দেশের দখলে, সেই দেশগুলির আয় ব্যয়ের হিসেব বিশ্লেষণ করে বিশ্বের সবচেয়ে ধনী দেশের তালিকা তৈরি করা হয়েছে। এই তালিকায় প্রথম চিন। তারা টপকে গিয়েছে মার্কিন যুক্তরাষ্ট্রকে।

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গবেষণা প্রতিবেদন বলা হয়েছ, গত দু দশকে বিশ্বের সম্পদ বেড়ে তিন গুণ হয়েছে। বিশ্বে যে পরিমাণ সম্পদ বেড়েছে, তার প্রায় তিন ভাগের এক ভাগই চিনের।

রিপোর্ট উঠে এসেছে,২০০০ সালে বিশ্বের চূডান্ত বা নিট সম্পদের মূল্য ছিল ১৫৬ ট্রিলিয়ন মার্কিন ডলার। ২০২০ সালে তা বেড়ে হয় ৫১৪ ট্রিলিয়ন মার্কিন ডলার। অর্থাৎ সময়ে বিশ্বের সম্পদ বেড়েছে প্রায় তিন গুণ।

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২০০০ সালে চিনের সম্পদ ছিল সাত ট্রিলিয়ন মার্কিন ডলার। ২০২০ সালে এই সম্পদের পরিমাণ বেড়ে দাঁড়ায় ১২০ ট্রিলিয়ন মার্কিন ডলার।

আর গত দু দশকে মার্কিন যুক্তরাষ্ট্রের নিট সম্পদের মূল্য দ্বিগুণের বেশি বেড়ে ৯০ ট্রিলিয়ন মার্কিন ডলার দাঁড়িয়েছে।

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p style=”text-align: justify;”>পরিসংখ্যান অনুসারে মার্কিন যুক্তরাষ্ট্রের নিট সম্পদের তুলনায় ৩০ ট্রিলিয়ন ডলার মূল্যের বেশি সম্পদের অধিকারী চিন। স্বাভাবিকভাবেই তারাই এখন বিশ্বের সবথেকে ধনী দেশ।