छत्तीसगढ़ में अपराध का बोलबाला: Narendra Modi

Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) मंगलवार सुबह 11 बजे जगदलपुर पहुंचे. इसके बाद पीएम मोदी ने मां दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन किए और फिर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. पीएम मोदी ने 26 हजार करोड़ रुपये के विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.

अब पीएम मोदी जगदलपुर के लालबाग मैदान में परिवर्तन महासंकल्प रैली को संबोधित करेंगे.इसके अलावा पीएम मोदी एक बार फिर तेलंगाना का दौरा करेंगे. दोपहर तीन बजे के करीब पीएम मोदी तेलंगाना के निजामाबाद पहुंचेंगे. जहां वे बिजली, रेल व स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों की लगभग 8000 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. साथ ही पीएम मोदी भाजपा की बैठक को भी संबोधित करेंगे. बता दें कि बीते 1 अक्टूबर को भी पीएम मोदी तेलंगाना पहुंचे थे.

पीएम मोदी तेलंगाना के महबूबनगर में जनसभा को संबोधित करके चुनावी बिगुल फूंक दिया था.लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का कोई भी मंत्री, मुख्यमंत्री और ना ही उप मुख्यमंत्री पहुंचे. इस बात पर पीएम मोदी ने जगदलपुर के लालबाग में आयोजित परिवर्तन महासंकल्प रैली को संबोधित करते हुए बघेल सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘छत्तीसगढ़ का एक मंत्री नहीं आया, सीएम नहीं आया, डिप्टी सीएम नहीं आया. ये आपका भला ताहते हैं तो कार्यक्रम में बैठना चाहिए की नहीं. सरकार बचान में लगे हुए हैं. अगर मोदी के सामने जाना है तो कोई भ्रष्टाचारी आंख नहीं मिला सकता है, इसलिए वो आने से डरते हैं

जिन कामों को 50 साल लगते, उन्हें महज तीन माह में किया गया’, शाह ने पीएम मोदी की तारीफों के बांधे पुल

Amit Shah Commends PM Modi

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिन कामों को करने में किसी को 50 साल लगते उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन महीने में करके दिखा दिया। दरअसल, वह नए संसद भवन, चंद्रयान-3, जी-20 शिखर सम्मेलन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर पीएम मोदी की सराहना कर रहे थे।

शाह ने शनिवार को एक सभा में कहा कि पीएम मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का कायाकल्प करने और इसके वैज्ञानिकों को प्रेरित करने के साथ-साथ जी-20 शिखर सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश दिया है कि भारत विकसित और विकासशील दोनों देशों के साथ है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी ने विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले विधेयक के माध्यम से ‘मातृ शक्ति’ को सम्मान दिया है।उन्होंने कहा कि मैं बड़े विश्वास के साथ कह सकता हूं कि नरेंद्र भाई ने तीन महीने के भीतर चार काम पूरे किए, जबकि एक भी काम पूरा होने में 50 साल लग जाते। यह दिखाता है कि नरेंद्र भाई के नेतृत्व में एनडीए सरकार भारत को विश्व में उसका स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर शाह ने कहा कि यह वर्षों से अधर में लटका हुआ था। पर प्रधानमंत्री ने इसे पटरी पर ला दिया।

बता दें, अमित शाह अहमदाबाद पहुंचे थे, यहां उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र गांधीनगर के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मोदी ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की अवधारणा को हकीकत में बदल दिया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो का कायाकल्प किया और अन्य वैज्ञानिकों को भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में शीर्ष पर ले जाने की कल्पना के साथ प्रेरित किया। चांद पर तिरंगा देखना पूरे देश और दुनिया के लिए सौभाग्य की बात है।

शाह ने कहा कि कई देशों में जी-20 का आयोजन हो चुका है। पर सभी देशों के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत ने जिस तरह से जी-20 का आयोजन किया, वह आने वाले 25 वर्षों तक सभी देशों के लिए चुनौती होगा। उन्होंने कहा, ‘जी-20 का आयोजन इतना शानदार था कि रूस, चीन और अमेरिका की मौजूदगी के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को चुनौती देने के बावजूद हमारे प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया को संदेश देते हुए सर्वसम्मति से घोषणापत्र जारी कराया।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अफ्रीकी संघ को जी-20 की सदस्यता दिलाने में मदद की और संदेश दिया कि भारत विकसित और विकासशील दोनों देशों के साथ है। शाह ने विश्वकर्मा योजना के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन लोगों को आगे लाने और समान दर्जा देने के लिए कदम उठाए जो विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन समाज में पिछड़ गए हैं।

Chhattisgarh: भूपेश बघेल सरकार पर पीएम मोदी का बड़ा हमला

PM Modi Launches Scathing Attack on Chhattisgarh

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चुनावी राज्य छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर दौरे पर हैं. बिलासपुर में रोड शो करने के बाद पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघले सरकार पर जमकर हमला बोला है. पीएम मोदी ने कहा, छत्तीसगढ़ में परिवर्तन तय हो गया है. रैली में दिखने वाला उत्साह परिवर्तन का उद्घोष है. कांग्रेस सरकार के अत्याचारों से त्रस्त राज्य की जनता कह रही है अब नहीं सहेंगे और बदल के रहेंगे.

पीएम ने कहा कि कांग्रेस न चाहते हुए भी महिला आरक्षण बिल का संसद में समर्थन किया था.पीएम ने कहा कि मैं बिलासपुर बहुत बार आया हूं. संगठन का काम करता था तब भी मैं यहां आता था और पीएम बनने के बाद भी आपके बीच में आया हूं, लेकिन मैंने ऐसा उत्साह कभी नहीं देखा. वहीं, भूपेश बघेल सरकार पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, यहां रोजगार के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है. अटल जी ने छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं को समझते हुए इस प्रदेश का निर्माण किया था.

ये बीजेपी ही है जिसने छत्तीसगढ़ के लोगों को समझा है.छत्तीसगढ़ की सरकार पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा, छत्तीसगढ़ के विकास के लिए बीजेपी केंद्र में हो या राज्य में पूरी तरह से समर्पित रही है. मैं आपको ये गारंटी देने के लिए आया हूं, आपके हर सपने को साकार करने के लिए मोदी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा. आप लिख लीजिए ये मोदी की गारंटी है आपका सपना मोदी का संकल्प है. राज्य के हर परिवार का सपना तभी साकार होगा जब यहां भी भाजपा सरकार होगी. दिल्ली से मैं जितनी कोशिश करू यहां की कांग्रेस सरकार उसको फेल करने जुटी हुई होती है.उन्होंने कहा, पिछले पांच साल में छत्तीसगढ़ को केंद्र से हजारों करोड़ रुपए मिले हैं, हमने छत्तीसगढ़ के लिए आपके लिए पैसे की कोई कमी नहीं रखी है. ये बात यहां के उप-मुख्यमंत्री ने कहा था.

अगर कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री भरी सभा में कहते हैं कि दिल्ली कभी अन्याय नहीं करती है तो फिर हर एक खुशी होनी चाहिए लेकिन कांग्रेस पार्टी में उफान मच गया.यहां के धान किसानों का दाना-दाना केंद्र की बीजेपी सरकार खरीदती है. छत्तीसगढ़ के किसानों का धान खरीदकर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम दी है. मैं फिर विश्वास दिलाता हूं कि बीजेपी धान किसानों के लिए समर्पित है. इसलिए सरकार बनेगी तो किसानों का पूरा ध्यान रखा जाएगा. मोदी एक रुपया भेजता है तो सौ के सौ पैसे पहुंचते हैं. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत छत्तीसगढ़ के किसानों के खाते में 28 हजार रुपए तक पहुंचे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम किसानों को 300 रुपए में यूरिया की एक बोरी देते हैं जबकि दुनिया में उसकी कीमत 3000 के आसपास है. बीजेपी सरकार का प्रयास है कि गरीबों के जीवन में सुधार हो और स्तर में सुधार हो. जब मेरे देश के गरीबों का कल्याण होता है तो मेरा जीवन धन्य हो जाता है. हमने शौचालय बनाया तो लोगों की मुश्किलें कम हुई. हमने उज्जवला का मुफ्त कनेक्शन दिया तो गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति मिली. हाल ही में उज्जवला गैस सिलेंडर को 400 रुपए सस्ता किया गया है.

महिला आरक्षण का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, बीजेपी सरकार ने इसका रास्ता साफ किया है, लेकिन खासकर माताओं-बहनों को बहुत सतर्क रहना होगा. यह बिल 30 साल से लटका हुआ था. कांग्रेस और इसके घमंडी साथियों को लग रहा है कि मोदी ने क्या कर दिया. उनको लगता है कि सारी माताएं-बहनें मोदी को ही आशीर्वाद देंगी. न चाहते हुए भी संसद में उनको बिल का समर्थन करना पड़ा.

Punjab: প্রধানমন্ত্রীর নিরাপত্তায় গাফিলতি, মামলা সুপ্রিমকোর্টে, কংগ্রেসের কটাক্ষ

পাঞ্জাবের ভাতিন্ডায় বুধবারের ঘটনার পর অনেকেই অভিযোগ করেছেন, “ফ্লপ” জনসভা এড়াতেই ব্রিজে দাঁড়িয়ে থাকার নাটক। তারপর তাঁকে “খুনের চক্রান্তের” অভিযোগ করেছেন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী। তীব্র রাজনৈতিক বিতর্কের মাঝে প্রধানমন্ত্রীর নিরাপত্তায় গাফিলতিজনিত মামলা দায়ের হল সুপ্রিম কোর্টে। রাষ্ট্রপতি রামনাথ কোবিন্দও গভীর উদ্বেগ প্রকাশ করেছেন।

শুক্রবার প্রধান বিচারপতি এনভি রামান্নার বেঞ্চে হবে এই মামলার শুনানি হবে। আইনজীবী মনিন্দর সিং আদালতে মামলটি দায়ের  করেছেন। আবেদনে মনিন্দর বলেছেন, প্রধানমন্ত্রীর নিরাপত্তায় কেন এত বড় মাপের গাফিলতি হল সে বিষয়ে পাঞ্জাব সরকারের বক্তব্য জানতে চাওয়া হোক।যাদের উপর প্রধানমন্ত্রীর নিরাপত্তার দায়িত্ব ছিল সেই সমস্ত আধিকারিকদের বিরুদ্ধেও ব্যবস্থা নেওয়া হোক। এ ধরনের ঘটনার পুনরাবৃত্তি যাতে না হয় সে বিষয়টিও যেন নিশ্চিত করা হয়।

বুধবারের ঘটনায় পাঞ্জাব সরকারের পক্ষ থেকেও তিন সদস্যের তদন্ত কমিটি গঠন করা হয়েছে। নির্দেশ দেওয়া হয়েছে তিন দিনের মধ্যে রিপোর্ট পেশ করার। বিচারপতি মেহতাব গিল এবং স্বরাষ্ট্র বিভাগের প্রধান সচিব অনুরাগ ভার্মা রয়েছেন এই কমিটিতে।

প্রধানমন্ত্রীকে নিরাপত্তা দিতে ব্যর্থ হওয়ার জন্য পাঞ্জাব সরকারের সমালোচনা করে স্বরাষ্ট্র মন্ত্রক জানিয়েছে, “ব্লু -বুক অনুসারে প্রধানমন্ত্রীর সফরের সময় পাঞ্জাবের মত স্পর্শকাতর জায়গায় বিকল্প রাস্তা তৈরি রাখা উচিত ছিল।”

প্রধানমন্ত্রীর এই সফরে, সব ধরনের প্রোটোকল মানা হয়েছে কিনা জানতে চেয়ে কংগ্রেসও পাল্টা কটাক্ষ করেছে। পাঞ্জাবে কংগ্রেস ক্ষমতায়।

পাঞ্জাবের মুখ্যমন্ত্রী চরণজিৎ সিং চান্নি সাংবাদিক সম্মেলন বলেছেন, “প্রধানমন্ত্রীর নিরাপত্তায় কোনওরকম গাফিলতি ছিল না। একজন পাঞ্জাবি হিসেবে, আমি আগে আপনাকে (প্রধানমন্ত্রী) রক্ষা করে তারপর মরব। কিন্তু আপনার জীবনের কোনও বিপদ হতে দেব না। মোদীর খুনের চক্রান্ত নিতান্তই বাহানা। মোদীর সড়ক পথে আসার কোনও পূর্ব পরিকল্পনাই ছিল না। ওনার যদি ফিরোজপুর যাওয়ার প্রকৃতই ইচ্ছে থাকত তাহলে উনি অন্য পথেও যেতে পারতেন। উনি যেখানে যাচ্ছিলেন সেখানে মাত্র ৭০০ জন লোক এসেছিল।”

বিরোধী শিবিরের মতে, প্রধানমন্ত্রীর জনসভায় ৭০ হাজার চেয়ার ছিল। কিন্তু লোক হয়েছিল মাত্র ৭০০ জন। তাই অস্বস্তি এড়াতেই তাঁর এই “উল্টোযাত্রা”।

বিজেপি বিরোধী শিবিরের কটাক্ষ, যেখানে রাস্তায় থেকে এক বছরে ৭০০জন কৃষক প্রাণ হারিয়েছেন সেখানে মাত্র ১৫ মিনিট রাস্তায় আটকে থাকায় নিজের “প্রাণনাশের” আশঙ্কা করছেন প্রধানমন্ত্রী। তাঁর এই আশঙ্কা যদি সত্যি হয় তবে, তো বলতে হয় মোদি সরকারের আমলে দেশে আইনশৃঙ্খলা বলে কোনও বস্তুই নেই।

Khalistan Threat: ‘আজাদ খালিস্তান আসছে’, মোদীকে হুমকি গুরপ্রীত পান্নুর

“আজাদ খালিস্তান আসছে। মোদী তুমি ভাগো।” এমনই ভাবে হুমকি এসেছে পাকিস্তান মদতপুষ্ট বিচ্ছিন্নতাবাদী সংগঠন শিখ ফর জাস্টিসের তরফে। নিষিদ্ধ এই সংগঠনটির নেতা গুরপ্রীত সিং পান্নুর ভিডিও ভাইরাল।

সরাসরি এই বিচ্ছিন্নতাবাদী নেতা ভারতের প্রধানমন্ত্রী মোদীকে ভেগে যাওয়ার হুমকি দিয়েছে। বুধবার পাঞ্জাবে জনসভায় বিক্ষোভের মুখে মোদীর চলে আসা ও বেঁচে ফিরেছি বলে মন্তব্য করার পর দেশ উত্তাল। এর পরেই এসেছে খালিস্তানি সংগঠনের তরফে হুমকি।

গোয়েন্দারা গোপন সূত্র মারফত জানতে পেরেছে যে, প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদীর পাঞ্জাবের ফিরোজপুর সফরের কয়েক দিন আগে ৪২,৭৫০ কোটি টাকার একাধিক উন্নয়ন প্রকল্পের শিলান্যাস করার জন্য খালিস্তানপন্থী সংগঠন শিখস ফর জাস্টিস (এসএফজে) পাঞ্জাবের বাসিন্দাদের তাঁর সফরের প্রতিবাদ করার আহ্বান জানিয়েছিল। পান্নুন নিজেকে এই নিষিদ্ধ সংগঠনের ‘সাধারণ পরামর্শদাতা’ বলে আখ্যা দিয়েছেন।

সোশ্যাল মিডিয়ায় ভাইরাল হওয়া এই ভিডিওতে পান্নুনকে পাঞ্জাবের জনগণের উদ্দেশ্যে আহ্বান দিতে দেখা গেছে। যেখানে তিনি বলছেন, ৫ জানুয়ারি “শো দ্য শু” (জুতো দেখাও)। গত বছর ৩৭০০ জনেরও বেশি কৃষকের মৃত্যুর জন্য প্রধানমন্ত্রী দায়ী। শুধু তাই নয়, প্রধানমন্ত্রীকে জুতো দেখানোর’ জন্য পুলিশ, সাংবাদিক, হাসপাতালের কর্মচারী এবং সাধারণ মানুষকে পান্নুন ১,০০,০০০ ডলার (১ লক্ষ মার্কিন ডলার) দেবেন বলেও শোনা যাচ্ছে ভিডিওতে।

২০২১ সালের ২৩ ডিসেম্বর ঘটা লুধিয়ানার আদালতে বিস্ফোরণের ঘটনায় যশবিন্দর সিং মুলতানি নামের এক শিখ উগ্রবাদীকে জার্মানি থেকে গ্রেফতার করে পুলিশ। সেও শিখস ফর জাস্টিসের সদস্য। আর সেই কথা মাথায় রেখেই পুলিশ প্রধানমন্ত্রীর সফরকে ঘিরে নিরাপত্তা আঁটোসাঁটো করেছিল পুলিশ। তারপরেও এই ঘটনা ঘটে। ফলে স্বাভাবিকভাবেই প্রধানমন্ত্রীর নিরাপত্তা ব্যবস্থা বড়সড় প্রশ্নের মুখে এসে দাঁড়িয়েছে।

স্বরাষ্ট্রমন্ত্রকের তরফ থেকে অভিযোগ করে বলা হয়েছে, আগে থেকেই প্রধানমন্ত্রীর এই সফরের ব্যাপারে পাঞ্জাব সরকারকে জানানো হয়েছিল। তারপরেও প্রধানমন্ত্রীকে নিরাপত্তা প্রদান করতে ব্যর্থ হয়েছে সরকার। এর পাশাপাশি কেন্দ্রীয় স্বরাষ্ট্র মন্ত্রক পাঞ্জাব সরকারকেও এই ত্রুটির দায় ঠিক করতে এবং কঠোর ব্যবস্থা নিতে বলেছে।

Tripura: মোদীর জনসভায় অনুপস্থিত সুদীপ, বিজেপির ফাটল স্পষ্ট

Sudip Barman

আগরতলায় প্রধানমন্ত্রীর জনসভা করছেন আর ত্রিপুরায় (Tripura) বিজেপির অন্যতম খুঁটি সুদীপ রায় বর্মণ গরহাজির! এতে তৃণমূল কংগ্রেস মহলে মুচকি হাসি আরও চওড়া হতে শুরু করল। বিজেপি মহলে স্পষ্ট হয়েছে ভাঙন।

মোদী আসছেন, মোদী এলেন আর বিজেপি বিধায়ক তথা প্রাক্তন স্বাস্থ্যমন্ত্রী সুদীপ রায় বর্মণ নীরব থাকলেন। আগরতলার স্বামী বিবেকানন্দ ময়দানে (আস্তাবল ময়দান) যেমন নেই, তেমনই সোশ্যাল মিডিয়াতেও নেই। অথচ, তিনি বারবার দাবি করেছেন, মোদীজীর নেতৃত্বে দেশ এগিয়ে যাচ্ছে। ত্রিপুরায় এর যথাযথ প্রয়োগ করা দরকার।

সুদীপ রায় বর্মণের গরহাজিরা, সোশ্যাল মিডিয়ায় প্রধানমন্ত্রীর সফর নিয়ে একটি শব্দ খরচ না করার পিছনে বিজেপির অন্দরমহল দ্বন্দ্ব আরও বাড়ল। আগরতলায় রাজনৈতিক মহলের খবর, বিধানসভা নির্বাচনের আগে নিজ গোষ্ঠীর বিধায়কদের নিয়ে সুদীপ রায় বর্মণ ফের তৃণমূল কংগ্রেসে যোগ দিতে চলেছেন।

সম্প্রতি পুর নির্বাচনের আগে ত্রিপুরার রাজনৈতিক সন্ত্রাস নিয়ে সরকারের ভূমিকায় প্রবল আক্রমনাত্মক মন্তব্য করেছিলেন সুদীপবাবু। তিনি বলেছিলেন, এ রাজ্যে বিজেপি এমন কিছু জনের হাতে পড়েছে যারা নরেন্দ্র মোদীর উন্নয়নমুখী ভূমিকাকে কালিমালিপ্ত করতে চায়। নাম না করে মুখ্যমন্ত্রী বিপ্লব দেবের মুন্ডপাত করেছিলেন সুদীপ রায় বর্মণ।

ত্রিপুরায় মুখ্যমন্ত্রীকে বদল না করলে তাঁর ভূমিকা বিজেপির পতনের কারণ হবে। দলীয় উচ্চস্তরে এই বার্তা বারবার পাঠিয়েছেন সুদীপবাবু ও বিদ্রোহী বিধায়করা। দিল্লি থেকে বারবার পরিস্থিতি সামাল দিতে এসেছেন কেন্দ্রীয় নেতারা। চিঁড়ে ভেজেনি। ফাটল ক্রমে বেড়েছে। মঙ্গলবার প্রধানমন্ত্রীর জনসভায় সুদীপবাবু সহ বিদ্রোহী বিধায়কদের অনুপস্থিতি বিতর্ক আরও উস্কিয়ে দিল।

ত্রিপুরায় দীর্ঘ আড়াই দশকের টানা বাম জমানায় সুদীপবাবু কংগ্রেসের বিধায়ক ছিলেন। পিতা সমীররঞ্জন বর্মণ প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রী। গত বিধানসভা ভোটের আগে সুদীপবাবু সহ সব কংগ্রেস বিধায়করা দলত্যাগ করে টিএমসিতে যোগ দেন। এরপর টিএমসি ত্যাগ করে বিজেপিতে চলে আসেন। সরকার পরিবর্তন হয়। মন্ত্রিসভায় এলেও সরকারের বিভিন্ন পদক্ষেপে সুদীপবাবুর সঙ্গে মুখ্যমন্ত্রী বিপ্লব দেবের সংঘাত তীব্র আকার নেয়।

Modi: ‘ঘরে ঘরে চাকরি’ নেই, মোদীর সফরে ত্রিপুরায় বেকারত্ব কাঁটা

modi farm laws withdrawal announcement

কড়া নিরাপত্তায় মুড়েছে ত্রিপুরার রাজধানী শহর আগরতলা। মঙ্গলবার আগরতলার মহারাজা বীর বিক্রম বিমান বন্দরের নতুন টার্মিনাল ভবনের উদ্বোধন করবেন প্রধানমন্ত্রী মোদী। তাঁর সফরসূচি জমকালো করতে রাজ্যের বিজেপি জোট সরকার খামতি রাখছে না। বিমানবন্দর থেকে আগরতলার বিখ্যাত আস্তাবল ময়দান জুড়ে নিরাপত্তার কঠিন বলয় রাখা হচ্ছে।

একই সফরে মনিপুর যাবেন মোদী। বরাক নদীর উপর সেতু উদ্বোধন করবেন তিনি। মনিপুরে আসন্ন বিধানসভা ভোটে বিজেপি সরকার  নড়বড়ে বলে সমীক্ষায় উঠে এসেছে।

মোদীর ত্রিপুরা সফরে রাজনৈতিক বিতর্ক প্রবল আকার নিয়েছে। আগরতলার রাজনৈতিক মহল তপ্ত। রাজ্য সশস্ত্র বাহিনী টিএসআর নিয়োগ ঘিরে সরকার অস্বস্তিতে। ভুয়ো নিয়োগের অভিযোগে সরব চাকরি প্রার্থীরা। রাস্তায় বিক্ষোভ তুঙ্গে। চাকরিচ্যুত শিক্ষক শিক্ষিকাদের আন্দোলনও চলছে।

বিজেপি জোট সরকারে আসার পর অর্থাভাবে আত্মঘাতী ও অসুস্থ হয়ে শতাধিক চাকরিচ্যুত শিক্ষক শিক্ষিকা মৃত। আরও অভিযোগ, ঘরে ঘরে চাকরির মি়থ্যে প্রতিশ্রুতি দিয়ে ক্ষমতায় এসেছে বিজেপি।

রাজ্যের বিজেপি সরকারের দাবি, ত্রিপুরা এখন উন্নয়নের পথে সামিল। তার উদাহরণ বাঁশ দিয়ে রোজগার ও বিমান বন্দরের জৌলুশ।

তবে প্রধান বিরোধী দল সিপিআইএমের দাবি, ২০০৮ সাল থেকে রাজ্য বামফ্রন্ট সরকারের সদর্থক ভুমিকারই ফসল আজকের এই আগরতলা আন্তর্জাতিক বিমানবন্দর। তৃণমূল কংগ্রেসের অভিযোগ, বিজেপি এই রাজ্যে দুয়ারে গুণ্ডা সরকার চালাচ্ছে। সবমিলে মোদীর সফরের আগে আগরতলা সরগরম।

আগরতলা  বিমানবন্দরটি ১৯৪২ সালে ত্রিপুরার রাজা বীর বিক্রম কিশোর মানিক্য বাহাদুরের সময় মনির্মিত হয়েছিল। দ্বিতীয় বিশ্বযুদ্ধ ও ১৯৭১ সালের ভারত-পাকিস্তান যুদ্ধের সময় গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা নেয় এই বিমান বন্দর। বাংলাদেশ সীমান্তের একেবারে নিকটে ভারতের এই বিমানবন্দরটি উত্তর পূর্বাঞ্চলের সঙ্গে বাকি দেশের আকাশপথ যোগাযোগের বিশেষ কেন্দ্র।

Carbon Emissions: ভারত এখনও কার্বনের আঁতুরঘর, পিছন থেকে ‘Leading the World…’

Modi

News Desk: নরেন্দ্র মোদী রয়েছেন নরেন্দ্র মোদীতেই। শব্দ জালে ফের বোঝাতে চাইলেন ‘সব চাঙ্গা হ্যায়’। জলবায়ু পরিবর্তন এবং কার্বন নির্গমনের বিরুদ্ধে বিশ্বকে পথ দেখাচ্ছে ভারত। কিন্তু সত্যি কি তাই?

নতুন বছরের প্রথম দিনে নিজ সরকারের গুণগান গাইলেন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী। যার মধ্যে অন্যতম বিষয়- জলবায়ু পরিবর্তন এবং কার্বন নির্গমন। তাঁর মতে, ‘”জলবায়ু পরিবর্তনের বিরুদ্ধে বিশ্বকে দিশা দেখাচ্ছে ভারত। ২০৭০ সালের মধ্যে কার্বন নির্গমনের দিক থেকে দেশ হবে ‘নেট জিরো’।” নেট জিরো অর্থাৎ, মোট শূন্য শতাংশ।

প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্য অনুযায়ী, উক্ত সালের মধ্যে ভারতে একেবারে বন্ধ হবে কার্বন নির্গমন। জলবায়ু পরিবর্তনের ক্ষেত্রে বড় সমস্যা কার্বন। বিজ্ঞানী, বিদ্বজ্জনেরা পূর্বে বহু বার সতর্ক করেছেন কার্বন নিঃসরণ এর ব্যাপারে। জলবায়ুর বিরূপ প্রতিক্রিয়ার বিরুদ্ধে প্রতিরোধ গড়ে তুলতে একের পর এক সম্মেলন করেছেন বিশ্বের তাবড় তাবড় দেশনায়কেরা। ভারতও রয়েছে তার মধ্যে। মোদীর দাবি, এক্ষেত্রে অন্যায় দেশগুলিকে পথ দেখাচ্ছে ভারত।

প্রধানমন্ত্রীর আশ্বাসবাণী এবং পরিসংখ্যান এর মধ্যে রয়েছে বিস্তর পার্থক্য। বিশ্বব্যাপী কার্বন উৎপাদক দেশগুলির মধ্যে ভারতের স্থান প্রথম সারিতে। ২০১৪ সালে কেন্দ্রের ক্ষমতায় এসেছিল ভারতীয় জনতা পার্টির নেতৃত্বাধীন সরকার। এর চার বছর পর অর্থাৎ ২০১৮ সালে কার্বন নির্গমনের তালিকায় ভারত জায়গা পেয়েছিল প্রথম দিক থেকে তিন নম্বরে। আন্তর্জাতিক সংবাদমাধ্যমে প্রকাশিত পরিসংখ্যান অনুযায়ী, উক্ত বছরে ভারতে কার্বন নির্গমনের পরিমাণ ছিল ২.৫৬ জিটি। যা বিশ্বব্যাপী উৎপন্ন মোট কার্বনের প্রায় ৭ শতাংশ। CO2 উৎপাদনের ক্ষেত্রে তৎকালীন ‘ফার্স্ট-বয়’ এবং ‘সেকেন্ড-বয়’ যথাক্রমে, চিন ও (২৮ শতাংশ), মার্কিন যুক্তরাষ্ট্র (১৫ শতাংশ)। তখন চতুর্থ স্থানে ছিল রাশিয়া (৫ শতাংশ)।

পাওয়া গিয়েছে ২০১৫ সালের কিছু তথ্যও। সে’বছর কার্বন উৎপাদনের ক্ষেত্রে ভারতের ‘অবদান’ ছিল ৬.৮ শতাংশ। ২০১৮ সালে প্রায় ৭ শতাংশ। অর্থাৎ আমাদের দেশে ঊর্ধ্বমূখী ছিল কার্বন-ডাই-অক্সাইডের জন্মহার। সংখ্যাগরিষ্ঠতা নিয়ে মসনদে ভারতীয় জনতা পার্টি।

এমিশন ডেটাবেস ফর গ্লোবাল অ্যাটমোস্ফিয়ার রিসার্চের তথ্য অনুযায়ী, ২০১৯ ভারতে তখনও কার্বনের আঁতুরঘর। এক রেখাচিত্র অনুযায়ী, ১৮৫০ থেকে ২০২১ সাল পর্যন্ত বিশ্ব জুড়ে ব্যাপক হারে ব্যবহার করা হয়েছে জীবাশ্ম জ্বালানী। ‘ভারত’ অগ্রগণ্য এক নাম। জীবাশ্ম জ্বালানী সম্পর্কিত অপর এক রেখচিত্রেও উজ্জ্বল ভারত। ২০০০ সালের পর থেকে কার্বন নির্গমনের গ্রাফ ঊর্ধ্বগামী। উল্লেখিত দ্বিতীয় রেখাচিত্রের তথ্য-কাল ১৯৭০-২০১৮ পর্যন্ত।

যদিও কার্বন নির্গমন সংক্রান্ত তথ্যগুলো প্রকাশ করেছে বিভিন্ন বিদেশি সংস্থা।

MP: দুর্নীতির টাকার অঙ্ক ঠিক করে দিলেন BJP সাংসদ, কত টাকা জেনে নিন

bjp mp janardan mishra

News Desk: ১৫ লাখ টাকা পর্যন্ত এদিক-ওদিক হলে সেটাকে দুর্নীতি বলা যায় না। এমনটাই মনে করেন মধ্যপ্রদেশের বিজেপি সাংসদ জনার্দন মিশ্র।

এই বিজেপি সাংসদ বলেন, প্রতিদিনই আমার কাছে অনেকেই আসেন সরপঞ্চের (পঞ্চায়েত প্রধান) বিরুদ্ধে আর্থিক দুর্নীতির অভিযোগ জানাতে। কিন্তু এটা বাস্তব যে, একজন সরপঞ্চ প্রার্থীকে ভোটে জিততে ৭ থেকে ৮ লাখ টাকা খরচ করতে হয়। পরের ভোটের জন্য তাঁকে আরও ৭ লক্ষ টাকা মজুত রাখতে হয়। ক্রমবর্ধমান মুদ্রাস্ফীতির ধাক্কায় আরও এক লাখ টাকা খরচ হয়ে যায়। তাই আমি বলি, ১৫ লাখ টাকা পর্যন্ত দুর্নীতি হলে কেউ আমার কাছে আসবেন না। তবে তার বেশি অংকের দুর্নীতি হলে অবশ্যই আমার কাছে আসতে পারেন। এহেন মন্তব্য করে ইতিমধ্যেই প্রবল বিতর্কে জড়িয়েছেন বিজেপি সাংসদ জনার্দন মিশ্র।

রেওয়ার বিজেপি সাংসদের এই বক্তব্যের পর রাজনৈতিক মহলের অনেকেই প্রশ্ন করেছেন, তাহলে আর্থিক দুর্নীতিরও ভাল মন্দ আছে? কম টাকার দুর্নীতি হলে সেটার কোনও গুরুত্ব নেই, কিন্তু বেশি টাকার হলে সেটাই গুরুতর হয়ে ওঠে এটা কেমন কথা? বিজেপি সাংসদ কি বলতে চাইছেন, ১৫ লাখ টাকা পর্যন্ত দুর্নীতি হলে সেটা কোন ধর্তব্যযোগ্য অপরাধ নয়?

উত্তরপ্রদেশের ব্যবসায়ী পীযূষ জৈনের বিরুদ্ধে যখন কোটি কোটি টাকা আয়কর ফাঁকি দেওয়ার অভিযোগে তদন্ত চলছে সে সময়ে বিজেপি সাংসদের এই বক্তব্য যথেষ্টই তাৎপর্যপূর্ণ বলে মনে করা হচ্ছে।

জনার্দন মিশ্রর বক্তব্যের ভিডিও ভাইরাল হতেই নেটিজেনরা অনেকেই প্রশ্ন করেছেন, প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী যখন দুর্নীতির বিরুদ্ধে জিহাদ ঘোষণা করেছেন সেখানে তাঁরই দলের একজন সাংসদ কিভাবে এধরনের মন্তব্য করতে পারেন। এই মন্তব্য করে ওই বিজেপি সাংসদ কার্যত দুর্নীতিকে প্রশ্রয় দিচ্ছেন।

অভিযোগ, প্রধানমন্ত্রী তো বড় গলায় বলে বেড়ান, তিনি চৌকিদার। তিনি নিজে চুরি করবেন না, কাউকে চুরি করতেও দেবেন না। সেক্ষেত্রে তারই দলের একজন সাংসদ কীভাবে এই মন্তব্য করেন? প্রধানমন্ত্রী যদি প্রকৃত দুর্নীতি বিরোধী হন তবে তাঁর উচিত অবিলম্বে এই সাংসদের বিরুদ্ধে উপযুক্ত শাস্তি মূলক ব্যবস্থা নেওয়া।

একুশেই মেয়েদের বিয়ে! বাহ্ মোদীজী কেয়া আইন লায়া!

শবনম হোসেন (কবি-প্রাবন্ধিক): সম্প্রতি নরেন্দ্র মোদীর সরকার মেয়েদের বিয়ের ন্যূনতম বয়স একুশ বছর করার সিদ্ধান্ত নিয়েছে।জয়া জেটলির নেতৃত্বে গঠিত কমিটি দেশের মেয়েদের স্বাস্থ্য, পুষ্টি ও সন্তানধারণ মূলত এই তিনটি বিষয়কে গুরুত্ব দিয়ে আঠার থেকে বাড়িয়ে বিয়ের বয়স একুশ বছর করার সুপারিশ করেছেন। বলা হচ্ছে এতে পুষ্টি লাভের পাশাপাশি আর্থিক উন্নয়ন ও লিঙ্গসাম্য রক্ষিত হবে।

একজন সাধারণ নাগরিক হিসেবে বলতেই পারি নূতন আইন স্বাগত। কিন্তু এর পাশাপাশি উঠে আসছে বেশ কিছু সমস্যা, সৃষ্টি হচ্ছে নানা বিতর্ক।

ন্যূনতম বিয়ের বয়স আঠারো বছর হওয়া সত্ত্বেও প্রান্তিক অঞ্চলে এমনকি বহু ক্ষেত্রে শহরাঞ্চলেরও ১৪- ১৫ বছরেই মেয়েদের বিয়ে হয়ে যাচ্ছে। ইউনিসেফের (UNICEF) রিপোর্ট বলছে প্রতি বছর আঠারোর কম বয়সে প্রায় ১৫ লাখ, শতকরা ৫৪ জন নাবালিকার বিয়ে হয়।

বিশেষজ্ঞদের মতে পরিবারগুলির আর্থিক দূরবস্থা এর মূল কারণ। অর্থাৎ পৃথিবীর অন্যতম বৃহত্তম অর্থনীতি হতে চলা ভারতে নগণ্য মাথাপিছু আয় বুঝিয়ে দিচ্ছে দেশের অর্থনৈতিক বিকাশের সুযোগ সমাজের সর্বস্তরে দেশের সব প্রান্তে সমানভাবে মানুষের কাছে পৌঁছাতে পারেনি। তাই প্রশ্ন উঠছে আঠার বছরে মেয়েদের যথেষ্ট পুষ্টিলাভ না হলে একুশ বছরে কি করে সম্ভব ?

তাই আগে প্রয়োজন পরিবারগুলির আর্থিক পরিকাঠামো মজবুত করা। এছাড়া স্কুলগুলিতে প্রশিক্ষণের মাধ্যমে মেয়েদের প্রাপ্তবয়স্ক হওয়ার সাথে সাথে আর্থিক ভাবে স্বনির্ভর করে তোলা জরুরি। কন্যা সন্তান পরিবারের আর্থিক অবলম্বন হয়ে উঠলে নাবালিকা বিবাহ আটকানো সম্ভব হবে।

অর্থনৈতিক উন্নয়নে শিক্ষার গুরুত্ব অপরিসীম। বলতে দ্বিধা নেই একবিংশ শতাব্দীতেও বিভিন্ন সামাজিক জনগোষ্ঠীর মধ্যে শিক্ষাক্ষেত্রে উল্লেখযোগ্য অসাম্য রয়ে গেছে নারী পুরুষের মধ্যে। এই অসাম্য প্রত্যক্ষ ও পরোক্ষভাবে দেশের অর্থনীতি ও সামাজিক অবস্থানকে অসাম্যের দিকে চালিত করে। পরিণত বয়সে উচ্চ শিক্ষা লাভ করার পাশাপাশি মেয়েরা শারীরিক ও মানসিক ভাবে আরও পরিণত হবে। ভবিষ্যতে ‘মা’ নিজের ও সন্তানের পরিচর্যায় অধিকতর সচেতন হবেন।

বিয়ের বয়সের নতুন আইনে নিয়ে কী কী হতে পারে

(১) সন্দেহ নেই এই আইন ১৩৮ কোটির দেশে ক্রমবর্ধমান জনসংখ্যার অগ্রগতিতে আগামী তিন বছরে দ্রুত লাগাম টানতে পারবে।

(২) বিয়ের বয়স যখন কন্যাশ্রীর মাপকাঠি, ধরে নেওয়া যেতে পারে নতুন আইন প্রণয়ন হলে আগামী তিন বছর কন্যাশ্রীর টাকা বাঁচবে। অর্থাৎ ঋণ জর্জরিত রাজ্য কিছুটা হলেও আর্থিক চাপমুক্ত হবে।

(৩) বর্তমান আইনানুসারে আঠারো বছর হলে প্রাপ্তবয়স্ক বলে গণ্য করা হয় কিন্তু বিয়ের ক্ষেত্রে নাবালিকা ধরা হলে আইনটি স্ববিরোধী বলে পরিগণিত হবে।

বলা হচ্ছে নতুন আইনে ছেলে মেয়ে উভয়ের বিয়ের বয়স একুশ বছর হলে লিঙ্গ সাম্য বিষয়টি গুরুত্ব পাবে। শুধুমাত্র বিয়ের বয়সে সমতা এনে লিঙ্গ সাম্য তৈরি করা যায় না। বাড়িতে, কর্মক্ষেত্রে এমনকি সামাজিক স্তরে এখনও পর্যন্ত চূড়ান্ত লিঙ্গবৈষম্য লক্ষ্য করা যায়। এর জন্য প্রয়োজন যথাযথ শিক্ষা ও মানসিক দৃষ্টিভঙ্গির পরিবর্তন।

চাইবো নারী সম্পর্কে পুরুষের তথা সমাজের এমনকি নারীর নিজের ও দৃষ্টি ভঙ্গির পরিবর্তন হোক। যখন নারী নিজে জীবনে গুরুত্বপূর্ণ সিদ্ধান্ত নেওয়ায় পারদর্শী হয়ে উঠবে।

Farm Laws: ‘কৃষি আইন ফের হবে কখনই বলিনি,’ কৃষিমন্ত্রীর ডিগবাজি!

Farm Laws Repeal

News Desk: যত দোষ নন্দঘোষ! মানে সংবাদ মাধ্যমের। নিজের পক্ষে সাফাই দিতে গিয়ে চাপের মুখে কেন্দ্রীয় কৃষিমন্ত্রীর এবার দাবি, আমি কখনই বলিনি ফের কৃষি আইন লাগু হবে। সবই সংবাদমাধ্যমে বিকৃত করে প্রকাশিত হয়েছে।

২৪ ঘন্টাও কাটল না, তার আগেই ডিগবাজি খেলেন কেন্দ্রীয় কৃষিমন্ত্রী নরেন্দ্র সিং তোমর। এবার স্পষ্টভাবেই জানালেন, নতুন করে কৃষি আইন কার্যকর করার কোনও প্রশ্নই ওঠে না। কৃষি চালু করার কোনও কথাই নাকি তিনি বলেননি।

শুক্রবার মহারাষ্ট্রের এক অনুষ্ঠানে কেন্দ্রীয় কৃষিমন্ত্রী বলেছিলেন, আপাতত তাঁরা কৃষি আইন নিয়ে পিছিয়ে গিয়েছেন অর্থাৎ আইন বাতিল করা হয়েছে। কিন্তু আগামী দিনে ফের এই আইন সামনে আনা হতে পারে। তোমরের এই মন্তব্য নিয়ে যথারীতি গোটা দেশে তৈরি হয় তীব্র চাঞ্চল্য। অনেকেই বলতে থাকেন, মোদী সরকার সময় ও সুযোগ পেলে এই কৃষি আইন কার্যকর করবে। কৃষি মন্ত্রীর বক্তব্যেই সেটা স্পষ্ট হয়ে গিয়েছে।

তোমরের ওই মন্তব্য নিয়ে আসরে ঝাঁপিয়ে পড়তে দেরি করেনি কংগ্রেস। কংগ্রেসের পক্ষ থেকে দাবি করা হয়, আগামী বছরের শুরুতে পাঁচ রাজ্যের বিধানসভা নির্বাচন মিটে গেলেই সংশোধনী-সহ নতুন করে তিন কৃষি আইন কার্যকর করার পরিকল্পনা রয়েছে মোদী সরকারের।

কংগ্রেস-সহ বিরোধী শিবিরের রাজনৈতিক চাপ তো ছিলই পাশাপাশি বিভিন্ন কৃষক সংগঠনও নতুন করে মোদী সরকারের বিরুদ্ধে সক্রিয় হয়ে ওঠে। এই খবর কেন্দ্রীয় কৃষি মন্ত্রীর কানে পৌঁছতেই ডিগবাজি খেলেন মন্ত্রী।

বক্তব্য থেকে সরে এসে মন্ত্রী বললেন, কৃষি আইন নিয়ে আমি এ ধরনের কোনও কথাই বলিনি। কৃষি আইন ফের সামনে আনা হবে, এটা তো একটা কল্পনা। আমি বলেছিলাম, সরকার স্বাধীনতার পর একটা বড়সড় পদক্ষেপ করেছিল। কৃষি ব্যবস্থায় একটা সংস্কার আনতে চেয়েছিল সরকার। কিন্তু ওই আইন যে যথেষ্ট ভাল ছিল সেটা আমরা সকলকে বোঝাতে পারিনি। বিশেষ করে যাদের কল্যাণ ও উন্নয়নের জন্য এই আইন তাদেরকেই আমরা বোঝাতে ব্যর্থ হয়েছি। ব্যর্থতার কারণেই আমরা ওই আইন ফিরিয়ে নিয়েছি। কিন্তু সংবাদমাধ্যম আমার এই মন্তব্যকে বিকৃত করেছে।

তোমরের কৃষি আইন ফের সামনে আনার মন্তব্যের তীব্র সমালোচনা করেন কংগ্রেস নেতা রাহুল গান্ধী। তিনি বলেছিলেন, মোদি সরকার কৃষকদের অসম্মান করছে।

তিন কৃষি আইন বাতিলের দাবিতে দীর্ঘ এক বছরেরও বেশি সময় ধরে আন্দোলন করছিল কৃষক সংগঠনগুলি। আন্দোলনের চাপে পড়ে গুরু নানকের জন্মদিনে প্রধানমন্ত্রী এই তিন আইন বাতিল করার কথা ঘোষণা করেন। সংসদের শীতকালীন অধিবেশনে কৃষি আইন প্রত্যাহার বিল পাশ করে সাংবিধানিকভাবেই আইন প্রত্যাহার করে নেওয়া হয়েছে।

আইন প্রত্যাহারের পরেও কৃষিমন্ত্রী তোমরের ওই মন্তব্য জল্পনা উস্কে দেয় যে, পাঞ্জাব ও উত্তরপ্রদেশ-সহ বিভিন্ন রাজ্যের বিধানসভা নির্বাচন মিটে গেলেই মোদী সরকার তিন কৃষি আইন সামনে আনতে পারে। ঘরে-বাইরে চাপের মুখে পড়ে শেষ পর্যন্ত তোমর তাঁর বক্তব্য প্রত্যাহার করলেন।

BJP: ১ হাজার টাকা পার্টি ফান্ডে ঢেলেই মোদীর আহ্বান দান করুন!

Modi Varanasi visit political controversy

News Desk: বিশ্বের বৃহত্তম দল বলে দাবি করে বিজেপি। আসন্ন বিধানসভাগুলি ও আগামী লোকসভা ভোটের দিকে তাকিয়ে বৃহত্তম দল চাঁদা সংগ্রহে নামল। দলকে ভালোবেসে ১ হাজার টাকা চাঁদা দিলেন প্রধানমন্ত্রী মোদী।

পার্টি ফান্ডে এক হাজার টাকা চাঁদা দিয়েই নরেন্দ্র মোদীর আহ্বান যারা বিজেপিকে ভালোবাসেন তারা মুক্তহস্তে দান করুন। দলকে শক্তিশালী করুন।

পুরো প্রক্রিয়াটি রাজনৈতিক কর্মসূচি। ক্ষমতাসীন বিজেপির দলীয় তহবিল উপচে পড়তে চলেছে বলেই ধারণা। কারণ প্রধানত নিজে হাজার টাকা দান করেছেন!

তবে দলেরই অভ্যন্তরে উঠছে কথা, মাত্র হাজার টাকা! প্রধানমন্ত্রী তো তাঁর বেতন ও ভাতার প্রায় পুরোটা দিলেও পারতেন। এমনতর আলোচনা দ্রুত ছড়াচ্ছে সোশ্যাল মিডিয়ায়।

শনিবার টুইট বার্তায় প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী লিখেছেন, ভারতীয় জনতা পার্টির পার্টি ফান্ডে ১০০০ টাকা অনুদান করলাম। আপনারাও ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র অনুদান করুন। বিজেপিকে শক্তিশালী করুন। এতে দেশ শক্তিশালী হবে। আমরা সব সময় দেশকে প্রাধান্য দিই। আমাদের ক্যাডারদের আজীবন আত্মত্যাগের আদর্শ আরো শক্তিশালী হবে। দলীয় তহবিলে টাকা জমা দেওয়া টাকার একটি রশিদও পোস্ট করেছেন মোদী।

Good Governance: সুশাসন তালিকায় শীর্ষে গুজরাট, পশ্চিমবঙ্গ কোথায়?

Modi

News Desk: প্রকাশিত হয়েছে কেন্দ্রের সুশাসনের তালিকা। রাজ্যগুলির মধ্যে সুশাসনের নিরিখে প্রথম স্থানে রয়েছে গুজরাট। তারপরে রয়েছে যথাক্রমে মহারাষ্ট্র ও গোয়া। অন্যদিকে কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলগুলির মধ্যে প্রথম স্থান পেয়েছে দিল্লি। পশ্চিমবঙ্গের নামই নেই তালিকার প্রথম দিকে।

২০২০-২১ সালে সুশাসনের এই সূচকে গুজরাটের সূচক ১২ শতাংশের বেশি বেড়েছে। তবে ২০১৯-২০ সালের তুলনায় চলতি বছরে গোয়ার সূচক বেড়েছে প্রায় ২৫ শতাংশ। উত্তরপ্রদেশের ক্ষেত্রে সূচক বৃদ্ধির হার ৯ শতাংশ।

উত্তরপ্রদেশের ক্ষেত্রে আরও একটি সুখবর আছে। বাণিজ্য ও শিল্প ক্ষেত্রেও শীর্ষস্থান দখল করেছে যোগীর উত্তর প্রদেশ। যে ১০টি জিনিসের উপর ভিত্তি করে সুশাসনের সূচক তৈরি করা হয়েছে তার মধ্যে শিল্প ও বাণিজ্য অন্যতম।

প্রকাশিত তালিকায় দেখা যাচ্ছে, উন্নয়ন, মানুষের নিরাপত্তা ও সুরক্ষা, বিচার বিভাগ, সামাজিক ন্যায় প্রভৃতি ক্ষেত্রে উত্তরপ্রদেশ আগের বছরের তুলনায় অনেক উন্নতি করেছে। শুধু উত্তরপ্রদেশ নয়, এবারের তালিকায় বেশ কয়েকটি রাজ্যও সুশাসনের নিরিখে গতবারের তুলনায় অনেকটাই উন্নতি করেছে।
তালিকায় দেখা যাচ্ছে, জম্মু ও কাশ্মীরের উন্নতির সূচক ৩.৭ শতাংশ বেড়েছে। শিল্প ও বাণিজ্য ক্ষেত্রে কাশ্মীর যথেষ্ট ভাল ফল করেছে।

যে ১০টি মানদন্ডের উপর ভিত্তি করে এই সূচক তৈরি করা হয়েছে তার মধ্যে পাঁচটি ক্ষেত্রেই গুজরাত যথেষ্ট ভাল ফল করেছে। মহারাষ্ট্র কৃষি, মানবসম্পদ উন্নয়ন, শিল্প ও বাণিজ্য এবং অন্যান্য ক্ষেত্রে যথেষ্ট ভালো ফল করেছে। কংগ্রেস জোট শাসিত ঝাড়খণ্ডও আগের বছরের তুলনায় সূচক ১২.৬ শতাংশ বাড়িয়ে নিয়েছে। এই রাজ্য ৭ টি সেক্টরে অত্যন্ত ভাল ফল করেছে। তুলনায় কংগ্রেস শাসিত রাজস্থানের সূচক বেড়েছে মাত্র ১.৭ শতাংশ।

শনিবার সুশাসন সপ্তাহ কর্মসূচির শেষ দিনে কেন্দ্রীয় স্বরাষ্ট্রমন্ত্রী অমিত শাহ এই তালিকা প্রকাশ করেন। সেখানেই তিনি বলেন, নরেন্দ্র মোদীর নেতৃত্বে গোটা দেশ উন্নয়নের চেষ্টা করছে। সরকারের লক্ষ্য হল, দেশের কোনও ক্ষেত্র উন্নয়ন ও সুশাসন থেকে যেন বঞ্চিত না হয়। সুশাসন মানে শুধু প্রশাসনিক উন্নয়ন নয়, সব ক্ষেত্রে উন্নয়ন। সুশাসন মানে দুর্নীতিমুক্ত প্রশাসন। সুশাসন মানে সরকারের ওপর মানুষের আস্থা ও বিশ্বাস। সব কিছুই পূরণ করেছে নরেন্দ্র মোদী সরকার।

Farm Laws: ‘কৃষি আইন ফের হবে কখনই বলিনি,’ কৃষিমন্ত্রীর ডিগবাজি!

Farm Laws Repeal

News Desk: যত দোষ নন্দঘোষ! মানে সংবাদ মাধ্যমের। নিজের পক্ষে সাফাই দিতে গিয়ে চাপের মুখে কেন্দ্রীয় কৃষিমন্ত্রীর এবার দাবি, আমি কখনই বলিনি ফের কৃষি আইন লাগু হবে। সবই সংবাদমাধ্যমে বিকৃত করে প্রকাশিত হয়েছে।

২৪ ঘন্টাও কাটল না, তার আগেই ডিগবাজি খেলেন কেন্দ্রীয় কৃষিমন্ত্রী নরেন্দ্র সিং তোমর। এবার স্পষ্টভাবেই জানালেন, নতুন করে কৃষি আইন কার্যকর করার কোনও প্রশ্নই ওঠে না। কৃষি চালু করার কোনও কথাই নাকি তিনি বলেননি।

শুক্রবার মহারাষ্ট্রের এক অনুষ্ঠানে কেন্দ্রীয় কৃষিমন্ত্রী বলেছিলেন, আপাতত তাঁরা কৃষি আইন নিয়ে পিছিয়ে গিয়েছেন অর্থাৎ আইন বাতিল করা হয়েছে। কিন্তু আগামী দিনে ফের এই আইন সামনে আনা হতে পারে। তোমরের এই মন্তব্য নিয়ে যথারীতি গোটা দেশে তৈরি হয় তীব্র চাঞ্চল্য। অনেকেই বলতে থাকেন, মোদী সরকার সময় ও সুযোগ পেলে এই কৃষি আইন কার্যকর করবে। কৃষি মন্ত্রীর বক্তব্যেই সেটা স্পষ্ট হয়ে গিয়েছে।

তোমরের ওই মন্তব্য নিয়ে আসরে ঝাঁপিয়ে পড়তে দেরি করেনি কংগ্রেস। কংগ্রেসের পক্ষ থেকে দাবি করা হয়, আগামী বছরের শুরুতে পাঁচ রাজ্যের বিধানসভা নির্বাচন মিটে গেলেই সংশোধনী-সহ নতুন করে তিন কৃষি আইন কার্যকর করার পরিকল্পনা রয়েছে মোদী সরকারের।

কংগ্রেস-সহ বিরোধী শিবিরের রাজনৈতিক চাপ তো ছিলই পাশাপাশি বিভিন্ন কৃষক সংগঠনও নতুন করে মোদী সরকারের বিরুদ্ধে সক্রিয় হয়ে ওঠে। এই খবর কেন্দ্রীয় কৃষি মন্ত্রীর কানে পৌঁছতেই ডিগবাজি খেলেন মন্ত্রী।

বক্তব্য থেকে সরে এসে মন্ত্রী বললেন, কৃষি আইন নিয়ে আমি এ ধরনের কোনও কথাই বলিনি। কৃষি আইন ফের সামনে আনা হবে, এটা তো একটা কল্পনা। আমি বলেছিলাম, সরকার স্বাধীনতার পর একটা বড়সড় পদক্ষেপ করেছিল। কৃষি ব্যবস্থায় একটা সংস্কার আনতে চেয়েছিল সরকার। কিন্তু ওই আইন যে যথেষ্ট ভাল ছিল সেটা আমরা সকলকে বোঝাতে পারিনি। বিশেষ করে যাদের কল্যাণ ও উন্নয়নের জন্য এই আইন তাদেরকেই আমরা বোঝাতে ব্যর্থ হয়েছি। ব্যর্থতার কারণেই আমরা ওই আইন ফিরিয়ে নিয়েছি। কিন্তু সংবাদমাধ্যম আমার এই মন্তব্যকে বিকৃত করেছে।

তোমরের কৃষি আইন ফের সামনে আনার মন্তব্যের তীব্র সমালোচনা করেন কংগ্রেস নেতা রাহুল গান্ধী। তিনি বলেছিলেন, মোদি সরকার কৃষকদের অসম্মান করছে।

তিন কৃষি আইন বাতিলের দাবিতে দীর্ঘ এক বছরেরও বেশি সময় ধরে আন্দোলন করছিল কৃষক সংগঠনগুলি। আন্দোলনের চাপে পড়ে গুরু নানকের জন্মদিনে প্রধানমন্ত্রী এই তিন আইন বাতিল করার কথা ঘোষণা করেন। সংসদের শীতকালীন অধিবেশনে কৃষি আইন প্রত্যাহার বিল পাশ করে সাংবিধানিকভাবেই আইন প্রত্যাহার করে নেওয়া হয়েছে।

আইন প্রত্যাহারের পরেও কৃষিমন্ত্রী তোমরের ওই মন্তব্য জল্পনা উস্কে দেয় যে, পাঞ্জাব ও উত্তরপ্রদেশ-সহ বিভিন্ন রাজ্যের বিধানসভা নির্বাচন মিটে গেলেই মোদী সরকার তিন কৃষি আইন সামনে আনতে পারে। ঘরে-বাইরে চাপের মুখে পড়ে শেষ পর্যন্ত তোমর তাঁর বক্তব্য প্রত্যাহার করলেন।

BJP: দলের মধ্যে ক্রমশই নিয়ন্ত্রণের রাশ হারাচ্ছেন মোদী

Modi

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: সংসদের শীতকালীন অধিবেশনের (winter season) শুরুতেই বিজেপি (BJP) সাংসদদের মধ্যে ছিল একটা গাছাড়া মনোভাব। অনেকেই সংসদ এড়িয়ে যাচ্ছিলেন। এই বিষয়টি নজর এড়ায়নি প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদীর (Narendra Modi)। যে কারণে ৭ ডিসেম্বর সংসদীয় দলের বৈঠক ডাকেন প্রধানমন্ত্রী। কিন্তু প্রধানমন্ত্রীর ডাকা সেই বৈঠকে বিজেপির ৩০৩ জন সাংসদের মধ্যে উপস্থিত ছিলেন মাত্র ২৫০ জন। সেই বৈঠকে প্রধানমন্ত্রী হুমকি দেন, সাংসদরা ঠিকমতো কাজ না করলে আগামিদিনে তাঁদের সরিয়ে দিতে দ্বিতীয়বার ভাববে না দল।

কিন্তু প্রধানমন্ত্রীর এই হুমকির পরেও বিজেপি সাংসদদের (bjp mp) মধ্যে তেমন কোনও ভাবান্তর লক্ষ্য করা যায়নি। বরং দেখা যাচ্ছে, যে সাংসদরা বিভিন্ন বিষয়ে প্রশ্ন করছেন তাঁরাই সভায় উপস্থিত থাকছেন না।

মঙ্গলবার (tuesday) বিভিন্ন মন্ত্রকের কাছে প্রশ্নকারী ৯ বিজেপি সাংসদ সভায় গরহাজির ছিলেন। অন্যদিকে প্রশ্ন করলেও সভায় হাজির ছিলেন না ৫ কংগ্রেস সাংসদ। বিজেপির অনুপস্থিত সাংসদদের তালিকায় রয়েছে পশ্চিমবঙ্গ বিজেপি সভাপতি তথা বালুরঘাটের সাংসদ সুকান্ত মজুমদারের নাম।

সাধারণ নিয়ম হল, প্রশ্ন করার পর কোনও সাংসদ যদি অনুপস্থিত থাকেন তাহলে দল এবং স্পিকারকে সেটা জানাতে হয়। কিন্তু বিজেপির নয় অনুপস্থিতি সাংসদের কেউই সেটা করেননি। বঙ্গ বিজেপি সভাপতি সুকান্ত মজুমদারের ছোট মেয়ের শারীরিক অবস্থা ছিল অত্যন্ত সঙ্কটজনক। সেকারণেই তিনি দিল্লি যেতে পারেননি। তবে সে বিষয়টি তিনি কাউকে জানানোর প্রয়োজন আছে বলে মনে করেননি।

বিজেপি সংসদের এই আচরণে রাজনৈতিক মহলের অনেকেই মনে করছেন, দলের মধ্যে মোদীর নিয়ন্ত্রণের রাশ ক্রমশই আলগা হচ্ছে। যদি সেটা না হত তবে প্রধানমন্ত্রী হুমকির পরেও এভাবে বিজেপি সাংসদরা সভায় অনুপস্থিত থাকতেন না। বিশেষ করে যে সমস্ত সাংসদ প্রশ্ন করেছেন তাঁদের অনুপস্থিতর তালিকাটা এত দীর্ঘ হত না। তবে যদি এই পরিস্থিতি বজায় থাকে তাহলে সেটা নিশ্চিতভাবেই মোদী-অমিত শাহর পক্ষে অত্যন্ত উদ্বেগের।

রাজনৈতিক মহল মনে করছে, পরবর্তী লোকসভা নির্বাচনের এখনও আড়াই বছর বাকি আছে। কিন্তু বিজেপির সাংসদদের এই আচরণ যদি আরও বাড়তে থাকে তবে সেটা দল ও মোদীর পক্ষে বিশেষ উদ্বেগের কারণ হয়ে উঠবে। বিশেষ করে পরবর্তী লোকসভা নির্বাচনের আগে টিকিট পাওয়াকে কেন্দ্র করে বিজেপি সাংসদদের মধ্যে অসন্তোষ আরও বাড়বে। প্রধানমন্ত্রী ইতিমধ্যেই জানিয়ে দিয়েছেন যে, তিনি প্রত্যেক সাংসদের উপর নজর রাখছেন। তাঁদের আচরণের ভিত্তিতেই টিকিট দেওয়ার বিষয়ে তিনি সিদ্ধান্ত নেবেন। সে ক্ষেত্রে যাঁরা আগামী দিনে বাদ পড়তে পারেন এমন সম্ভাবনা তৈরি হবে বা প্রধানমন্ত্রী ও অমিত শাহ যাদের বাদ দেবেন তাঁরা যে অবশ্যই বিরোধী শিবিরে গিয়ে ভিড়বেন তা বলার অপেক্ষা রাখে না।

Ganga Expressway: গঙ্গা এক্সপ্রেসওয়ে প্রকল্পের ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন অনুষ্ঠানে ‘বিস্ফোরক’ মোদী

PM Modi lays foundation stone of Ganga Expressway

নিউজ ডেস্ক: আর মাস দুয়েকের মধ্যেই উত্তর প্রদেশ বিধানসভা নির্বাচন। নির্বাচনের আগে ফ্রি-লান্সের রীতিমতো ছিলেন পড়ে গিয়েছে। শনিবার উত্তরপ্রদেশে গঙ্গা এক্সপ্রেসওয় প্রকল্পের (Ganga Expressway)  ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন করলেন প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী। এই প্রকল্পের জন্য খরচ হবে 36230 কোটি টাকা।

ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রী বলেন, উত্তরপ্রদেশে এখন মাফিয়ারা বুলডোজারের মুখে পড়েছে যত সুখ যে সমস্ত বেআইনি নির্মাণ ছিল সেগুলি গুঁড়িয়ে দেওয়া হচ্ছে ৷ তাই যারা এতদিন মাফিয়াদের মধ্যে এসেছে তাদের খুব কষ্ট হচ্ছে এজন্যই সাধারণ মানুষ বলে ইউপি প্লাস যোগী বি ইকুয়াল টু উপযোগী। শুক্রবারে সমাজবাদী পার্টির প্রধান তথা রাজ্যের প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রী অখিলেশ যাদবের ঘনিষ্ঠ কয়েকজনের বাড়িতে হানা দেয় আয়কর দপ্তর। মুইন পুরীতে সমাজবাদী পার্টির শক্ত ঘাঁটি দেও বেশ কয়েকজনের বাড়িতে তল্লাশি করা হয় এর প্রেক্ষিতে অভিযোগ করেছেন বিজেপি সমস্ত কেন্দ্রীয় সংস্থাকে বিরোধীদের বিরুদ্ধে ব্যবহার করছে। তবে মোদী সরকার যাই করুক না কেন সাইকেলের গতি তারা কোনভাবেই থামাতে পারবে না আসলে সাইকেল হলো সমাজবাদী পার্টির নির্বাচনী প্রতীক।

অখিলেশের ওই মন্তব্যের কয়েক ঘন্টার মধ্যেই পাল্টা উত্তর দিয়েছেন মোদী তিনি এদিনের ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন অনুষ্ঠানে বলেন সকলেই জানেন আগে কিভাবে সরকারি অপব্যবহার করা হতো একসময় কোনো প্রকল্প এ রাজ্যে কোন প্রকল্প শুরু হতো কাগজে-কলমে আসলে মূল উদ্দেশ্য ছিল কয়েকজনের পকেট ভর্তি করা। কিন্তু সেই দিন আর নেই এখন জনগণের টাকায় উন্নয়নের কাজে ব্যয় করা হয় জনগণের টাকায় জনগণের প্রয়োজনেই খরচ হয়।

এই প্রকল্পের জন্য বিরোধীদের কটাক্ষ করে দিন উড়িয়ে দিয়েছেন তিনি বলেছেন কিছু কিছু রাজনৈতিক দল আছে যারা দেশের উন্নতি নয় নিজেদের উন্নতি পাখির চোখ করে বসে আছে আসলে ওই সব দল ভোটব্যাঙ্কের কথাই ভাবে তারা দেশকে এগিয়ে নিয়ে যাওয়া উন্নয়নের কথা ভাবে না। এই সমস্ত দলগুলির চায়না গরিব মানুষের উন্নতি হোক তাই এই দলগুলি কাশী বিশ্বনাথ অযোধ্যায় রাম মন্দির ঘুরতে গেলে আপত্তি জানায়। এই সমস্ত দলগুলির সেনাবাহিনীর কার্যকলাপ নিয়েও প্রশ্ন তোলেন এমনকি মেক ইন ইন্ডিয়া প্রকল্প কটাক্ষ করে। সকলকে মনে রাখতে হবে সরকার আসবে ও যাবে কিন্তু দেশের উন্নয়ন অগ্রগতি হলে সেটা চিরস্থায়ী হয় কিন্তু দুঃখের কথা এই যে দেশের উন্নয়ন অনেকেই মেনে নিতে পারে না।

CDS: সেনা সর্বাধিনায়ক পদে নিয়োগ করতে সরকারের এত টালবাহানা কেন, উঠছে প্রশ্ন

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নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: দেশের প্রথম সেনা সর্বাধিনায়ক বিপিন রাওয়াতের (Bipin Rawat) মৃত্যুর পর কেটে গিয়েছে ৮ দিন। কিন্তু ৮ দিনের মধ্যেও সেনা সর্বাধিনায়কের (CDS) মত এত গুরুত্বপূর্ণ পদে কেন কাউকে নিয়োগ করা হচ্ছে না, ইতিমধ্যেই তা নিয়ে নানা প্রশ্ন উঠেছে। সেনা সর্বাধিনায়কের মত এমন একটি গুরুত্বপূর্ণ পদ কোনওভাবেই ফাঁকা রাখা ঠিক নয়।

সেনাবাহিনীর (army) প্রচলিত নিয়ম অনুযায়ী কোনও পদের শীর্ষ কর্তা আনুষ্ঠানিকভাবে তাঁর উত্তরসূরির হাতে দায়িত্ব অর্পণ করে বিদায় গ্রহণ করেন। বিদায় অনুষ্ঠানে দুইজন একে অপরের সঙ্গে করমর্দন করেন ও অভিনন্দন জানান। কিন্তু বিপিন রাওয়াতের মৃত্যুর পর ৮ দিন কেটে গেলেও নতুন সেনা সর্বাধিনায়কের নাম ঘোষণা করা হয়নি।

স্বাভাবিকভাবেই প্রশ্ন উঠেছে কেন্দ্র (central government) বিষয়টি নিয়ে এত গড়িমসি করছে কেন? কেন্দ্রের এই টালবাহানায় স্পষ্টতই বোঝা যাচ্ছে, বিপিন রাওয়াতকে যখন সেনা সর্বাধিনায়ক নিয়োগ করা হয়েছিল তখন তাঁর উত্তরসূরির সম্পর্কে কোনও রকম চিন্তাভাবনাই করা হয়নি। রাওয়াতকে তো একদিন না একদিন অবসর নিতেই হত। কিন্তু তারপর কে ওই পদে অভিষিক্ত হবেন সে বিষয়ে কেন্দ্র কোনও পরিকল্পনাই করেনি। কেন্দ্রের এ ধরনের আচরণ শুধু যে সিডিএস-এর মতো একটি গুরুত্বপূর্ণ পদের মর্যাদাহানি করছে তা নয়, দেশের প্রতিরক্ষার ক্ষেত্রেও বিষয়টি যথেষ্ট উদ্বেগের বলে মনে করছেন বিশেষজ্ঞরা। পাশাপাশি অনেকেই প্রশ্ন তুলেছেন, সিডিএস-এর মতো একটি গুরুত্বপূর্ণ পদেও কি শাসক দল বিজেপি তাদের প্রতি আনুগত্য আছে এমন কাউকে উপহার হিসেবে দিতে চায়?

প্রতিরক্ষা বিশেষজ্ঞরা অনেকেই বলেছেন, এই মুহূর্তে সেনাবাহিনীর তিন শাখার প্রধানরা কেউই অবসর নেওয়ার মত জায়গায় নেই। তাই তাঁদের মধ্য থেকেই কাউকে অবিলম্বে সেনা সর্বাধিনায়ক পদে নিয়োগ করা উচিত। বর্তমান সেনাপ্রধান মনোজ মুকুন্দ নারাভানে পরবর্তী সেনা সর্বাধিনায়ক হওয়ার ক্ষেত্রে সবচেয়ে বেশি এগিয়ে আছেন। কিন্তু ৮ দিন কেটে গেলেও তাঁকে এখনও ওই পদে নিয়োগ করা হয়নি। স্বাভাবিকভাবেই প্রশ্ন উঠেছে সিডিএস-এর মত এত গুরুত্বপূর্ণ পদে নিয়োগ নিয়ে এত টালবাহানা কেন! দেশের চলতি নীতি অনুযায়ী সেনাবাহিনীর কোনও শীর্ষকর্তা পদে নিয়োগের ক্ষেত্রে আগাম ঘোষণা করা হয়। কিন্তু ৮ দিন কেটে গেলেও এখনও সেনা সর্বাধিনায়কের পদে কারও নামটুকু ঘোষণা করা হল না।

প্রশ্ন উঠেছে প্রতিরক্ষামন্ত্রক কি পরবর্তী সিডিএস নিয়োগের জন্য কারও বিশেষ নির্দেশের অপেক্ষা করছে! অনেকেই মনে করছেন, সেনা সর্বাধিনায়ক নিয়োগের বিষয়টি এভাবে ঝুলিয়ে রাখা হলে সন্ত্রাসবাদীরাই উৎসাহিত হবে। তারা এই সুযোগে বিভিন্নভাবে নাশকতা চালানোর চেষ্টা করবে। এভাবে সেনা সর্বাধিনায়ক পদে নিয়োগের বিষয়টি ঝুলিয়ে রেখে মোদীসরকার দেশের প্রতিরক্ষা ব্যবস্থারকেই দুর্বল করছে বলে অনেকেই অভিযোগ করেছেন।

Modi Varanasi visit: দেশে সংকট দেখা দিলে এক সন্ত দেখা দেন: মোদী

Modi Varanasi visit political controversy

News Desk: সংসদীয় এলাকা বারাণসী (কাশী)-তে দু’দিনের সফরে (Modi Varanasi visit) মঙ্গলবার প্রধানমন্ত্রী বলেছেন দেশে যখন কোনও সংকট দেখা দেয় তখন কেউ একজন সন্ত আর্বিভূত হন।

কাশীর সদগুরু সদাফলদেব যোগ সংস্থার বার্ষিক অনুষ্ঠানে অংশ নেন প্রধানমন্ত্রী মোদী। তিনি বলেন, কাশীতে যে সব বিদেশি পর্যটকরা আসেন তাদের কাছে এখন বদল ধরা পড়বে।

প্রধানমন্ত্রী বলেছেন, আমাদের লক্ষ্য কন্যাদের শিক্ষাদান। দেখতে হবে আর্থিক দিক থেকে কোনও ‘বেটি’ যেন শিক্ষা থেকে বঞ্চিত না হয়। তার জন্য সবাইকে এগিয়ে আসতে হবে। প্রধানমন্ত্রী ‘বেটি পড়াও’ কর্মসূচির আরও বিস্তার ঘটানোর আহ্বান জানান।

তিনি বলেন, যখন আমি বারাণসীর উন্নয়নের কথা বলি তখন দেশের উন্নয়নের রোড ম্যাপ তৈরি হয়ে যায়। এখানে যারা আসবেন তারা চলে যাবার সময় অনেক কিছু সংগ্রহ করে নিয়ে যাবেন।

প্রধানমন্ত্রীর সফর ঘিরে রাজনৈতিক হাওয়া উত্তপ্ত হতে শুরু করেছে। বিরোধী দলগুলির অভিযোগ, উত্তর প্রদেশ বিধানসভা নির্বাচনের দিকে লক্ষ্য রেখেই প্রধানমন্ত্রী বারাণসীতে জমকালো উন্নয়ন বার্তা দিচ্ছেন। রাজ্যের বেটিরা বিজেপি সরকারের আমলে চরম নিরাপত্তাহীনতায়।

প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রী তথা সমাজবাদী পার্টির নেতা অখিলেশ সিং যাদব পৌরাণিক প্রবাদের সাহায্যে প্রধানমন্ত্রীর প্রাক নির্বাচনী কাশী সফরকে কটাক্ষ করেছেন। তিনি বলেছেন যখম অন্তিম সময় আসে তখন মানুষ কাশী যায়।

ব্যাংক ডুবলেও তিন মাসের মধ্যে গ্রাহকদের সমস্ত টাকা ফেরত দেবে সরকার, আশ্বাস মোদীর

PM Modi

নিউজ ডেস্ক, নয়াদিল্লি: ব্যাংক বেসরকারিকরণের (bank privatisation) চেষ্টাও শুরু করেছে নরেন্দ্র মোদী সরকার (modi goverment)। সরকারের এই উদ্যোগে রীতিমতো আতঙ্ক তৈরি হয়েছে আমজনতার মধ্যে।

মানুষের সেই উদ্বেগ দূর করতে রবিবার এক অনুষ্ঠানে প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী বলেন, যদি কোনও কারণে ব্যাংক গ্রাহকদের (depositer) টাকা ফেরত দিতে না পারে তবে কারও কোনও চিন্তার প্রয়োজন নেই। কারণ সবার টাকাই সুরক্ষিত থাকবে। সরকার ইতিমধ্যেই এ বিষয়ে যথাযথ ব্যবস্থা নিয়েছে। গ্রাহকদের জমা টাকা ফেরত দেওয়ার ব্যবস্থা করবে সরকার। প্রধানমন্ত্রী জানান সরকার এ পর্যন্ত দেশের ৯৮.১ শতাংশ গ্রাহকের টাকা বিমার (insurance)৷ মাধ্যমে সুরক্ষিত করে ফেলেছে। বাকিদের ক্ষেত্রেও শীঘ্রই এই কাজ করা হবে।

রবিবার ‘ব্যাংক আমানত বিমা’ নামে একটি অনুষ্ঠানে ভাষণ দিচ্ছিলেন প্রধানমন্ত্রী। সেখানেই তিনি বলেন, বিভিন্ন রাষ্ট্রায়ত্ত ব্যাংকের গ্রাহকদের ৭৬ লক্ষ কোটি টাকা ইতিমধ্যেই বিমার মাধ্যমে সুরক্ষার আওতায় আনা হয়েছে। সে কারণে সরকার ব্যাংক ডিপোজিটের পরিমাণ এক লাখ টাকা থেকে বাড়িয়ে পাঁচ লাখ টাকা করেছে। ব্যাংক বেসরকারিকরণ করা হলেও মানুষের দুশ্চিন্তার কোনও কারণ নেই। কোনও কারণে ব্যাংক বন্ধ হয়ে গেলেও গ্রাহকরা যাতে ৯০ দিনের মধ্যেই তাঁদের টাকা ফেরত পান সে বিষয়টি সরকারই নিশ্চিত করবে।

যথারীতি এদিন কংগ্রেসকে কটাক্ষ করে মোদী বলেন, আমি গুজরাতের মুখ্যমন্ত্রী থাকাকালীন কেন্দ্রের কংগ্রেস সরকারকে একাধিকবার বলেছিলাম ব্যাংকের টাকা ফেরতের উর্ধ্বসীমা এক লাখ থেকে পাঁচ লাখ টাকা করা হোক। কিন্তু আমার কথায় পাত্তাই দেয়নি কংগ্রেস সরকার। সেজন্যই ওই নিয়ম পাল্টাতেই মানুষ আমাকে কেন্দ্রে পাঠিয়েছে। মানুষ এখন নিশ্চিন্ত থাকতে পারেন। তাঁরা অবশ্যই টাকা ফেরত পাবেন। যদি কোনও কারণে ব্যাংক টাকা দিতে না পারে সেক্ষেত্রে গ্রাহকদের টাকা ফিরিয়ে দেবে সরকার।

উল্লেখ্য, দ্বিতীয় দফায় ক্ষমতায় এসে রুগ্ন ও রাষ্ট্রায়ত্ত ব্যাংকগুলির বিলগ্নীকরণের চেষ্টা চালাচ্ছে মোদী সরকার। একই সঙ্গে বেশ কিছু ব্যাংকের সংযুক্তিকরণ প্রক্রিয়াও সম্পন্ন হয়েছে। আরও কয়েকটি ব্যাংকের সংযুক্তিকরণ করা হবে বলে জানানো হয়েছে। ইতিমধ্যেই বেশ কয়েকটি ব্যাংককে আগামী অর্থবছরে বেসরকারি হাতে তুলে দেওয়ার পরিকল্পনা রয়েছে মোদী সরকারের। যা নিয়ে মানুষের মধ্যে উদ্বেগ তৈরি হয়েছে। প্রধানমন্ত্রী এদিন সেই উদ্বেগ নিরসন করার চেষ্টা করলেন।