HC के जज की माफ़ी स्वीकारते हुए SC ने कहा- भारत के किसी हिस्से को पाकिस्तान नहीं कह सकते

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारत के किसी भी हिस्से को ‘पाकिस्तान’ कहना देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है। अदालत इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा था।

पांच न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यह बात उस मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणियों के वीडियो क्लिप का स्वतः संज्ञान लिया था।

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस वेदव्यसचार श्रीशनंदा ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के एक मुसलमान बहुल इलाके को ‘पाकिस्तान’ कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से रिपोर्ट मांगी थी।

बुधवार को पीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन किया जिसमें कहा गया था कि न्यायाधीश ने 21 सितंबर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ’21 सितंबर, 2024 को खुली अदालत की कार्यवाही के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा मांगी गई माफी को ध्यान में रखते हुए हम न्याय और संस्था की गरिमा के हित में इन कार्यवाहियों को आगे नहीं बढ़ाएंगे।’

पीठ ने कहा, ‘रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट इस बात का पर्याप्त संकेत है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के दौरान जो टिप्पणियां की गईं, वे कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों से संबंधित नहीं थीं और उन्हें टाला जाना चाहिए था। समाज के हर वर्ग के लिए न्याय की धारणा उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी कि न्याय को एक वस्तुनिष्ठ तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना।’

ज्ञात हो कि हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस वेदव्यासचार श्रीशनंदा को सुनवाई के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिख रहे थे। एक क्लिप में न्यायाधीश को बेंगलुरु के मुस्लिम बहुल इलाके गोरी पाल्या को ‘पाकिस्तान’ कहते हुए सुना जा सकता है, जबकि दूसरे में वह एक महिला वकील पर अनुचित टिप्पणी करते हैं।

अदालत ने कहा, ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कार्यवाही की लाइव स्ट्रीम न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए अदालतों की एक महत्वपूर्ण आउटरीच सुविधा के रूप में उभरी है। साथ ही, न्यायिक प्रणाली में सभी हितधारकों, जिनमें न्यायाधीश, वकील और वादी, विशेष रूप से व्यक्तिगत रूप से पक्षकार शामिल हैं, को इस तथ्य के प्रति सचेत रहना होगा कि अदालत में होने वाली कार्यवाही की पहुंच केवल उन लोगों तक ही सीमित नहीं है जो शारीरिक रूप से मौजूद हैं, बल्कि अदालत के परिसर से कहीं आगे के दर्शकों तक भी इसकी महत्वपूर्ण पहुंच है।’

पीठ ने आगे कहा, ‘न्यायाधीशों के रूप में हम इस तथ्य के प्रति सचेत हैं कि प्रत्येक व्यक्ति के पास जीवन के अनुभवों के आधार पर एक निश्चित मात्रा में पूर्वाग्रह होते हैं… यह महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक न्यायाधीश को अपने स्वयं के पूर्वाग्रहों के बारे में पता होना चाहिए। न्याय करने का मूल तत्व निष्पक्ष और न्यायसंगत होना है. इस प्रक्रिया में प्रत्येक न्यायाधीश के लिए अपनी स्वयं की प्रवृत्तियों के बारे में जागरूक होना आवश्यक है, क्योंकि केवल ऐसी जागरूकता के आधार पर ही हम न्यायाधीश के उद्देश्यपूर्ण और निष्पक्ष न्याय प्रदान करने के मौलिक दायित्व के प्रति वास्तव में वफादार हो सकते हैं।’

अदालत ने कहा, ‘हम इस बात पर जोर देते हैं क्योंकि संस्था में प्रत्येक हितधारक के लिए यह समझना आवश्यक है कि न्यायिक निर्णय लेने में केवल वही मूल्य शामिल होने चाहिए जो भारत के संविधान में निहित हैं. आकस्मिक अवलोकन व्यक्तिगत पूर्वाग्रह की एक निश्चित सीमा को दर्शा सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें किसी विशेष लिंग या समुदाय के लिए निर्देशित माना जाता है। इसलिए, न्यायालयों को न्यायिक कार्यवाही के दौरान ऐसी टिप्पणियां न करने के लिए सावधान रहना चाहिए, जिन्हें महिलाओं के प्रति द्वेषपूर्ण या हमारे समाज के किसी भी वर्ग के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण माना जा सकता है।’

अदालत ने कहा, ‘ऐसी टिप्पणियों को नकारात्मक रूप में समझा जा सकता है, जिससे न केवल न्यायालय या उन्हें व्यक्त करने वाले न्यायाधीश पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि व्यापक न्यायिक प्रणाली पर भी प्रभाव पड़ता है।’ पटना हाईकोर्ट की ‘विधवा को मेकअप की जरूरत नहीं’ टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद आपत्तिजनक कहा इसी दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (25 सितंबर) को कहा कि पटना हाईकोर्ट द्वारा की गई यह टिप्पणी कि विधवा को मेकअप करने की जरूरत नहीं है, ‘बेहद आपत्तिजनक’ है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट संपत्ति विवाद को लेकर एक महिला के अपहरण और हत्या के मामले की सुनवाई कर रहा था। मृतक से जुड़े गवाहों ने बताया था कि घटना के समय वह एक घर में रह रही थी और बाद में पुलिस को वहां से मेकअप का सामान मिला था. हालांकि बाद में पता चला कि वह सामान घर में रहने वाली एक अन्य महिला का था।

उस समय पटना हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि मेकअप का सामान दूसरी महिला का नहीं हो सकता, क्योंकि वह विधवा है और उसे मेकअप करने की कोई जरूरत नहीं है। जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने पटना हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘हमारे विचार में उच्च न्यायालय की टिप्पणी न केवल कानूनी रूप से अपुष्ट है, बल्कि अत्यधिक आपत्तिजनक भी है. इस तरह की व्यापक टिप्पणी कानून की अदालत से अपेक्षित संवेदनशीलता और तटस्थता के अनुरूप नहीं है, खासकर तब जब रिकॉर्ड पर मौजूद किसी भी साक्ष्य से ऐसा साबित न हो।’

UP के बाद HP ने भी भोजनालयों को मालिकों के नाम लिखने का दिया निर्देश

नई दिल्ली: कांग्रेस के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंगलवार को राज्य के सभी खाद्य विक्रेताओं और  भोजनालयों को ‘पारदर्शिता’ बढ़ाने का हवाला देते हुए मालिकों के नाम और पते लिखने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्णय मंगलवार को राज्य के शहरी विकास और नगर निगम की बैठक के दौरान लिया गया, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में घोषणा की।

पठानिया ने कहा, ‘हिमाचल में हर रेस्तरां और फास्ट फूड आउटलेट को मालिक की पहचान बताना अनिवार्य होगा ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो। इसके लिए शहरी विकास और नगर निगम की बैठक में निर्देश जारी किए गए हैं।’

आदेश के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में मंत्री विक्रमादित्य सिंह और अनिरुद्ध सिंह शामिल हैं।

जिस बैठक में यह फैसला लिया गया, वह विक्रमादित्य सिंह के कार्यालय में हुई थी और इसे राज्य की स्ट्रीट वेंडिंग पॉलिसी को अंतिम रूप देने के लिए बुलाया गया था, जो शिमला की संजौली मस्जिद से संबंधित 11 सितंबर के विवाद के बाद से सुर्खियों में है। इस महीने की शुरुआत में हुए उक्त सांप्रदायिक तनाव के पीछे अलग-अलग समुदायों के दो दुकानदारों के बीच लड़ाई थी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस वर्ष 15 दिसंबर तक नीति को अंतिम रूप दिए जाने के पश्चात सभी स्ट्रीट वेंडर अपने पहचान पत्र तथा वेंडिंग लाइसेंस प्रदर्शित करेंगे। विक्रमादित्य ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में हमारे राज्य में अशांति थी। हमारे निर्णय किसी अन्य राज्य द्वारा प्रेरित नहीं हैं. सभी विक्रेताओं के लिए पहचान पत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा – चाहे वे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या किसी अन्य समुदाय से हों। राज्य में वेंडिंग जोन, वेंडिंग नीति बनाने के लिए उच्च न्यायालय से हमें निर्देश मिले हैं. हाल ही में हुई अशांति एक मजबूत वेंडिंग नीति की न होने से जुड़ी हुई थी।’

यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए इसी तरह के निर्देश के बाद आया है। सबसे पहले जुलाई में कांवड़ यात्रा से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले को उठाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादास्पद कदम पर रोक लगा दी, जिसे कई लोगों ने सांप्रदायिक पहचान और भेदभाव का एक स्पष्ट कृत्य माना था।

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने यूपी में पिछले दो हफ्तों में कम से कम चार घटनाओं के मद्देनजर इसे फिर से आगे बढ़ाया है, जहां फूड स्टॉल स्टाफ या जूस सेंटर पर कथित तौर पर जूस और रोटियों को मानव मल या थूक से दूषित करने का आरोप लगाया गया था।

पति की लाश बिस्तर पर रख 3 रात तक सोती रही पत्नी

उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है। पुलिस ने एक घर से 55 साल के व्यक्ति का शव बरामद किया है। पुलिस ने उसकी पत्नी को भी उसके परिवार के हवाले किया है। पत्नी तीन दिन और तीन रात तक अपने पति के शव के साथ रही। जिस बैड पर पति ने दम तोड़ा था उसी बैड पर तीन रातों तक वह सोई। घटना जिले के गोवर्धन विलास थाना इलाके की है।

पुलिस ने बताया कि बलीचा क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर के नजदीक स्थित सत्यम टावर की यह पूरी घटना है। टावर में 55 साल के महावीर अपनी पत्नी के साथ रह रहे थे। दत्पत्ति के कोई संतान नहीं है। महावीर का भाई कल सवेरे उनसे मिलने पहुंचा तो भाभी ने उसे कमरे में ही नहीं घुसने दिया। कहा कि… वो अभी सो रहे हैं, बाद में मिलने आना। महावीर का छोटा भाई कल दोपहर में फिर भाई से मिलने पहुंचा तो भी भाभी ने उसे अंदर घुसने नहीं दिया। उसे अंदर से दुर्गंध आई तो वह पुलिस के पास पहुंचा और पुलिस को लेकर फिर से भाई के कमरे पर गया।

वहां जाकर पता चला कि महावीर का शव बैड पर पड़ा है। शव खराब होने लगा था और उसमें से दुर्गंध आने लगी थी। पुलिस ने तुरंत एंबुलेंस बुलाई और कल रात शव को मुर्दाघर में रखवाया। महावीर की पत्नी ने शव नहीं ले जाने दिया। उसने कहा कि पति के साथ ही रहना चाहती है। छोटे भाई ने पुलिस को बताया कि उसकी भाभी मानसिक रूप से बीमार रहती हैं। जांच में सामने आया कि महावीर की मौत तीन दिन पहले ही हो चुकी थी। माना जा रहा है कि मौत हार्ट अटैक से हो सकती है। लेकिन पत्नी ने इस बारे में किसी को भी नहीं बताया। आज पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

तनिष्क ने दुर्गा पूजो के लिए बंगाल की ऐशानी के सम्मान में प्रस्तुत किया “आलो”

कोलकाता: भारत का सबसे बड़ा ज्वेलरी रिटेल ब्रांड, और टाटा समूह का एक सदस्य, तनिष्क ने अपना खास पूजो कलेक्शन प्रस्तुत किया है – “आलो” दिव्य प्रकाश के सार को जगाने के लिए दिया गया यह नाम, “आलो” बंगाल की ऐशानियों की चमक और उनकी अटूट शक्ति का प्रतीक है। यह कलेक्शन हर बंगाली महिला में समाई हुई शक्ति की भावना को सम्मानित करता है। बंगाल के कारीगरों ने अपने बेहतरीन शिल्प कौशल को दर्शाते हुए इस कलेक्शन में मां दुर्गा की दिव्य आभा को प्रतिबिंबित किया है। मशहूर बंगाली अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती ने कोलकाता के ताल कुटीर में एक विशेष कार्यक्रम में इसे लॉन्च किया। इस कलेक्शन के बहुत ही खूबसूरती से बनाए गए आभूषण त्यौहार का सार दर्शाते हैं।

“आलो” कलेक्शन तनिष्क के मास्टर कारीगरों की प्रतिभा और बंगाल की पारंपरिक शिल्पकला को दर्शाता है। चालचित्र, जाली, नौका और पालकी जैसे खास रूपांकनों को इसमें शामिल किया गया है। हर आभूषण बंगाल की समृद्ध विरासत को दर्शाता है, थोकई नकाशी, डाई-स्टैम्पिंग और माइक्रो फिलिग्री जैसी पारंपरिक तकनीकों का इसमें उपयोग किया गया है। नाजुक, जटिल नक्काशी के नेकलेस सेट, सीता हार, चूड़ियाँ और मफ़ चेन जैसे बंगाल की बेजोड़ शिल्पकला को दर्शाने वाले सोने के आभूषणों की एक बेहतरीन रेंज इसमें शामिल है। पूजो उत्सव की खुशियों को सुनहरा बनाने के लिए तनिष्क ने सोने की दर पर प्रति ग्राम 475 रुपये तक की छूट* और हीरे के आभूषणों के मूल्य पर 20% तक की छूट और किसी भी ज्वेलर से खरीदे गए पुराने सोने पर 100%* तक की एक्सचेंज वैल्यू देने की घोषणा की है। इन विशेष ऑफर का लाभ पश्चिम बंगाल के सभी तनिष्क स्टोर्स में उठाया जा सकता है। बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले, बेहद खूबसूरत आभूषणों के साथ उत्सव मनाने की ख़ुशी अपने उपभोक्ताओं को देना तनिष्क का लक्ष्य है।

तनिष्क ब्रांड को बंगाली महिलाओं की आभूषणों के सौंदर्य से जुड़ी पसंद की बहुत ही अच्छी समझ है और उसी को ध्यान में रखकर बनाया गया यह कलेक्शन बंगाल की महिलाओं की दृढ़ता और आत्मविश्वास को समर्पित है। यह कलेक्शन उनकी अटूट शक्ति, प्रगतिशील सोच, अद्वितीय दृष्टिकोण और जो उन्हें सही लगता है उसके लिए खड़े होने की क्षमता को सम्मानित करता है। बंगाली महिलाओं का सोने के प्रति लगाव और उनके कीमती आभूषणों पर पाए जाने वाले जटिल शिल्प कौशल की सराहना यह कलेक्शन करता है। बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित आलो कलेक्शन बंगाल की ऐशानियों को सजाने के लिए बहुत ही सोच-समझ कर

बनाया गया है। यह कलेक्शन बंगाल की विविधतापूर्ण लेकिन एकता की भावना का जश्न मनाने की तनिष्क की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है और इसीलिए सभी अवसरों के लिए यह एक पसंदीदा विकल्प बनेगा।

टाइटन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रीजनल बिज़नेस हेड सोमप्रभ सिंग ने बताया, “आलो, यानी प्रकाश, जो दुर्गा पूजो के उल्लास को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में, तनिष्क ने कोलकाता और बंगाल के उपभोक्ताओं के साथ एक खास रिश्ता बनाया है। आलो कलेक्शन के साथ, हम क्षेत्र की संस्कृति और आधुनिक डिज़ाइन तत्त्वों को एक साथ दर्शाने वाले आभूषण प्रस्तुत करने की अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखते हैं। कलेक्शन का हर आभूषण बंगाल के खास रूपांकनों और पारंपरिक शिल्प कौशल से प्रेरित है। आलो में हम न केवल बंगाल की कलात्मक विरासत का, बल्कि बंगाल की ऐशानियों की चमक और शक्ति का भी सम्मान कर रहे हैं। यह कलेक्शन हर बंगाली महिला की प्रतिभा और आंतरिक प्रकाश का प्रतिबिंब है। तनिष्क को गर्व है कि इस कलेक्शन के साथ हम अपने ग्राहकों और पूजो की उत्सव भावना के साथ गहराई से जुड़े हुए, कालातीत आभूषण प्रस्तुत करने के अपने वादे को पूरा कर रहे हैं।”

तनिष्क की सीएमओ पेल्की शेरिंग ने बंगाल की महिलाओं के लिए नए कलेक्शन के लॉन्च पर कहा, “तनिष्क एक राष्ट्रीय स्थानीय ब्रांड है, जो क्षेत्रीय बारीकियों को बखूबी समझता है और उन्हें महत्व देता है। अपने विश्वासों पर अड़ी रहने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनने की बंगाली महिला की ताकत के हर पहलू का जश्न तनिष्क ने मनाया है। ‘शोरबोरूपे देबी, शोरबोरूपे शक्ति’ इस सार को समेटे हुए, हर बंगाली महिला के भीतर की दिव्यता और शक्ति को सम्मानित करता है। यह कलेक्शन ‘आलो’ बंगाल की सभी ऐशानियों के लिए है जो मज़बूत हैं, अपने खुद के विचारों के साथ वे मूल्यों और संस्कृति को मानती हैं। इनमें आधुनिक समय की दुल्हनें भी हैं जो अपनी शादी को खास बनाने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। अपनी शादी को अपनी पहचान बनाने की हर दुल्हन की क्षमता का सम्मान हम रिवाह बाय तनिष्क में करते हैं।”

बंगाली अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती ने कहा, “तनिष्क का बेहतरीन आलो कलेक्शन बहुत ही खूबसूरती से दिव्य आशीर्वाद की कामना करता है और बंगाल की जीवंत संस्कृति को दिल से सम्मानित करता है। दुर्गा पूजो के दौरान तनिष्क के साथ साझेदारी करना मेरे लिए हमेशा खास रहा है, क्योंकि मुझे साल दर साल नए कलेक्शन पेश करने का सौभाग्य मिला है। हर साल, पूजो कलेक्शन परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ता है, और इस बार का आलो इसका अपवाद नहीं है। हर आभूषण, बारीकी से ध्यान देकर तैयार किया गया है, यह तनिष्क के कारीगरों की असाधारण कलात्मकता का प्रमाण है। यह कलेक्शन बंगाल की ऐशानियों की चमक को सम्मानित करता है, साथ ही माँ दुर्गा की अपार कृपा को भी दर्शाता है। मैं सम्मानित महसूस कर रही हूँ क्योंकि मैं एक ऐसे

ब्रांड का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ जो विरासत और आधुनिकता के बीच बेहतरीन संतुलन बनाता है, जो ऐसे आभूषण पेश करता है जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों और नए दौर की फैशन संवेदनाओं दोनों के अनुरूप हैं।”

ओडिशा में सैन्य अधिकारी और उनकी मंगेतर के साथ बदसलूकी के बाद सेना आक्रोशित

नई दिल्ली: बीते 14-15 सितंबर की दरमियानी रात ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के भरतपुर थाने में एक सैन्य अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार और उनकी मंगेतर के साथ पुलिस द्वारा की गई हिंसा, बदसलूकी, छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न को भारतीय सेना ने गंभीरता से लिया है।

पीड़ित सैन्य अधिकारी सेना की सिख रेजिमेंट में मेजर के पद पर सेवारत हैं, जबकि उनकी मंगेतर सेना के पूर्व ब्रिगेडियर की बेटी है। मामले में 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने पुलिस हिरासत में सैन्य अधिकारी की मंगेतर के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

भुवनेश्वर में रेस्टोरेंट चलाने वाली महिला, जो एक वकील भी हैं, अपना रेस्टोरेंट बंद करके अपने मंगेतर के साथ रविवार देर रात कार से घर लौट रही थी। इसी दौरान तीन कारों में सवार कुछ युवकों ने उनका पीछा किया. घटना के बाद सामने आए कथित तौर पर घटना से संबंधित कुछ वीडियो में महिला और उसके मंगेतर के साथ कुछ युवकों को उलझते हुए देखा जा सकता है।

इसके बाद महिला और सैन्य अधिकारी घटनास्थल से अपनी गाड़ी लेकर निकल गए और घटना की शिकायत के लिए भरतपुर पुलिस थाने पहुंचे। इसके बाद उनके साथ थाने में जो हुआ, वह रोंगटे खड़े करने वाला था। गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए महिला ने बताया, ‘किसी तरह हम वहां (युवकों के झुंड से) से भागने में कामयाब रहे और मामला दर्ज कराने के लिए भरतपुर थाने गए। वहां रिसेप्शन पर बैठी एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के अलावा कोई नहीं था। हमने उनसे शिकायत दर्ज करने का अनुरोध किया. हालांकि, मेरी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्होंने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया।’

ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी का व्यवहार कथित तौर पर तब और भी आक्रामक हो गया जब उसे पता चला कि पीड़िता एक वकील है। इस बीच, पुलिस की एक गश्ती गाड़ी, जिसमें कुछ महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, थाने पहुंची। महिला ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मंगेतर को हवालात में बंद कर दिया, जब इसके खिलाफ आवाज उठाई कि वे सेना के किसी अधिकारी को हिरासत में नहीं रख सकते, यह गैरकानूनी है, तो दो महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

पीड़ित महिला ने बताया, ‘दो महिला अधिकारियों ने मेरे बाल खींचना शुरू कर दिया और मुझे पीटना शुरू कर दिया। जब मैंने उनसे रुकने की गुहार लगाई, तो उन्होंने मुझे थाने के गलियारे में घसीटा। मैंने उनमें से एक का हाथ काट लिया। उन्होंने मेरी जैकेट उतार दी और मेरे दोनों हाथ उससे बांध दिए. उन्होंने मेरे दोनों पैरों को दुपट्टे से बांध दिया। बाद में, एक पुरुष अधिकारी आया और मेरी ब्रा उतारने के बाद लगातार मेरी सीने पर लात मारने लगा। फिर थाना इंस्पेक्टर आया और अपनी पैंट की जिप खोल गुप्तांग दिखाकर मुझसे शारीरिक संबंध बनाने की पूछने लगा। उसने मेरे साथ छेड़छाड़ भी की।’

महिला के मंगेतर सेना के मेजर ने भी राज्य पुलिस महानिदेशक (अपराध शाखा) अरुण बोथरा को लिखित शिकायत में दंपत्ति के साथ पुलिस द्वारा किए गए अत्याचारों का विवरण दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने पीड़िता के साथ छेड़छाड़ की और उसका यौन उत्पीड़न किया।

उन्होंने बताया, ‘मैं 30 मिनट तक चीखें सुनता रहा। इसके बाद मेरी मंगेतर को अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और अदालत भेज दिया गया।’

उन्होंने आगे बताया कि जब वह थाने में बैठकर अपनी शिकायत लिख रहे थे तो चार पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया और घसीटते हुए एक कोठरी में ले गए, जहां उन्होंने उनकी पैंट उतार दी और उनका सारा सामान ले लिया, जिनमें पर्स, मोबाइल, सेना का पहचान पत्र और कार की चाबियां शामिल थीं। उनके मुताबिक, इस दौरान दो महिला पुलिसकर्मी उनकी मंगेतर के साथ मारपीट करने लगीं।

मेजर ने थाने में मौजूद कॉन्स्टेबल से थाना प्रभारी को बुलाने का अनुरोध किया ताकि वह वह उन्हें एक सैन्य अधिकारी को हिरासत में लेने संबंधी प्रोटोकॉल समझा सकें, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। मेजर ने उन्हें अवैध हिरासत में रखने, उनका उत्पीड़न करने और उन्हें मानसिक यातना देने का आरोप लगाया। उन्होंने साथ ही बताया कि जब उनकी मंगेतर वकील ने गिरफ्तारी से जुड़ा वॉरंट दिखाने की मांग की तो उसे घसीटा गया, मारा-पीटा गया और निर्वस्त्र कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हस्तक्षेप किया, जिसके बाद मेजर को रिहा कर दिया गया। वहीं, अस्पताल में उनकी मंगेतर की मेडिकल जांच कराई गई, जहां रिपोर्ट में बताया गया कि उनके साथ गंभीर मारपीट की गई थी।

घटना की भनक लगते ही भारतीय सेना ने सक्रियता दिखाई। घटना के अगले ही दिन एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, जिसमें राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई की बात कही। वहीं, 18 सितंबर को मध्य भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पीएस शेखावत ने ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले में कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया और उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की।

जानकारी के मुताबिक, जस्टिस चक्रधारी चरण सिंह को लिखे पत्र में लेफ्टिनेंट जनरल शेखावत ने लिखा, ‘एक सेवारत सैन्य अधिकारी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई और उनकी मंगेतर, जो एक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर की बेटी भी है, की गरिमा पर पुलिसकर्मियों द्वारा हाथ डाला गया।’ उन्होंने कहा कि जब दंपत्ति शिकायत दर्ज कराने पुलिस थाने गए तो पुलिस अधिकारियों ने ‘अपने पद के अनुरूप काम नहीं किया।’

जनरल ने आगे लिखा, ‘उन्होंने न केवल महिला को अपमानित किया, बल्कि उसके साथ छेड़छाड़ भी की और सेना अधिकारी को बिना किसी आरोप के लगभग 14 घंटे तक हिरासत में रखकर उनका भी अपमान किया।’

उन्होंने पुलिस थाने में सीसीटीवी न होने की बात उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करार दिया। साथ ही लिखा कि पुलिसकर्मियों की कार्रवाई ने दंपति और साथ ही सैन्य बिरादरी के कानून प्रवर्तन प्रणाली में विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि सेना का मानना ​​है कि कई मामलों में कानून का उल्लंघन किया गया है, जहां एक सेवारत सैन्य अधिकारी को बगैर कोई अपराध दर्ज किए और सेना के अधिकारियों को सूचित किए बिना हिरासत में रखा गया था।

जनरल ने मुख्य न्यायाधीश से घटना का स्वत: संज्ञान लेने और बिना किसी देरी के महिला को जमानत देने का अनुरोध किया। साथ ही, लिखा कि अपराध शाखा द्वारा निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए और दोषी पुलिसकर्मियों को उनके पदों से हटाया जाए और उन्हें उचित सजा दी जाए।

संभवत: जनरल के पत्र का असर भी हुआ। पुलिस द्वारा हिरासत में ली गई पीड़ित महिला को उसी दिन हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। वहीं, 17 सितंबर को राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया और ओडिशा पुलिस के डीजीपी से 3 दिन में घटना के संबंध में रिपोर्ट मांगी और मामले में तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा।

मेजर की शिकायत के आधार पर मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। पहली एफआईआर सड़क पर बदसलूकी करने वाले युवकों के खिलाफ और दूसरी एफआईआर दंपति की अवैध हिरासत और हिरासत में दी गई यातनाओं से संबंधित है।

इससे पहले, भरतपुर पुलिस ने सैन्य अधिकारी और उनकी मंगेतर के खिलाफ मामला दर्ज किया था और आरोप लगाया था कि उनके हमले में चार कॉन्स्टेबल और एक महिला सब-इंस्पेक्टर घायल हो गए। बहरहाल, पुलिस ने मामले में भरतपुर के थाना प्रभारी दिनकृष्णा मिश्रा, सब-इंस्पेक्टर बैशालिनी पांडा, सहायक उपनिरीक्षक सलिलमई साहू और सागरिका रथ और कॉन्स्टेबल बलराम हांडा को निलंबित किया है। इससे पहले, डीजीपी ने मामले की जांच ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा से कराने के निर्देश दिए थे। अपराध शाखा ने भी पांचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

वहीं, सड़क पर मेजर और पीड़ित महिला के साथ बदसलूकी करने वाले 12 युवकों की पुलिस ने पहचान की, जिनमें से 7 को गिरफ्तार भी किया गया, हालांकि अदालत से उन्हें जमानत मिल गई है। वहीं, ओडिशा सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री मोहन मांझी द्वारा न्यायिक जांच के आदेश के बाद मेजर, उनकी मंगेतर और पूर्व सैन्यकर्मियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. न्यायिक आयोग 60 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

इस बीच, ओडिशा पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि रविवार देर रात लगभग 01:30 बजे मेजर और उनकी मंगेतर अपने वाहन में जा रहे थे, जब उन्हें तीन वाहनों में सवार 12-13 व्यक्तियों द्वारा परेशान किया गया, जो लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे। उन्होंने गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और हाथापाई की. मेजर और उनकी मंगेतर किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहे।

पुलिस ने बयान में कहा कि दंपति ने आरोपी युवकों की एक कार का नंबर ले लिया था, जिसके बाद वे थाने पहुंचे और पुलिस से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया, लेकिन पुलिसकर्मी बहाने बनाते रहे और दंपति से अपना मेडिकल कराने के लिए कहा।

ओडिशा पुलिस ने भी अपने बयान में इसके बाद दंपति के साथ घटित वाकये की पुष्टि की। साथ ही बताया कि पीड़ित महिला किसी तरह सुबह 5 बजे अपनी कार तक पहुंचने में कामयाब हुई और अपना फोन मेजर को दिया, जिससे वह मदद के लिए सेना के अधिकारियों को फोन लगा सके।

पुलिस ने बयान में यह भी कहा कि सेना की ओर से 120 टीए बटालियन से एक जूनियर कमीशन अधिकारी और तीन अन्य रैंक के अधिकारियों की एक टीम को मेजर की मदद के लिए पुलिस थाने भी भेजा गया था। बयान में कहा गया, ‘दंपति को अस्पताल ले जाया गया। महिला का जबड़ा अपनी जगह से खिसक गया था, नाक टूट गई थी और शरीर पर कई अन्य घाव के निशान थे। फिर दोनों को पुलिस थाने ले जाया गया, जहां महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।’

हालांकि, मामला सामने आने के बाद पुलिस दंपति को ही कुसूरवार ठहरा रही थी। ओडिशा टीवी के मुताबिक, भुवनेश्वर के एडिशनल डीसीपी सुरेश चंद्र पात्रा ने कहा था कि मेजर और उनकी मंगेतर ने पुलिस के साथ बदसलूकी की थी। पात्रा ने कहा था कि जब वे थाने आए तो सही हालत में नहीं थी। पुलिस ने जब उनसे औपचारिक शिकायत दर्ज कराने कहा तो पुलिस से बहस करने लगे। उन्होंने महिला अधिकारी समेत पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की।

वहीं, निलंबित थाना प्रभारी दीनाकृष्ण मिश्रा ने दंपति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने नशे की हालत में थाने पहुंचने के बाद स्टाफ के साथ बदसलूकी की।

ओडिशा रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सेना के अधिकारियों को संबोधित एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें पूछा गया है कि क्या मेजर के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। जानकारी के मुताबिक, पत्र में कहा गया है कि दंपति नशे में थे और मेजर ने इस हालत में कार चलाई। महिला ने कार में बैठे हुए कुछ इंजीनियरिंग छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और गाली-गलौज की।

पत्र में कहा गया है, ‘युवा इंजीनियरिंग छात्रों को आपके (सेना) दबाव में अदालत भेज दिया जाएगा और महिला के अत्याचारी व्यवहार के कारण उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा।’ इससे पहले, पूर्व सैन्य कर्मियों के संगठन ने ओडिशा के कमिश्नरेट पुलिस भवन के पास प्रदर्शन किया था और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। कई पूर्व सैन्यकर्मियों ने घटना के खिलाफ सोशल मीडिया का भी रुख किया था।

भारतीय सेना के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि सेना इस मामले को लेकर बहुत चिंतित हैं और उसे उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सेना के अधिकारियों के साथ ऐसी घटनाएं देश के लोगों का भी मनोबल तोड़ती हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार पूजा के बाद शुरू करेगा उद्यम शिविर

कोलकाता :  पश्चिम बंगाल में आरजी कर कांड की वजह से राज्य सरकार अपनी एक महत्वपूर्ण पहल शुरू नहीं कर सकी। वह सभी जिलों में निवेश बढ़ाने के लिए ‘दुआरे उद्यम’ नामक नया अभियान शुरू करने वाली थी। राज्य सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, अगर सब कुछ ठीक रहा तो दुर्गापूजा के बाद दुआरे उद्यम शुरू हो सकता है।

इस अभियान के नवंबर के अंत में शुरू करने की बात हो रही है। यह शिविर लगाने का मुख्य उद्देश्य बंगाल के छोटे, लघु और मध्यम उद्यमों को ‘उद्यम’ वेबसाइट पर नामांकित करना है।

इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर सरकारी सब्सिडी या लोन की सुविधा नहीं मिलेगी। यहां तक कि केंद्र और राज्य (पश्चिम बंगाल सरकार) की सुविधाओं से वंचित रहे जायेंगे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने दुआरे उद्यम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए प्राइस वाटर हाउस कूपर्स को नियुक्त किया है।

बताया जा रहा है कि यह शिविर अगस्त और सितंबर में लगने वाला था, लेकिन उस समय स्थिति अनुकूल नहीं थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। दुर्गा पूजा के बाद नवंबर की शुरुआत से दिसंबर अंत के बीच ब्लॉक स्तर पर दुआरे उद्यम शिविर लगाये जायेंगे।

तिरुपति प्रसाद विवाद के बाद यूपी में CM योगी का सख्त निर्देश

लखनऊ: आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी के प्रसाद में मिलावट का मामला देशभर में चर्चा में बना हुआ है। इस बीच यूपी की योगी सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। सीएम योगी ने कहा है कि जूस, दाल और रोटी जैसी खान-पान की वस्तुओं में मानव अपशिष्ट मिलाना वीभत्स है और यह सब स्वीकार नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया है कि ऐसे ढाबों/रेस्टोरेंट आदि खान-पान के प्रतिष्ठानों की सघन जांच होगी। हर कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन होगा। खान-पान की चीजों की शुद्धता-पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में आवश्यक संशोधन के निर्देश दिए गए हैं।

सीएम योगी के निर्देशों के मुताबिक, खान-पान के केंद्रों पर संचालक, प्रोपराइटर, मैनेजर आदि का नाम और पता डिस्प्ले करना अनिवार्य होगा। शेफ हो या वेटर, उन्हें मास्क और ग्लव्स लगाना होगा। होटल/ रेस्टोरेंट में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य होगा। अगर कोई अपशिष्ट या अन्य गंदी चीजों की मिलावट करता है तो संचालक/प्रोपराइटर पर भी कठोर कार्रवाई होगी।

देश के विभिन्न क्षेत्रों में घटीं ऐसी घटनाओं का संज्ञान लेते हुए मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी होटलों/ढाबों/रेस्टोरेंट आदि संबंधित प्रतिष्ठानों की गहन जांच, सत्यापन आदि के भी निर्देश दिए हैं साथ ही आम जन की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नियमों में आवश्यकतानुसार संशोधन के भी निर्देश दिए।

प्वाइंटर्स में समझें सीएम योगी के निर्देश-

  • सीएम योगी ने कहा कि जूस, दाल और रोटी जैसी खान-पान की वस्तुओं में मानव अपशिष्ट मिलाना वीभत्स, यह सब स्वीकार नहीं है।
  • सीएम ने निर्देश दिया कि ऐसे ढाबों/रेस्टोरेंट आदि खान-पान के प्रतिष्ठानों की सघन जांच होगी। हर कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन होगा।
  • सीएम ने कहा कि खान-पान की चीजों की शुद्धता-पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में आवश्यक संशोधन के निर्देश दिए गए हैं।
  • सीएम ने कहा कि खान-पान के केंद्रों पर संचालक, प्रोपराइटर, मैनेजर आदि का नाम और पता डिस्प्ले करना अनिवार्य होगा।
  • सीएम ने कहा कि शेफ हो या वेटर, उन्हें मास्क और ग्लव्स लगाना होगा। होटल/ रेस्टोरेंट में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य होगा।
  • सीएम ने कहा कि अपशिष्ट आदि गंदी चीजों की मिलावट की तो संचालक/प्रोपराइटर पर भी कठोर कार्रवाई होगी।

बेपटरी हुई मालगाड़ी की बोगियां, ट्रेनों को किया गया डायवर्ट

जलपाईगुड़ी: मंगलवार सुबह न्यू मयनागुड़ी रेलवे स्टेशन पर एक खाली मालगाड़ी के पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। सुबह 6:20 बजे हुई इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। ओवरहेड बिजली के तार और कुछ खंभे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है और दोपहर तक ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

बता दें कि इस घटना के कारण कई ट्रेनों को दूसरे रूट से डायवर्ट किया गया है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को अन्य हिस्सों से जोड़ता है। एनएफआर के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं। घटना के कारणों की जांच की जाएगी।

हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन ओवरहेड बिजली के तार और खंभों के क्षतिग्रस्त होने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। मरम्मत कार्य में तेजी लाई जा रही है और अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही ट्रेनों का परिचालन सामान्य हो जाएगा।

दो लाख देकर “IPS” बनने वाले की इच्छा है “डॉक्टर” बन लोगों की करे सेवा

पटना :10वीं पास मिथिलेश कुमार फर्जी तरीके से आईपीएस अधिकारी बन चुके हैं। अब उनकी आगे इच्छा डॉक्टर बनने की है। दो लाख रुपये देकर आईपीएस अधिकारी बनने वाले मिथिलेश कुमार अब डॉक्टर बनना चाहते हैं। अब उन्हें पुलिस वाला नहीं बनना है। डॉक्टर बनना है। डॉक्टर बनने के पीछे मिथिलेश ने जो कारण बताया वो भी बहुत खास है। एक साक्षात्कार में मिथिलेश ने कहा, “अब पुलिस वाला नहीं बनेंगे। उ सब नहीं बनना है। हां डॉक्टर बनना है। सबका इलाज करना है।” 19 साल के मिथिलेश कुमार लखीसराय जिले के हलसी थाना क्षेत्र के गोवर्धन बीघा गांव के निवासी हैं। आईपीएस की ड्रेस में घूमने के बाद मिथिलेश को पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया गया था।

उसने पुलिस को बताया कि खैरा इलाके के मनोज सिंह नाम के एक व्यक्ति ने उसे पुलिस में नौकरी लगाने का ऑफर दिया था और इसके लिए उससे दो लाख तीस हजार रुपये की मांग की गई थी। इसके लिए मिथिलेश ने अपने मामा से दो लाख रुपये लेकर मनोज सिंह को दिए, ताकि उसकी नौकरी पुलिस में लग जाए। दो लाख रुपये लेने के बाद मनोज सिंह ने उसके शरीर का नाप लिया और उसके दूसरे दिन बुलाकर उसे आईपीएस की वर्दी, आईपीएस का बैच और नकली पिस्टल दिया। मिथिलेश वर्दी पहनकर खुशी-खुशी अपने घर गया और अपनी मां से आशीर्वाद लेकर फिर मनोज सिंह से मिलने निकल पड़ा।

पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान मिथिलेश ने बताया कि मनोज सिंह ने उसे कहा कि उसकी आईपीएस में नौकरी लग गई है। वर्दी पहन कर हलसी थाने में अपना योगदान दे दे। मिथिलेश ने पुलिस को बताया कि वह वर्दी पहनकर और कमर में लाइटर पिस्तौल रख कर अपनी बाइक से हलसी थाना जा रहा था। मगर, इसी दौरान मनोज सिंह ने उसे अपने घर बुलाया बाकी के तीस हजार रुपये की मांग की। मिथिलेश उससे मिलने जा रहा था। रास्ते में कुछ देर के लिए सिकंदरा चौक पर रुका, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में सिकंदरा थाने में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर मोजम्मिल अंसारी के लिखित आवेदन के आधार पर मिथिलेश कुमार और मनोज सिंह को आरोपित बनाया गया है। जमुई के डीएसपी सतीश सुमन ने कहा, “सात या सात साल से कम सजा वाले मामले में गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है। फर्जी आईपीएस वाले मामले में आरोपी मिथिलेश कुमार को इसी के तहत बॉन्ड भरवा कर जेल न भेजते हुए छोड़ा जा रहा है।” पुलिस पूरे मामले की गंभीरतापूर्वक जांच कर रही है और जांच के दौरान जिन लोगों को भी इस मामले में संलिप्त पाया जाएगा, उन्हें आरोपी बनाकर कार्रवाई की जाएगी।

एयरटेल बिजनेस और सिस्को ने उद्यमों के नेटवर्किंग को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए ‘एयरटेल एसडी-ब्रांच’ लॉन्च किया

कोलकाता: भारती एयरटेल (एयरटेल) की बी2बी शाखा एयरटेल बिजनेस और नेटवर्किंग और सुरक्षा में विश्व में अग्रणी सिस्को ने आज ‘एयरटेल सॉफ्टवेयर-डिफाइंड (एसडी) ब्रांच’ – उद्यमों के लिए एक सरल, सुरक्षित, क्लाउड-आधारित, एंड-टू-एंड प्रबंधित नेटवर्क समाधान, लॉन्च किया।

सिस्को मेराकी क्लाउड-फर्स्ट प्लेटफॉर्म द्वारा संचालित, एयरटेल एसडी-ब्रांच, कई शाखा स्थानों पर LAN, WAN, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के एकीकृत प्रबंधन को सक्षम करेगा, जिससे उद्यमों को अपने नेटवर्क प्रबंधन को सरल बनाने, एप्लीकेशन की कार्यक्षंमता बढ़ाने और पूरे शाखा नेटवर्क बुनियादी ढांचे से ज्यादा बेहतर कार्यक्षमता प्राप्त करने और उसको बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

शरत सिन्हा, सीईओ – एयरटेल बिजनेस, ने कहा, “हम ‘सिस्को मेराकी इंडिया रीजन’ के साथ साझेदारी में देश के उद्यमों के लिए अपने क्रांतिकारी नेटवर्क समाधान के लॉन्च की घोषणा करते हुए रोमांचित हैं। यह सेवा इसलिए तैयार की गई है ताकि उद्मम, आईटी प्रबंधन के कामों में उलझे रहने के बजाय अपना अधिक से अधिक ध्यान मुख्य व्यावसायिक परिणामों को बेहतर करने पर लगा सकें। यह ग्राहकों को एक सरल नेटवर्क समाधान प्रदान करेगा जिससे उद्मम का विस्तार करना आसान होगा जिससे उपयोगकर्ता बेहतर कार्यक्षमता और सुरक्षा के साथ व्यावसायिक एप्लीकेशन उपयोग कर सकेंगे।”

डेज़ी चिट्टिलापिल्ली, अध्यक्ष, सिस्को इंडिया और सार्क (SAARC), ने कहा, “हम एक ऐसे माहौल में रहते हैं जहां कार्यस्थल जगह-जगह बिखरे हुए हैं और कई तरह के एप्लीकेशन उपयोग करने पड़ते हैं, जिससे विश्वसनीय और कुशल नेटवर्क बुनियादी ढांचे की अच्छी व्यवस्था होना जरूरी हो जाता है। एयरटेल के साथ हमारी साझेदारी का उद्देश्य उद्यमों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म समाधान देकर मजबूत बनाना है जो कई स्थानों पर एकीकृत, चुस्त और सुरक्षित अनुभव प्रदान करता हो, जिससे व्यवसायों को हाइपर – कनेक्टेड दुनिया में सफल होने में सक्षम बनाया जा सके।”

एयरटेल एसडी-ब्रांच, रिटेल, शिक्षा, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में उद्यमों की नेटवर्क बुनियादी ढांचे से जुड़ी तरह-तरह की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह व्यवसायों द्वारा अपनी जटिल नेटवर्क आवश्यकताओं के प्रबंधन के तरीके को बदल देगा, जिससे शाखा स्थानों पर मजबूत और कुशल कनेक्टिविटी बनाने में मदद मिलेगी। एयरटेल के व्यापक कनेक्टिविटी समाधानों और उन्नत नेटवर्क प्रबंधन क्षमताओं और सिस्को की सुरक्षित नेटवर्किंग में विशेषज्ञता के साथ, यह समाधान संगठनों की नेटवर्क आवश्यकताओं के लिए एकीकृत, केंद्रीकृत प्लेटफार्म प्रदान करता है, जिससे नेटवर्क का प्रबंधन अधिक कुशलता से किया जा सकता है।

आज के मिश्रित कार्य वातावरण में, कर्मचारी कई स्थानों से काम कर रहे हैं, विभिन्न कनेक्शनों का उपयोग कर रहे हैं और विविध प्लेटफार्मों पर जानकारी तक पहुंच रहे हैं। जबकि इससे कर्मचारियों को अपनी सुविधा के अनुसार मनचाहा चयन करने का मौका मिलता है, लेकिन इससे व्यवसाय के लिए नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं क्योंकि उन्हें ग्राहक-स्वामित्व वाले और गैर-स्वामित्व वाले नेटवर्क पर लोगों और उपकरणों को जोड़ना और साथ ही उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना होगा। सिस्को के साइबरसुरक्षा तत्परता सूचकांक के अनुसार, भारत में 92% कंपनियों ने कहा है कि उनके कर्मचारी अप्रबंधित उपकरणों से कंपनी के प्लेटफॉर्म तक पहुंचते हैं, और उनमें से 48% अपने समय के पांचवां हिस्स तक अप्रबंधित उपकरणों से कंपनी के नेटवर्क पर लॉग इन रहते हैं। इसके अतिरिक्त, 39% कंपनियों ने बताया है कि उनके कर्मचारी एक सप्ताह में बदल-बदलकर कम से कम छह नेटवर्कों का उपयोग करते हैं।

नेटवर्क के केंद्रीय प्रबंधन, सरल डैशबोर्ड, स्वचालित प्रक्रियाओं, उन्नत विश्लेषण और उच्च प्रदर्शन वाले कनेक्टिविटी समाधानों जैसी ऐसी क्षमताओं के साथ संचालित, जिन्हें विशिष्ट व्यावसायिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है, एयरटेल एसडी-ब्रांच, उद्यमों को अपने शाखा नेटवर्क पर बेहतर नियंत्रण पाने में मदद करेगा। प्रत्येक अलग शाखा स्थान के लिए अनुकूलित किए जा सकने वाले सदस्यता मॉडल के साथ, यह ‘ब्रांच’ व्यवसायों को मांग के अनुसार अपने नेटवर्क को बढ़ाने की सुविधा भी प्रदान करेगा। 

चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करना या देखना अपराध- SC

नई दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी को डाउनलोड करना, स्टोर करना और देखना POCSO और IT एक्ट के तहत अपराध है। CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पादरीवाला की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए फैसला सुनाया।

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर कोई चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करता और देखता है, तो यह अपराध नहीं, जब तक कि नीयत इसे प्रसारित करने की न हो। जस्टिस जेबी पादरीवाला ने संसद को भी सुझाव दिया, और कहा-

चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह ‘चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूसिव मटेरियल’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए। केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर बदलाव करें। अदालतें भी चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द का इस्तेमाल न करें।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केरल हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट का फैसला खारिज कर दिया है। केरल हाईकोर्ट ने 13 सितंबर 2023 को कहा था कि अगर कोई व्यक्ति अश्लील फोटो या वीडियो देख रहा है तो यह अपराध नहीं है, लेकिन अगर दूसरे को दिखा रहा है तो यह गैरकानूनी होगा।

केरल हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर मद्रास हाईकोर्ट ने 11 जनवरी को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के केस में एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस और नई दिल्ली के NGO बचपन बचाओ आंदोलन ने सुप्रीम कोर्ट में फैसलों के खिलाफ याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन की बेंच ने यह फैसला दिया था। जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा था, पोर्नोग्रॉफी सदियों से प्रचलित है। आज डिजिटल युग में इस तक आसानी से पहुंच हो गई। बच्चों और बड़ों की उंगलियों पर ये मौजूद है।

सवाल यह है कि अगर कोई अपने निजी समय में दूसरों को दिखाए बगैर पोर्न देख रहा है तो यह अपराध है या नहीं? जहां तक कोर्ट की बात है, इसे अपराध की कैटेगरी में नहीं लाया जा सकता क्योंकि यह व्यक्ति की निजी पंसद हो सकती है। इसमें दखल उसकी निजता में घुसपैठ के बराबर होगा।

केरल हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को आधार बताते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2024 को पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी के खिलाफ केस को रद्द कर दिया था। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि अपनी डिवाइस पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना या डाउनलोड करना अपराध के दायरे में नहीं आता है।

कोर्ट ने 28 साल के एक व्यक्ति के खिलाफ चल रहे केस पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी। उस व्यक्ति के खिलाफ चाइल्ड पोर्नोग्राफी के आरोप में POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) कानून और IT कानून के तहत केस दर्ज हुआ था। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ चल रहे केस को रद्द कर दिया था।

  • भारत में ऑनलाइन पोर्न देखना गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 में पोर्न वीडियो बनाने, पब्लिश करने और सर्कुलेट करने पर बैन है।
  • इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के सेक्शन 67 और 67A में इस तरह के अपराध करने वालों को 3 साल की जेल के साथ 5 लाख तक जुर्माना देने का भी प्रावधान है।
  • इसके अलावा IPC के सेक्शन-292, 293, 500, 506 में भी इससे जुड़े अपराध को रोकने के लिए कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं। चाइल्ड पोर्नोग्राफी में POCSO कानून के तहत कार्रवाई होती है।
  • भारत में तेजी से बढ़ रहा है पोर्न वीडियो का बाजार 2026 तक मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या 120 करोड़ होने की उम्मीद है। यही नहीं दुनिया की टॉप वेबसाइट ‘पोर्न हब’ ने बताया है कि भारतीय औसतन एक बार में पोर्न वेबसाइट पर 8 मिनट 39 सेकेंड समय गुजारता है। यही नहीं पोर्न देखने वाले 44% यूजर्स की उम्र 18 से 24 साल है, जबकि 41% यूजर्स 25 से 34 साल उम्र के हैं।

गूगल ने 2021 में रिपोर्ट जारी कर बताया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा पोर्न देखने के मामले में भारत छठे स्थान पर है। वहीं, पोर्न हब वेबसाइट के मुताबिक इस वेबसाइट को यूज करने वालों में भारतीय तीसरे नंबर पर आते हैं।

ईरान की कोयला खदान में विस्फोट, कम से कम 51 लोगों की मौत

नई दिल्ली :  पूर्वी ईरान के कोयला खदान में हुए एक विस्फोट से कम से कम 51 लोगों की मौत हो गई है। सरकारी मीडिया ने इस घटना की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि खदान के दो ब्लॉकों में मीथेन गैस के रिसाव की वजह से यह विस्फोट हुआ है।

यह खदान ईरान की राजधानी तेहरान से क़रीब 540 किलोमीटर दूर दक्षिणपूर्व में तबास में है। स्थानीय समयानुसार यह धमाका शनिवार रात 9 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11 बजे) हुआ। दक्षिण खुरासान के गवर्नर जवाद घेनात्ज़ादेह ने कहा है कि विस्फोट के समय ब्लॉक में 69 लोग मौजूद थे।

जानकारी के मुताबिक़ जवाद घेनात्ज़ादेह ने कहा, “मदनज़ू खदान में एक विस्फोट हुआ है, दुर्भाग्य से उस वक्त ब्लॉक बी और सी में 69 लोग काम कर रहे थे।” “ब्लॉक सी में 22 लोग मौजूद थे, जबकि ब्लॉक सी में 47 लोग थे।” यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि कितने लोग अभी जीवित हैं और कितने खदान के अंदर फंसे हुए हैं।

हालांकि सरकारी मीडिया ने मृतकों के आंकड़ों में संशोधन किया है। पहले बताया गया था कि इस हादसे में 30 मजदूरों की मौत हुई है। जानकारी के अनुसार, “हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 पहुंच गई है, जबकि घायलों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।”

ईरान के रेड क्रिसेंट के प्रमुख का हवाला देते हुए, सरकारी टीवी ने रविवार को कहा था कि 24 लोग लापता हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। पेज़ेशकियान ने टीवी पर प्रसारित एक वीडियो में कहा, “मैंने मंत्रियों से बात की है और हम इस मामले पर नज़र रखेंगे।”

अल ज़ज़ीरा के मुताबिक़, राष्ट्रपति पेज़ेशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क जाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा है कि खदान में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करने और पीड़ित परिवारों की मदद करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंये साथ ही ये भी कहा कि इस घटना की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

तबास खदान 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर (लगभग 11,600 वर्ग मील) से अधिक क्षेत्र में फैली है। “इसे ईरान की सबसे बड़ी और सबसे समृद्ध खदान माना जाता है।” सरकारी मीडिया ने स्थानीय सरकारी वकील अली नेसाई के हवाले से कहा, “खदान में गैस जमा होने के कारण राहत बचाव कार्य में मुश्किल पेश आ रही है।”

नेसाई ने कहा, “अभी हमारी प्राथमिकता है कि घायलों का इलाज कराया जाए और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला जाए।” उन्होंने कहा, “इस हादसे से संबंधित लोगों की ग़लती और लापरवाही पर बाद में कार्रवाई की जाएगी.”
इससे पहले भी हुए हैं हादसे ईरान की खदानों में इससे पहले भी ऐसे हादसे हुए हैं।

पिछले साल दामगन के उत्तरी शहर में स्थित कोयला खदान में हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी। स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ हो सकता है कि यह हादसा मीथेन गैस के रिसाव की वजह से हुआ था।

मई 2021 में इसी खदान में दो लोगों की मौत हो गई थी। स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ खदान के ढहने से ऐसा हुआ था। साल 2017 में उत्तरी ईरान के आज़ाद शहर में स्थित एक कोयला खदान में विस्फोट हुआ था। इस हादसे में 43 लोगों की जान चली गई थी, जिसकी वजह से ईरानी अधिकारियों के प्रति लोगों में गुस्सा था।

अल ज़ज़ीरा के मुताबिक साल 2013 में दो अलग-अलग खदानों में हादसे हुए थे जिनमें 11 मज़दूरों की जान गई थी। वहीं 2009 में इस तरह की कई घटनाएं हुई थीं, जिनमें कम से कम 20 कामग़ार मारे गए थे।

आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी रोकने का क्या है सही तरीक़ा?

नई दिल्ली:  दुनियाभर में रेबीज़ का ख़तरा बढ़ता जा रहा है। हर साल रेबीज़ से क़रीब 60 हज़ार लोगों की जान जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक़ इनमें से 99 फ़ीसद मामले कुत्ते के काटने और खरोंच के हैं। रेबीज़ से बचाव के लिए एक वैक्सीन है, जिसे कुत्ते के काटने के बाद लिया जाता है। हालांकि, जब कुत्ता किसी व्यक्ति के चेहरे या किसी नर्व के नज़दीक काटता है तो ये वैक्सीन हमेशा कारगर साबित नहीं होती।

जुलाई में तमिलनाडु के अरक्कोणम में चार साल के निर्मल पर उनके घर के बाहर खेलते समय एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। जब कुत्ते ने निर्मल के मुंह पर हमला किया, उससे थोड़ी देर पहले ही निर्मल के पिता घर के अंदर गए थे। निर्मल के पिता बालाजी के अनुसार, “मैं उसी वक्त घर के अंदर पानी लेने गया था। जब मैं वापस आया तो उसके चेहरे पर चोट लगी थी।” इसके बाद परिवार उन्हें लेकर अस्पताल गया, जहां उन्हें 15 दिनों तक कड़ी देखरेख में रखा गया।

इसके बाद हालत स्थिर हो गई और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन, घर आने के कुछ दिनों के बाद निर्मल में रेबीज़ के लक्षण दिखने लगे। उनका परिवार उन्हें लेकर फिर अस्पताल गया, जहां पता चला कि वायरस की वजह से तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) में इनफेक्शन हो गया है। दो दिनों के बाद निर्मल की मौत हो गई।

कभी-कभी बच्चे अपने घर में ये बताने से डरते हैं कि उन्हें कुत्ते ने काटा है. जिसकी वजह से उन्हें रेबीज़ की वैक्सीन लगाने में बहुत देर हो जाती है। साल 1994 से 2015 के बीच मुंबई में करीब 13 लाख लोगों को कुत्ते ने काटा और 434 लोगों की रेबीज़ से मौत हुई है।

इंटरनेशनल कंपेनियन एनिमल मैनेजमेंट कोलिज़न (आईसीएएम) के मुताबिक़ आवारा कुत्तों से होने वाले अन्य ख़तरों में अव्यवस्थित आवारा कुत्तों की आबादी, सड़क हादसे और मवेशियों के लिए ख़तरा शामिल हैं। इसके अलावा लोगों को सड़क पर पैदल चलने से रोका जा रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैसे होगा सर्वाइकल कैंसर का इलाज?

नई दिल्ली:  क्वाड शिखर सम्मेलन के बाद भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के राष्ट्राध्यक्षों ने कैंसर मूनशॉट के लिए अपना संबोधन दिया. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सर्वाइकल कैंसर के इलाज को लेकर एक बड़ी घोषणा की। सर्वाइकल कैंसर से जंग के लिए आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से इलाज शुरू करने का ऐलान किया। इसके साथ ही दूसरे देशों की मदद के लिए 7.5 मिलियन डॉलर के मदद की पेशकश की।

कैंसर दुनिया भर में असमय मौत का प्रमुख कारण है। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी का अनुमान है कि वर्ष 2024 में कैंसर से दो मिलियन से अधिक नए मामले और 611,720 मौतें हो सकती हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, लंग्स और प्रोस्टेट कैंसर कैंसर के होंगे।

कैंसर के उपचार में समय से पता लगाने का बहुत ज्यादा महत्व है. अब एआई ( AI ) यानी आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग कैंसर उपचार में किया जा रहा है. आइए जानते हैं कैंसर के उपचार में एआई की क्या भूमिका है और भविष्य में इसकी क्या संभावनाएं हैं।

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में कुछ सेल्स तेजी से बढ़ने लगते हैं। यह जीन के म्यूटेशन के कारण होने वाले जेनेटिक बीमारी है। ट्यूमर के बारे में यह अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि वे उपचार पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे। ट्यूमर वाले कैंसर रोगियों में एक ही उपचार की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।

कैंसर के उपचार के लिए कैंसर के हर मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। डॉक्टर मरीज के अनुसार उसके ट्रीटमेंट का प्लान तैयार करते हैं। इसके लिए मरीज की बॉडी में पाए जाने वाले जीनोमिक असामान्यताओं, प्रोटीन और अन्य पदार्थों पर जानकारी का यूज करते हैं।

सर गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के वाइस चेयरमैन डॉ अमरेंद्र पाठक के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इलाज को और भी बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है। उनका कहना है कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो मरीज का सर्वाइवल रेट और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है।

इसे ऐसे समझे कि अगर किडनी में ट्यूमर है तो सीटीएमआरआई की इनफार्मेशन फीड की जा सकती है। इसके अलावा मरीज का और उसके इलाज का पूरा डाटा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में फीड हो जाता है जिसे इलाज करने में मदद मिलती है।

डॉ पाठक के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इलाज के असेसमेंट में मदद मिलती है. साथ ही चार्ट बोर्ड की मदद से मरीज को भी यह समय-समय पर रिमाइंड करता रहता है कि कब डॉक्टर के पास जाना है और कब कौन से टेस्ट कराने हैं।

रोबोट या फिर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की इमेज अटैच की जा सकती है जिससे इंट्राऑपरेटिव सजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मिल सकते हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इन ऑपरेशन के बाद हुई जांच को देखते हुए आगे क्या बेहतर इलाज किया जा सकता है इसका गाइडेंस मिलता है। डॉ अमरेंद्र पाठक के मुताबिक अगर किसी मरीज का स्टोन का ऑपरेशन हुआ है तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पेशेंट को क्या करना चाहिए क्या नहीं इसका भी सजेशन देता है ताकि यह दोबारा ना हो।

एआई कैंसर के पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट में तेजी लाने में काफी मददगार साबित हो रहा है। कैंसर का पता लगाने और उपचार से लेकर ट्यूमर और उनके वातावरण, लक्षण, दवा की खोज और उपचार की प्रतिक्रिया और परिणामों के बारे में की भविष्यवाणी तक में एआई की मदद ली जा रही है। ऑन्कोलॉजी के हर क्षेत्र में एआई का यूज हो रहा है।

ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि फिलहाल इसका उपयोग ज्यादातर कैंसर निदान और स्क्रीनिंग के लिए किया जाता है. कैंसर में स्क्रीनिंग बचाव का सबसे बेहतर उपाय है और इस दिशा में एआई काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सता है। फुल बॉडी स्कैन चिकित्सा इमेजेज को बढ़ाने और विश्लेषण के बाद रिपोर्ट तैयार करने के लिए एआई से काफी मदद मिल रही है।

भारत को अमेरिका से मिलेंगे MQ-9B स्काई गार्जियन और सी गार्जियन ड्रोन, बाइडेन-मोदी ने डन की डील

नई दिल्ली :  अमेरिका से भारत लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लेस किलर ड्रोन खरीदने जा रहा है। इस डील को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अंतिम रूप दे दिया है। भारत, अमेरिका से 31 MQ-9B (16 स्काई गार्जियन और 15 सी गार्जियन) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट ड्रोन खरीदने जा रहा है. इन ड्रोन की कीमत करीब 3 अरब डॉलर है।

पिछले साल जून में रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों और लेजर-गाइडेड बमों से लैस MQ-9B स्काई गार्जियन और सी गार्जियन सशस्त्र ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी थी।

मोदी और बाइडेन ने इंडिया-अमेरिका डिफेंस इंडस्ट्रियल को-ऑपरेशन रोडमैप को सराहा. इस रोडमैप के तहत जेट इंजन, गोला-बारूद और ग्राउंड मोबिलिटी सिस्टम जैसे भारी इक्वीपमेंट्स और हथियारों का निर्माण शामिल है. इस अहम सहयोग में लिक्विड रोबोटिक्स और भारत के सागर डिफेंस इंजीनियरिंग, मेरिटाइम सुरक्षा को बढ़ाने के लिए मानवरहित सतही वाहनों के प्रोडक्शन पर भी जोर दिया गया.

क्वाड सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका साझेदारी को काफी मजबूत बताया। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत की। द्विपक्षीय बैठक में रूस यूक्रेन युद्ध और मोदी की हालिया यूक्रेन यात्रा पर चर्चा हुई।

बैठक में दोनों लीडर्स ने यूएस-इंडिया सीईओ फोरम की सह-अध्यक्षता करने वाली दो कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान पर टीमिंग समझौते की सराहना की।

यह समझौता भारतीय बेड़े और सी-130 सुपर हरक्यूलिस विमान संचालित करने वाले वैश्विक भागीदारों की तैयारी का समर्थन करने के लिए भारत में एक नई रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) सुविधा स्थापित करेगा। अमेरिका-भारत रक्षा और एयरोस्पेस सहयोग में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दोनों पक्षों की गहरी होती रणनीतिक और प्रौद्योगिकी साझेदारी संबंधों को दर्शाता है।

ट्रेन उड़ाने की एक और साजिश नाकाम, रेलवे ट्रैक पर मिला गैस सिलेंडर

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां एक बार फिर ट्रेन को पलटाने की साजिश देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, कानपुर देहात जिले में रेलवे ट्रैक पर छोटा वाला एक गैस सिलेंडर पाया गया। इससे टकराने के बाद कोई भी बड़ा हादसा हो सकता था जो टल गया।

कुछ दिन पहले ही कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश सामने आई थी। इस वक्त रेलवे ट्रैक पर एलपीजी सिलेंडर रखा गया था जिससे ट्रेन टकरा भी गई थी। रेलवे लाइन के पास पेट्रोल और बारूद भी बरामद किया गया था।

जानकारी के अनुसार नॉर्थर्न सेंट्रल रेलवे के प्रयागराज डिवीजन के पेरम्बूर रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर एलपीजी का छोटा सिलेंडर मिला। इस ट्रेक से मालगाड़ी गुजरने वाली ही थी। लोको पायलट ने खतरे को देखते हुए पहले ही मालगाड़ी को रोक दिया। इस वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मालगाड़ी के लोको-पायलट द्वारा आपातकालीन ब्रेक लगाने के बाद रविवार सुबह एक और ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश नाकाम हो गयी। यह घटना तब हुई जब मालगाड़ी कानपुर से प्रयागराज की ओर जा रही थी। लगभग एक महीने के भीतर यह तीसरी घटना है, जब रेल सेवा को बाधित करने की कोशिश की गयी है।

रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि सुबह लगभग आठ बजकर 10 मिनट पर रेलवे सुरक्षा बल पुलिस ने सूचना दी कि प्रेमपुर स्टेशन से इलाहाबाद की तरफ जाने वाले रेलवे मार्ग पर लाल रंग का एक सिलेंडर पटरी पर रखा हुआ है। इस सूचना पर स्थानीय पुलिस ने तत्काल प्रेमपुर रेलवे स्टेशन पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया. यह पाया गया कि लाल रंग का खाली सिलेंडर पटरी पर रखा हुआ था।

कानपुर पूर्व के पुलिस उपायुक्त श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि लोको पायलट ने रेलवे अधिकारियों को सतर्क किया, जिन्होंने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और कानपुर पुलिस को सूचना दी और मामले की जांच शुरू की गयी। डीसीपी ने बताया कि मालगाड़ी के लोको पायलट ने पांच किलोग्राम वजन का एलपीजी सिलेंडर देखा, जिसके बाद आपातकालीन ब्रेक लगाकर कानपुर से प्रयागराज की ओर जा रही मालगाड़ी को रोक दिया गया। उन्होंने बताया कि खोजी कुत्तों को काम पर लगाया गया और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी बुलाया गया. उन्होंने पाया कि एलपीजी सिलेंडर खाली था।

लैवेंडर बिकिनी में Aashram की ‘सोनिया’ , इंटरनेट पर छाया बोल्ड अवतार

नई दिल्ली: ईशा गुप्ता को बॉलीवुड में एक दशक से ज्यादा हो गया है। भले ही 12 सालों में उन्होंने ज्यादा फिल्में नहीं की हैं, लेकिन उन्होंने चुनिंदा फिल्मों से ही अपनी पहचान बना ली है। आश्रम में सोनिया बनना हो या फिर जन्नत 2 की जाह्नवी हो, ईशा अपनी अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींचने में कामयाब रही हैं।

सिर्फ अदाकारी ही नहीं, फिल्मों से इतर ईशा गुप्ता का फैशन सेंस भी किसी से छुपा नहीं है। बोल्डनेस में तो वह बड़ी-बड़ी हीरोइनों पर भी भारी पड़ती हैं। हाल ही में, एक बार ईशा ने सोशल मीडिया पर अपनी लेटेस्ट फोटो से आग लगाई है।

दरअसल, ईशा गुप्ता इन दिनों फ्लोरिडा में हैं। उन्होंने अपनी आउटिंग की फोटो 21 सितंबर को इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की है, जिसमें वह बहुत बोल्ड लुक में नजर आ रही हैं। समंदर के किनारे टहलती हुई ईशा बिकिनी में अपना कर्वी फिगर फ्लॉन्ट कर रही हैं। उन्होंने डीप नेक लैवेंडर कलर की बिकिनी पहनी और अपने लुक को ग्रे कैप के साथ स्टाइल किया। पलकें झुकाकर वह मुस्कुराते हुए पोज दे रही हैं।

ईशा गुप्ता पिछले दो साल से फिल्मी दुनिया से गायब हैं। आखिरी बार वह बॉबी देओल की चर्चित वेब सीरीज आश्रम 3 में नजर आई थीं। वह सीरीज में सोनिया के रोल में छा गई थीं। अपकमिंग फिल्मों की बात करें तो कहा जा रहा है कि वह हेरा फेरी 3 और फाइल नंबर 323 में नजर आएंगी।

 

बेंगलुरु में 29 साल की लड़की के 30 टुकड़े; फ्रिज में मिली लाश

बेंगलुरु : बेंगलुरु के मल्लेस्वरम में एक सिंगल बेडरूम फ्लैट के फ्रिज में 29 साल की महिला महालक्ष्मी का शव 30 टुकड़ों में मिला। महालक्ष्मी इस फ्लैट में अकेली रह रही थी। पुलिस को संदेह है कि एक सप्ताह पहले महिला की हत्या हुई है।

मल्लेस्वरम में रहने वाली महालक्ष्मी एक माल में काम करती थी और उसके पति शहर से दूर एक आश्रम में काम करते हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह भी पहुंचे।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिमी क्षेत्र) एन सतीश कुमार ने कहा कि व्यालिकावल थाना क्षेत्र के एक घर में फ्रिज से महिला के शव के टुकड़े मिले। फोरेंसिक विशेषज्ञ ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में रह रही महिला मूल रूप से दूसरे राज्य की निवासी थी। अपार्टमेंट में पहुंची पुलिस टीम ने सबसे पहले 165-लीटर, सिंगल-डोर फ्रिज को चालू देखा और पाया शरीर में कीड़े पड़ गए थे।

इस घटना ने 18 मई, 2022 को दिल्ली के महरौली में श्रद्धा वाकर की उनके लिव-इन पार्टनर आफताब पूनावाला की तरफ से की गई नृशंस हत्या की याद दिला दी है। आफताब ने श्रद्धा का गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसके शव के 35 टुकड़े कर दिए थे। शहर के अलग-अलग भागों में फेंकने से पहले लगभग तीन हफ्ते तक उसने शव के टुकड़ों को अपने आवास में फ्रिज में रखा था।

 

लद्दाख में रात्रिकालीन ऑपरेशन, सेना ने स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर का किया इस्तेमाल

लेह : लद्दाख में भारतीय सेना के जवानों ने स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव का उपयोग करके ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रात के ऑपरेशन करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित ये हेलीकॉप्टर लद्दाख के चुनौतीपूर्ण इलाकों और चरम मौसम की स्थिति में सेना के संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

बेड़े के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सेना के जवान हविंदर सिंह ने हेलीकॉप्टरों को मिशन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में बताया। “मेरा काम यह सुनिश्चित करना है कि मेरे अधीन सभी तकनीशियन और पर्यवेक्षक इस हेलीकॉप्टर पर निरंतर प्रशिक्षण प्राप्त करते रहें।

इसके अलावा, इस हेलीकॉप्टर को सेवा योग्य बनाने में कई एजेंसियां ​​​​शामिल हैं, एक लॉजिस्टिक एजेंसी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड शामिल है। उन सभी से बात करना और उनकी टीमों को यहां बुलाना मेरा काम है । “2 महीने बाद तापमान माइनस 20 से माइनस 30 तक गिर जाएगा। आज के मौसम में बहुत ज़्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन ठंड के मौसम में जब कोई तकनीशियन विमान के पास जाता है, तो वह 10 मिनट तक निरीक्षण करता है और फिर दोबारा निरीक्षण करने से पहले वार्मअप करने के लिए नीचे आता है।”

अब नए झुंड को लेकर दहशत मचा रहा लंगड़ा भेड़िया सरदार

लखनऊ : भेड़ियों का सरदार वन विभाग और प्रशासन के हाथ नहीं आ रहा है। अल्फा भेड़िए को पकड़ने के लिए पूरा प्रशासन, पीएसी की टीम और वन विभाग के तमाम एक्सपर्ट दिन-रात एक किए हुए हैं। मगर भेड़ियों का सरदार ये लंगड़ा भेड़िया किसी के हाथ नहीं आ रहा है। दूसरी तरफ से लगातार अपना शिकार करता जा रहा है. कभी इंसानों पर हमला कर रहा है तो कभी पशुओं को अपना निवाला बना रहा है।

अब इस लंगड़े भेड़िए को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि अल्फा भेड़िए ने अब अपना अलग झुंड बना लिया है। अपने झंड के सारे भेड़ियों के पकड़े जाने के बाद अल्फा भेड़िए ने अपने झुंड में नए भेड़ियों को शामिल कर लिया है। माना जा रहा है कि अगर ये दावा सही है तो भेड़ियों का ये खतरा बहराइच और उसके आस-पास के इलाकों में काफी बढ़ सकता है।

दरअसल ग्रामीणों ने भेड़ियों के नए झुंड को देखे जाने का दावा किया है। इस झुंड के साथ अल्फा यानी भेड़ियों का सरदार लंगड़ा भेड़िया भी था। ये झुंड मासी तहसील के मंगला गांव के एक फार्म हाउस के पास देखा गया है। गौर करने वाली बात ये भी है कि जिस स्थान पर ये झुंड देखा गया है, वह भेड़िए की आतंक को लेकर सबसे ज्यादा संवेदनशील है।

बता दें कि जब से भेड़ियों का नया झुंड देखे जाने की खबर सामने आई है, तभी से वन विभाग समेत ऑपरेशन भेड़िया में लगे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। इलाके के 50 हजार लोग फिर से डर के साये में जीने को मजबूर हो गए हैं।